NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
नई शिक्षा नीति के ख़िलाफ़ AISA का 'रोल बैक NEP' अभियान
बीते शुक्रवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में नई शिक्षा नीति-2020 के खिलाफ़ छात्र संगठन 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा)' ने एक राष्ट्रीय अभियान 'रोल बैक एनईपी 2020 (NEP)' की घोषणा करते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। सम्मेलन में 150 से अधिक छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया।
जगन्नाथ कुमार यादव
26 Dec 2021
नई शिक्षा नीति के ख़िलाफ़ AISA का 'रोल बैक NEP' अभियान

बीते शुक्रवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में नई शिक्षा नीति-2020 के खिलाफ़ छात्र संगठन 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा)' ने एक राष्ट्रीय अभियान 'रोल बैक एनईपी 2020 (NEP)' की घोषणा करते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। सम्मेलन में 150 से अधिक छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया।
आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन. साई. बालाजी की अध्यक्षता में शुरू हुई इस सम्मेलन में ववक्ता के तौर पर राज्यसभा सांसद मनोज झा, इतिहासकार प्रो. एस. इरफान हबीब, प्रोफेसर रतन लाल, प्रोफेसर नंदिता नारायण, प्रोफेसर मौसमी बसु, प्रोफेसर पंकज झा, पत्रकार अजय आशीर्वाद, बिहार विधानसभा सदस्य मनोज मंजिल, डॉ लक्ष्मण यादव और डॉ जितेंद्र मीणा शामिल थे। 


इतिहासकार प्रो सैयद इरफ़ान हबीब भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद के समतामूलक शिक्षा नीति को याद हुए और शिक्षा के भगवाकरण को तुलना करते हुए कहा, "यह सरकार और यह NEP हमारी पूरी संस्कृति और हमारे दैनिक जीवन का भगवाकरण करना चाहती है।"
वहीं हिन्दू कॉलेज में इतिहास पढ़ा रहें प्रो रतन लाल ने NEP में सामाजिक न्याय पर हमले के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि 65 पेज के इस दस्तावेज में आरक्षण शब्द का एक बार भी ज़िक्र नहीं है। वहीं इस दस्तावेज में सामाजिक न्याय (सोशल जस्टिस) और एससी, एसटी और ओबीसी का दो-दो बार, उच्च शिक्षा में स्वायत्तता (ऑटोनोमी) का 21 बार, संस्कृत शब्द का 23 बार, डिजिटल और ऑनलाइन शब्द को क्रमशः 38 और 50 बार लिखा गया है। NEP असल में उच्च ध्वनि वाले वाक्यांशों और शिक्षा के मजाक का एक संयोजन है। 

आगे उन्होंने कहा कि जिस तरह से संविधान को ख़त्म करने की घोषणा किए बग़ैर ख़त्म की जा रही है, ठीक वैसे ही NEP को आधिकारिक घोषणा किए बग़ैर ही डीयू, जेएनयू जैसे संस्थानों में लागू कर दी गई है। 

DUTA के पूर्व अध्यक्ष प्रो नंदिता नारायण ने NEP द्वारा लागू ऑनलाइन शिक्षा की बुराइयों के बारे में बात करते हुए कहा, "एमओओसीएस और स्वयंवर के माध्यम से स्वायत्तता और डिजिटलीकरण रूपी तमाशा, सभी का उद्देश्य हमें कॉरपोरेट्स का गुलाम बनाना है।"
सभा को संबोधित करते हुए वायर के पत्रकार अजय आशीर्वाद ने कहा, "एनईपी भाजपा के केंद्रीकरण और संघवाद के हमले के एजेंडे के साथ पूरी तरह से फिट बैठता है।" साथ ही, उन्होंने NEP से जुड़े कुछ सवाल भी उठाए; मसलन- भारत में मुख्यत समस्या एक्सेस का है। यह नई शिक्षा नीति भारत के पिछड़ो, दलितों, वंचितों, शोषितों और अल्पसंख्यकों को किस तरह से शिक्षा का एक्सेस देगा! लिटरेसी दर को कैसे बढ़ाएगा, कोठारी कमीशन का अनुशंसा कि बजट का छठा हिस्सा शिक्षा पर खर्च हो, को कैसे लागू करेगा आदि। साथ ही, उन्होंने कहा कि 'शिक्षा का अधिकार' आज तक पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पाया, इस स्थिति में यह नई शिक्षा नीति कैसे लागू की जाएगी!

राज्यसभा सांसद प्रो मनोज झा ने किसान आंदोलन से प्रेरणा लेते हुए कहा, "NEP का यह मसौदा आपका कृषि विधेयक है। हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी को लोगों का सड़कों पर उतरने और आंदोलन करने से डर लगता है। इसलिए इस NEP के खिलाफ आप भी सड़क पर उतरिये। आज संसद से बहुत कुछ नहीं होता।"
साथ ही उन्होंने कहा कि NEP का दस्तावेज मिथकीय गौरव गान की गाथा है। मिथकीय गौरव गान से कोई देश महान नहीं होता है। देश तब महान होता है, जब आप विमर्श करते हैं।

इतिहासकार प्रो पंकज झा ने कहा कि इतिहास लेखन और अध्ययन का यह NEP मॉडल, वह मॉडल है जिसे अंग्रेज इस देश को बांटने के लिए इस्तेमाल करते थे।

जेएनयूटीए के अध्यक्ष प्रो मौसमी बसु ने कहा, "पूंजीवाद का संकट हमारी सरकार और निकायों को हमारी ही शिक्षा प्रणाली को नष्ट करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इस हमले से लड़ने के लिए छात्र और शिक्षक को बड़े आंदोलन के लिए एकजुट होना चाहिए।"

डीयू के इतिहास शिक्षक डॉ जितेंद्र मीणा ने कहा कि NEP की योजना एससी, एसटी और ओबीसी विरोधी है। यह मनुस्मृति का पुन: कार्यान्वयन है। 
वहीं ज़ाकिर हुसैन में हिंदी पढ़ा रहे डॉ. लक्ष्मण यादव ने NEP के रिसर्च विरोधी स्वभाव पर बोलते हुए यूनिवर्सिटी में एमफिल को खत्म करने की बुराइयों पर प्रकाश डाला, जो अकादमिक रिसर्च के लिए आधार का कार्य करता है।

अगियां से भाकपा विधायक, मनोज मंजिल ने ऐतिहासिक 'सड़क पर स्कूल' आंदोलन से प्रेरणा लेते हुए कहा, "भाजपा ऐश्वर्या रेड्डी, फातिमा लतीफ, रोहित वेमुला की हत्यारा है और हमारे आंदोलन को सभी ड्रॉपआउट और ऑनलाइन शिक्षा के पीड़ितों के लिए न्याय की तलाश करनी चाहिए।" 

आगामी योजना पर न्यूज़क्लिक से बात करते हुए आइसा के राष्ट्रीय कार्यवाहक सचिव प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि हमारी संगठन आगामी बजट सत्र के दौरान पूरे देश से नई शिक्षा नीति के खिलाफ संसद का घेराव करते हुए 50 दिवसीय अभियान शुरू करने घोषणा करती है। यह आंदोलन पूरे देश में विभिन्न गतिविधियों को अंजाम देगा, जिसमें सामूहिक हस्ताक्षर और सभी परिसरों में विरोध प्रदर्शन शामिल हैं। साथ ही, आइसा 'रोल बैक एनईपी' अभियान को देश के सभी परिसरों में ले जाने के लिए संकल्पबद्ध है।

AISA
students protest
NEP
protest at press club
roll back NEP

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

शिक्षा को बचाने की लड़ाई हमारी युवापीढ़ी और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई का ज़रूरी मोर्चा

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

स्कूलों की तरह ही न हो जाए सरकारी विश्वविद्यालयों का हश्र, यही डर है !- सतीश देशपांडे

नई शिक्षा नीति बनाने वालों को शिक्षा की समझ नहीं - अनिता रामपाल

नई शिक्षा नीति से सधेगा काॅरपोरेट हित

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात

नई शिक्षा नीति भारत को मध्य युग में ले जाएगी : मनोज झा


बाकी खबरें

  • J&K
    जसविंदर सिद्धू
    'कश्मीर में नागरिकों की हत्याओं का मक़सद भारत की सामान्य स्थिति की धारणा को धूमिल करना है'—मिलिट्री थिंक-टैंक के निदेशक
    20 Oct 2021
    मौजूदा हालात सीपीओ (केंद्रीय पुलिस संगठन) बलों के लिए और ज़्यादा समस्यायें पैदा करने वाले इसलिए हैं क्योंकि अब सेना को उन इलाक़ों में तैनात नहीं किया जाता है, जिन इलाक़ों में इमारतें हैं या घनी आबादी…
  • पार्थ एस घोष
    कैसे कश्मीर, पाकिस्तान और धर्मनिर्पेक्षता आपस में जुड़े हुए हैं
    20 Oct 2021
    हिंदुत्व को बढ़ावा देना पाकिस्तान की सैन्य-नौकरशाही एजेंसी द्वारा बिछाए गए जाल में फंसने जैसा है। धर्मनिर्पेक्षता को नकारना दक्षिण एशिया के सामाजिक ताने-बाने की बर्बादी का कारण बन सकता है।
  • Bhutan
    एम. के. भद्रकुमार
    भारत के निर्णयों को प्रभावित करने वाले नैरेटिव और ज़मीनी हक़ीक़त में इतना अंतर क्यों है? 
    20 Oct 2021
    भूटान और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए गुरुवार को थिम्पू में हस्ताक्षरित 'रोडमैप' ने तो भारत के डोकलाम-नैरेटिव में एक बड़ा सुराख कर दिया है, इतना बड़ा कि उस से होकर अब…
  • valmiki
    राज वाल्मीकि
    महर्षि वाल्मीकि जयंती के बहाने स्वच्छकार समाज को धर्मांध बनाए रखने की साज़िश!
    20 Oct 2021
    ये समाज कभी नहीं सोचेगा कि ये आमंत्रित अतिथिगण जिन महर्षि वाल्मीकि जी की इतनी प्रशंसा कर रहे हैं, जिनके पदचिह्नों पर चलने का उपदेश दे रहे हैं, उनकी तस्वीर तक अपने घर में नहीं लगाते हैं। जिस स्वच्छकार…
  • khoj khabar
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर : कश्मीर हिंसा या सिंघु लिंचिंगः साज़िश ही साज़िश
    19 Oct 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने कश्मीर में बढ़ती हिंसा और सिंघु बॉडर में हुई लिंचिग के पीछे की साज़िश पर कश्मीर के नेता यूसुफ़ तारागामी और अर्थशास्त्री नवशरण कौर से बातचीत की। एक तरफ़ किसान…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License