NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
बीएचयू: छात्रावास में लगा ताला, जबरन हॉस्टल खाली कराने के ख़िलाफ़ छात्रों का धरना!
छात्रों का आरोप है कि उन्हें लॉकडाउन के बीच अचानक 48 घंटे के अंदर हॉस्टल खाली कराने का नोटिस थमा दिया गया। जब उन्होंने ने इसे मानने से इंकार कर दिया, तब प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने हॉस्टल के सभी कमरों में ताला लगा दिया। जिसके बाद अब छात्र बाहर धरने पर बैठने को मज़बूर हैं।
सोनिया यादव
21 May 2020
BHU

“हमें हॉस्टल से निकाल कर कमरों में ताले लगा दिए गए हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच प्रशासन हमें बिना किसी उचित व्यवस्था के जबरन घर भेजने पर अमादा है। प्रशासन को बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है।”

ये वक्तव्य बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों का है, जो फिलहाल हॉस्टल के बाहर धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन के बीच बीएचयू प्रशासन द्वारा तीन दिन पहले अचानक से सभी छात्रों को 48 घंटे के अंदर हॉस्टल खाली कराने का नोटिस थमा दिया गया। जब छात्रों ने इस आदेश को मानने से इंकार कर दिया, तब प्रॉक्टोरियल बोर्ड द्वारा बिड़ला और रुइया हॉस्टल के सभी कमरों में ताला लगा दिया गया। जिसके बाद अब छात्र बाहर धरने पर बैठने को मज़बूर हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

बीएचयू प्रशासन की ओर मंगलवार, 19 मई को जारी नोटिस में कहा गया कि यूजीसी और एमएचआरडी से प्राप्त गाइडलाइन के अनुसार ऑनलाइन मोड के अलावा विश्वविद्यालय में किसी भी तरह की कोई शैक्षणिक गतिविधि 1 जुलाई से पहले शुरू नहीं होगी। ऐसे में यह निर्णय लिया गया है कि जो छात्र 23 मार्च के बाद अपने घर नहीं जा सकें और अभी भी हॉस्टल में ही रह रहें हैं वह 48 गंटे के भीतर हॉस्टल खाली कर दें। इन छात्रों के लिए जिला प्रशासन से आवश्यक अनुमति ली गई है। विश्वविद्यालय ने बसों की भी व्यवस्था की है। जिससे कि छात्रों को उनके घरों तक सुरक्षित भेजा जाए। किसी भी तरह की जानकारी के लिए चीफ प्रॉक्टर या वार्डन से भी सम्पर्क करने को कहा गया है।

quicksquarenew_2.jpg

हालांकि छात्रों का कहना है कि बीएचयू प्रशासन जिस एमएचआरडी गाइडलाइन की बात कर रहा है। उसमें साफ लिखा है कि “विश टू मूव” यानी वो लोग जो अपनी इच्छा से घर जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दिया जाए। जिसका साफ मतलब है कि छात्रों की सहमति से ही प्रशासन उन्हें घर भेज सकता है लेकिन बीएचयू में छात्रों से इस बाबत न तो कोई संपर्क किया गया और न ही कोई सहमति ली गई।

छात्रों ने भी इस संबंध में मंगलवार को ही एक पत्र बीएचयू कुलपति और मानव संसाधन मंत्रालय के नाम लिखा। जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के तर्ज पर बीएचयू के छात्रों से भी हॉस्टल न खाली कराने के लिए एमएचआरडी से हस्तक्षेप की मांग की गई है। छात्रों का कहना है कि इस महामारी के काल में ट्रैवल करना सबसे खतरनाक है, इसे लेकर छात्रों के बीच भय और चिंता का माहौल बना हुआ है, जिसके चलते सभी की पढ़ाई पर भी इसका असर होना लाज़मी है।

क्या कहना है बीएचयू प्रशासन का?

छात्रों से जबरन हॉस्टल खाली करवाने के संबंध में जब न्यूज़क्लिक ने बीएचयू के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर डॉ. राजेश सिंह से सवाल किया तो उन्होंने छात्रों के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि प्रशासन ने किसी कमरे में कोई ताला नहीं लगाया। बीते कई दिनों से छात्रों से लगातार निवेदन किया जा रहा है कि वे सुरक्षित अपने घरों को लौट जाएं क्योंकि फिलहाल बीएचयू रेड जोन यानी हॉटस्पाट बना हुआ है, ऐसे में छात्रों के ऊपर लगातार संक्रमित होने का यहां खतरा बना बना हुआ है।

डॉ. राजेश आगे कहते हैं, “प्रशासन द्वारा सभी छात्रों को घर तक छोड़ने के लिए बसों का इंतज़ाम किया गया है, जिसे सैनिटाइज़ करवा के सभी सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए इस्तेमाल किया जा रहा है। छात्रों को नाश्ता, पानी आदि की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है। अभी तक करीब 150 बच्चों को उनके घरों तक पहुंचा दिया गया है केवल 20-25 छात्र ही कैंपस में बचे हैं, जिन्हें समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

छात्रों की समस्या क्या है?

न्यूज़क्लिक ने जब धरने पर बैठे छात्रों से पीआरओ की बातों के संबंध में प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उनका साफ तौर पर कहना था कि ये सभी बातें सही नहीं हैं। अभी हॉस्टल परिसर में करीब 160 छात्र रुके हुए हैं। जो कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते अपने घरों नहीं जाना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें रास्ते में संक्रमित होने का डर है।

घर तक सुरक्षित पहुंचने का संकट

इस समय छात्रवास के बाहर मौजूद बीएचयू के छात्र राज अभिषेक बताते हैं, “प्रशासन छात्रों को केवल बॉर्डर तक बसों में छोड़ रहा है। उसके आगे की व्यवस्था छात्रों के खुद के जिम्मे है। अब ऐसे लॉकडाउन के बीच हम कहां से कैसे साधन की व्यवस्था करेंगे। रही बात सुरक्षा की तो अब जब कोरोना के मामले बहुत अधिक बढ़ गए हैं तो ऐसे में हमारा एक जगह से दूसरी जगह जाना कैसे सुरक्षित हो सकता है?”

क्वारंटाइन सेंटर की बदहाली और डर

एक अन्य छात्र दिवाकर कहते हैं कि कोरोना का संक्रमण अब इतना बढ़ गया है कि जो भी कोई बाहर से आ रहा है उसे जिला प्रशासन द्वारा 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन सेंटर में भेज दिया जा रहा है। ऐसे में हम सभी अपने क्षेत्रों में ऐसे संटरों की व्यवस्था से भलीभांति परिचित हैं, वहां कैसी बदहाली है, ये सभी को पता है, ऐसे में हम विश्वविद्यालय जैसी सुरक्षित जहग को छोड़ कर कैसे किसी क्वारंटाइन सेंटर जा सकते हैं?

संक्रमित होने का खतरा और भविष्य की चिंता

डिपार्टमेंट ऑफ फिलासफी के छात्र सुबोध श्रीवास्तव अपनी समस्या बताते हैं, “पिछले दो महीने से हम लोगों को प्रशासन द्वारा कोई मदद नहीं दी जा रही थी। यहां तक की खाने की मेस तक बंद हो गई, जिसके बाद प्रशासन ने छात्रों को भूखा-प्यासा छोड़ दिया। बावजूद इसके हम लोग चुप-चाप बिना किसी मांग के यहां शांतिपूर्वक रह रहे हैं। अब जब नोटिस के 48 घंटे पूरे हो गए तो आज सुबह वार्डन और चीफ प्रॉक्टर के द्वारा सभी छात्रों को उनके कमरों से निकाल कर तालाबंदी कर दी गई है। प्रशासन जबरन हॉस्टल ऐसे समय में खाली करवाना चाहता है जब देश-प्रदेश के सभी जिलों में कोरोना अपने चरम पर है। हम तो शोध छात्र हैं, हमारे पाठ्यक्रम में तो कभी छुट्टी होती ही नहीं है। हम अपना काम छोड़कर कैसे निकल जाएं।”

क्या हॉस्टल मेंटेनेंस बहाना है?

बीएचयू पीआरओ ने प्रशासन द्वारा हॉस्टल खाली करवाने के संबंध में एक और तर्क ये दिया कि हर साल वैकेशन के समय मई-जून के महीने में सभी हॉस्टलों में मेंटेनेंस का काम होता है। अगर ये छात्र हॉस्टल नहीं खाली करेंगे तो वो मरम्मत का काम नहीं हो पाएगा।

हालांकि छात्रों ने प्रशासन के इस तर्क को गलत बताया है। उनका कहना है कि मेंटेनेंस का काम तो तब होता है जब पूरे कमरे और हॉस्टल खाली होते हैं लेकिन फिलहाल जो छात्र घर गए हैं, उनके कमरों में ताले लगे हैं, सभी का सामान कमरों में पड़ा है ऐसे में कैसे मरम्मत होगी? छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन का ये रवैया ऐसे संकट के समय में अमानवीय और संवेदहीन है।

इस संबंध में हमने बीएचयू कुलपति और मानव संसाधन मंत्रालय से भी संपर्क कर ईमेल के जरिए उनकी प्रतिक्रिया मांगी है, खबर लिखे जाने तक हमें कोई जवाब नहीं मिला है। जैसे ही जवाब मिलेगा, खबर अपडेट की जाएगी।

BHU
BHU protstests
Banaras Hindu University
UGC
MHRD
BHU Administration
Coronavirus
Student Protests

Related Stories

बीएचयू: अंबेडकर जयंती मनाने वाले छात्रों पर लगातार हमले, लेकिन पुलिस और कुलपति ख़ामोश!

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा

रेलवे भर्ती मामला: बिहार से लेकर यूपी तक छात्र युवाओं का गुस्सा फूटा, पुलिस ने दिखाई बर्बरता

सड़क पर अस्पताल: बिहार में शुरू हुआ अनोखा जन अभियान, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जनता ने किया चक्का जाम

अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध छात्र, अचानक सिलेबस बदले जाने से नाराज़

झारखंड विधान सभा में लगी ‘छात्र संसद’; प्रदेश के छात्र-युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर

उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं


बाकी खबरें

  • The Indian Agricultural Situation Must Not Be Misread
    प्रभात पटनायक
    खेती के संबंध में कुछ बड़ी भ्रांतियां और किसान आंदोलन पर उनका प्रभाव
    15 Nov 2021
    इनमें पहली भ्रांति तो इस धारणा में ही है कि खेती किसानी पर कॉर्पोरेट अतिक्रमण तो ऐसा मामला है जो बस कॉर्पोरेट और किसानों से ही संबंध रखता है। यह ग़लत है। 
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 10,229 नए मामले, 125 मरीज़ों की मौत
    15 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.39 फ़ीसदी यानी 1 लाख 34 हज़ार 96 हो गयी है।
  • Facebook
    परंजॉय गुहा ठाकुरता
    फ़ेसबुक/मेटा के भीतर गहरी सड़न: क्या कुछ किया जा सकता है?
    15 Nov 2021
    क्या सांप्रदायिक नफ़रत फैलाने के सिलसिले में सक्रिय रूप से उकसाने को लेकर फ़ेसबुक के ख़िलाफ़ क़ानूनी और नियामक कार्रवाई की जा सकती है? हालांकि, अमेरिका में इसकी एक मिसाल मौजूद है, लेकिन भारत में इसे…
  • tax
    सुबोध वर्मा
    सरकार का टैक्स कलेक्शन तो बढ़ा है, लेकिन फिर भी ख़र्च में कटौती जारी
    15 Nov 2021
    मोदी सरकार ने शिक्षा, सामाजिक न्याय, पर्यावरण समेत कई मंत्रालयों के ख़र्च पर रोक लगा दी है। 
  • Gurgaon Panchayat
    मुकुंद झा
    गुड़गांव पंचायत : औद्योगिक मज़दूर, किसान आए एक साथ, कहा दुश्मन सांझा तो संघर्ष भी होगा सांझा!
    15 Nov 2021
    रविवार को गुड़गांव में बेलसोनिका ऑटो कंपोनेंट इंडिया इंप्लॉयीज यूनियन, मानेसर द्वारा मजदूर-किसान पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें  कृषि बिलों को वापस लेने और श्रम संहिताओं को समाप्त करने की संयुक्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License