NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अफ़ग़ानिस्तान: ग़नी-अब्दुल्ला ने सत्ता बंटवारे के समझौते पर हस्ताक्षर किए
समझौते के अनुसार गनी राष्ट्रपति होंगे जबकि अब्दुल्ला शांति वार्ता का नेतृत्व करेंगे और उनकी टीम को मंत्रिमंडल में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी।
पीपल्स डिस्पैच
18 May 2020
Ashraf Ghani and Abdullah Abdullah

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ ग़नी और उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने 17 मई को शक्ति बंटवारे के समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे देश में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ये समझौता दो प्रशासक होने से नव-निर्मित सरकार के भीतर महीनों से चल रहे राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करने में सक्षम होगा।

इस समझौते के अनुसार, अशरफ ग़नी अफगानिस्तान के राष्ट्रपति बने रहेंगे। हालांकि, उनके प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला अब्दुल्ला तालिबान के साथ शांति वार्ता का नेतृत्व करने के अलावा सरकार में समान संख्या में मंत्री का चयन सकते हैं।

राष्ट्रपति ग़नी ने इस "समझौते को अफगानिस्तान के लिए ऐतिहासिक दिन" क़रार दिया है। समझौते के बाद अपने भाषण में उन्होंने कहा: "हम बोझ साझा करेंगे और उम्मीद है हमारा कंधा हल्का हो जाएगा।"

ग़नी और अब्दुल्ला दोनों ने दावा किया था कि उन्होंने सितंबर में हुए पिछले चुनावों में जीत हासिल की थी और अपने अपने शपथ समारोह का आयोजन किया था। हालांकि अफ़ग़ानिस्तान इंडिपेंडेंट इलेक्शन कमीशन ने अशरफ ग़नी को विजयी घोषित किया था। अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने पिछले राष्ट्रपति चुनावों के परिणाम के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाया था और एक समानांतर सरकार बनाई थी।

इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद अफ़ग़ानिस्तान के मुख्य कार्यकारी के रूप में कार्य कर चुके अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने कहा कि यह समझौता "अधिक समावेशी, जवाबदेह और योग्य प्रशासन" बनाने में सहायक होगा। उन्होंने ट्वीट किया, "अब हमें एक राष्ट्र के रूप में एक साथ आने की ज़रूरत है और जो व्यावहारिक समाधान तलाश करने की ज़रुरत है।"

राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच यह सफलता तब मिली है जब अफ़ग़ानिस्तान की पूरी आबादी देश में कोरोनोवायरस के प्रसार और आतंकी हमलों की आशंका के बीच जूझ रही है।

अप्रैल महीने में तालिबान ने इंटरा-अफगान टॉक (अफ़ग़ान के भीतर चर्चा) को राष्ट्रपति ग़नी द्वारा तालिबान क़ैदियों की उचित संख्या को रिहा करने से इनकार के बाद ख़ारिज कर दिया था। तालिबान ने इस वार्ता को "बेकार" बताया था। तालिबान ने आरोप लगाया कि 1 मार्च को तालिबान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर किए गए हस्ताक्षर के अनुसार अफ़ग़ान सरकार जानबूझकर शांति प्रक्रिया में देरी कर रही है।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

Afghanistan
United States
Ashraf Ghani
TALIBAN
International news
Abdullah Abdullah

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

दुनिया भर की: कोलंबिया में पहली बार वामपंथी राष्ट्रपति बनने की संभावना

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

अमेरिका में महिलाओं के हक़ पर हमला, गर्भपात अधिकार छीनने की तैयारी, उधर Energy War में घिरी दुनिया

रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार

डोनबास में हार के बाद अमेरिकी कहानी ज़िंदा नहीं रहेगी 

तालिबान को सत्ता संभाले 200 से ज़्यादा दिन लेकिन लड़कियों को नहीं मिल पा रही शिक्षा

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

दुनिया भर की: सोमालिया पर मानवीय संवेदनाओं की अकाल मौत

यमन में ईरान समर्थित हूती विजेता


बाकी खबरें

  • Mothers and Fathers March
    पीपल्स डिस्पैच
    तख़्तापलट का विरोध करने वाले सूडानी युवाओं के साथ मज़बूती से खड़ा है "मदर्स एंड फ़ादर्स मार्च"
    28 Feb 2022
    पूरे सूडान से बुज़ुर्ग लोगों ने सैन्य शासन का विरोध करने वाले युवाओं के समर्थन में सड़कों पर जुलूस निकाले। इस बीच प्रतिरोधक समितियां जल्द ही देश में एक संयुक्त राजनीतिक दृष्टिकोण का ऐलान करने वाली हैं।
  • गौरव गुलमोहर
    यूपी चुनाव: क्या भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं सिटिंग विधायक?
    28 Feb 2022
    'यदि भाजपा यूपी में कम अंतर से चुनाव हारती है तो उसमें एक प्रमुख कारण काम न करने वाले सिटिंग विधायकों का टिकट न काटना होगा।'
  • manipur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान
    28 Feb 2022
    मणिपुर विधानसभा के लिए आज पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। मतदान का समय केवल शाम 4 बजे तक ही था। अपराह्न तीन बजे तक औसतन 67.53 फ़ीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
    28 Feb 2022
    हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
  • Sergey Lavrov
    भाषा
    यूक्रेन की सेना के हथियार डालने के बाद रूस ‘किसी भी क्षण’ बातचीत के लिए तैयार: लावरोव
    28 Feb 2022
    लावरोव ने यह भी कहा कि रूस के सैन्य अभियान का उद्देश्य यूक्रेन का ‘‘विसैन्यीकरण और नाजी विचारधारा से’’ मुक्त कराना है और कोई भी उस पर कब्जा नहीं करने वाला है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License