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राजस्थान : दलितों पर बढ़ते अत्याचार के ख़िलाफ़ DSMM का राज्यव्यापी विरोध-प्रदर्शन
दलित शोषण मुक्ति मंच(DSMM) ने पूरे प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा माँगा है और कहा राजस्थान सरकार कमजोर तबके की सुरक्षा में विफल रही है। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Mar 2022
rajasthan protest

राजस्थान में दलित-वर्ग और महिलाओं पर बढ़ते हमलों के खिलाफ लगातार जन-आक्रोश बढ रहा है, सोमवार 21 मार्च 2022 को दलित शोषण मुक्ति मंच (डीएसएमएम) सहित विभिन्न स॔गठनों ने पूरे प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा और उनसे इस्तीफ़ा देने की मांग भी रखी ।

डीएसएमएम के प्रदेश संयोजक एडवोकेट किशन मेघवाल ने बताया कि राजस्थान में कमजोर वर्गों के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश के तहत लगातार हमले किए जा रहे हैं जो न केवल निंदनीय हैं अपितु राजस्थान की छवि को देश और दुनिया में धूमिल करने वाले हैं, जिस प्रकार से दलितों पर हमलों की बाढ़ आई हैं जिसने आपकी "संवेदनशील सरकार" की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।

जोधपुर जिला कलेक्ट्रेट पर हुए विरोध-प्रदर्शन में सैंकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए, वहां हुई आमसभा को सम्बोधित करते हुए डीएसएमएम के प्रदेश सहसंयोजक शैलेष मोसलपुरिया ने राजस्थान सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री गहलोत जिस गद्दी पर विराजमान है वो इन्हीं तड़पते, चीखते और लहुलुहान मतदाताओं के बदौलत हासिल हुई है।

नौजवान संगठन डीवाईएफआई के प्रदेश संयुक्त सचिव महिपाल सिंह ने कहा “विगत भाजपा सरकार के दौर में राजस्थान में दलित तबके पर हुए हमलों से परेशान होकर, कांग्रेस पर भरोसा करते हुए आपको सत्ता तक पहुँचा दिया, राज्य की कानून व्यवस्था का मजाक उड़ाया जाता हैं जबकि गृहमंत्री का कार्यभार भी आपके पास में हैं, इसके अलावा दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह भी है कि दलित उत्पीड़न का केंद्र बिन्दू जोधपुर संभाग है जहाँ से आप स्वयं आते हैं।”

भीम-आर्मी के नेता आनंदपाल आजाद भी इस विरोध स्थल पर आए और उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि “दलित-वर्ग के खिलाफ लगातार षड्यंत्र चलते रहते है, कभी अपनी पसंद का नाम रखने पर, कभी तावदार मूंछे रखने पर, कभी नाई द्वारा बाल काटने पर, कभी दुल्हे को घोड़ी पर चढने के सवाल पर एक सुनियोजित तरीक़े से एक के बाद एक हमले करते हुए दलित-वर्ग को भय के वातावरण में जीने को मजबूर कर दिया गया हैं।”

विभिन्न संगठनों द्वारा दिए गए ज्ञापन में मुख्य रूप से पाली के बाली में हुए जितेंद्रपाल मेघवाल हत्याकांड की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए इस प्रकरण में न्यायिक आयोग गठित करने, पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है।

ज्ञापन में लिखा है कि जोधपुर जिले के फलोदी में राहुल देवड़ा का अपहरण कर के तीन दिन तक बंधक बनाए रखा और फिर यातनाएं देते हुए पानी में डाल कर मौत के घाट उतार दिया। इस प्रकरण में पुलिस भारी दबाव में निष्पक्ष जाँच नहीं कर पा रही हैं। अतः इस मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए न्यायिक आयोग गठित किया जाए। 

ज्ञापन में पाली के राणी में प्रवीण और उसकी मां सीतादेवी को बोलेरो से कुचलकर मारने की कोशिश का मामला भी उठाया गया, घायल जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में भर्ती हैं जहां दोनों घायलों के इलाज में घोर लापरवाही सामने आई है अतः सरकार उनका समुचित ईलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करें और आर्थिक सहायक उपलब्ध कराए।

मांग पत्र में धौलपुर जिले की घटना का जिक्र किया जहां एक दलित महिला के साथ उनके नाबालिग बच्चों के सामने ही हुई गैंगरेप की वारदात ने पूरे राजस्थान को कलंकित किया हैं, इस प्रकरण को गंभीरता से लेकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलवाने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग की।

कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए डीएसएमएम, भीम-आर्मी, स्टूडेंट्स फैडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), भारत की जनवादी नौजवान सभा (डीवाईएफआई), अजा/जजा संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) सहित सामाजिक और कर्मचारी संगठनों ने मांग की कि राजस्थान सरकार दलितों और महिलाओं पर बढ़ते हमलों को रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाए,

जहाँ भी उत्पीड़न की घटना हो उस जिले के पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर को निलम्बित किया जाए एवं संबंधित थानाधिकारी को बर्खास्त किया जाए, दलित विरोधी मानसिकता रखने वाले उपाधीक्षकों को सूचीबद्ध कर उन्हे जांच के लिए अयोग्य घोषित कर ब्लेक-लिस्टेड किया जाए। क्योंकि बढ़ती घटनाओं के लिए ऐसे जांच अधिकारी प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं जो मुल्जिमों को बचाने के उद्देश्य से दूषित जांच कर के न्यायालयों में आधे-अधूरे दस्तावेजों के साथ चालान पेश कर रहे हैं परिणामस्वरूप मुल्जिमों पर दोष साबित नहीं हो पाते हैं जिसके चलते अपराधियों को ठोस संदेश नहीं मिलता हैं और कानून का भय न रहने से वारदातों में बढ़ोतरी होती हैं।

कई जिलों में Sc/St के विशेष न्यायाधीशों के पद खाली रहने से न्यायालय का काम प्रभावित होता है, दूसरे न्यायालयों में चार्ज देने से इस एक्ट की गंभीरता के नजरिए से सुनवाई नहीं होती, अतः राजस्थान के सभी जिलों में विशिष्ट न्यायालय Sc/St प्रकरण के न्यायाधीशों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, Sc/St एक्ट के तहत दर्ज प्रकरणों में पीड़ितों को आर्थिक सहायता समय पर नहीं मिलती है। इसके लिए अनावश्यक अवरोध पैदा किए जाते है, पुलिस थानों में कई महीनों तक पीड़ितों के आवश्यक कागजात तक अपलोड नहीं किए जाते हैं, अतः इस तंत्र को चुस्त-दुरुस्त किया जाए ताकि पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।

करीब आधा दर्जन संगठनों ने राजस्थान की सरकार को चेतावनी दी कि यदि करोड़ों लोगों के जीवन को गरिमामय बनाने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए गए तो एक आक्रामक जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी राजस्थान सरकार की होगी, हम यह भी चेतावनी देते हैं कि यदि कानून ने अपना काम ठीक से नहीं किया तो लोग अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं संघर्ष के रास्ते पर चलने पर मजबूर होंगे, जिससे राजस्थान में जातीय संघर्ष की स्थिति पैदा होगी इसके लिए भी राजस्थान की सरकार की जिम्मेदारी होगी।

ये भी पढ़ें: राजस्थान: घोड़ी पर चढ़ने के कारण दलित दूल्हे पर पुलिस की मौजूदगी में हमला

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