NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोरोना की दूसरी लहर में फिर बेपर्दा हो गयी बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था
बिहार का सेहत महकमा एक बार फिर से उसी स्थिति में पहुंच गया है, जैसा पिछले साल कोरोना के पीक के वक़्त पहुंच गया था। जब बड़े-बड़े अधिकारी अस्पतालों के बाहर एडमिट होने का इंतजार करते रहते थे, अस्पताल में दो-दो, तीन-तीन दिन तक शव पड़े रहते थे।
पुष्यमित्र
13 Apr 2021
PMCH पटना 
PMCH पटना 

घटना-1

बिहार के दरभंगा जिले का वह 30 वर्षीय युवक शनिवार, 10 अप्रैल को जांच में कोरोना पॉजिटिव पाया गया। उसने जिले के सबसे बड़े अस्पताल दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती होने के लिए कई दफा फोन किया, मगर अस्पताल प्रशासन की तरफ से उसके लिए एंबुलेंस नहीं भेजी गई। लाचार होकर वह पैदल ही अस्पताल पहुंचा और उसे भर्ती कर लिया गया। रविवार, 11 अप्रैल को युवक के पिता उसके लिए टूथब्रश, पेस्ट, अंडा और दूध लेकर पहुंचे थे। उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया गया। एक सफाईकर्मी को रिश्वत के तौर पर कुछ पैसे देकर जब उन्होंने यह सामान पहुंचाया तो सफाईकर्मी ने लौटकर बताया कि युवक तो दो घंटे से टॉयलेट में पड़ा हुआ है।

फिर युवक के परिजन जबरदस्ती अंदर पहुंचे। शौचालय में युवक मृत हालत में पड़ा था। युवक के परिजन यह देखकर नाराज हो गये। आरोप है कि इसके बाद उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और तोड़फोड़ की।  

तोड़फोड़ के बाद DMCH दरभंगा की तस्वीर।

घटना-2

शुक्रवार, 9 अप्रैल को बाढ़ का रहने वाला एक युवक कोरोना मरीज के रूप में राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में भर्ती हुआ। उसके परिजनों को उससे मिलने नहीं दिया जा रहा था। रविवार, 11 अप्रैल को परिजनों को सूचना दी गयी कि युवक की मृत्यु हो गयी है। परिजन भागे-भागे पहुंचे और उन्हें एक शव सौंप दिया गया। शव की कद काठी को देखकर युवक की पत्नी को शक हुआ। श्मशान घाट पर उसने अस्पताल कर्मियों को रिश्वत के तौर पर कुछ पैसे देकर शव का चेहरा दिखाने कहा। जब युवक का चेहरा दिखा तो वह कोई अन्य ही व्यक्ति निकला। परिजन उस शव को घाट पर ही छोड़कर गुस्साई हालत में अस्पताल पहुंचे। वहां उन्होंने हंगामा किया।

बिहार के दो बड़े अस्पतालों में रविवार को घटी इन दो घटनाओं से जाहिर है कि बिहार का सेहत महकमा एक बार फिर से उसी स्थिति में पहुंच गया है, जैसा पिछले साल कोरोना के पीक के वक्त पहुंच गया था। जब बड़े-बड़े अधिकारी अस्पतालों के बाहर एडमिट होने का इंतजार करते रहते थे, अस्पताल में दो-दो, तीन-तीन दिन तक शव पड़े रहते थे। बिहार के सेहत महकमे की बदहाली नेशनल मीडिया की लीड खबर बन गयी थी। कोरोना के इस दूसरी लहर में लोगों को लग रहा है कि फिर से वह दौर लौट आया है।

आंकड़ों से जाहिर है कि इस दूसरी लहर में बिहार में कोरोना संक्रमण की स्थिति पिछले साल के मुकाबले काफी खराब है। शनिवार और रविवार को राज्य में जब रोजाना चार हजार के करीब मरीज मिलने लगे तो सोमवार को टेस्ट की संख्या कम कर दी गयी। पिछले साल जब राज्य में कोरोना का पीक था तो 30 अगस्त को एक दिन में सिर्फ 2078 मरीज मिले थे। जबकि उस रोज एक लाख से अधिक सैंपल की जांच हुई थी।

पिछले तीन दिन में कोरोना संक्रमण के आंकड़े-

राजधानी पटना सबसे अधिक ख़तरे में

इस लहर में कोरोना का सबसे अधिक असर बिहार की राजधानी पटना पर दिख रहा है। इस वक्त राज्य में कुल एक्टिव मरीजों का 40 फीसदी सिर्फ राजधानी पटना में है। पटना में शनिवार को 1431 मरीज मिले, रविवार को 1382 और सोमवार को 1197 मरीज मिले। सोमवार को सिर्फ पटना में 10 मरीजों की कोरोना से मौत हो गयी। जबकि पिछले साल चार जुलाई को एक दिन में पटना में सर्वाधिक 1069 मरीज मिले थे। राजधानी पटना के बाद भागलपुर की स्थिति सबसे नाजुक है। रविवार को वहां एक 12 वर्ष की बच्ची की मौत हो गयी थी। सोमवार को भागलपुर में पांच लोगों की मौत की खबर है।

बाहर से आने वालों से नहीं हो रहा अधिक संक्रमण

पहले यह माना जा रहा था कि इस लहर में दूसरे राज्य से आने वाले लोगों की वजह से संक्रमण फैल सकता है। मगर दूसरे राज्य से आने वाली ट्रेनों की नियमित जांच हो रही है और आंकड़े बताते हैं कि इन ट्रेनों में पाये जाने वाले संक्रमित लोगों की संख्या कभी तिहाई तक नहीं पहुंची है।

जांच रिपोर्ट आने में लग रहा वक़्त

राज्य सरकार का दावा है कि वह बड़े पैमाने पर आरटीपीसीआर टेस्ट करवा रही है, मगर इस टेस्ट की रिपोर्ट के आने में काफी वक्त लग रहा है। कई मरीजों ने शिकायत की है कि एक हफ्ते बाद भी उनकी रिपोर्ट नहीं मिली है।

टीकाकरण हो रहा मगर संक्रमित आबादी उससे बाहर

बिहार में कोरोना से संक्रमित होने वाली 60 फीसदी आबादी 49 साल से कम उम्र की है। यही आबादी अभी टीकाकरण से बाहर है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 46 लाख से अधिक लोगों को कोरोना टीका लगाया जा चुका है, इनमें से 6.31 लाख लोगों को दूसरा डोज भी दिया जा चुका है। राज्य को 5 लाख टीके का नया डोज केंद्र से मिलने वाला है। हालांकि टीका लगा चुके लोग भी खासकर स्वास्थ्य कर्मी बड़ी संख्या में कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं।

एक साल बाद भी क्यों नहीं संभले हालात

पिछले साल कोरोना के भारी संक्रमण के वक्त बदहाली का सामना कर चुकी बिहार सरकार की स्थिति पिछले एक साल में भी क्यों नहीं संभली यह बड़ा सवाल है। मगर इसका जवाब पिछले महीने बिहार विधानसभा में रखी गई कैग रिपोर्ट से जाहिर होता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में अभी भी डॉक्टरों की संख्या में 61 फीसदी और नर्सों की संख्या में 92 फीसदी की कमी है। इस रिपोर्ट को सोमवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी ट्वीट किया था।

बिहार में स्वास्थ्य विभाग में मैन पावर की यह कमी लंबे समय से है। 2019 में चमकी बुखार के प्रकोप के वक्त भी सुप्रीम कोर्ट को बिहार सरकार ने सूचना दी थी कि राज्य में डॉक्टरों के 57 फीसदी और नर्सों के 71 फीसदी पद खाली हैं। तब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि स्वास्थ्य कर्मियों की बहाली करना कोर्ट का काम नहीं है। 2020 में मई महीने में राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने पटना हाईकोर्ट को बताया था कि राज्य में डॉक्टरों के 70 फीसदी से अधिक पद खाली हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार ने इन खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में कोई काम नहीं किया। ऐसे में यह तबाही तो आनी ही थी।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Bihar
Bihar Health Care Facilities
PATNA
PMCH
COVID-19
Coronavirus
Bihar government
Nitish Kumar

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • LAW AND LIFE
    सत्यम श्रीवास्तव
    मानवाधिकारों और न्याय-व्यवस्था का मखौल उड़ाता उत्तर प्रदेश : मानवाधिकार समूहों की संयुक्त रिपोर्ट
    30 Oct 2021
    29 अक्तूबर को जारी हुई एक रिपोर्ट ‘कानून और ज़िंदगियों की संस्थागत मौत: उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा हत्याएं और उन्हें छिपाने की साजिशें’ हमें उत्तर प्रदेश में मौजूदा कानून व्यवस्था के हालात को बेहद…
  • migrant
    सोनिया यादव
    महामारी का दर्द: साल 2020 में दिहाड़ी मज़दूरों ने  की सबसे ज़्यादा आत्महत्या
    30 Oct 2021
    एनसीआरबी के आँकड़ों के मुताबिक़ पिछले साल भारत में तकरीबन 1 लाख 53 हज़ार लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें से सबसे ज़्यादा तकरीबन 37 हज़ार दिहाड़ी मजदूर थे।
  • UP
    लाल बहादुर सिंह
    आंदोलन की ताकतें व वाम-लोकतांत्रिक शक्तियां ही भाजपा-विरोधी मोर्चेबन्दी को विश्वसनीय विकल्प बना सकती है, जाति-गठजोड़ नहीं
    30 Oct 2021
    पिछले 3 चुनावों का अनुभव गवाह है कि महज जातियों के जोड़ गणित से भाजपा का बाल भी बांका नहीं हुआ, इतिहास साक्षी है कि जोड़-तोड़ से सरकार बदल भी जाय तो जनता के जीवन में तो कोई बड़ी तब्दीली नहीं ही आती, संकट…
  • Children playing in front of the Dhepagudi UP school in their village in Muniguda
    राखी घोष
    ओडिशा: रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न-आय वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट इस तथ्य का खुलासा करती है कि जब अगस्त 2021 में सर्वेक्षण किया गया था तो ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 28% बच्चे ही नियमित तौर पर पठन-पाठन कर रहे थे, जबकि 37% बच्चों ने अध्ययन बंद कर दिया था।…
  • climate change
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट : अमीर देशों ने नहीं की ग़रीब देशों की मदद, विस्थापन रोकने पर किये करोड़ों ख़र्च
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट के अनुसार, विकसित देश भारी हथियारों से लैस एजेंटों को तैनात करके, परिष्कृत और महंगी निगरानी प्रणाली, मानव रहित हवाई प्रणाली आदि विकसित करके पलायन को रोकने के लिए एक ''जलवायु दीवार'' का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License