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झारखंड : हेमंत सरकार पर दबाव बनाने के लिए बजट सत्र के दौरान 'नागरिकता बचाओ मार्च'
सीएए और एनआरसी के खिलाफ झारखंड के विभिन्न सामाजिक संगठनों, आदिवासी और नागरिक समाज प्रतिनिधियों ने 22 फरवरी को रांची में ‘पीपुल्स कन्वेन्शन’ का आयोजन किया। इस दौरान हेमंत सरकार पर दबाव बनाने के लिए बजट सत्र के दौरान नागरिकता बचाओ मार्च निकालने का निर्णय लिया गया।
अनिल अंशुमन
24 Feb 2020
Jharkhand

सीएए, एनपीआर और एनआरसी थोपे जाने के खिलाफ पूरे देश में सड़कों का प्रतिवाद निरंतर जारी है। झारखंड में भी कई स्थानों पर दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर प्रतिवाद अभियान चल रहा है। इसे वामपंथी संगठनों समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों, आदिवासी और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों का सक्रिय समर्थन मिल रहा है।

हालांकि अब भी मीडिया के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को मतिभ्रम का शिकार बनाया जा रहा है। झारखंड में भी 1 अप्रैल से एनपीआर की प्रक्रिया शुरू किए जाने की विधिवत घोषणा के मद्देनजर आदिवासी संघर्ष मोर्चा व ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम समेत कई अन्य सामाजिक जन संगठानों ने जनता को जमीनी तौर पर सक्रिय बनाने की पहल शुरू की है।

इसे लेकर 22 फरवरी को राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित संगम गार्डन बैंकवेट हॉल में आयोजित ‘पीपुल्स कन्वेन्शन’ का आयोजन किया गया। कन्वेन्शन की शुरुआत देश के संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक पाठ और राष्ट्रीय गान से की गयी। दिनभर चले इस कन्वेन्शन में वक्ताओं ने प्रदेश की वर्तमान सरकार के ढुलमुल रवैये पर चिंता जताया। उन्होंने कहा कि केरल व पश्चिम बंगाल इत्यादि प्रदेशों की भांति झारखंड में भी एनपीआर ना लागू करने की घोषणा नहीं किए जाने से व्यापक झारखंडी समाज इस सरकार पर संदेह करने लगा है।
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इस दौरान दो दर्जन से भी अधिक विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने तर्कपूर्ण विचारों और सुझावों से स्पष्ट किया कि किस तरह से देश की जनता को गुमराह बनाकर मोदी शासन एनआरपी और सीएए के बहाने चोर दरवाज़े से एनआरसी थोपने का कुचक्र कर रही है। कन्वेन्शन ने सर्वसम्मति से सीएए – एनपीआर – एनआरसी को अविलंब रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि मोदी शासन कि यह कवायद संविधान विरोधी-देश विरोधी और गरीब विरोधी होने के साथ साथ पूरे देश को फिर से उन्मादी सांप्रदायिक विभाजन की आग में झोंककर बहुरंगी भारत को धर्म विशेष राष्ट्र में पतित करने की सुनियोजित चाल है।

कन्वेन्शन से पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव के तहत ये मांग की गयी कि हेमंत सोरेन सरकार आगामी 28 फरवरी से शुरू होनेवाले विधान सभा के बजट सत्र में केरल व पश्चिम बंगाल इत्यादि गैर भाजपा सरकारों द्वारा लिए गए फैसलों के अनुरूप झारखंड में भी उक्त काले क़ानूनों को नहीं लागू करने का अविलंब फैसला ले। इस मांग पर संज्ञान के लिए बजट सत्र के दौरान ही विधानसभा सत्र के समक्ष ‘नागरिकता बचाओ मार्च’ संगठित करने का भी निर्णय लिया गया। साथ ही व्यापक जन अभियान खड़ा करने हेतु प्रदेश के सभी प्रमंडलों में ज़ोनल पीपुल्स कन्वेन्शन आयोजित कर अन्य सभी छोटे बड़े स्थानीय सामाजिक जन संगठनों को सक्रिय तौर से भागीदार बनाने का कार्यभार लिया गया। जिसके प्रथम चरण का समापन अप्रैल में मोरहाबादी मैदान में विशाल जनसभा के आयोजन से किया जाना तय हुआ।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकान्त सहाय , पूर्व सांसद फुरकान अंसारी तथा भाकपा माले झारखंड राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद, सीपीएम सचिव जीके बक्शी तथा सीपीआई नेता केडी सिंह के अलावा कांग्रेस व राजद पार्टियों के नेताओं ने भी कन्वेन्शन को संबोधित किया। वरिष्ठ अर्थशास्त्री व एक्टिविष्ट ज्यां द्रेज, आदिवासी बुद्धिजीवी प्रो. कर्मा उरांव, प्रो. फिरोज अहमद (पूर्व कुलपति), प्रेमचंद मुर्मू, झारखंड आंदोलनकारी बशीर अहमद, दयामनी बारला तथा फादर महेंद्र पीटर तिग्गा सहित कई अन्य वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों ने भी अपने विचार रखे।  
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कन्वेन्शन में आदिवासी संघर्ष मोर्चा, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच, एआईपीएफ, आदिवासी जन परिषद सहित पचास से भी अधिक सामाजिक–सांस्कृतिक और आदिवासी जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने कन्वेन्शन में सक्रिय भागीदारी निभाई।  

बिहार : भाकपा माले का 25 फरवरी को विधानसभा मार्च

विगत 2 महीनों से पूरे देश की तरह बिहार में भी सीएए-एनआरसी और एनपीआरसी खिलाफ जबरदस्त आंदोलन चल रहा है। आम लोग विगत 1 महीने से जगह-जगह अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर हैं। इसे लेकर भाकपा-माले ने 31 जनवरी को पटना में आयोजित राज्यस्तरीय जन एकता सम्मेलन से 25 फरवरी को एनपीआर रोकने के सवाल पर विधानसभा मार्च का आह्वान किया था। भाकपा माले के नेताओं ने दावा किया है कि एक महीने तक बिहार के गांव-गांव में इसकी तैयारी की गई है।
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उनके अनुसार विधानसभा मार्च के कार्यक्रम में बिहार के हजारों दलित-गरीब और अकलियत समुदाय के लोगों की भागीदारी हो रही है। विधान सभा के सामने प्रदर्शन करके बिहार सरकार से मांग करेंगे कि एनपीआर पर तत्काल रोक लगाए और सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित करे। इस प्रकार, यह विधानसभा मार्च सीएए-एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ जारी आंदोलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने वाला है।

माले द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 25 फरवरी को ही विधानसभा के अंदर भी सरकार को इस सवाल पर घेरने की योजना बनाई गई है। पार्टी ने राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और हम (सेकुलर) को आमंत्रण भेज कर अपील की है कि उस दिन विपक्ष का संयुक्त कार्यस्थगन लाया जाए और एनपीआर के खिलाफ बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने का दबाव सरकार पर बनाया जाए।

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