NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
संस्कृति
पुस्तकें
समाज
भारत
राजनीति
इलाहाबाद विश्वविद्यालय: छात्रसंघ से किसे डर लगता है?
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के स्थान पर छात्र परिषद के गठन के विरोध में आंदोलनरत छात्र अब क्रमिक अनशन पर बैठ गए हैं।
अमित सिंह
27 Jun 2019
Allahabad

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद लागू किए जाने की सहमति बनने के बाद छात्रों में विरोध के सुर उठने लगे हैं। बुधवार को आक्रोशित छात्रों ने कुलपति कार्यालय के सामने इविवि(इलाहाबाद विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू और इविवि प्रशासन का पुतला फूंका। गुरुवार को आंदोलनरत छात्रों ने एसएसपी से मुलाक़ात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और छात्रसंघ बहाली को लेकर क्रमिक अनशन पर बैठ गए हैं। 

आपको बता दें कि इस निर्णय पर अंतिम मंज़ूरी 29 जून को प्रस्ताविक कार्य परिषद की बैठक में दी जाएगी। अगर कार्य परिषद की बैठक में छात्र परिषद के गठन को मंज़ूरी मिल जाती है तो 96 साल पुराना विश्वविद्यालय छात्रसंघ समाप्त हो जाएगा।

ग़ौरतलब है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद का विरोध करने वालों छात्रों और उनके साथियों पर इविवि प्रशासन कार्रवाई पर अड़ गया है। इसके लिए डीएम और एसएसपी को पत्र लिख गया है। मंगलवार को भी विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के नाम की सूची डीएम और एसएसपी को भेजी गई थी। बुधवार को इविवि प्रशासन ने दोबारा ऐसे लोगों को चिह्नित कर सूची भेज दी है। 

वहीं, इसके ख़िलाफ़ गुरुवार को आंदोलन छात्रों ने भी एसएसपी से मुलाक़ात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा है। एसएसपी को सौंपे गए ज्ञापन में छात्रों का आरोप है, 'छात्रसंघ बहाली को लेकर चल रहे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन को विश्वविद्यालय प्रशासन एक तयशुदा साजिश के तहत तोड़ना एवं बंद करना चाहता है और इसके लिए वह आंदोलनरत छात्रों पर फ़र्ज़ी मुक़दमे लादने, उन्हें निलंबित व निष्काषित किए जाने जैसी अनेक कार्रवाइयों को अंजाम दे रहा है।'

पत्र में आगे छात्रों ने एसएसपी से मांग की है, 'पुलिस बल को विश्वविद्यालय प्रशासन की कठपुतली न बनने दें एवं छात्रों पर मढ़े जा रहे विश्वविद्यालय प्रशासन के आरोपों की निष्ठा जांच के बाद ही कोई कार्रवाई करने का कार्य करें।'

आपको बता दें कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ का बेहद गौरवशाली इतिहास रहा है। लेकिन अभी विश्वविद्यालय प्रशासन की दलील है कि छात्रसंघ की वजह से कैंपस में आए दिन अराजकता का माहौल रहता था इसलिए इसे ख़त्म किया जा रहा है।

आक्रोशित हैं छात्र नेता

छात्रसंघ की जगह पर छात्र परिषद के गठन को लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता आक्रोशित हैं। इसे लेकर छात्र संघ महामंत्री शिवम सिंह ने कहा, 'इलाहाबाद विश्वविद्यालय राजनीति की नर्सरी के रूप में जानी जाती है। इस विश्वविद्यालय ने देश को वैज्ञानिक, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कवि, न्यायविद, संविधानविद दिए हैं। लेकिन वर्तमान कुलपति के आने के बाद से विश्वविद्यालय अपने सबसे बुरे दौर में है जिसकी आवाज़ सिर्फ़ यहाँ का छात्रसंघ उठाता है। इसी बुलंद आवाज़ को ख़त्म करने के लिए वर्तमान विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यह अलोकतांत्रिक एवं तानाशाही क़दम छात्रों के ख़िलाफ़ उठाया जा रहा है।'

65099963_458581154931002_8452889469849174016_n.jpg

वहीं छात्र नेता नेहा यादव ने कहा, 'इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघ का गौरवमयी इतिहास रहा है लेकिन आज जिस तानाशाही मनमानी व जबरन छात्रों पर छात्र परिषद बनाने की ज़िद प्रशासन द्वारा थोपी जा रही है वह कहीं न कहीं लोकतंत्र में बाधा है। अराजकता के आरोप लगाने वाले शिक्षकों को रिकॉर्ड देखना चाहिए कि यहाँ से चयनित पदाधिकारियों का कार्य कभी भी आपराधिक या अराजकता युक्त नहीं रहा है। छात्रों से राइट टू वोटिंग का अधिकार छीनकर विश्वविद्यालय प्रशासन भय, गुंडागर्दी, माफ़ियागिरी, ख़रीद-फ़रोख्त, शिक्षकों की गुटबाज़ी से छात्र परिषद के चुनाव कराकर माहौल ख़राब करना चाहते हैं।'

ग़ौरतलब है कि इससे पहले 2011 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र परिषद के गठन का फ़ैसला किया था लेकिन तब छात्रों ने उग्र प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय प्रशासन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रसंघ की बहाली कर दी गई थी। 

आपको बता दें कि छात्रसंघ प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली है जिसमें छात्र अपने मत का इस्तेमाल कर सीधे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महामंत्री आदि का चुनाव करते हैं, जबकि छात्र परिषद अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली है। इसमें पहले कक्षावार प्रतिनिधि चुने जाते हैं और यही प्रतिनिधि पदाधिकारियों का चुनाव करते हैं।

इस पूरे वाक़ये पर प्रशासन के रवैये पर सवाल छात्र नेता सौरभ सिंह भी उठाते हैं। वो कहते हैं, 'विश्वविद्यालय प्रशासन अराजकता की बात कर रहा है लेकिन 2012 से छात्रसंघ के प्रतिनिधि चुने जा रहे हैं, विश्वविद्यालय प्रशासन बताए कि कितने प्रतिनिधियों ने अराजकता फैलाई है। कितने लोगों पर मुक़दमा चल रहा है। दरअसल विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए छात्रसंघ पर हमला कर रहा है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती में अनियमितता की बात सबके सामने हैं, कुलपति को लेकर विवाद है, प्रशासन का रवैया आम छात्रों को लेकर भी ठीक नहीं है। इसकी आवाज छात्रसंघ हमेशा से उठाता रहा है। इसलिए इस पर रोक लगाने की कवायद चल रही है।'

वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता रमेश यादव इस पूरे मामले को बड़े परिप्रेक्ष्य पर देखे जाने की ज़रूरत बताते हैं। वो कहते हैं, 'छात्र आंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ हैं और छात्र संघ इसमें अहम भूमिका अदा करते हैं। छात्रों के आंदोलन न सिर्फ़ सरकारों की सामाजिक निगरानी और उन पर अंकुश रखने का काम करते हैं बल्कि उनके जनविरोधी फ़ैसलों के ख़िलाफ़ आंदोलनों की अगुवाई करके नया राजनीतिक विकल्प पैदा करने में भी मदद करते हैं। इसलिए सत्ताधारी दल या सरकार उनसे डरती हैं और उनपर रोक लगाना चाहती हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का यह मामला भी इससे अलग नहीं है। देश की सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की ताक़त और एकता से डरा हुआ है।'

Allahabad University
Allahabad University students union
dissolving student union
student union election
student union
Uttar pradesh
Save Democracy
Indian democracy
central university

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

अनुदेशकों के साथ दोहरा व्यवहार क्यों? 17 हज़ार तनख़्वाह, मिलते हैं सिर्फ़ 7000...

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

दिल्ली में गूंजा छात्रों का नारा— हिजाब हो या न हो, शिक्षा हमारा अधिकार है!


बाकी खबरें

  • weekend curfew
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली में ओमीक्रॉन के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र शनिवार-रविवार का कर्फ़्यू
    04 Jan 2022
    डीडीएमए की बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री सिसोदिया ने कहा, ‘‘शनिवार और रविवार को कर्फ़्यू रहेगा। लोगों से अनुरोध किया जाता है कि बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।’’
  • Subramanian Swamy
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी, नज़र भी: भाजपा के अपने ही बाग़ी हुए जा रहे हैं
    04 Jan 2022
    मोदी सरकार चाहती है कि कोर्ट उनके ही नेता सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका पर कोई ध्यान न दे जिसमें उन्होंने एअर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया रद्द करने और अधिकारियों द्वारा दी गई मंज़ूरी रद्द करने का…
  • Hindu Yuva Vahini
    विजय विनीत
    बनारस में हिन्दू युवा वाहिनी के जुलूस में लहराई गईं नंगी तलवारें, लगाए गए उन्मादी नारे
    04 Jan 2022
    "हिन्दू युवा वाहिनी के लोग चाहते हैं कि हम अपना धैर्य खो दें और जिससे वह फायदा उठा सकें। हरिद्वार में आयोजित विवादित धर्म संसद के बाद बनारस में नंगी तलवारें लहराते हुए जुलूस निकाले जाने की घटना के…
  • Maulana Hasrat Mohani
    परमजीत सिंह जज
    मौलाना हसरत मोहानी और अपनी जगह क़ायम अल्पसंख्यक से जुड़े उनके सवाल
    04 Jan 2022
    आज भी अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस करते हैं, ऐसे में भारत को संविधान सभा में हुई उन बहसों को फिर से याद दिलाने की ज़रूरत है, जिसमें बहुसंख्यकवाद के कड़वे नतीजों की चेतावनी दी गयी थी।
  • Goa Chief Ministers
    राज कुमार
    गोवा चुनावः  34 साल में 22 मुख्यमंत्री
    04 Jan 2022
    दल बदल के मामले में गोवा बाकी राज्यों को पीछे छोड़ता नज़र आ रहा है। चुनाव से पहले गोवा के आधे से ज्यादा विधायक पार्टी बदल चुके हैं। आलम ये है कि कहना मुश्किल है कि जो विधायक आज इस पार्टी में है कल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License