NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोरोना वायरस: दिहाड़ी मजदूरों के सामने संकट कितना बड़ा है?
लॉकडाउन का सबसे बुरा असर प्रवासी खासकर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है। अभी इनकी मदद के लिए कई हाथ सामने आए हैं लेकिन क्या इससे इनकी समस्याओं का हल मिल पाएगा?
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Mar 2020
कोरोना वायरस
Image courtesy: Social Media

लॉकडाउन का सबसे बुरा असर प्रवासी खासकर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है। इनका रोजगार छिन गया और ये अपने-अपने घर लौटने को विवश हैं। सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदी के कारण इन्हें पैदल ही घर जाना पड़ रहा है। अगर हम उत्तर भारत की बात करें तो ये मजदूर दिल्ली-एनसीआर से बिहार, राजस्थान, यूपी, हरियाणा तक की यात्रा पैदल करने को मजबूर हैं। वहीं, महाराष्ट्र के शहरों मुंबई, पुणे तो गुजरात के बड़े शहरों सूरत, अहमदाबाद लगभग पूरे देश से इस तरह प्रवासी मजदूरों के पैदल सफर की कहानियां सामने आ रही हैं।  

हालांकि ऐसे में कुछ सुकून देने वाली खबरें भी सामने आई हैं। मुंबई में लॉकडाउन से प्रभावित गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों की मदद के लिए फिल्म उद्योग सामने आया है। दिहाड़ी मजदूरों के सामने खाने पीने की दिक्कतों को देखते हुए 'आई स्टैंड विथ डेली वेजेस ऑर्नर्स' अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत दिहाड़ी पर काम करने वाले करीब 10 लाख मजदूरों के पूरे परिवार को 10 दिनों के राशन देने की बात कही गई है। इस अभियान को कार्तिक आर्यन, राजकुमार राव, रोहित शेट्टी, राजकुमार हिरानी, एकता कपूर जैसी फिल्मी हस्तियों का सर्मथन मिला है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इन मजदूरों के लिए विशेष व्यवस्था करने की बात कही। उन्होंने पुलिस को इनके खाने-पीने और सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भी गुरुग्राम और फरीदाबाद से आ रहे मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है।

इसी तरह गौतम बुद्ध नगर प्रशासन नोएडा में फंसे 600 से ज्यादा लोगों को उनके घर छोड़ने की व्यवस्था कर रहा है। प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सरकार शुक्रवार को 600 से ज्यादा लोगों को उनके घर भेजने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था कर रही है।

FB_IMG_1585283893859.jpg

उत्तराखंड पुलिस ने भी ट्वीट किया है कि उनके जवान मजदूरों और बेसहारा लोगों को भोजन मुहैया करा रहे हैं। कई जगहों से ऐसी खबर भी आई है कि इन मजदूरों को पीटने वाले या फिर परेशान करने वाले पुलिस कर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई भी हुई है।

इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अपने पैकेज में मजदूरों को लिए थोड़ी राहत की घोषणा की है। मनरेगा के तहत मजदूरी 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये कर दी गई है। इससे नियमित काम पाने वाले मजदूर को सालाना दो हजार रुपये का फायदा होगा।

हालांकि ये सब बहुत फौरी राहत के रूप में सामने आ रहे हैं। असल में दिहाड़ी मजदूरों पर आया संकट इससे भी बड़ा है।

कोरोना वायरस से उपजा संकट निश्चित रूप से बहुत बड़ा है। इसके कारण लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। कोरोना वायरस का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर हुआ इसकी पूरी तस्वीर आने वाले समय में ही स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन जो एक बात तय है कि इससे सबसे ज्यादा संकट में दिहाड़ी मजदूर आएंगे।

ऐसे में भारत में सबसे ज्यादा खतरा स्वरोजगार, ठेके पर काम करने वाले लोगों और दिहाड़ी मजदूरों को है। भारत में अगर नौकरियों पर संकट मंडराता है तो सबसे ज्यादा असर रेस्टोरेंट, रियल स्टेट, विमानन, सिनेमा एवं मनोरंजन, पर्यटन, ड्राइविंग आदि पर पड़ना लाजिमी है।

एक अनुमान के मुताबिक देश में कार्यरत 41 लाख अस्थायी कर्मचारियों पर अगली दो तिमाही सबसे ज्यादा भारी पड़ने वाली है। एसोचैम और ग्लोबल हंट इंडिया का मानना है कि कोरोना का सबसे अधिक नकारात्मक असर सर्विस सेक्टर और खास तौर पर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है। अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो संगठित क्षेत्र की हायरिंग में भी 15 से 20 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

ऐसे में हमें इस संकट से बचने के लिए श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने, अर्थव्यवस्था को मदद, रोजगार एवं आमदनी बनाए रखने में सहायता (यानी कम अवधि का काम, वैतनिक अवकाश, अन्य सब्सिडी) के लिए फौरन बड़े पैमाने पर मिले-जुले उपाय करने होंगे।

साथ ही छोटे एवं मझोले उद्योगों के लिए वित्तीय और कर राहत जैसी सुविधाएं मुहैया करानी होगी। इसकी तस्दीक अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की एक रिपोर्ट भी करती है। उसने एक अध्ययन में कहा है कि वैश्विक स्तर पर गर एक समन्वित नीति बनती है तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि इन उपायों को निपटने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है। देखना है कि देश की सरकारें इसे कैसे लागू करती हैं। 

Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
Labour
Daily Wage Workers
India Lockdown
poverty
Hunger Crisis
modi sarkar
Narendra modi

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • make in india
    बी. सिवरामन
    मोदी का मेक-इन-इंडिया बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा श्रमिकों के शोषण का दूसरा नाम
    07 Jan 2022
    बहुराष्ट्रीय कंपनियों के गिग कार्यकर्ता नई पीढ़ी के श्रमिक कहे जा सकते  हैं, लेकिन वे सीधे संघर्ष में उतरने के मामले में ऑटो व अन्य उच्च तकनीक वाले एमएनसी श्रमिकों से अब टक्कर लेने लगे हैं। 
  • municipal elections
    फर्राह साकिब
    बिहारः नगर निकाय चुनावों में अब राजनीतिक पार्टियां भी होंगी शामिल!
    07 Jan 2022
    ये नई व्यवस्था प्रक्रिया के लगभग अंतिम चरण में है। बिहार सरकार इस प्रस्ताव को विधि विभाग से मंज़ूरी मिलने के पश्चात राज्य मंत्रिपरिषद में लाने की तैयारी में है। सरकार की कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इस…
  • Tigray
    एम. के. भद्रकुमार
    नवउपनिवेशवाद को हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका की याद सता रही है 
    07 Jan 2022
    हिंद महासागर को स्वेज नहर से जोड़ने वाले रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर पर अपने नियंत्रण को स्थापित करने की अमेरिकी रणनीति की पृष्ठभूमि में चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अफ्रीकी यात्रा काफी…
  • Supreme Court
    अजय कुमार
    EWS कोटे की ₹8 लाख की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट को किस तरह के तर्कों का सामना करना पड़ा?
    07 Jan 2022
    आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग को आरक्षण देने के लिए ₹8 लाख की सीमा केवल इस साल की परीक्षा के लिए लागू होगी। मार्च 2022 के तीसरे हफ्ते में आर्थिक तौर पर कमजोर सीमा के लिए निर्धारित क्राइटेरिया की वैधता पर…
  • bulli bai aap
    सना सुल्तान
    विचार: शाहीन बाग़ से डरकर रचा गया सुल्लीडील... बुल्लीडील
    07 Jan 2022
    "इन साज़िशों से मुस्लिम औरतें ख़ासतौर से हम जैसी नौजवान लड़कियां ख़ौफ़ज़दा नहीं हुईं हैं, बल्कि हमारी आवाज़ और बुलंद हुई है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License