NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
बिहार चुनावः सांकेतिक तस्वीरों की आड़ में बीजेपी का फ़र्ज़ीवाड़ा!
क्या चुनाव के दौरान, ठोस दावों के साथ सांकेतिक तस्वीरें लगाना उचित है? आइये, बिहार के चुनाव प्रचार में इन सांकेतिक तस्वीरों के फ़र्ज़ीवाड़े को समझते हैं।
राज कुमार
05 Nov 2020
बिहार चुनाव

बिहार चुनाव में सोशल मीडिया पर सबसे सशक्त उपस्थिति बीजेपी की है। चुनाव की घोषणा से भी पहले बीजेपी ने सोशल मीडिया पर प्रचार शुरू कर दिया था। सब जानते हैं कि सोशल मीडिया पर प्रचार को ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिये तस्वीरें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। नेताओं की तस्वीरों के साथ विकास कार्यों की तस्वीरों के कोलाज़ बनाकर इन रंगीन विज्ञापनों को सोशल मीडिया पर वायरल किया जाता है। अगर इन विज्ञापनों से तस्वीरें हटा दें तो प्रचार नीरस हो जाता है, आकर्षक नहीं रहता। लेकिन दुविधा तब आती है जब विकास कार्य दिखाने के लिये वास्तविक तस्वीरें न हों। ऐसे में कहीं से भी तस्वीरें उठा ली जाती हैं और पार्टी के प्रचार में धड़ल्ले से उनका इस्तेमाल शुरू कर दिया जाता है।

इसे पढ़ें : बिहार चुनावः बीजेपी का प्रचार माने फ़र्ज़ी तस्वीरों का गोरखधंधा!

बिहार चुनाव प्रचार में बीजेपी यही कर रही है। प्रचार के शुरुआती दौर में ही इन तस्वीरों का फैक्ट चेक किया गया तो पता चला कि तस्वीरें बिहार की नहीं बल्कि कहीं और की हैं। उदाहरण के तौर पर इस लिंक पर क्लिक करके आप देखें जहां बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सिंगापुर की तस्वीर को समस्तीपुर का बताकर ट्वीट किया था। इस लिंक पर क्लिक करें और देखें जब बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने उत्तर प्रदेश की तस्वीर को बिहार का बताकर ट्वीट किया। जब इन तस्वीरों के फैक्ट चेक किये गये तो बीजेपी ने तस्वीरों पर सांकेतिक तस्वीरें लिखना शुरू कर दिया। लेकिन क्या सांकेतिक तस्वीर लिखकर पल्ला झाड़ा जा सकता है? क्या चुनाव के दौरान, ठोस दावों के साथ सांकेतिक तस्वीरें लगाना उचित है? आइये, बिहार के चुनाव प्रचार में इन सांकेतिक तस्वीरों के फ़र्ज़ीवाड़े को समझते हैं।

उदाहरण एक

बिहार में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जैसवाल नें बिहार में बनाये गये पुलों के प्रचार के लिये एक ट्वीट किया। जिसे आप यहां देख सकते हैं। बिहार में 3346 पुल निर्माण के दावे के साथ एक तस्वीर भी लगाई गई है। ये तस्वीर बिहार की नहीं बल्कि दिल्ली के रानी झांसी फ्लाइओवर की है। ज्यादा जानकारी के लिये इस लिंक पर क्लिक करें।

 उदाहरण दो

बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से सड़क निर्माण संबंधी प्रचार के लिये एक ट्वीट किया गया। जिसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं। जिस फोटो का इस्तेमाल किया गया वो बिहार की नहीं बल्कि नेशनल हाइवे-16, विजयवाड़ा मंगलगिरी की है। ज्यादा जानकारी के लिये इस लिंक पर क्लिक करें।

उदाहरण तीन

कृषि क्षेत्र में किये गये कार्यों के प्रचार के लिये बीजेपी के आधिकारिक अकाउंट से एक ट्वीट किया गया। जिसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं। ये तस्वीर बिहार की नहीं बल्कि यूएस स्टेट अरिज़ोना के फिनिक्स शहर की है। ज्यादा जानकारी के लिये इस लिंक पर क्लिक करें।

उदाहरण चार

युवाओं को रोज़गार देने और स्वरोज़गार के प्रचार के लिये बीजेपी ने ट्वीट किया। जिसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं। जो फोटो इस्तेमाल किया गया वो बिहार के किसी कंप्यूटर सेंटर का नहीं बल्कि कनाडा का है। ज्यादा जानकारी के लिये इस लिंक पर क्लिक करें। इस फोटो पर एक विदेशी फोटोग्राफर MC Pearson का कॉपिराइट है।

उदाहरण पांच

इसी प्रकार आवास योजना के प्रचार के लिये ट्वीट किया गया। बीजेपी का ट्वीट आप इस लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं। जिस फोटो का इस्तेमाल किया गया वो बिहार का नहीं बल्कि रायपुर का है। ज्यादा जानकारी के लिये इस लिंक पर क्लिक करें।

ऊपर सिर्फ पांच उदाहरण दिये गये हैं। “सांकेतिक तस्वीर” लिखकर बिहार के ठोस दावों के साथ इन फ़र्ज़ी तस्वीरों का इस्तेमाल बीजेपी बड़े पैमाने पर चुनाव प्रचार में कर रही है।

अगर दावा ठोस है तो फोटो सांकेतिक क्यों?

गौरतलब है कि सांकेतिक तस्वीरों का इस्तेमाल उस मौके पर किया जाता है जब आप किसी की पहचान आदि ज़ाहिर न करना चाहते हों, ज्यादा खून-खराबा और हिंसात्मक हो, फोटो पब्लिश करने से सुरक्षा को ख़तरा हो, जहां पर फोटो खींचना प्रतिबंधित हो आदि। बीजेपी के चुनाव प्रचार के विज्ञापनों में से किसी पर भी ये लागू नहीं होता है। समझना मुश्किल है कि बीजेपी को सड़क की तस्वीरों के लिये भी फ़र्ज़ी तस्वीरों का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है। पुल के विज्ञापन में बिहार के ही किसी पुल की फोटो क्यों नहीं लगाई जाती। सांकेतिक तस्वीरें लिखकर देश-विदेश की फोटो को धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। जब दावा ठोस है तो फोटो सांकेतिक क्यों?

ये विज्ञापन और ट्वीट साफतौर पर भ्रामक हैं। चुनाव के दौरान वोटरों को फ़र्ज़ी तस्वीरों के ज़रिये गुमराह किया जा रहा है। चुनाव आयोग को इसका नोटिस लेना चाहिये। फिलहाल सोशल मीडिया एक बड़ा मंच बन चुका है। चुनाव आयोग को इस बात को समझना चाहिये और सोशल मीडिया पर जारी होने वाले विज्ञापनों बारे स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिये। इन विज्ञापनों में इस्तेमाल होने वाली तस्वीरों पर भी साफ निर्देश देना चाहिये। ताकि सांकेतिक तस्वीर लिखकर पल्ला ना झाड़ा जा सके।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते रहते हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

ये स्टोरी भी ज़रूर पढ़ें :

फेक्ट चेकः बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने यूपी का फोटो बिहार का बताकर किया चुनाव प्रचार

फेक्ट चेक: बीजेपी की तरफ़ से प्रचार समस्तीपुर का, फोटो सिंगापुर का

फेक्ट चेकः क्या सचमुच बिहार पहला राज्य है जो वेटनरी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देता है?

फेक्ट चेक: बिहार में अपराध में गिरावट और आदर्श कानून व्यवस्था के बारे में बीजेपी के दावे की पड़ताल

Bihar Elections 2020
Bihar Polls
fact check
Fake Advertisement
fake news
BJP
Narendra modi
modi sarkar

Related Stories

बीजेपी के चुनावी अभियान में नियमों को अनदेखा कर जमकर हुआ फेसबुक का इस्तेमाल

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

चुनाव के रंग: कहीं विधायक ने दी धमकी तो कहीं लगाई उठक-बैठक, कई जगह मतदान का बहिष्कार

पंजाब विधानसभा चुनाव: प्रचार का नया हथियार बना सोशल मीडिया, अख़बार हुए पीछे

‘बुल्ली बाई’: महिलाओं ने ‘ट्रोल’ करने के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा

मुख्यमंत्री पर टिप्पणी पड़ी शहीद ब्रिगेडियर की बेटी को भारी, भक्तों ने किया ट्रोल

सांप्रदायिक घटनाओं में हालिया उछाल के पीछे कौन?

हेट स्पीच और भ्रामक सूचनाओं पर फेसबुक कार्रवाई क्यों नहीं करता?

वे कौन लोग हैं जो गोडसे की ज़िंदाबाद करते हैं?

पड़ताल: क्या टिकैत वाकई मीडिया को धमकी दे रहे हैं!


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    केरल: RSS और PFI की दुश्मनी के चलते पिछले 6 महीने में 5 लोगों ने गंवाई जान
    23 Apr 2022
    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने हत्याओं और राज्य में सामाजिक सौहार्द्र को खराब करने की कोशिशों की निंदा की है। उन्होंने जनता से उन ताकतों को "अलग-थलग करने की अपील की है, जिन्होंने सांप्रदायिक…
  • राजेंद्र शर्मा
    फ़ैज़, कबीर, मीरा, मुक्तिबोध, फ़िराक़ को कोर्स-निकाला!
    23 Apr 2022
    कटाक्ष: इन विरोधियों को तो मोदी राज बुलडोज़र चलाए, तो आपत्ति है। कोर्स से कवियों को हटाए तब भी आपत्ति। तेल का दाम बढ़ाए, तब भी आपत्ति। पुराने भारत के उद्योगों को बेच-बेचकर खाए तो भी आपत्ति है…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लापरवाही की खुराकः बिहार में अलग-अलग जगह पर सैकड़ों बच्चे हुए बीमार
    23 Apr 2022
    बच्चों को दवा की खुराक देने में लापरवाही के चलते बीमार होने की खबरें बिहार के भागलपुर समेत अन्य जगहों से आई हैं जिसमें मुंगेर, बेगूसराय और सीवन शामिल हैं।
  • डेविड वोरहोल्ट
    विंबलडन: रूसी खिलाड़ियों पर प्रतिबंध ग़लत व्यक्तियों को युद्ध की सज़ा देने जैसा है! 
    23 Apr 2022
    विंबलडन ने घोषणा की है कि रूस और बेलारूस के खिलाड़ियों को इस साल खेल से बाहर रखा जाएगा। 
  • डॉ. राजू पाण्डेय
    प्रशांत किशोर को लेकर मच रहा शोर और उसकी हक़ीक़त
    23 Apr 2022
    एक ऐसे वक्त जबकि देश संवैधानिक मूल्यों, बहुलवाद और अपने सेकुलर चरित्र की रक्षा के लिए जूझ रहा है तब कांग्रेस पार्टी को अपनी विरासत का स्मरण करते हुए देश की मूल तासीर को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License