NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
बेहिसाब दौलत के बीच जीते अफ़ग़ानिस्तान के ग़रीब लोग
ख़ासकर महिलाओं के ख़िलाफ़ तालिबान की सख़्त सामाजिक नीति से कई सहायता समूह इस देश  में वापस आने से हिचकेगी।
विजय प्रसाद
04 Oct 2021
afghanistan taliban
प्रतिकात्मक फ़ोटो: साभार: एनडीटीवी

25 सितंबर, 2021 को अफ़ग़ानिस्तान के अर्थव्यवस्था मंत्री कारी दीन मोहम्मद हनीफ़ ने कहा कि उनकी सरकार "पिछली सरकार की तरह दुनिया से मदद और सहयोग नहीं चाहती है। पुरानी व्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने 20 साल तक समर्थन दिया, लेकिन फिर भी नाकाम रही। यह कहना बिल्कुल ठीक है कि हनीफ़ को एक जटिल अर्थव्यवस्था चलाने का कोई तजुर्बा नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने करियर का ज़्यादतर समय तालिबान (अफ़ग़ानिस्तान और क़तर दोनों में) के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक काम करने में बिताया है। हालांकि, 1996 से 2001 तक पहली तालिबान सरकार के दौरान हनीफ़ योजना मंत्री थे और उस पद पर रहते हुए आर्थिक मामलों को देखते थे।

हनीफ़ का यह कहना सही है कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई (2001-2014) और अशरफ़ ग़नी (2014-2021) की सरकारें अरबों डॉलर की आर्थिक सहायता हासिल करने के बावजूद अफ़ग़ान आबादी की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा कर पाने में भी नाकाम रहीं। उनकी हुक़ूमत और अमेरिका के 20 साल के कब्ज़े के में रहने के बावजूद इस समय अफ़ग़ानिस्तान के तीन में से एक व्यक्ति भूख का सामना कर रहा है, 72 प्रतिशत आबादी ग़रीबी रेखा से नीचे जी रही है और 65 प्रतिशत लोगों के पास बिजली नहीं है। पश्चिमी देश चाहे जितनी भी शेखी बघार ले, लेकिन इस हक़ीक़त पर पर्दा नहीं डाली जा सकती कि "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय" के समर्थन का नतीजा इस देश के किसी आर्थिक और सामाजिक विकास के रूप में नतीजा सामने नहीं आया।

ग़रीब उत्तरी भाग

हनीफ़ अफ़ग़ानिस्तान के नये मंत्रिमंडल के एकलौते ऐसे सदस्य हैं, जो देश के ताजिक जातीय अल्पसंख्यक समुदाय से हैं और बदख़्शां के पूर्वोत्तर अफ़ग़ान सूबे से आते हैं। अफ़ग़ानिस्तान का यह पूर्वोत्तर प्रांत ताजिक-प्रभुत्व वाला इलाक़ा हैं और बदख़्शां ही वह आधार था, जहां से 2001 में तालिबान के ख़िलाफ़ हमला शुरू करने वाला उत्तरी गठबंधन तेज़ी से यू.एस. की हवाई सुरक्षा के तहत बढ़ता गया था। अगस्त 2021 की शुरुआत में तालिबान इन ज़िलों में घुस गया था। बदख़्शां की राजधानी फ़ैज़ाबाद में रहने वाले करज़ई सरकार के एक पूर्व अधिकारी ने कहा, "हम काबुल में उस सरकार का बचाव क्यों करेंगे, जिसने हमारे लिए कुछ किया ही नहीं?"

2009 और 2011 के बीच अफ़ग़ानिस्तान में आने वाले यूएसएड फ़ंड का 80 प्रतिशत दक्षिण और पूर्व के उन इलाक़ों के हवाले हो गया, जो तालिबान का स्वाभाविक आधार रहा है। अमेरिकी सीनेट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पैसा भी "दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं के बजाय स्थिरता लाने वाले अल्पकालि कार्यक्रमों"पर ख़र्च हुआ। 2014 में बदख़्शां के अर्गो ज़िले के तत्कालीन गवर्नर हाजी अब्दुल वदूद ने रॉयटर्स को बताया, "किसी ने भी विकास परियोजनाओं पर ख़र्च करने के लिए पैसे नहीं दिये हैं। हमारे पास अपने ज़िले में ख़र्च करने के लिए संसाधन तक नहीं हैं, हमारा सूबा दूर-दराज़ इलाक़े में स्थित है और यहां कम ही ध्यान जाता है।”

हनीफ़ का गृह प्रांत बदख़्शां और इसके आस-पास के इलाक़े ज़बरदस्त ग़रीबी से ग्रस्त हैं, इन इलाक़ों में निर्धनता दर 60 प्रतिशत से ऊपर है। जब वह नाकामी की बात कर रहे होते हैं, तो हनीफ़ के दिमाग़ में अपना गृह प्रांत ही होता है।

यह बदख़्शां हज़ारों सालों से लाजवर्द जैसे रत्नों की खानों का भंडार रहा है। 2010 में एक अमेरिकी सैन्य रिपोर्ट में इस बात का आकलन किया गया था कि अफ़ग़ानिस्तान में कम से कम एक ट्रिलियन डॉलर मूल्य की क़ीमती धातुयें थीं; उसके बाद के सालों में अफ़ग़ानिस्तान के तत्कालीन खान मंत्री वहीदुल्लाह शाहरानी ने बीबीसी रेडियो को बताया कि वास्तविक आंकड़ा तो इससे तीन गुना ज़्यादा हो सकता है। यह सब होते हुए ग़रीब उत्तरी इलाक़ा शायद इतना ग़रीब न रहे।

उत्तर के चोर

अफ़ग़ानिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद में अफीम उत्पादन के एक बड़े हिस्से का योगदान है। देश की अर्थव्यवस्था को लेकर इस अफीम पर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का फ़ोकस होता है और पिछले कई सालों से देश को बर्बाद करने वाले भयानक युद्धों को आंशिक रूप से इसी अफ़ीम ने वित्तपोषित किया जाता रहा है। इस बीच बदख़्शां के इन्हीं रत्नों ने 1980 के दशक में अहमद शाह मसूद के जमीयत-ए-इस्लामी गुट का भी वित्तपोषण किया था; 1992 के बाद जब मसूद काबुल में रक्षा मंत्री बने थे, तो उन्होंने प्रति वर्ष अनुमानित 200 मिलियन डॉलर के रत्नों को बेचने के लिए पोलैंड की एक कंपनी-इंटरकॉमर्स के साथ गठबंधन किया था। जब तालिबान ने मसूद को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था, तो वह पंजशीर घाटी में लौट आया था और अपने तालिबान विरोधी प्रतिरोध को वित्तपोषित करने के लिए बदख़्शां, तखर और पंजशीर के इन्हीं रत्नों का इस्तेमाल किया था।

उत्तरी गठबंधन, जिसमें मसूद का गुट भी शामिल था, जब 2001 में अमेरिकी बमबारी के तहत सत्ता में आया था, तो ये ही खदानें उत्तरी गठबंधन कमांडरों की दौलत बन गयी थीं। उत्तरी गठबंधन के हाजी अब्दुल मालेक, ज़करिया सावदा और ज़ुल्मई मुजादीदी जैसे सभी राजनेताओं ने इन खानों को नियंत्रित किया। मुजादीदी का भाई असदुल्लाह मुजादीदी खनन सुरक्षा बल के मिलिशिया कमांडर था, जो इन नये अभिजात वर्ग के लिए खानों की हिफ़ाज़त करता था।

2012 में अफ़ग़ानिस्तान के तत्कालीन खनन मंत्री वहीदुल्ला शाहरानी ने इन सौदों में भ्रष्टाचार की हद का ख़ुलासा किया था, जिसे उन्होंने 2009 में अमेरिकी दूतावास के सामने स्पष्ट रूप से सामने रख दिया था। हालांकि, अफ़ग़ानिस्तान के अंदर पारदर्शिता को लेकर शाहरानी की इस कोशिश को अफ़ग़ान खनन प्रतिष्ठानों को अमान्य करने और एक नये क़ानून के ज़रिये आगे बढ़ाने वाली एक ऐसी व्यवस्था के तौर पर देखा गया, जो अंतर्राष्ट्रीय खनन कंपनियों को देश के संसाधनों तक पहुंच की ज़्यादा आज़ादी देगा। सेंटर (यूनाइटेड किंगडम) और पोलैंड के अरबपति जान कुल्ज़िक सहित कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने इस प्रांत के सोने, तांबे और रत्न की खदानों तक पहुंच बनाने की कोशिश की; सेंटर ने पूर्व शहरी विकास मंत्री सादात नादेरी की अध्यक्षता में अफ़ग़ानिस्तान गोल्ड एंड मिनरल्स कंपनी के साथ गठबंधन किया। कंपनियों के इस संघ के खनन उपकरण को अब तालिबान ने ज़ब्त कर लिया है। इस साल की शुरुआत में अफ़ग़ान सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार के दुरुपयोग को लेकर शाहरानी को 13 महीने की जेल की सज़ा सुनायी थी।

क्या करेगा तालिबान ?

हनीफ़ के पास एक नामुमकिन एजेंडा है। आईएमएफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान को पैसे दिये जाने पर रोक लगायी हुई है, और अमेरिकी सरकार संयुक्त राज्य अमेरिका में रखे गये तक़रीबन 10 अरब डॉलर के अफ़गान विदेशी भंडार तक की पहुंच को ब्लकॉक करना जारी रखे हुए है। कुछ मानवीय सहायता अब इस देश में पहुंच रही है, लेकिन यह नाकाफ़ी है। ख़ासकर महिलाओं के ख़िलाफ़ तालिबान की सख़्त सामाजिक नीति से कई सहायता समूह इस देश  में वापस होने से हिचकेगी।

देश के केंद्रीय बैंक दा अफ़ग़ानिस्तान बैंक (DAB) के अधिकारी मुझे बताते हैं कि सरकार के सामने विकल्प बहुत ही कम बचे हैं। खनन संपत्ति पर संस्थागत नियंत्रण स्थापित नहीं किया गया है। एक अधिकारी ने बताया, "जिन सौदों में कटौती की गयी, उनसे कुछ ही लोगों को फ़ायदा हुआ, न कि पूरे देश को फ़ायदा हुआ।" चीन के मेटलर्जिकल कॉरपोरेशन और जियांग्शी कॉपर के साथ बनी मेस अयनाक तांबे की खदान को विकसित करने का एक बड़ा सौदा 2008 से बेकार पड़ा हुआ है।

सितंबर के मध्य में हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन ने मध्य एशिया और पश्चिमी चीन को बाधित करने वाले आतंकवादी समूहों को अफ़ग़ान सीमाओं के पार जाने से रोकने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। रहमोन ने ख़ुद को ताजिक लोगों के रक्षक के तौर पर अपना रुख़ अख़्तियार किया है, हालांकि सीमा के दोनों ओर ताजिक समुदायों की ग़रीबी पर अफ़ग़ानिस्तान में बतौर अल्पसंख्यक ताजिकों के अधिकारों को बनाये रखने के रूप में ज़्यादा ग़ौर किये जाने की ज़रूरत होनी चाहिए।

एससीओ की ओर से किसी तरह का कोई सार्वजनिक संकेत नहीं है कि यह न सिर्फ़ सीमा पार आतंकवाद को रोकेगा, बल्कि सीमा पार की तस्करी पर भी रोक लगायेगा। उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान से हेरोइन और अफीम की सबसे बड़ी खेप ताजिकिस्तान ही जाती है; अफ़ग़ानिस्तान से खनिजों, रत्नों और धातुओं की अवैध आवाजाही से बेशुनमार पैसे बनाये जाते हैं। हनीफ़ ने इस मुद्दे को सीधे तौर पर तो नहीं उठाया है, लेकिन डीएबी के अधिकारियों का कहना है कि जब तक अफ़ग़ानिस्तान अपने संसाधनों पर बेहतर ढंग से क़ाबू नहीं कर लेता, जिसे दो दशकों में कर पाने में नाकाम रहा है, तबतक यह देश अपने नागरिकों की ज़िंदगी के हालात में सुधार नहीं ला पायेगा।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Afghanistan’s Impoverished People Live Amid Enormous Riches

Afghanistan
US
TALIBAN
China
Tajikistan
Shanghai Cooperation Organization

Related Stories

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

क्या दुनिया डॉलर की ग़ुलाम है?

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

रूस की नए बाज़ारों की तलाश, भारत और चीन को दे सकती  है सबसे अधिक लाभ


बाकी खबरें

  • Jhajjar Road Flyover of Bahadurgarh
    सोनिया यादव
    लखीमपुर खीरी कांड के बाद हरियाणा में प्रदर्शनकारी महिला किसानों को ट्रक ने कुचला, तीन की मौत
    28 Oct 2021
    महज़ एक महीने के भीतर लखीमपुर खीरी की घटना के बाद ये दूसरा किसानों की हत्या से जुड़ा मामला सामने आया है। इससे पहले लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में तीन अक्टूबर को हुई हिंसा में चार किसानों…
  • fact check
    प्रियंका झा
    आज तक, APN न्यूज़ ने श्रीनगर में WC में पाकिस्तान की जीत का जश्न बताकर 2017 का वीडियो चलाया
    28 Oct 2021
    ऑल्ट न्यूज़ ने श्रीनगर के एक रिपोर्टर से बात की जो समाचारपत्र के लिए काम करते हैं. उन्होंने कहा कि ये वीडियो श्रीनगर का ही है लेकिन पुराना है. उन्होंने ये भी कहा कि हाल में श्रीनगर में मैच के बाद…
  • schools colleges reopen
    भाषा
    दिल्ली: डेढ़ साल बाद एक नवंबर से फिर खुलेंगे स्कूल, कॉलेज
    28 Oct 2021
    दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को कहा कि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने शहर में एक नवंबर से सभी शैक्षणिक संस्थानों को फिर से खोलने और छठ पूजा समारोहों को कोविड के सख्त…
  • Zakia Jafri
    सबरंग इंडिया
    जाकिया जाफरी मामला : याचिकाकर्ता ने जांच की मांग की
    28 Oct 2021
    सुप्रीम कोर्ट जाकिया जाफरी द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें गुजरात प्रशासन में प्रमुख सदस्यों की भूमिका की जांच की मांग की गई थी, जिन्होंने 2002 के नरसंहार को बेरोकटोक…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 16,156 नए मामले, 733 मरीज़ों की मौत
    28 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.47 फ़ीसदी यानी 1 लाख 60 हज़ार 989 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License