NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार चुनाव: नीतीश कुमार की सत्ता से बेदख़ली चाहते हैं बेलछी हत्याकांड के इकलौते बचे गवाह
उस घटना के चार दशक बीत जाने बाद भी पासवान कहते हैं कि अगर नीतीश कुमार सत्ता में बने रहे, तो नीतीश की जाति के लोग इस इलाक़े के दलितों से अपनी दुश्मनी के चलते उनके गांव में कभी कोई विकास नहीं होने देंगे।
मोहम्मद इमरान खान
01 Nov 2020
बिहार चुनाव

पटना: पटना के बेलछी गांव के दलित समुदाय से ताल्लुक़ रखने वाले जानकी पासवान इस बार के विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री,नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल किये जाने के पक्ष में हैं। 1977 में हुए कुख्यात बेलछी नरसंहार में शक्तिशाली भू-स्वामी कुर्मी जाति के किसानों की एक निजी सेना ने 11 निचली जाति के लोगों की हत्या कर दी थी, उस हत्याकांड में इकलौता जीवित बचे पासवान इस समय भी उन कुर्मियों के डर के साये में जी रहे हैं, जो नीतीश कुमार की बदौलत सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक तौर पर ताक़तवर है,क्योंकि नीतीश कुमार भी इसी कुर्मी जाति से हैं।

उस घटना के चार दशक बीत जाने बाद भी पासवान कहते हैं कि अगर नीतीश कुमार सत्ता में बने रहे, तो नीतीश की जाति के लोग इस इलाक़े के दलितों से अपनी दुश्मनी के चलते उनके गांव में कभी कोई विकास नहीं होने देंगे। वह रोज़गार की कमी और क़ीमतों में आयी बढ़ोत्तरी से भी निराश है। अपनी आशंका ज़ाहिर करते हुए इस 80 वर्षीय शख़्स ने न्यूज़क्लिक को बताया, “नीतीश का जाना तय है। नीतीश आगर पॉवर में रहेंगे,तो हमारा दर्द कम नहीं होगा। हम चाहेंगे के उसकी हार हो। नीतीश की सरकार बदलनी चाहिए।”

जानकी पासवान

अपनी बेटी के घर के बाहर अपने किशोर नाती-नातिन से घिरे प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठे जानकी पासवान स्थानीय बोली, मगधी में बताते हैं, “इसी कुर्मी जाति का निजी गिरोह था,जिसने मेरे परिवार के चार सदस्यों और अन्य लोगों सहित ग़रीबों का नरसंहार किया था। नीतीश के मुख्यमंत्री होने के नाते उनकी जाति के उन लोगों को ताक़तवर होने का एहसास होता है, जो हमसे नफ़रत करते हैं और हमें पसंद इसलिए नहीं करते, क्योंकि हम उन्हें चुनौती देते हैं।”

अपने बुढ़ापे के बावजूद, पासवान में जूझने का जज़्बा बरक़रार है। उन्हें अभी भी याद है कि मई 1977 के जानलेवा दोपहरी को वह किस तरह महावीर महतो के उस कुर्मी सशस्त्र गिरोह के चंगुल से बच निकले थे। “मैंने पड़ोसी के पास के फूस के छप्पर पर लेटकर दम साधे हुए सब कुछ देखा था कि किस तरह उन्होंने मक्का के खेतों में 11 ग़रीबों को गोली मार दी थी, काट डाला था और मौत के घाट उतार दिया था और उसके बाद सबूत मिटाने के लिए उन्हें एक जलती हुई लकड़ी की आग में झोंक दिया था।”

वह आगे बताते हैं, “सबकुछ बहुत डरावना था कि हमने तो कभी भी सोचा नहीं था कि ऐसा भी कुछ हो भी सकता है। मुझे दिन-दहाड़े मारे गये उन लोगों के जलते हुए और आग के हवाले कर दिये गये मांस के जलने की दुर्गंध आ रही थी।” 43 साल बाद भी उनके चेहरे पर डर दिखता है,वह बताते हैं, “डर तो अब भी लगता है, हम ग़रीब हैं।“

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौरे के बाद ही इस हत्याकांड के पीड़ितों के परिवार को कुछ एकड़ ज़मीन के तौर पर कुछ मुआवज़ा मिला था, वह आगे कहते हैं कि हालांकि, वह ज़मीन भी अब बची नहीं है,क्योंकि उस ज़मीन को नदी ने लील लिया है।

उनके मुताबिक़, पिछले 15 सालों से नीतीश कुमार के सत्ता में बने रहने के दौरान ग्रामीण बार-बार पुलिस स्टेशन और ब्लॉक कार्यालयों को स्थानांतरित करने के लिए नये भवनों के निर्माण की मांग उठाते रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है।

पासवान कहते हैं कि इतना ही नहीं, गांव में चल रहे सरकारी मिडिल स्कूल के प्रधानाध्यापक कुर्मी समुदाय से आते हैं और वह दलित बच्चों के साथ भेदभाव करते हैं। “यह शिक्षक हमारे बच्चों को अछूत मानते हैं और उन्हें कक्षाओं में आने से हतोत्साहित करने के लिए उनके साथ भेदभाव करते हैं। हमने इस शिक्षक को स्थानांतरित करने की कई बार मांग की है, लेकिन ज़िला प्रशासन इसे नज़रअंदाज़ कर देता है।” उन्होंने इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अधिकारों से वंचित दलितों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए उन्होंने ही जो 1 कट्ठा ज़मीन दान दी थी, उसी पर स्कूल बना है।

रविन्द्र पासवान

रविन्द्र पासवान उस दिल दहला देने वाले वाक़यये  को याद करते हुए कहते हैं कि उस नरसंहार के समय वह मुश्किल से 16 या 17 साल के थे, उन्होंने मुसहर परिवार के फूस के छप्पर से उस पूरे वाक़ये को देखा था। एक सशस्त्र गिरोह ने उन पर हमला कर दिया था और उन्हें बुरी तरह से पीटा गया था और वह गंभीर रूप से घायल हो गये थे, लेकिन एक मुसहर महिला ने समय पर उनकी मदद की थी और वह बच गये थे। रविन्द्र पासवान बताते हैं, “चूंकि तब मैं नाबालिग़ था, इसलिए मेरे पिता ने उस मामले में गवाह के तौर पर मेरा नाम नहीं दिया था।” उन्होंने भी नीतीश कुमार सरकार के ख़िलाफ़ अपनी राय देने में जानकी पासवान के साथ सहमति जतायी।

जानकी की गवाह वाले बयान के कारण ही नरसंहार के मुख्य अभियुक्तों को मौत की सज़ा मिली थी, जबकि 14 दूसरे लोगों को उम्रक़ैद की सज़ा मिली थी। जानकी के शब्दों में, इसी कारण उनका सम्मान 200 से ज़्यादा पासवान परिवारों के बीच है। इसी गांव के उपेंद्र पासवान कहते हैं, “हम नीतीश सरकार को बदलना चाहते हैं। इस सरकार ने हमारे साथ भेदभाव किया है और हमें बेहाली में छोड़ दिया गया है।” 

सिर्फ़ पासवान ही नहीं, बल्कि दूसरे ग्रामीण भी नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल करने के लिए उनके ख़िलाफ़ वोट देने का मन बना चुके हैं। रमनी समुदाय के हीरामणि राम  कहते हैं,“इस बार लोग नीतीश सरकार को बदलेंगे।”

रविदास समुदाय की रेखा देवी ने बताया कि इस गांव के लोग सरकार बदलने के मूड में हैं।

रेखा देवी

इस बीच, बेलची के दूसरे किनारे पर आबाद मुसहर समुदाय के लोग चुनाव के बारे में कुछ भी कहना नहीं चाहते। एक बुजुर्ग मुसहर व्यक्ति जामुन मांझी, भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गांव की यात्रा को याद करते हुए कहते हैं, "हम अन्य ग्रामीणों के साथ खड़े हैं"।

बेलची बाढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है जहां पहले दौर में 28 अक्टूबर को वोट डाले गए हैं।

सभी तस्वीरें : मो. इमरान खान

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Bihar Elections: Lone Surviving Witness of Belchi Massacre Wants to Oust Nitish Kumar from Power

Bihar government
Bihar Assembly Elections 2020
Assembly Elections 2020
Bihar Elections
Belchi Massacre
Dalit Discrimination
Caste Based Atrocities
Dalit Men Killed in Bihar
Nitish Kumar Government
Kurmi vs Dalits in Bihar

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार में शराबबंदी से क्या समस्याएं हैं 

बिहारः बड़े-बड़े दावों के बावजूद भ्रष्टाचार रोकने में नाकाम नीतीश सरकार

बिहार मनरेगा: 393 करोड़ की वित्तीय अनियमितता, 11 करोड़ 79 लाख की चोरी और वसूली केवल 1593 रुपये

बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन

बिहार : बालू खनन का विरोध कर रहे ग्रामीणों के साथ पुलिस ने की बर्बरता, 13 साल की नाबालिग को भी भेजा जेल 

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'


बाकी खबरें

  • ऋचा चिंतन
    डब्ल्यूएचओ द्वारा कोवैक्सिन का निलंबन भारत के टीका कार्यक्रम के लिए अवरोधक बन सकता है
    09 Apr 2022
    चूँकि डब्ल्यूएचओ के द्वारा कोवैक्सिन के निलंबन के संदर्भ में विवरण सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में यह इसकी प्रभावकारिता एवं सुरक्षा पर संदेह उत्पन्न कर सकता है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    इमरान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए पाक संसद का सत्र शुरू
    09 Apr 2022
    पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए नेशनल असेंबली का सत्र सुबह साढ़े 10 बजे (स्थानीय समयानुसार) शुरू हुआ।
  • भाषा
    दिल्ली में एक फैक्टरी में लगी आग, नौ लोग झुलसे
    09 Apr 2022
    दिल्ली दमकल सेवा (डीएफएस) के अनुसार, आग बुझाने की कोशिश में दमकल विभाग के छह कर्मी, एक पुलिसकर्मी, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) का एक अधिकारी और एक स्थानीय व्यक्ति झुलस गया।
  • वसीम अकरम त्यागी
    महंगाई के आक्रोश को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत बढ़ाकर ढकने की कोशिश, आख़िर किसका नुक़सान? 
    09 Apr 2022
    पेट्रोलियम और रोज़मर्रा के सामान की दर लगातार आसमान छू रही हैं और तो दूसरी तरफ़ मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत बेतहाशा बढ़ रही है।
  • रूबी सरकार
    सीधी प्रकरण: अस्वीकार्य है कला, संस्कृति और पत्रकारिता पर अमानवीयता
    09 Apr 2022
    सीधी की घटना को लेकर पत्रकार, रंगकर्मियों के अलावा मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रगतिशील लेखक संघ व अन्य प्रसिद्ध लेखक-साहित्याकारों ने गहरा प्रतिरोध दर्ज कराया है और इसे लोकतंत्र में तानाशाही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License