NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
बोलिवियाः कोर्ट ने 18 अक्टूबर को होने वाले चुनावों से एमएएस को हटाने की अपील ख़ारिज की
अदालत के इस फैसले के बाद सेंटर-राइट के सशस्त्र समूहों ने कोर्ट के बाहर इंतज़ार कर रहे एमएएस समर्थकों पर हमला किया।
पीपल्स डिस्पैच
06 Oct 2020
बोलिविया

5 अक्टूबर को ला पाज़ के सेकेंड कंस्टिच्यूशनल चैंबर ने सेंटर-राइट डेमोक्रेटिक यूनिटी (यूडी) पार्टी के सीनेटर कारमेन ईवा गोंजालेस द्वारा प्रस्तुत उस अपील को ख़ारिज कर दिया जिसमें प्रगतिशील मूवमेंट टूवार्ड्स सोशियलिज्म (एमएएस) पार्टी को 18 अक्टूबर को होने वाले आम चुनावों में लड़ने से हटाया जा सके।

नियमों द्वारा अनुमति दी गई समय अवधि के बाहर ओपिनियन पोल के विवरण को प्रसारित करने के लिए एमएएस के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार लुइस एर्से पर आरोप लगाते हुए सीनेटर गोंजालेस ने मांग की कि एमएएस की क़ानूनी स्थिति रद्द करने के लिए संवैधानिक अदालत सुप्रीम एलेक्टोरल कोर्ट (टीएसई) पर दबाव डाले।

एमएएस के वकील विल्फ्रेडो चावेज़ ने अदालत से बाहर निकलते हुए कहा कि "कोर्ट ऑफ कंस्टिच्यूशनल गारंटी ने दो चीजें स्थापित की हैं: पहला, वादी के पास अनुपालन कार्रवाई पेश करने के लिए सक्रिय वैधता नहीं थी और दूसरा, यह उस मामले पर फैसला नहीं कर सकता है जो कंस्टिच्यूशनल कोर्ट में लंबित है, इन दो कारणों के चलते आह्वान किए गए सुरक्षा कार्रवाई से इनकार कर दिया गया है।” चावेज ने कहा, "यह एक विचलित करने वाली कार्रवाई थी और मैंने चुनावी अभियान को जारी रखने के लिए एमएएस के साथियों को बुलाया है।"

इस फैसले का सैकड़ों एमएएस समर्थकों द्वारा स्वागत किया गया जो सुनवाई के दौरान अदालत के बाहर इकट्ठा थे। पूर्व राष्ट्रपति इवो मोरालेस ने भी अदालत के इस फैसले का स्वागत किया। मोरालेस ने एक ट्वीट में लिखा, “राजनीतिक रूप से हमारी अयोग्यता के लिए दक्षिणपंथी द्वारा प्रयासों के बावजूद एमएएस की क़ानूनी स्थिति को रद्द करने का कोई क़ानूनी कारण नहीं है। कोर्ट ने क़ानून के साथ फैसला किया। हमारा आंदोलन हमेशा शांति और लोकतांत्रिक चुनावों के अधिकार के मार्ग पर रहेगा।”

इस बीच, एमएएस के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार एर्से ने अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से कहा कि अदालत के फैसले के बाद, अतिदक्षिणपंथी सशस्त्र समूहों ने कोर्ट के बाहर इंतज़ार कर रहे एमएएस समर्थकों पर हमला किया।

लेटिन अमेरिकन स्ट्रेटेजिक सेंटर फॉर जियोपॉलिटिक्स (सीईएलएजी) के हालिया ओपिनियन पोल में सामने आया है कि एमएएस राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार लुइस एर्से- डेविड चोकहुआंसा को देश में सबसे ज़्यादा समर्थन है। सीईएलएजी द्वारा 19 से 29 सितंबर के बीच किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, देश भर में 1,700 टेलीफोनिक साक्षात्कारों के माध्यम से, एर्से 44.4% वोट के साथ आगे थे जबकि इसके बाद 34.0% वोटों के साथ सेंटर-राइट सिटिजन कम्यूनिटी (सीसी) गठबंधन के कार्लोस मेसा का स्थान रहा।

bolivia
Bolivia Elections
Movement Towards Socialism Party
International news

Related Stories

दुनिया भर की: कोलंबिया में पहली बार वामपंथी राष्ट्रपति बनने की संभावना

अमेरिका में महिलाओं के हक़ पर हमला, गर्भपात अधिकार छीनने की तैयारी, उधर Energy War में घिरी दुनिया

रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार

दुनिया भर की: सोमालिया पर मानवीय संवेदनाओं की अकाल मौत

क्या चिली की प्रगतिशील सरकार बोलीविया की समुद्री पहुंच के रास्ते खोलेगी?

कोविड -19 के टीके का उत्पादन, निर्यात और मुनाफ़ा

पत्रकारिता एवं जन-आंदोलनों के पक्ष में विकीलीक्स का अतुलनीय योगदान 

दुनिया भर की: जर्मनी में ‘ट्रैफिक लाइट गठबंधन’ के हाथों में शासन की कमान

बोलिवियाई लोगों को तख्तापलट करने वाली नेता जीनिन आनेज़ के जेल से भागने की आशंका

बोलिविया के तख़्तापलट में शस्त्र मुहैया कराने के मामले में अर्जेंटीना ने जांच शुरू की


बाकी खबरें

  • bonded labour
    द लीफ़लेट
    भारत में अभी भी क्यों जारी है बंधुआ मज़दूरी?
    15 Sep 2021
    हालांकि हम 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं मगर भारत में बंधुआ मज़दूरी अभी भी एक हक़ीक़त है। मानव गुप्ता और कशिश गुप्ता बंधुआ मज़दूरी से बचने के लिए भारत में क़ानूनों का विश्लेषण कर रहे हैं और इस ख़तरे को…
  • Big auto companies leaving India is a big blow to Modi's Make-in-India
    बी. सिवरामन
    बड़ी ऑटो कम्पनियों का भारत छोड़ना मोदी के मेक-इन-इंडिया के लिए भारी धक्का
    15 Sep 2021
    एक भी बड़े ऑटोमोबाइल प्लांट का बंद होना किसी देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन में दुर्घटना बनकर उसे बुरी तरह हिला सकता है। बड़ी धूम-धाम के साथ मेक-इन-इंडिया की घोषणा के 6 वर्षों के अंदर फोर्ड छठी…
  • norway
    उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: नॉर्वे में लेबर की अगुआई में मध्य-वाम गठजोड़ सत्ता में
    15 Sep 2021
    नॉर्व में चुनावी मुद्दे बाकी देशों जैसे नहीं रहे हैं। नॉर्वे की नाजुक पारिस्थितिकी का असर यह है कि जलवायु परिवर्तन भी वहां बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है, और साथ ही लोगों की आर्थिक सेहत के बीच बढ़ती खाई…
  • 1300 से अधिक फ़िलिस्तीनी क़ैदी इज़रायली जेलों में दुर्व्यवहार के विरोध में भूख हड़ताल करेंगे
    पीपल्स डिस्पैच
    1300 से अधिक फ़िलिस्तीनी क़ैदी इज़रायली जेलों में दुर्व्यवहार के विरोध में भूख हड़ताल करेंगे
    15 Sep 2021
    6 सितंबर को गिल्बोआ जेल से छह कैदियों के भागने के बाद इजरायल की जेलों और हिरासत केंद्रों के अंदर बढ़ी क्रूरता और दमन का विरोध
  • नार्वेः संसदीय चुनावों में वाम दलों ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की
    पीपल्स डिस्पैच
    नार्वेः संसदीय चुनावों में वाम दलों ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की
    15 Sep 2021
    169 सीटों वाली नॉर्वे की संसद के आम चुनावों के नतीजे मंगलवार 14 सितंबर को घोषित कर दिए गए। परिणामों के अनुसार, सोमवार को हुए
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License