NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
बिहार में एक और चीनी मिल की बंदी और हज़ारों किसानों की तबाही
कभी देश के लिए 40 फीसदी चीनी उत्पादन करने वाले बिहार में 33 चीनी मिल हुआ करते थे, अब सिर्फ 10 चीनी मिल बचे हैं।
पुष्यमित्र
18 Jan 2021
बिहार में एक और चीनी मिल की बंदी और हजारों किसानों की तबाही

आखिरकार बिहार में एक और चीनी मिल बंद हो गयी है। यह सीतामढ़ी जिले की रीगा चीनी मिल है, जिसके साथ आसपास के चार जिलों के 40 हजार से अधिक किसानों का भविष्य जुड़ा था। इन किसानों की 15 लाख टन गन्ने की फसल की खरीदारी यह लगभग 90 साल पुराना चीनी मिल करता था। मगर इस साल किसानों का गन्ना खेतों में है और वे इसे किसे बेचेंगे इसका कोई ठिकाना नहीं है। गन्ने की इस साल की फसल के साथ-साथ उनके पिछले कुछ सालों का बकाया भी इस मिल के मालिक के पास है। इसके भी मिलने का कोई ठिकाना नहीं है। रीगा चीनी मिल का बंद होना इन किसानों के लिए झटका तो है ही, पिछले तीन-चार दशकों से उद्योगहीनता की स्थिति का सामना करने वाले बिहार राज्य के लिए भी अच्छी खबर नहीं है। कभी देश के लिए 40 फीसदी चीनी उत्पादन करने वाले बिहार में 33 चीनी मिल हुआ करते थे, अब सिर्फ 10 चीनी मिल बचे हैं।

रविवार, 17 जनवरी 2021 को सीतामढ़ी के रीगा में स्थानीय लोगों ने इस चीनी मिल के बंद होने के विरोध में बाजार बंद रखा। इस बंदी में गन्ना किसानों के साथ-साथ मिल में काम करने वाले मजदूर और स्थानीय व्यापारी भी शामिल थे। इस बंदी के दौरान ईखोत्पादक संघ के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इस वक्त किसानों का अमूमन 50 करोड़ रुपये की लागत का गन्ना खेतों में पड़ा है। अड़ोस-पड़ोस के चीनी मिल के एजेंट आधी कीमत में किसानों का गन्ना खरीद रहे हैं। किसान लाचारी में इसे बेच भी रहे हैं। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप करके यथाशीध्र इस चीनी मिल को चालू कराने की मांग की और साथ ही कहा कि किसानों का सवा सौ करोड़ रुपये का पिछला बकाया भी दिये जाने का मुद्दा उठाया।

गन्ना खरीद का सत्र आधा बीत जाने और रीगा चीनी मिल द्वारा गन्ने की खरीद शुरू न किये जाने के बाद जब किसानों ने बिहार सरकार के अधिकारियों के सामने इस समस्या को उठाया तो 13 जनवरी, 2021 को बिहार सरकार के ईख कमीश्नर ने इस बारे में एक आदेश जारी किया। इस आदेश के मुताबिक रीगा चीनी मिल से संबंधित किसानों का गन्ना उसके आसपास के चीनी मिलों को कैंप लगाकर खरीदना है। यह गन्ना सिधवलिया, मझौलिया और गोपालगंज सुगर मिल को खरीदने की जिम्मेदारी दी गयी है। इसके तहत 19 क्रयकेंद्रों की स्थापना होगी। मगर यह आदेश अभी भी लागू नहीं हो पाया है।

दिलचस्प है कि ईख आयुक्त द्वारा जारी इस आदेश में उन्होंने यह बताया है कि रीगा सुगर कंपनी, सीतामढ़ी के मुख्य प्रबंधक ओपी धानुका ने 23 दिसंबर, 2020 को ही पत्र लिख कर उन्हें सूचित कर दिया था कि वित्तीय और दूसरी परेशानियों के कारण वे मिल परिचालन करने में खुद को सक्षम नहीं पा रहे। बाद में 25 दिसंबर, 2020 को अगले पत्र में उन्होंने कहा था कि मजदूर की समस्याओं और यूनियन के विरोध के कारण चीनी मिल का परिचालन संभव नहीं लग रहा। उनके क्षेत्र का गन्ना दूसरे चीनी मिलों को आवंटित कर दिया जाये।

इस पत्र के बावजूद ईख आयुक्त को यह फैसला लेने में 20 दिन से अधिक वक्त लग गया। गन्ने की खरीद अभी भी शुरू नहीं हो पायी है।

जब यह पता लगाने की कोशिश की गयी कि मजदूरों की समस्या और यूनियन का विरोध क्यों है, तो जानकारी मिली कि लॉकडाउन के वक्त मई में चीनी मिल प्रबंधन ने 500 मिल मजदूरों को जबरन अवैतनिक अवकाश पर भेज दिया था। मजदूर उस वक्त से मिल प्रबंधन के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। अब जब अक्तूबर महीने में चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू हो रहा है तो मिल प्रबंधन मजदूरों को काम पर लौटने के लिए कह रहा है, मजदूर तैयार नहीं हो रहे। क्योंकि मजदूरों के 15 नेताओं को नौकरी से इस आरोप में हटा दिया गया कि वे फैक्टरी का माहौल खराब करते हैं।

रीगा के ईखोत्पादक संघ के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह कहते हैं, मिल मालिक ने मजदूरों के साथ तो गलत किया ही है। मगर यह मिल के बंद होने की असली वजह नहीं है। असली कारण यह है कि पहले इस चीनी मिल की पेराई क्षमता 35 से 40 लाख टन गन्ने की थी, अब यह 15 लाख टन गन्ना रह गया है। अब मिल मालिक का मानना है कि इस स्थिति में मिल चलाने से उन्हें 15 से 20 करोड़ का घाटा हो सकता है। इसलिए वे मिल का परिचालन बंद करना चाहते हैं।

पेराई क्षमता क्यों कम हो गयी, इस सवाल पर नागेंद्र सिंह कहते हैं कि चीनी मिल ने किसानों के गन्ने का भुगतान करना बंद कर दिया। जिन किसानों का पैसा मिल में फंसने लगा, वे गन्ने की खेती करना बंद करने लगे। इसलिए इस इलाके में गन्ने का उत्पादन कम होने लगा।

इस संबंध में जब हमने रीगा चीनी मिल के मजदूर सभा के महासचिव अशोक कुमार सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि मिल मालिक का यह आरोप बेबुनियाद है कि मजदूरों के कारण मिल चालू नहीं हो पा रहा। हम तो चाहते हैं कि मिल चालू हो, मिल चालू होने से ही हमारे इलाके के हजारों घर का चूल्हा जलेगा। मगर हम यह भी चाहते हैं कि 11 मई, 2020 से जो मजदूर काम और वेतन के बिना खाली बैठे हैं, उन सबको काम पर बुलाया जाये। मगर मिल मालिक सिर्फ डिस्टलरी यूनिट के मजदूरों को काम पर बुला रहे हैं, क्योंकि उनका कुछ इथेनॉल बचा हुआ है, उसे तैयार करवाना चाह रहे हैं। वे गन्ना पेराई से जुड़े किसी मजदूर को काम पर नहीं बुला रहे, इसका मतलब साफ है कि वे गन्ना की पेराई करना नहीं चाहते।

अशोक कुमार सिंह ने यह भी कहा कि स्थानीय प्रशासन के स्तर पर जब-जब मिल प्रबंधन और मजदूरों के बीच समझौते के लिए वार्ता का आयोजन किया गया, मिल के लोग उसमें शामिल नहीं हुए। उल्टे 15 मजदूर नेताओं को निलंबित कर दिया। वे यह भी कहते हैं कि मिल प्रबंधन के पास मजदूरों का दो साल से ओवर टाइम, लीव अलाउंस, एरियर का पैसा बकाया है। पिछले नौ महीने से उन्हें वेतन नहीं दिया गया है।

मजदूरों के आरोपों का जवाब देते हुए रीगा सुगर फैक्टरी के मुख्य प्रबंधक ओपी धानुका ने कहा कि यह गलत बात है कि हमने सिर्फ डिस्टलरी वालों को बुलाया है। हां, डिस्टलरी वालों को पहले बुलाया, दूसरे विभाग के मजदूरों को बाद में। यही हमारा क्रम है। उन्होनें यह भी कहा कि हम सिर्फ इस साल पेराई का काम रोक रहे हैं। अगले साल इसे फिर से जारी करने की कोशिश करेंगे। उन्होनें कहा कि हम तो फैक्टरी चलाना चाहते हैं मगर बिहार सरकार के असहयोग की वजह से फैक्टरी परिचालन में दिक्कतें आ रही हैं। दिक्कतों के बारे में पूछने पर उन्होनें कहा कि फोन पर ये बातें नहीं हो सकतीं।

पुष्यमित्र पटना स्थित लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। 

Bihar
Bihar Sugar Mills
Sugar Mill closed
farmers crises
Bihar Farmers
Nitish Kumar
sugarcane farmers

Related Stories

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

महाराष्ट्र में गन्ने की बम्पर फसल, बावजूद किसान ने कुप्रबंधन के चलते खुदकुशी की

बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

ग्राउंड रिपोर्ट: कम हो रहे पैदावार के बावजूद कैसे बढ़ रही है कतरनी चावल का बिक्री?

बिहारः खेग्रामस व मनरेगा मज़दूर सभा का मांगों को लेकर पटना में प्रदर्शन

सड़क पर अस्पताल: बिहार में शुरू हुआ अनोखा जन अभियान, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जनता ने किया चक्का जाम

यूपीः धान ख़रीद को लेकर किसानों से घमासान के बाद हड़ताल पर गए क्रय केंद्र प्रभारी

पीएम के 'मन की बात' में शामिल जैविक ग्राम में खाद की कमी से गेहूं की बुआई न के बराबर

बिहार खाद संकटः रबी की बुआई में देरी से किसान चिंतित, सड़क जाम कर किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • kashmir jammu
    सुहैल भट्ट
    विशेषज्ञों के मुताबिक़ कश्मीर में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति अपने कगार पर है
    27 Dec 2021
    जम्मू-कश्मीर में तनाव से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिसका बड़ा कारण साल 2019 में हटाई गई धारा 370 को मुख्य माना जा रहा है, खुद को कैदी जैसा महसूस कर रहे जम्मू-कश्मीर के लोगों में…
  • Ethiopia
    पीपल्स डिस्पैच
    अमेरिका समर्थित टीपीएलएफ़ ने इथियोपिया में जंग हारने के बाद संयुक्त राष्ट्र से सुरक्षा की गुहार लगाई
    27 Dec 2021
    संघीय सरकार की फ़ौज ने टीपीएलएफ़ को टिगरे राज्य में वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया, अब टीपीएलएफ़ शांति प्रक्रिया के लिए बातचीत शुरू करने की गुहार लगा रहा है। सरकार ने समूह के नि:शस्त्रीकरण और इसके…
  • Mental health
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड: मानसिक सेहत गंभीर मामला लेकिन इलाज के लिए जाएं कहां?
    27 Dec 2021
    फ़रवरी 2019 में उत्तराखंड में मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का गठन करने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई। ये प्राधिकरण काग़ज़ों में भी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। प्राधिकरण में मानसिक स्वास्थ्य के लिए…
  •  Muzaffarpur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुज़फ़्फ़रपुर: हादसा या हत्याकांड!, मज़दूरों ने कहा- 6 महीने से ख़राब था बॉयलर, जबरन कराया जा रहा था काम
    27 Dec 2021
    बॉयलर छह महीने से ख़राब था। कामगारों ने ख़तरे की आशंका जताई थी। बॉयलर का सेफ्टी वाल्व भी ख़राब था। इसके विरोध में दो दिन तक मज़दूरों ने काम भी बंद रखा था लेकिन प्रबंधन ने इसको ठीक नहीं कराया था।
  • haridwar
    वसीम अकरम त्यागी
    राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग: आख़िर तुम किस मर्ज़ की दवा हो?
    27 Dec 2021
    हरिद्वार, आगरा से लेकर गुरुग्राम तक, त्रिपुरा से लेकर कर्नाटक तक, नमाज़ से लेकर चर्च की प्रार्थना सभा तक अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिये बना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License