NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कोविड-19
भारत
राजनीति
दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध
स्वास्थ्य मंत्री के पहुंचने पर अस्पताल गेट के समक्ष कर्मचारियों ने बैनर के साथ नारे लगाते हुए शांतिपूर्ण विरोध किया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 May 2022
protest

नई दिल्ली: ऐक्टू के बैनर तले पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से आंदोलनरत ‘कोविड योद्धाओं’ को दिल्ली पुलिस ने सोमवार को तब हिरासत में ले लिया जब कर्मचारियों ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के नए ब्लॉक का उद्घाटन करने आए स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के समक्ष अपनी बात रखने की कोशिश की। गौरतलब है कि इन कोविड योद्धाओं ने पिछले एक महीने के दौरान अस्पताल प्रबंधन, स्वास्थ्य मंत्री और श्रम मंत्री के समक्ष कई बार अपनी नौकरी को लेकर बात की है लेकिन सरकार और अस्पताल प्रबंधन ने किसी भी तरह की सुनवाई से मना कर दिया है। इन सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पिछले महीने काम से निकाल दिया गया था। दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में बड़ी संख्या में कोविड के दौरान ड्यूटी करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की छटनी की गई है।

स्वास्थ्य मंत्री के पहुंचने पर अस्पताल गेट के समक्ष कर्मचारियों ने बैनर के साथ नारे लगाते हुए शांतिपूर्ण विरोध किया। इससे पहले डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल के अंदर कर्मचारी स्वास्थ्य मंत्री का घेराव कर चुके हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में रिपोर्ट जारी कर इस बात को दर्शाया है कि कोविड महामारी के कारण भारत में हुई कुल मौतें 48 लाख के करीब हैं जो कि सरकारी आंकड़ों से दस गुना तक ज्यादा हैं। हालांकि सरकार ने इस रिपोर्ट को मानने से मना कर दिया है लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अगर कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी ड्यूटी नहीं करते तो न जाने और कितनी जानें जाती। कोविड महामारी के भयावह दौर में भी जिन कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपनी जान पर खेलकर अस्पतालों को चलाया और लाखों लोगों की जान बचाई और आज उन्हीं कर्मचारियों को अपनी नौकरी बचाने के लिए महीने भर से धरने पर बैठना पड़ रहा है। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस द्वारा इन्हें किसी भी प्रकार के धरने-प्रदर्शन से रोका जा रहा है और हिरासत में भी लिया जा चुका है। सोमवार को अस्पताल गेट के समक्ष शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे कोविड योद्धाओं को दिल्ली पुलिस द्वारा मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया।

ऐक्टू द्वारा पिछले महीने की 27 तारीख को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया था जिसके बाद स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय व श्रम मंत्रालय में ज्ञापन दिया गया था। इस प्रदर्शन में दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया था। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार द्वारा ‘बरसाए गए फूल’, सरकार को ही प्रतीकात्मक रूप में वापस किया था। परंतु इसके बावजूद सरकार ने कोई सकारात्मक पहलकदमी नहीं दिखाई। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया को इससे पहले डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों द्वारा भी विरोध का सामना करना पड़ा था। अस्पताल दौरे पर गए केंद्रीय मंत्री का घेराव करते हुए कर्मचारियों ने उन्हें उनके समक्ष अपनी बात रखी थी।

ऐक्टू ने कहा कि सरकार को सभी निकाले गए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को वापस लेना चाहिए। ऐक्टू के राज्य परिषद सदस्य और अधिवक्ता मुकेश किशोर ने बताया कि पुलिस लगातार कर्मचारियों पर अनावश्यक रूप से दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। यह साफ़ तौर पर केंद्र सरकार और अस्पताल प्रबंधन के इशारे पर हो रहा है। लोकतंत्र में सभी को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है। इसे धारा 144 के नाम पर खत्म करने की कोशिश करना लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है और मोदी-सरकार के मजदूर विरोधी रवैये को दर्शाता है। इतना विरोध झेलने के बाद भी कर्मचारियों की बात नहीं सुनना, कोविड महामारी के खतरे के बीच में कर्मचारियों के मनोबल और जन-स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालने वाला है।

ऐक्टू ने सरकार से मांग किया कि लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से लेकर डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल तक सभी निकाले गए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को तत्काल काम पर वापस लिया जाए और इनके अधिकारों की रक्षा की गारंटी हो। दिल्ली सरकार के विभिन्न अस्पतालों से भी निकाले गए सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को काम पर रखा जाए। ऐक्टू ने कहा कि मांग नहीं माने जाने की सूरत में स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन और तेज़ होगा। 

COVID-19
Corona warriors
Mansukh Mandaviya
Protest
LHMC Hospital

Related Stories

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

बिजली संकट को लेकर आंदोलनों का दौर शुरू

दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे

नफ़रत देश, संविधान सब ख़त्म कर देगी- बोला नागरिक समाज

दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

दिल्ली: कोविड वॉरियर्स कर्मचारियों को लेडी हार्डिंग अस्पताल ने निकाला, विरोध किया तो पुलिस ने किया गिरफ़्तार

स्कीम वर्कर्स संसद मार्च: लड़ाई मूलभूत अधिकारों के लिए है


बाकी खबरें

  • Subramanian Swamy
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी, नज़र भी: भाजपा के अपने ही बाग़ी हुए जा रहे हैं
    04 Jan 2022
    मोदी सरकार चाहती है कि कोर्ट उनके ही नेता सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका पर कोई ध्यान न दे जिसमें उन्होंने एअर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया रद्द करने और अधिकारियों द्वारा दी गई मंज़ूरी रद्द करने का…
  • Hindu Yuva Vahini
    विजय विनीत
    बनारस में हिन्दू युवा वाहिनी के जुलूस में लहराई गईं नंगी तलवारें, लगाए गए उन्मादी नारे
    04 Jan 2022
    "हिन्दू युवा वाहिनी के लोग चाहते हैं कि हम अपना धैर्य खो दें और जिससे वह फायदा उठा सकें। हरिद्वार में आयोजित विवादित धर्म संसद के बाद बनारस में नंगी तलवारें लहराते हुए जुलूस निकाले जाने की घटना के…
  • Maulana Hasrat Mohani
    परमजीत सिंह जज
    मौलाना हसरत मोहानी और अपनी जगह क़ायम अल्पसंख्यक से जुड़े उनके सवाल
    04 Jan 2022
    आज भी अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस करते हैं, ऐसे में भारत को संविधान सभा में हुई उन बहसों को फिर से याद दिलाने की ज़रूरत है, जिसमें बहुसंख्यकवाद के कड़वे नतीजों की चेतावनी दी गयी थी।
  • Goa Chief Ministers
    राज कुमार
    गोवा चुनावः  34 साल में 22 मुख्यमंत्री
    04 Jan 2022
    दल बदल के मामले में गोवा बाकी राज्यों को पीछे छोड़ता नज़र आ रहा है। चुनाव से पहले गोवा के आधे से ज्यादा विधायक पार्टी बदल चुके हैं। आलम ये है कि कहना मुश्किल है कि जो विधायक आज इस पार्टी में है कल…
  • fark saaf hai
    सत्यम श्रीवास्तव
    फ़र्क़ साफ़ है- अब पुलिस सत्तासीन दल के भ्रामक विज्ञापन में इस्तेमाल हो रही है
    04 Jan 2022
    पिछले कुछ सालों से देश के शीर्ष नेतृत्व द्वारा अपने ही देश के नागरिकों को ‘कपड़ों से पहचानने’ की जो युक्ति ईज़ाद की है उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि पूरी मंशा से भाजपा ने इस विज्ञापन में दंगाई व्यक्ति…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License