NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
हिमाचल: मज़दूरों की जीत, हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया कि वो सभी की मदद करें
हिमाचल प्रदेश सरकार ने 22 तरीख के अपने हलफनामे में कहा था कि कोई भी सड़क पर नहीं रह रहा है और कोई भूखा नही है। लेकिन सच्चाई यह है कि अब भी मज़दूर हिमाचल के जंगलों में फंसे हुए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Apr 2020
HP
Image courtesy: Bar and Bench

दिल्ली: हिमाचल हाईकोर्ट ने बुधवार को अधिकारियों और जिला प्रशासन को राज्य भर में फंसे हुए हजारों प्रवासी श्रमिकों को मुफ्त राशन और चिकित्सा देने का निर्देश दिया। वकील सुभाष चंद्रन केआर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने सरकार को तत्काल कदम उठाने और 5 मई से पहले की गई कार्रवाई पर जबाब दाखिल करने को कहा।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में 25 मार्च से ही देशव्यापी लॉकडाउन से फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों को भोजन और राशन मिलने में मुश्किल हो रही है। इसे लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) माकपा के विधायक ने शिमला प्रशासन के ऑफिस में धरना भी दिया था।

याचिका को लेकर एडवोकेट चंद्रन ने न्यूजक्लिक को बताया, 'मैंने 17 अप्रैल को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने मामले की सुनवाई अगले दिन ही की। सरकारी वकील ने अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए कुछ समय की मांग की। अगली सुनवाई 22 अप्रैल को हुई और अदालत ने कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी मज़दूर भूखा न रहे।'

चंद्रन ने कहा, “लॉकडाउन की अचानक घोषणा के कारण मज़दूर अपने घर वापस नहीं लौट सके। लॉकडाउन की घोषणा किए लगभग एक महीना हो चुका है और उनकी बचत भी खत्म हो चुकी है। अगर सरकार इन मज़दूरों की मदद नहीं करती है, तो हम भूख से कई मौतें देखेंगे। स्थिति इतनी खराब है कि बबूल के पेड़ों को काटने के लिए आए कश्मीरी मजदूर जंगलों में फंसे और मुझे मदद के लिए लगातार फोन कर रहे हैं"

हालंकि सरकार ने 22 तरीख के अपने हलफनामे में कहा था कि कोई भी सड़क पर नहीं रह रहा है और कोई भूखा नहीं है। लेकिन माकपा नेताओं ने इसे सरकार का झूठ कहा और कहा आज भी शिमला, कांगड़ा, मंडी, ऊना, हमीरपुर, सोलन आदि जिला में हजारों मजदूर जंगलों व सड़कों में खुले में तिरपाल लगा कर रह रहे हैं और खाने का भी कोई उचित इंतजाम नहीं है। उसका उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया जो फंसे हुए एक मज़दूर ने भेजा था।

जम्मू-कश्मीर के मज़दूरों ने कहा कि उन्होंने राशन बचाने के लिए दिन में केवल एक बार भोजन किया। वीडियो में श्रमिकों में से एक ने कहा: “हम एक तम्बू में 18 व्यक्ति हैं। हम सोशल डिस्टेंसिंग को कैसे बनाए रखेंगे? साथ ही, कई कार्यकर्ता अपने परिवार के एकमात्र  कमाने वाले हैं और उनके परिवार के सदस्य उनके घर वापस आने का इंतजार कर रहे हैं।”

शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान ने न्यूज़क्लिक को बताया कि हिमाचल प्रदेश में अभी बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के 1.5 लाख प्रवासी मज़दूर हैं। इनमें से लगभग पच्चीस हजार अकेले निर्माण में लगे हैं। ये दिहाड़ी मजदूर हैं और ये भुखमरी के खतरे का सामना कर रहे हैं।

आगे उन्होंने कहा, 'कुछ गैर-सरकारी संगठनों द्वारा मजदूरों को अब तक खिलाया गया था, जैसे सिविल सोसाइटी के लोग और एक स्थानीय गुरुद्वारा लेकिन उनके पास बहुत सीमित क्षमता है। चूंकि ये प्रवासी श्रमिक हैं, उनके पास न तो राशन कार्ड हैं और न ही वे मुफ्त में 5 किलोग्राम चावल पाते हैं। इन्हें गरीब किसान कल्याण योजना का भी लाभ नहीं मिलता हैं।'

चौहान ने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों से आने वाले मजदूर सोलन, नालागढ़ और बद्दी के औद्योगिक शहरों में फंसे हुए हैं। हालाँकि, सरकार संकट से बेपरवाह दिख रही है और अभी तक उनके लिए एक पैसा भी जारी नहीं किया है।

Himachal Pradesh
HP high court
Lockdown
Workers and Labors
himacha Government
Jai Ram Thakur

Related Stories

उनके बारे में सोचिये जो इस झुलसा देने वाली गर्मी में चारदीवारी के बाहर काम करने के लिए अभिशप्त हैं

यूपी: महामारी ने बुनकरों किया तबाह, छिने रोज़गार, सरकार से नहीं मिली कोई मदद! 

यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!

ग्राउंड रिपोर्ट: देश की सबसे बड़ी कोयला मंडी में छोटी होती जा रही मज़दूरों की ज़िंदगी

महामारी का दर्द: साल 2020 में दिहाड़ी मज़दूरों ने  की सबसे ज़्यादा आत्महत्या

हिमाचल: सेब के उचित दाम न मिलने से गुस्साए किसानों का प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन

बसों में जानवरों की तरह ठुस कर जोखिम भरा लंबा सफ़र करने को मजबूर बिहार के मज़दूर?

महानगरों में दूसरे लॉकडाउन के बाद बिगड़ी मज़दूरों की हालत

हिमाचल प्रदेश का मज़दूर आंदोलन शहादत की अनोखी मिसाल है

दिल्ली : राशन को लेकर सरकारों के आपसी झगड़े में ग़रीबों के लिए क्या है?


बाकी खबरें

  • election
    राज वाल्मीकि
    चुनाव 2022: ‘हमारा वोट सबको चाहिए उन्हें भी जो हमसे भेदभाव करते हैं’
    10 Feb 2022
    ‘हमारा वोट मांगने तो हर पार्टी के लोग हमारे पास आते हैं। कथित उच्च जाति के लिए हम दलित और अछूत होते हैं। हम से छूआछूत और भेदभाव करते हैं। पर चुनाव के समय वे यह भूल जाते हैं। क्योंकि हमारे वोट की तो…
  • up elections
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    गुंडागीरी और लोकतंत्रः समाज को कैसे गुंडे चाहिए
    10 Feb 2022
    अगर अपराधी अपनी जाति का है तो वह साधु संत है और अगर दूसरी जाति और धर्म का है तो वह गुंडा है, माफिया है!!
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: यूपी चुनाव और गोदी मीडिया के सवाल
    10 Feb 2022
    गोदी मीडिया शायद पूरी तरह ज़मीन से कट चुका है, तभी तो महंगाई, बेरोज़गारी और खेती-किसानी के संकट के दौर में भी वह यूपी के मतदाता से हिजाब पर सवाल पूछता है।
  • jammu and kashmir
    अनीस ज़रगर
    राइट्स ग्रुप्स ने की पत्रकार फ़हाद शाह की रिहाई और मीडिया पर हमलों को बंद करने की मांग
    10 Feb 2022
    पत्रकार फ़हाद शाह की गिरफ़्तारी को कई लोग कश्मीर में मीडिया पर हमले के रूप में देख रहे हैं, जहां पुलिस अधिकारियों ने हाल के वर्षों में कई मीडिया कर्मियों पर मुकदमा दर्ज कर और उन्हें परेशान किया गया है।
  • ग्राउंड रिपोर्ट
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    ग्राउंड रिपोर्टः जाट-मुस्लिम गठजोड़ बना चुंबक, बिगड़ रहा भाजपा का खेल, मुखर हुईं मुस्लिम आवाज़ें
    10 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बागपत के ढिकौली गांव में सपा-रालोद गठबंधन के मुस्लिम उम्मीदवार के पक्ष में बनते माहौल और हापुड़, मुरादाबाद व अलीगढ़ में मुस्लिम आवाजों की राजनीतिक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License