NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
भारत एक अभूतपूर्व बेरोज़गारी संकट के मुहाने पर खड़ा है : सीएमआईई रिपोर्ट
सीएमआईई की रिपोर्ट बताती है कि ज़्यादातर वैतनिक नौकरियों का नुक़सान ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ है।
ज्ञान पाठक
22 Apr 2021
बेरोज़गारी

भारत में बेरोज़गारी पर 'सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी' की एक हालिया रिपोर्ट का विश्लेषण कर ज्ञान पाठक भारत में आने वाले बेरोज़गारी के अभूतपूर्व संकट के बारे में चेतावनी दे रहे हैं।

एक साल से हो रहे आर्थिक नुकसान के असली नतीज़े अब सबके सामने आ रहे हैं। आमतौर पर माना जाता है कि कोविड-19 लॉकडाउन और उसके बाद लगाए गए प्रतिबंधों का वेतनभोगी कर्मचारियों की आय और रोज़गार पर सबसे कम असर पड़ा है। लेकिन 2020-21 में इन्हीं वेतनभोगियों को रोज़गार का सबसे ज़्यादा नुकसान झेलना पड़ा है। फिर से नौकरियां पैदा करने के मजबूत कार्यक्रम की अनुपस्थिति और अब कोरोना वायरस की दूसरी लहर के चलते लगाए गए प्रतिबंधों से आगे स्थिति और भी ज़्यादा खराब होने वाली है। 

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (CMIE) की हालिया रिपोर्ट बताती है कि 2020-21 में वैतनिक नौकरियों में 98 लाख नौकरियों की कमी आई है। भारत में 2019-20 में 8 करोड़ 59 लाख वैतनिक नौकरियां थीं, जो मार्च 2021 तक घटकर 7 करोड़ 62 लाख रह गईं।

साफ़ है कि दोबारा नौकरियां पैदा करने की केंद्र सरकार की कोशिशें असफल हो चुकी हैं। इसकी बड़ी वज़ह इन सरकारी कार्यक्रमों से ऊपजी नौकरियों की संविदा और जल्दबादी भरी प्रवृत्ति रही है। अब उम्मीद है कि सरकार असफलताओं से सीख लेगी और आने वाले भविष्य के लिए बेहतर रणनीति बनाएगी। 

कोरोना वायरस की मौजूदा लहर से हज़ारों कामग़ारों की आजीविका पर संकट आ गया है। देश के कई हिस्सों में कोरोना के संक्रमण को कम करने के लिए लॉकडाउन और कर्फ्यू लगाया गया है, अनुमान है कि इससे सप्ताहांत में भारत की 57 फ़ीसदी आबादी घरों के भीतर रहती है। 

ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में भारी वैतनिक नौकरियों का नुकसान

फिलहाल शहरी क्षेत्रों में ज़्यादा प्रतिबंध लगाए गए हैं। यहां वैतनिक नौकरियां ज़्यादा होती हैं। 2019-20 के रोज़गार आंकड़े बताते हैं कि देश की कुल वैतनिक नौकरियों में से 58 फ़ीसदी शहरी भारत में हैं। CMIE की रिपोर्ट के मुताबिक़ 2020-21 के दौरान ख़त्म हुईं 98 लाख नौकरियों में से सिर्फ़ 38 फ़ीसदी ही शहरी क्षेत्रों में थीं। इसका मतलब हुआ कि अब आगे शहरी भारत में नौकरियां जाने की संभावना ज़्यादा बनेगी।

भारत में 42 फ़ीसदी वैतनिक नौकरियां ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। लेकिन 2020-21 में खत्म हुईं 98 लाख नौकरियों में से 62 फ़ीसदी ग्रामीण क्षेत्र से थीं। संख्या के हिसाब से यह आंकड़ा 60 लाख बैठता है। आगे शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में वैतनिक नौकरियां जाने की संभावना कम है, लेकिन अब भी डर बना हुआ है। दूसरी लहर में छोटे शहर ज़्यादा बुरे तरीके से प्रभावित हो रहे हैं। निश्चित तौर पर इन शहरों के आसपास लगे ग्रामीण इलाकों में रोज़गार की तस्वीर आगे बदरंग होने की संभावना है।

कोरोना की पहली लहर में नौकरियां गंवाने वाले कर्मचारियों का क्या हुआ? CMIE की रिपोर्ट के मुताबिक़, इनमें से ज़्यादातर लोग कृषि क्षेत्र में चले गए। यह लोग भी ग्रामीण भारत के उन 30 लाख व्यापार करने वाले लोगों के साथ आ गए, जिनका काम धंधा ठप हो गया और जो कृषि क्षेत्र में प्रवास कर गए। 

कृषि क्षेत्र में आए इस उछाल की रोज़गार के आंकड़ों से भी पुष्टि होती है। इन आंकड़ों के मुताबिक़ कृषि क्षेत्र में 90 लाख कामग़ारों की संख्या बढ़ी है। कुलमिलाकर कृषि क्षेत्र पर अब बहुत भार बढ़ चुका है। अब कृषि उत्पादकता में बहुत ज़्यादा बढ़ोत्तरी के बिना यह क्षेत्र बहुत अच्छे ढंग से नहीं चल पाएगा। 

रिपोर्ट कहती है कि इस बदलाव को शहर से ग्रामीण इलाकों में प्रवास नहीं माना जाना चाहिए। बल्कि यह ग्रामीण भारत में गैर कृषिगत कार्यों से कृषिगत कार्यों की तरफ़ प्रवास है। 2021 के मार्च महीने में कृषि क्षेत्र में आया उछाल भी इस तथ्य की पुष्टि करता है।

बड़े स्तर पर कामगारों के प्रवास के नतीजे

शहरी क्षेत्रों से नौकरियां-रोज़गार जाने के चलते बड़ा स्तर का प्रवास हुआ, जिससे ग्रामीण भारत और कृषि पर और भी भार बढ़ गया। अप्रैल, 2021 के शुरुआती 15 दिनों से संबंधित रिपोर्ट से पता चलता है कि शहर से ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों का प्रवास हो रहा है। यह प्रक्रिया शहरी इलाकों में वैतनिक और गैर-वैतनिक नौकरियों में हो रहे नुकसान का सबूत है। 

कोरोना की दूसरी लहर में चालू हुआ यह प्रवास ज़्यादातर महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली से हो रहा है। चूंकि ज़्यादातर प्रवासी उत्तरप्रदेश, बिहार और दूसरे पूर्वी राज्यों से हैं, इसलिए आगे इन राज्यों में बेरोज़गारों की संख्या में तेज उछाल आ सकता है। फिर जिन राज्यों से यह प्रवासी मज़दूर जा रहे हैं, वहां की अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। 

खुदरा, खानपान, निर्माण, घरेलू सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों में पहले ही दिक़्क़तें आना शुरू हो गई हैं। यातायात और रसद क्षेत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव शुरू हो गया है। उत्पादन और आपूर्ति में अनियमित्ता आने लगी है और भविष्य में इसके और भी ज़्यादा भयावह होने की संभावना है। 

जैसा पहले उल्लेख हुआ था, CMIE की रिपोर्ट बताती है कि ज़्यादातर वैतनिक नौकरियों का नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ है। फिर भी पिछले साल शहरी भारत में 37 लाख नौकरियां गईं। अब दूसरी लहर के बीच शहरी क्षेत्रों में लगने वाले प्रतिबंधों से अप्रैल और आगे के महीनों में वैतनिक रोज़गार के और भी ज़्यादा कम होने की संभावना है।

भारत के सामने मौजूद बेरोज़गारी के संकट का स्तर

पहली लहर में नौकरियां गंवाने वाले लाखों लोगों को अब भी अपना काम वापस नहीं मिला है। चूंकि बड़ी संख्या में अब भी नौकरियों में कमी आ रही है, ऐसे में यह लोग निकट भविष्य में नौकरियां वापस पाने की उम्मीद भी नहीं लगा सकते। मौजूदा परिस्थितियों में अच्छी नौकरी की बात तो छोड़ दीजिए, किसी भी तरह का नया काम मिलना मुश्किल हो गया है। 

कोरोना की दूसरी लहर ने आर्थिक सुधार को बहुत मुश्किल बना दिया है। CMIE की रिपोर्ट के मुताबिक़, मार्च, 2021 में श्रम भागीदारी 40.2 फ़ीसदी थी, जबकि 2019-20 के दौरान यह 42.7 फ़ीसदी थी। पिछले साल रोज़गार दर 39.4 फ़ीसदी थी, जो गिरकर 37.6 फ़ीसदी के स्तर पर आ गई है। बेरोज़गारी दर अब भी 6.5 फ़ीसदी के ऊंचे स्तर पर बरकरार है, हालांकि यह 2019-20 में 7.6 फ़ीसदी की दर से कम है।

CMIE की रिपोर्ट बताती है कि कोरोना की मौजूदा लहर 12 करोड़ लोगों के रोज़गार को ख़त्म कर सकती है, जो सभी क्षेत्रों में काम करने वाली कुल आबादी का 30 फ़ीसदी हिस्सा है। अप्रैल, 2020 के पहले दो हफ़्तों का आंकड़ा बताता है कि बेरोज़गारी दर अब बढ़कर 8 फ़ीसदी हो चुकी है, वहीं श्रम भागीदारी दर में 40 फ़ीसदी की कमी आई है।

मार्च, 2021 तक भारत में कुल 39.8 करोड़ रोज़गार मौजूद थे, जो 2019-20 से 54 लाख कम थे। 2019-20 में भारत में कुल 40 करोड़ 35 लाख रोज़गार मौजूद थे। यह आंकड़ा अपने-आप में बेहद भयावह है। लेकिन इसका एक और बड़ा नुकसान है; जिन लोगों की नौकरियां जाती हैं, वो दूसरे कम उत्पादक और कम वेतन देने वाली नौकरियों में लग जाते हैं। करीब 8 फ़ीसदी कर्मचारी कृषि क्षेत्र में प्रवास कर चुके हैं। जबकि इस क्षेत्र की उत्पादक क्षमता में महज़ 2 से 3 फ़ीसदी इज़ाफ़ा ही हुआ है। इससे रोज़गार पाने वालों की संख्या तो बढ़ जाती है, लेकिन असली नुकसान छुप जाता है।

यह अब बेहद जरूरी है कि केंद्र सरकार बेरोज़गारी के इस आंकड़े का गंभीरता से विश्लेषण करे और बेरोज़गारी के संकट का तुरंत समाधान करे। 

यह लेख मूलत: द लीफ़लेट में प्रकाशित हुआ था।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

India on the Brink of Unprecedented Unemployment Crisis: CMIE Report

COVID-19
Economy
unemployment

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • BJP Manifesto
    रवि शंकर दुबे
    भाजपा ने जारी किया ‘संकल्प पत्र’: पुराने वादे भुलाकर नए वादों की लिस्ट पकड़ाई
    08 Feb 2022
    पहले दौर के मतदान से दो दिन पहले भाजपा ने यूपी में अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। साल 2017 में जारी अपने घोषणा पत्र में किए हुए ज्यादातर वादों को पार्टी धरातल पर नहीं उतार सकी, जिनमें कुछ वादे तो…
  • postal ballot
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: बिगड़ते राजनीतिक मौसम को भाजपा पोस्टल बैलट से संभालने के जुगाड़ में
    08 Feb 2022
    इस चुनाव में पोस्टल बैलट में बड़े पैमाने के हेर फेर को लेकर लोग आशंकित हैं। बताते हैं नजदीकी लड़ाई वाली बिहार की कई सीटों पर पोस्टल बैलट के बहाने फैसला बदल दिया गया था और अंततः NDA सरकार बनने में उसकी…
  • bonda tribe
    श्याम सुंदर
    स्पेशल रिपोर्ट: पहाड़ी बोंडा; ज़िंदगी और पहचान का द्वंद्व
    08 Feb 2022
    पहाड़ी बोंडाओं की संस्कृति, भाषा और पहचान को बचाने की चिंता में डूबे लोगों को इतिहास और अनुभव से सीखने की ज़रूरत है। भाषा वही बचती है जिसे बोलने वाले लोग बचते हैं। यह बेहद ज़रूरी है कि अगर पहाड़ी…
  • Russia China
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस के लिए गेम चेंजर है चीन का समर्थन 
    08 Feb 2022
    वास्तव में मॉस्को के लिए जो सबसे ज्यादा मायने रखता है, वह यह कि पेइचिंग उसके विरुद्ध लगने वाले पश्चिम के कठोर प्रतिबंधों के दुष्प्रभावों को कई तरीकों से कम कर सकता है। 
  • Bihar Medicine
    एम.ओबैद
    बिहार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाः मुंगेर सदर अस्पताल से 50 लाख की दवाईयां सड़ी-गली हालत में मिली
    08 Feb 2022
    मुंगेर के सदर अस्पताल में एक्सपायर दवाईयों को लेकर घोर लापरवाही सामने आई है, जहां अस्पताल परिसर के बगल में स्थित स्टोर रूम में करीब 50 लाख रूपये से अधिक की कीमत की दवा फेंकी हुई पाई गई है, जो सड़ी-…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License