NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!
कैंपस में आए दिन छात्राओं के साथ हो रहे अभद्र व्यवहार और छेड़खानी के खिलाफ छात्रों ने सेंट्रल ऑफिस पर प्रदर्शन कर प्रशासन से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इस दौरान छात्राओं ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय ने सुरक्षा को देखते हुए आवश्यक कदम नहीं उठाया तो हम सभी 2017 वाले आंदोलन से भी बड़ा विरोध करने को मजबूर होंगे।
सोनिया यादव
22 Aug 2021
बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी यानी बीएचयू एक बार फिर यौन हिंसा को लेकर सुर्खियों में है। बीते दिनों त्रिवेणी हॉस्टल की एक लड़की के साथ हुए यौन दुर्व्यवहार और मार-पीट की खबर ने छात्रों को फिर से सड़क पर उतरे को मज़बूर कर दिया है। छात्र इन घटनाओं पर विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी और असंवेदनशील रवैए से भी निराश हैं। कैंपस में आए दिन छात्राओं के साथ हो रहे अभद्र व्यवहार और छेड़खानी के खिलाफ छात्रों ने शनिवार, 21 अगस्त को प्रदर्शन किया। साथ ही अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर कार्यवाहक कुलपति को संबोधित करते हुए एक ज्ञापन भी अधिकारियों को सौंपा।

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि आए दिन सड़क पर लंपट लड़के यूनिवर्सिटी की लड़कियों पर अश्लील टिप्णणियां करते हैं, उनसे छेड़खानी करते हैं लेकिन प्रशासन सुरक्षा देना तो दूर यौन हिंसा करने वाले लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं करता है। यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वो विश्विद्यालय में पढ़ने वाले हर विद्यार्थी की सुरक्षा सुनिश्चित करे, लेकिन यहां प्रशासन अपराधियों को ही संरक्षण देता दिखाई देता है।

सुरक्षा सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रशासन की ही ज़िम्मेदारी है!

भगत सिंह छात्र मोर्चा के सदस्यों ने न्यूज़क्लिक को बताया कि त्रिवेणी हॉस्टल की घटना केवल एक घटना है जो बीते कई दिनों में हाईलाइट हुई है। लेकिन कैंपस में लगातार ऐसी घटनाएं होती आ रही हैं कुछ मामले ही सामने आते हैं और बहुत से दब जाते हैं। छात्र-छात्राएं इन सभी घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर प्रशासन से अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं क्योंकि ये सुरक्षा सिर्फ और सिर्फ प्रशासन की ही जिम्मेदारी है, जिसे शायद प्रशासन भूल गया है या जानबूझ कर अनदेखा कर रहा है।

यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने बताया कि कुछ ही दिन पहले हुए त्रिवेणी हॉस्टल की घटना से सभी लड़कियों और उनके परिजनों में डर और दहशत का माहौल है कि कहीं अगला नंबर उनका ही न हो। ये बहुत आसान है समझना कि जहां हमें सबसे ज्यादा सुरक्षा की अपेक्षा होती है अगर वहीं एक लड़की के साथ तीन लड़के आधे घंटे तक छेड़छाड और मार-पीट करें तो फिर इससे शर्मनाक कुछ भी नहीं हो सकता। चिंता तब और बढ़ जाती है जब इस तरह की घटना पर प्राक्टोरियल बोर्ड का बेहद ढीला और असंवेदनशील रवैया देखने को मिले, ये सबसे ज्यादा परेशान करने वाला है।

आपको बता दें कि त्रिवेणी हॉस्टल की जिस घटना का बार-बार जिक्र हो रहा है, वो बीते सोमवार, 16 अगस्त के रात करीब 10 बजे की है। पीड़ित छात्रा के मुताबिक जब वह कैंपस के एलडी गेस्ट हाउस चबूतरे पर बैठ कर अपने दोस्त के साथ खाना खा रही थी। उसी दौरान नशे में धुत तीन युवकोें ने भद्दे कमेंट्स और अपशब्दों की बौछार शुरू कर दी। जब छात्रा और उसके साथी ने इसका विरोध किया तो उन लड़कों ने अश्लील हरकतें और मारपीट शुरू कर दी। इसके साथ ही धमकी दी कि वह कई मर्डर कर चुके हैं, जिससे शिकायत करना होगा कर लेना। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने रहें।

छात्रा ने इस मामले में जिस मुख्य आरोपी बजरंगी का नाम लिया है वो बीएचयू के ही संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग का छात्र उपकार दूबे है। उपकार कुशीनगर जिले के सोहरौना खड्‌डा का रहने वाला है और फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है। हालांकि विश्वविद्यालय की छात्राएं इस गिरफ्तारी से बहुत अधिक संतुष्ट नहीं हैं और लगातार प्रशासन से सवाल कर रही हैं।

महिलाओं के लिए एक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करवाना आंदोलन का मकसद है!

अपनी बात रखते हुए छात्राओं ने कहा कि भले ही इस मामले में एक गिरफ्तारी हो गई हो लेकिन हमारा न्याय के लिए संघर्ष पूरा नहीं हुआ है। हमारा आंदोलन कैंपस में आए दिन हो रही सभी यौन हिंसा की घटनाओं को खत्म करने के लिए है। प्रशासन से महिलाओं के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाने और अपने महिला अधिकार को सुनिश्चित करवाने के लिए है।

प्रदर्शन को दौरान छात्राओं ने कहा कि जब तक सरकार और प्रशासन कैंपस में पूरी सुरक्षा नहीं सुनिश्चित कर लेते तब तक उन्हें महिला सुरक्षा का झूठा स्वांग रचना छोड़ देना चाहिए। जिन पार्टियों के नेता अपने तमाम भाषणों में महिला सशक्तिकरण की बड़ी बातें करते हैं उसी के नेता और छात्र संगठन बलात्कार और छेड़खानी जैसे मामलों में शामिल होते हैं। इस दौरान छात्राओं ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय ने सुरक्षा को देखते हुए आवश्यक कदम नहीं उठाया तो हम सभी 2017 वाले आंदोलन से भी बड़ा विरोध करने को मजबूर होंगे।

2017 का ऐतिहासिक आंदोलन जिसने शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी थी!

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई बार यौन हिंसा के खिलाफ बीएचयू की छात्राएं सड़क पर उतरी हैं और अपने हक़ के लिए प्रशासन के खिलाफ लड़ी हैं। 2017 का ऐतिहासिक प्रदर्शन शायद ही

कोई भूला हो जब बड़ी संख्या में छात्राओं ने छेड़खानी के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू किया था। तब भी छात्राओं का आरोप था कि यूनिवर्सिटी परिसर में छात्राओं की सुरक्षा के पुख़्ता इंतेज़ाम नहीं है और छेड़छाड़ आम बात है। छात्राओं ने ये भी आरोप लगाया था कि यूनिवर्सिटी प्रशासन छेड़खानी की शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाए छात्राओं पर ही सवाल उठाता है।

तब प्रदर्शन उग्र भी हुआ था और छात्राओं ने पुलिस की लाठियां भी खाईं थी। छात्रों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोलों तक का इस्तेमाल करना पड़ा था। इस आंदोलन का न कोई नेता था और न कोई राजनीतिक विचारधारा हावी थी। मुद्दा सिर्फ एक था, छात्राओं के लिए परिसर पूरी तरह सुरक्षित हो। छात्राओं की सुरक्षा संबंधी मांगों पर उनके समर्थन में कई अन्य विश्वविद्यालय के छात्र भी आए।

ये इस आंदोलन का ही परिणाम था कि विश्वविद्यालय का प्रॉक्टोरियल बोर्ड भंग कर दिया गया और चीफ प्रॉक्टर को इस्तीफा देना पड़ा। विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार महिला चीफ प्रॉक्टर तैनात की गईं। इसके साथ ही महिला छात्रावासों में महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और सीसीटीवी कैमरों के जाल बिछाने की योजना तैयार की गई। अरसे बाद महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, मंडलायुक्त और मजिस्ट्रेट, न्यायिक आयोग के सामने छात्राओं को अपनी बात कहने का मौका मिला। कुलमिलाकर इस आंदोलन ने विश्वविद्यालय की तस्वीर बदल दी, सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी तक सबके कानों में महिला सुरक्षा की आवाज़ बुलंद कर दी। अब देखना है कि इस बार आवाज़ कहां तक जाती है और उसे कितना सुना और समझा जाता है। 

BHU
Banaras Hindu University
sexual crimes
sexual harassment
Student Protests

Related Stories

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा

रेलवे भर्ती मामला: बिहार से लेकर यूपी तक छात्र युवाओं का गुस्सा फूटा, पुलिस ने दिखाई बर्बरता

अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध छात्र, अचानक सिलेबस बदले जाने से नाराज़

झारखंड विधान सभा में लगी ‘छात्र संसद’; प्रदेश के छात्र-युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर

उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं

गरमाने लगा बनारस: किसान आंदोलन के समर्थक छात्रों के खिलाफ FIR, सिंधोरा थाने पर प्रदर्शन

यूपी में पश्चिम से पूरब तक रही भारत बंद की धमक, नज़रबंद किए गए किसान नेता


बाकी खबरें

  • local body poll
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    आगामी जीटीए चुनावों पर टिकी है दार्जिलिंग हिल्स की राजनीति
    23 Nov 2021
    भाजपा और उसके सहयोगी जीएनएलएफ के विरोध के साथ यहाँ पर चुनाव एक संवेदनशील मुद्दा बन सकता है, जो इसके ‘स्थायी राजनीतिक समाधान’ के पक्ष में हैं।
  • attack on journalist
    एम.ओबैद
    बिहारः एक महीने के भीतर एक और पत्रकार पर जानलेवा हमला, स्थिति नाज़ुक 
    23 Nov 2021
    बिहार में एक सप्ताह पहले ही मधुबनी ज़िले के बेनीपट्टी इलाक़े में एक न्यूज़ पोर्टल से जुड़े पत्रकार बुद्धिनाथ झा की बदमाशों ने हत्या कर, उनके शव को जला दिया था। वे बेनीपट्टी में फ़र्ज़ी नर्सिंग होम का…
  • Death of 3 dalit girls
    विजय विनीत
    पड़ताल: जौनपुर में 3 दलित लड़कियों की मौत बनी मिस्ट्री, पुलिस, प्रशासन और सरकार सभी कठघरे में
    23 Nov 2021
    परिजन इसे हत्या का मामला बता रहे हैं और पुलिस आत्महत्या का। अगर यह हत्या है तब भी कई सवाल हैं जिनका जवाब पुलिस को ढूंढना होगा और अगर यह वाकई ग़रीबी की वजह से की गईं आत्महत्याएं हैं तब तो यह ज़िला…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक : किसान एकता का असर
    23 Nov 2021
    किसान आंदोलन की वजह से तीनों विवादित कृषि कानून वापस हो गए हैं और अब किसान एकता और मजबूत होती जा रही है। यही वजह है कि किसानों के अल्टीमेटम के बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय टेनी ने लखीमपुर में…
  • Tripura
    संदीप चक्रवर्ती
    त्रिपुरा; यदि मतदान निष्पक्ष रहा तो बीजेपी हारेगी : जितेंद्र चौधरी 
    23 Nov 2021
    नगरपालिका चुनावों से पहले और इस पूर्वोत्तर राज्य में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद, माकपा और आदिवासी नेता तथा पूर्व लोकसभा सांसद का कहना है कि त्रिपुरा के लोग भाजपा से नाराज़ हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License