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कोविड-19
भारत
राजनीति
कोविड-19: अस्पतालों में आईसीयू बेड्स और आवश्यक दवाओं की भारी किल्लत से संकटग्रस्त ग्रामीण महाराष्ट्र
मुंबई और पुणे के संकट को जहाँ एक तरफ धीरे-धीरे काबू में कर लिया गया है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के ग्रामीण हिस्से सरकार के लिये बड़ी चुनौती साबित हो रहे हैं।
अमय तिरोदकर
06 May 2021
देवलाली प्रवर में कोविड-19 उपचार केंद्र। राज्य सरकार द्वारा राज्य भर में ऐसे और भी केन्द्रों को बनाये जाने की घोषणा की गई है।
देवलाली प्रवर में कोविड-19 उपचार केंद्र। राज्य सरकार द्वारा राज्य भर में ऐसे और भी केन्द्रों को बनाये जाने की घोषणा की गई है।

4 मई को महाराष्ट्र में कोल्हापुर जिले के जिलाधिकारी ने कोविड-19 संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए 10 दिनों के सख्त लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। इसके एक दिन पहले, इसी प्रकार के लॉकडाउन की घोषणा सांगली जिले में घोषित की जा चुकी है। ये दोनों जिले पश्चिमी महाराष्ट्र में स्थित हैं। वहीं मराठवाड़ा, बीड और परभणी पहले से ही लॉकडाउन लगा हुआ है। इसके बावजूद महाराष्ट्र में 16 जिलों में मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, जो कि राज्य प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

हालात कुछ ऐसे हैं कि महाराष्ट्र मुख्य सचिव को भारत के कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को पत्र लिखकर उनसे राज्य के ऑक्सीजन कोटे में प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन की बढ़ोत्तरी करने के लिए निवेदन करना पड़ा है। पत्र में जिन 16 जिलों का हवाला दिया गया है उनमें पालघर, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, सोलापुर, नंदुरबार, बीड, परभनी, हिंगोली, अमरावती, बुल्ढाना, वर्धा, गडचिरोली और चंद्रपुर शामिल हैं, जहाँ पर कोविड-19 के मामलों में दैनिक वृद्धि देखने को मिल रही है। 

महाराष्ट्र के मुख्य सचिव की ओर से भारत के कैबिनेट सचिव को पत्र। 

इस बीच मुंबई और इसके आस-पास के शहरों में महामारी की दूसरी लहर के अंतर्गत नए मामलों में रोजाना बढ़ोत्तरी के क्रम में कमी देखने को मिलनी शुरू हो गई है। जहाँ पहली लहर के दौरान मुंबई सहित आठ नगरपालिकाओं में सबसे अधिक मौतों की खबर थी, वहीँ दूसरी लहर में लगभग 15 दिनों के बाद इस महामारी संकट ने ग्रामीण महाराष्ट्र को बुरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया है।

4 मई को राज्य में 51,880 नए रोगियों के पाए जाने की खबर है, जिससे कुल संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 6,63,758 हो चुकी है। इनमें से 78,884 लोग ऑक्सीजन पर हैं और 24,878 आईसीयू में हैं। मंगलवार को कुल 891 लोगों की मौत का आंकड़ा दर्ज किया गया था, और राज्य में अभी तक कुल 71,742 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके चलते महामारी की जारी दूसरी लहर में यह सबसे अधिक हताहतों वाला राज्य बन गया है। जैसे-जैसे ग्रामीण महाराष्ट्र में संकट गहराता जा रहा है, राज्य की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था और भी अधिक गंभीर दबाव में आ गई है।

सिंधुदुर्ग जिले में स्थित मालवान तहसील के सुकलवाड़ गाँव में लवू सारंग जब कोरोनावायरस की जाँच में पॉजिटिव पाए गए तो उनके नाते-रिश्तेदारों ने उनके इलाज के लिए जिले में वेंटीलेटर की तलाश करनी शुरू कर दी, क्योंकि उनका स्वास्थ्य तेजी से खराब होने लगा था। भले ही उनका घर जिला मुख्यालय से मात्र 10 किमी की दूरी पर है, लेकिन बिस्तरों की किल्लत के कारण उन्हें वेंटीलेटर उपलब्ध न हो सका। बाद में उनके रिश्तेदारों ने उन्हें पास के कोल्हापुर जिले में स्थानांतरित कर दिया, जहाँ पर अंततः उन्हें एक निजी अस्पताल में दाखिला मिल गया।  

इस बारे में लवू के छोटे भाई उमेश सारंग का कहना था “सारे जिले में एक भी वेंटीलेटर बेड उपलब्ध नहीं था। हमने सभी निजी अस्पतालों से संपर्क साधा था। इसलिए हमारे पास मरीज की जान को खतरे में डालकर चार घंटे की सड़क यात्रा कराकर कोल्हापुर ले जाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा था। 

महाराष्ट्र के बाकी के छोटे जिलों और दूर-दराज के कस्बों में भी हालात इसी प्रकार से खराब बने हुए हैं। खबरों के मुताबिक लोगों को आईसीयू बेड, वेंटीलेटर, ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन इत्यादि उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। राज्य में रोजाना 50,000 से अधिक नए मामलों की रिपोर्टिंग की वजह से राज्य सरकार के सामने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुचारू रूप से चला पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ग्रामीण स्तर पर नए कोविड-19 केंद्रों को स्थापित करें। चंद्रपुर में 865 ग्रामीणों को आइसोलेशन सेंटर और छोटे कोविड-19 केंद्र शुरू करने के लिए कहा गया है, जहाँ पर जो मरीज गंभीर रूप से बीमार नहीं हैं, उनका स्थानीय स्तर पर इलाज किया जा सकता है।

एक सेवानिवृत्त राज्य सरकार के अधिकारी, दत्तात्रेय कडू पाटिल ने अहमदनगर के राहुरी तहसील में अपने गृहनगर देवलाली प्रवर में 50-बेड वाले कोविड-19 उपचार केंद्र की शुरुआत की है। इस केंद्र को शुरू करने के लिए उन्होंने तहसील प्रमुख से इजाजत ले ली थी। न्यूज़क्लिक  के साथ फोन पर बातचीत के दौरान पाटिल ने बताया कि “दो दिनों के भीतर ही सारे बेड फुल हो चुके थे। सिर्फ हल्के लक्षणों वाले मरीजों को ही यहाँ पर भर्ती कराया जा रहा है। अभी तक कुल 80 मरीज यहाँ से ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं। सेंटर अभी भी मरीजों से अटा पड़ा है।”

इस बीच राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे लॉकडाउन नियमों का कड़ाई से पालन करें। रविवार को मीडिया के साथ अपनी बात में उप मुख्यमंत्री, अजीत पवार ने कहा “हम हर जगह पर बुनियादी ढाँचे का निर्माण कर रहे हैं। सभी जिलाधिकारियों एवं अभिभावक मंत्रियों को सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है। लेकिन इसके साथ ही हम लोगों से भी अपील करते हैं कि वे अनावश्यक रूप से अपने घरों से बाहर न निकलें। वायरस को रोकने के लिए फ़िलहाल हमें सभी संभावित गतिविधियों पर लगाम लगाये रखने की आवश्यकता है।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

COVID-19: Rural Maharashtra in Crisis as Hospitals Run Out of ICU Beds, Essential Medicines

maharashtra government
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Rural Maharashtra
COVID 19 Medicines

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