NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
समाज
भारत
राजनीति
सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ बहुजन-वंचित संगठनों का 'दिल्ली चलो' आंदोलन
दिल्ली के जंतर मंतर पर बुधवार को बहुजन, वंचित ओर प्रगतिशील संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोगों ने 'देश बचाओ, संविधान बचाओ' प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
सोनिया यादव
04 Mar 2020
jantar mantar protest

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुधवार, 4 मार्च को सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ 'दिल्ली चलो' के बैनर तले देशभर से आए बहुजन-वंचित और प्रगतिशील संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोगों ने 'देश बचाओ, संविधान बचाओ' प्रदर्शन में हिस्सा लिया। सभी प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नागरिकता संशोधन कानून को वापस लेने की मांग की।

देश के अलग-अलग राज्यों से आए प्रदर्शनकारियों ने ‘जय भीम' नारे के उद्घोष के साथ क्रांतिकारी और आज़ादी के नारे भी लगाए। इस दौरान कई वक्ताओं ने मंच से सीएए, एनआरसी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की भी आलोचना की। साथ ही सत्तारूढ़ दल द्वारा देश में एक विशेष विचारधारा को थोपने का आरोप भी लगाया।

protest

वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश आंबेडकर ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, ‘दिल्ली में आज डर का माहौल है। लोग डर-डर कर आंदोलन करते हैं। हम यहां उस डर को मिटाने आए हैं। आज हमारे आंदोलन की शुरुआत हुई है। हम सरकार को बताना चाहते हैं कि अगर सरकार सीएए का कानून वापस नहीं लेती तो हम बड़ा आंदोलन करेंगे। मेरे पास अपने पिता और दादा के कागज नहीं है दिखाने को, ना ही समाज के वंचित लोगों के पास हैं। ऐसे में सरकार का ये कानून जनविरोधी है। हमें आज एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है।'

protest

इस प्रदर्शन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं। उन्होंने सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख को याद करते हुए कहा कि जिस तरह मनुवादी सोच के आगे फुले और फातिमा ने हिम्मत नहीं हारी, हम भी इस कानून के आगे नहीं हारेंगे, फासीवाद का मुकाबला हम पूरी ताकत से करेंगे।

चेन्नई से आईं जयंती ने कहा, ‘हम सालों से अपने देश में सभी धर्मों और संप्रदाय के लोगों के साथ खुशी-खुशी रहते आए हैं। अनेकता में एकता भारत की खूबसूरती है। हमारा संविधान पंथनिरपेक्ष होने की बात करता है, ऐसे में ये कानून संविधान पर हमला है। हम देश बचाने, संविधान बचाने आए हैं।'

protest

महाराष्ट्र से आए विजय के मोरे ने न्यूज़क्लिक को बताया, ‘हम लोग सीएए-एनआरसी और एनपीआर का विरोध करने दिल्ली आए हैं। ये सब जो देश में हो रहा है, बहुत खतरनाक है। हम असम में इसका परिणाम देख चुके हैं, अगर पूरे देश में सीएए लागू हो गया तो बहुत से लोग बर्बाद हो जाएंगे।'

कई छात्र संगठनों ने भी इस आंदोलन में हिस्सा लिया। क्रांतिकारी युवा संगठन के प्रदर्शनकारियों ने 'साझी शहादत, साझी विरासत और साझी नागरिकता' की बात करते हुए बताया कि हमें आजादी कई कुर्बानियों के बाद मिली है और इन कुर्बानियों का एक ही मकसद था हम सबका आजाद भारत, एक ऐसा भारत जहां लोगों को अपनी बात रखने की आजादी हो, लेकिन आज की सरकार हमसे वो आज़ादी छीनने की कोशिश कर रही है। हमारा ध्यान शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी, बेरोजगारी से हटाकर कागज बनाने की ओर लगा रही है।

दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा काजल ने कहा, ‘सरकार कहती है कि ये नागरिकता देने का कानून है फिर सरकार सभी को नागरिकता क्यों नहीं देती, एक धर्म को क्यों छोड़ दिया है, केवल तीन देशों को क्यों शामिल किया है। क्या सरकार अब हमसे हमारी सबसे बड़ी किताब संविधान को छीनना चाहती है। क्या सरकार बाबा साहब आंबेडकर की विचारधारा की जगह आरएसएस और सावरकर की विचारधारा देश पर थोपना चाहती है।'

protest

गौरतलब है कि लगातार विरोध के बावजूद नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को केंद्र सरकार ने 10 जनवरी से लागू कर दिया है। लेकिन अभी भी देश के विभिन्न हिस्सों में सीएए-एनआरसी और एनपीआर को लेकर जबरजस्त विरोध देखने को मिल रहा है।

छात्रों और महिलाओं ने आंदोलन का मोर्चा संभाल रखा है तो वहीं बहुजन, आदिवासी और वंचित समाज इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है। सरकार भले ही सीएए पर एक इंच पीछे ना होने की बात कर रही हो लेकिन इसका विरोध कर रहे लोगों के भी मनोबल में कोई कमी नहीं है।

Delhi CHALO
Protest against CAA
New Delhi
Jantar Mantar
NRC
NPR
Prakash Ambedker
Bhim Army
Vanchit Bahujan

Related Stories

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

मुस्लिम विरोधी हिंसा के ख़िलाफ़ अमन का संदेश देने के लिए एकजुट हुए दिल्ली के नागरिक

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है

डीजेबी: यूनियनों ने मीटर रीडर्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई वापस लेने की मांग की, बिलिंग में गडबड़ियों के लिए आईटी कंपनी को दोषी ठहराया

दिल्ली: अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ बढ़ते हमलों के विरोध में सीपीआई(एम) का प्रदर्शन

दिल्ली: अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते हमलों के विरोध में माकपा का प्रदर्शन

कार्टून क्लिक: जंतर-मंतर पर महिला किसान संसद

दिल्ली : जद्दोजहद के बाद किसानों का एक जत्था पहुंचा जंतर-मंतर, भारी सुरक्षा के बीच लगाएंगे किसान संसद

खोरी गांव विस्थापन संकट : घरों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू, निवासियों ने जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन

सीएए : एक और केंद्रीय अधिसूचना द्वारा संविधान का फिर से उल्लंघन


बाकी खबरें

  • Job
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सरकार जी का बर्थ-डे और एक और नया ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’
    19 Sep 2021
    वैसे सरकार जी रिकॉर्ड बनाते ही रहते हैं। इतने बनाते हैं कि उसकी, रिकॉर्ड बनाने की गिनती भी मुश्किल है। सरकार जी द्वारा रिकॉर्ड बनाने का भी कोई रिकॉर्ड बन ही गया होगा।
  • jammu and kashmir
    अब्बास रतहर
    जम्मू-कश्मीर : जहाँ जम्हूरियत का मतलब डीडीसी सदस्यों को 'क़ैद' करना है
    19 Sep 2021
    जम्मू-कश्मीर की जनता ने हिम्मत दिखा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया था, मगर चुने हुए सदस्यों की आवाजाही पर रोक लगने की वजह से उनके लिए काम करना मुश्किल हो रहा है।
  • Nature
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 3 भोजपुरी ग़ज़लें
    19 Sep 2021
    भोजपुरी में बेहद उम्दा कलाम लिखा जा रहा है। इस बात की तस्दीक़ करने का ज़िम्मा हम पाठकों पर छोड़ते हैं। इतवार की कविता में आज पढ़िये शायर इरशाद ख़ान सिकंदर की 3 भोजपुरी ग़ज़लें।
  • Sarcasm
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: जन्मदिन हो तो मोदी जी जैसा, वर्ना ना हो...
    18 Sep 2021
    टीका तो अब लगा है। टीका लगना वह है, जो मोदी जी के बर्थडे पर सारी दुनिया ने देखा और इंडिया ने दिखाया। बिना बर्थ डे वाले दिनों से पूरे तीन गुने ज्यादा टीके, बर्थडे पर लगे।
  • Winning was Difficult Under Captain
    न्यूज़क्लिक टीम
    कैप्टन के रहते जीतना कठिन था पर अब कांग्रेस को जितायेगा कौन?
    18 Sep 2021
    बीते कुछ समय से कांग्रेस के 'प्रथम परिवार' में अमरिन्दर सिंह को लेकर गहरे मतभेद थे. बताते हैं कि राहुल और प्रियंका गांधी ने विधायकों की नाराजगी के चलते अमरिन्दर सिंह को पद से हटाने के विचार का समर्थन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License