NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
विश्वगुरु बनने की चाह रखने वाला भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 107 देशों में 94वें पायदान पर
ग्लोबल हंगर इंडेक्स के अनुसार 2020 में दुनिया भर के 107 देशों में से भारत 27.2 स्कोर के साथ 94वें रैंक पर है। इससे साफ है कि जिन 107 देशों का डेटा इस साल साझा किया गया है, उनमें से मात्र 13 देशों में भूख की वजह से लोग भारत से ज्यादा परेशान हैं।
अजय कुमार
17 Oct 2020
भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 107 देशों में 94वें पायदान पर
Image courtesy: The Jakarta Post

भूख का नाम सुनते ही एक तरह की तड़प का ख्याल आता है। एक ऐसी तड़प का जहां पेट सन्न पड़ जाए। होंठ सूख जाए। दिमाग काम करना बंद कर दे। सांस का भीतर आना जाना मुश्किल हो जाए। हालात जिंदगी को अलविदा कहने वाले हो जाए। इसलिए भूख के साथ भुखमरी का एहसास भूख बोलते ही आ जाता है। इसलिए जरा सोच कर देखिए कि जिस परिवार में दो जून की भूख मिटाने के लिए हर रोज लड़ना पड़ता होगा उनका दुनिया के किसी भी दूसरे इंसान से किस तरीके का व्यवहार हो सकता है। जवाब आसान है चाहे जैसा मर्जी वैसा व्यवहार हो लेकिन वैसा तो नहीं होगा जैसा दो लोगों के बीच होना चाहिए। इसलिए भूख से लड़ना दुनिया की अहम जिम्मेदारियों में से एक है।

भूख को मापने के लिए कैलोरी इकाई का इस्तेमाल किया जाता है। एक तयशुदा मात्रा से कम कैलोरी का भोजन का सेवन भूख की कैटेगरी में आता है। जिसकी वजह से अल्पपोषण और कुपोषण जैसे परिणाम निकलकर आते हैं।

कैलोरी के इसी पैमाने के आधार पर हर साल वैश्विक क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भूख को मापने के लिए ग्लोबल हंगर इंडेक्स का प्रकाशन होता है। साल 2020 का ग्लोबल हंगर इंडेक्स प्रकाशित हो चुका है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक बहुत कुछ जानने से पहले भारत की स्थिति जान लेते हैं। Global hunger index में 107 देशों के बीच भारत 94 पायदान पर है। भारत से 21 पायदान ऊपर नेपाल है और 19 पायदान ऊपर बांग्लादेश है। भारत भूख के लिहाज से ग्लोबल हंगर इंडेक्स के 'गंभीरता की स्थिति' वाली कैटेगरी में है।

4 तरह के पैमानों के जरिए ग्लोबल हंगर इंडेक्स को मापा जाता है। पहला पैमाना यह कि आबादी में कितना बड़ा हिस्सा अल्प पोषण का शिकार है। यानी कुल आबादी में कितने लोग जरूरी कैलोरी से कम कैलोरी लेकर जीवन जी रहे है।

दूसरा पैमाना चाइल्ड वेस्टिंग से जुड़ा होता है। इसका मतलब यह हुआ कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों में कितने बच्चे ऐसे हैं जिनका वजन उनकी लंबाई के हिसाब से कम है। ठीक है सही तीसरा पैमाना चाइल्ड स्टांटिंग से जुड़ा होता है। इसका मतलब यह कि 5 साल के उम्र से कम उम्र के बच्चों में कितने बच्चे ऐसे हैं जिनकी लंबाई उनके वजन के मुताबिक नहीं है। और सबसे अंतिम पैमाना चाइल्ड मोर्टालिटी से जुड़ा होता है। इसका मतलब यह कि 5 साल से कम उम्र के कितने बच्चे 5 साल पूरा करने से पहले ही मर जा रहे है।

इन चारों पैमानों के आधार पर global hunger index तैयार किया जाता है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स के स्कोर के हिसाब से देखा जाए तो भारत का स्कोर साल 2000 से लेकर 2006 तक 40 के आसपास रहता था। लेकिन 2006 के बाद इसमें हर साल गिरावट आई है। इस साल भारत का स्कोर 27.2 है। 0 से लेकर 100 के बीच ग्लोबल हंगर इंडेक्स के तहत स्कोरिंग की जाती है। 0 का मतलब होता है कि अमुक देश में अल्प पोषण का शिकार कोई व्यक्ति नहीं है। यह सबसे आदर्श स्थिति होती है। यहां तक कोई देश नहीं पहुंच पाता। फिर भी अगर स्कोरिंग के लिहाज से देखा जाए तो साल 2006 के बाद भारत की स्थिति लगातार सुधरी है। फिर भी भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स के हिसाब से गंभीरता वाली स्थिति में पड़ता है। रैंकिंग के लिहाज से साल 2000 में भारत दुनिया के 113 देशों के बीच 83वें पायदान पर था। साल 2019 में घटकर दुनिया के 117 देशों के बीच 102 वें पायदान पर आ गया।

भारत की तकरीबन 15 फ़ीसदी आबादी को उतना भोजन नहीं मिलता जितनी भोजन की उसे हर रोज जरूरत होती है। 5 साल से कम उम्र के तकरीबन 18 फ़ीसदी बच्चों का वजन अपनी लंबाई के हिसाब से कम है। 5 साल से कम उम्र के बीच मृत्यु दर 3 से 4 फ़ीसदी के आसपास है। हालांकि अच्छी खबर है कि साल 2000 के बाद भारत में बच्चों की मृत्यु दर में लगातार गिरावट आई है। साल 2000 में यह 9 से 10 फ़ीसदी के आस पास रहती थी। कम होकर साल 2020 में तीन से चार फीसदी के आस पास आ गई है।

ग्लोबल हगर इंडेक्स के मुताबिक भारत में करीबन 135 करोड़ यानी अफ्रीका महादेश से भी ज्यादा लोग रहते हैं। खासकर देहात के इलाकों में खाद्य सुरक्षा की कमी है। अधिकतर महिलाएं हाशिए पर मौजूद होने के बावजूद हाशिए की तरफ ही बढ़ती जाती है। निचली जाति के लोगों में बहुत बड़े स्तर पर गरीबी है। इन सब की पहुंच ना तो स्कूल तक हो पाती है और ना ही जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं तक। यह सब मिलकर भारत की भूख की गंभीर स्थिति के कारण बनते हैं।

अब भारत को छोड़कर थोड़ा दुनिया की तरफ चलते हैं। समझते हैं कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स में दुनिया के बारे में क्या कहा गया है?

दुनिया में इस समय तकरीबन 69 करोड़ लोग भूख से जूझ रहे हैं। यानी 69 करोड़ लोगों को उतना भोजन नहीं मिल रहा है जितना मिलना चाहिए। साल 2018 में भोजन की कमी की वजह से तकरीबन 5 करोड़ 30 लाख 5 साल से कम उम्र के बच्चे मर गए। सोमालिया, साउथ सूडान, सीरिया, यमन, जैसे अफ्रीका के 8 ऐसे देश हैं जहां भुखमरी की दुनिया में सबसे बुरी स्थिति है।

दुनिया के देशों द्वारा सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के तहत साल 2030 तक जीरो हंगर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन जिस तरह से दुनिया चल रही है अगर उसी तरह से चलती रहे तो साल 2030 तक जीरो हंगर का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता है। भुखमरी से निपटने के तौर तरीके भुखमरी खड़ा करने वाली समस्याओं के सामने कमजोर पड़ रहे हैं। दुनिया में कोविड-19 की महामारी और आर्थिक बदहाली की वजह से इस बार करोड़ों लोग भुखमरी के कगार पर धकेले जा चुके हैं।

मानव जंतु पर्यावरण स्वास्थ्य व्यापार से जुड़े तमाम क्षेत्रों के बीच आपसी गठजोड़ की बजाए बहुत अधिक बिखराव है। इस वजह से दबे पांव भुखमरी की स्थितियां बढ़ती रहती हैं लेकिन निपटने का कोई तौर तरीका नहीं अपनाया जाता है। इसलिए ग्लोबल हंगर रिपोर्ट का कहना है इन सभी क्षेत्रों में व्यापक तौर पर इंटरकनेक्शन और आपसी गठजोड़ की जरूरत है।

यह दुनिया मानव जंतु और पर्यावरण के आपसी मेलजोल से बनी है। इन सब की साझी हिस्सेदारी है। हम क्या उत्पादित करते है? कच्चे माल से किस तरह से पक्का माल बनाते हैं? उत्पादों का बंटवारा किस तरीके से करते हैं? मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल किस तरीके से करते हैं?इन सब पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि पर्यावरण जंतु और मानव तीनों को अपना जरूरी हक मिल सके।

Global Hunger Index
India ranks 94th out of 107 countries
Poverty in India
Hunger Crisis
malnutrition in India
UNEMPLOYMENT IN INDIA
poverty line
Poor People's
new india reality
Narendra modi
Narendra Modi Government

Related Stories

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक

दवाई की क़ीमतों में 5 से लेकर 5 हज़ार रुपये से ज़्यादा का इज़ाफ़ा

कोविड पर नियंत्रण के हालिया कदम कितने वैज्ञानिक हैं?

हर नागरिक को स्वच्छ हवा का अधिकार सुनिश्चित करे सरकार

दुनिया की 42 फ़ीसदी आबादी पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ

बिहारः तीन लोगों को मौत के बाद कोविड की दूसरी ख़ुराक

अबकी बार, मोदी जी के लिए ताली-थाली बजा मेरे यार!

कोरोना संकट के बीच भूख से दम तोड़ते लोग

जन्मोत्सव, अन्नोत्सव और टीकोत्सव की आड़ में जनता से खिलवाड़!

डेंगू की चपेट में बनारस, इलाज के लिए नहीं मिल रहे बिस्तर


बाकी खबरें

  • bihar
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एक बार फिर बाढ़ की चपेट में उत्तर बिहार, जनजीवन बुरी तरह प्रभावित
    22 Oct 2021
    'लोगों के सामने खाने पीने की वस्तुओं की कमी है। बीमार बच्चे और वृद्ध लोगों के इलाज में समस्याएं हो रही हैं। मवेशियों के लिए चारा मिलना मुश्किल है, ग्रामीण क्षेत्र पूरी तरह प्रभावित है।'
  • custodial death
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश: पुलिस की ज़्यादती का एक और मामला, सफ़ाईकर्मी की पुलिस हिरासत में मौत
    22 Oct 2021
    घटना से वाल्मीकि समाज ग़ुस्से में है। दलित कार्यकर्ताओं समेत बड़ी संख्या में लोग पोस्टमार्टम स्थल पर इकट्ठा हो गए और संबंधित पुलिस कर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की।
  • jail
    सोनिया यादव
    प्रिवेंटिव डिटेंशन क्या क़ानून के नाम पर भरपूर मनमानियां करने का ज़रिया है?
    22 Oct 2021
    एहतियातन हिरासत को लेकर देश के 100 रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारियों ने केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू को एक खुली चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में कहा गया है कि इस अधिसूचना को जारी करने में 43 वर्षों की…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    100 करोड़ वैक्सीन डोज आंकड़े के सिवाय और कुछ भी नहीं!
    22 Oct 2021
    100 करोड़ वैक्सीन डोज महज आंकड़ा है। अगर देश के सामर्थ्य का प्रतिबिंब होता तो अब तक 100 करोड़ लोगों को दोनों डोज मुफ्त में आसानी से लग चुका होता।
  • jammu
    अबास राथर
    जम्मू-कश्मीर: सुस्त प्रशासन का लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालना जारी
    22 Oct 2021
    जिला विकास परिषद (डीडीसी) के चुनावों के लगभग नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन नौकरशाही और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच कामकाजी संगति नहीं बन सकी है। यह होने की बजाय, हम केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन को…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License