NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
कला
भारत
राजनीति
झारखंड: सत्ता से बेख़ौफ़ कार्टूनिस्ट बशीर अहमद का जाना...
कार्टूनिस्ट-कार्यकर्ता बशीर अहमद का 8 अगस्त को निधन हो गया। वे ऐसे सामाजिक जन सरोकारों के कलाकार रहे जिन्हें झारखंड राज्य गठन के आन्दोलनकारी समाज ने राइटर और फाइटर कहकर संबोधित किया।
अनिल अंशुमन
12 Aug 2020
 Jharkhand: Dismissed cartoonist Bashir Ahmed from power .

आम तौर पर कार्टून विधा के हुनरमंद कलाकार राज-समाज के हर दायरे पर अपनी पैनी नज़र रखते हुए अपनी कार्टून कला के ज़रिये व्यवस्था जनित स्थितियों – विसंगतियों को लेकर नागरिक समाज को आगाह करते हैं। परन्तु कुछ ऐसे भी हरफ़नमौला व्यक्तित्व के कलाकार होते हैं जो न सिर्फ अपनी कला–कार्टूनों से समाज को आगाह–जागरूक करते हैं बल्कि ज़मीनी स्तर भी पर सक्रिय होकर यथास्थितियों में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रयासरत दीखते हैं।

झारखंड कि राजधानी रांची स्थित हिन्दपीढ़ी मुहल्ला निवासी जनाब बशीर अहमद ऐसे ही सामाजिक जन सरोकारों के कलाकार रहे। जिन्हें झारखंड राज्य गठन के आन्दोलनकारी समाज ने राइटर और फाइटर कहकर संबोधित किया।

bashir ji_0.jpg

1980 के दशक से ही झारखंड राज्य गठन के साथ साथ जल – जंगल – ज़मीन के आंदोलनों के नेतृत्व की अगली कतार में शामिल रहते हुए अपनी कला के विविध रूपों जरिये आन्दोलनों को मुखर स्वर देने का काम पूरी हुनरमंदी के साथ किया । इसीलिए उन्हें राइटर और फाइटर दोनों कहा जाता था ।       

इनके उतकृष्ट राजनितिक कार्टूनों को देखकर कई अंतर्राष्ट्रीय-राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित जाने माने फिल्मकार-निर्देशक मेघनाथ जी ने उन्हें झारखंड के आर.के लक्ष्मण की उपाधि से नवाज़ा था। 8 अगस्त को कोरोना आपदा काल की चपेट में आकर हार्ट अटैक के कारण अचानक ही सबको अलविदा कह गए। चंद दिनों से वे कुछ अस्वस्थ चल रहे थे जिसका इलाज़ भी हो रहा था। 65 वर्षीय बशीर अहमद जी झारखंड अलग राज्य गठन के आन्दोलनों में फ्रंट लाइन सक्रिय युवा टीम के अगुवाकर्मी, सामाजिक संगठक और आन्दोलनधर्मी कलाकार रहे। हर आन्दोलन के बैनर–पोस्टर लिखने से लेकर भव्य-आकर्षक दीवाल लेखन को लेकर सभी उनके आन्दोलन के कायल रहे। प्रदेश के दुर्गम सुदूर गांवों से लेकर आज की राजधानी रांची के हर आन्दोलनों और सामाजिक अभियानों के वरिष्ठ अगुवा सहकर्मी रहे। ’80 के दशक में चल रहे झारखंड राज्य गठन आन्दोलन के दौर में तत्कालीन सरकार के राज्य–दमन का सामना कर रहे अनगिनत नेताओं और युवा कार्यकर्त्ताओं के लिए उनका घर–परिवार हरवक्त पनाह का स्थल रहा। इस करण अक्सर पुलिस आकर छापा भी मारा करती थी। कई बार उन्हें गिरफ्तार भी होना पड़ा था।

झारखंड आन्दोलन के सबसे पहले छात्र-युवा संगठन आजसू के संस्थापक कोर टीम के महत्वपूर्ण भागीदार रहते हुए झारखंड के डॉ. रामदयाल मुंडा व वीपी केशरी सरीखे अगुवा बौद्धिक जमात के बेहद चहेते कलाकार रहे।

उनके बनाए कार्टून स्थापित अखबारों से लेकर अनगिनत पत्र –पत्रिकाओं में काफी लोकप्रिय हुए। अनगिनत वामपंथी–लोकतान्त्रिक और सामाजिक जन संगठनों के अभियानों–आन्दोलनों के सांस्कृतिक प्रचार–प्रसार के संचालक भी रहे। झारखंड राज्य आन्दोलन के तमाम उतर चढ़ावों के बीच भी वे अपने आन्दोलनकारी व बौद्धिक युवा टीम के साथियों के साथ निरंतर डटे रहे । लेकिन राज्य गठन के उपरांत जब उन्होंने देखा कि अलग राज्य को लेकर देखे गए सारे सपने धूल धूसरित किये जा रहें हैं तो जननायक कॉमरेड महेंद्र सिंह की क्रन्तिकारी वामपंथी धारा से प्रभावित होकर एक बार फिर से सामाजिक जन अभियानों के सेनानी बन गए। हालाँकि वर्तमान सत्ताधारी दलों (भाजपा छोड़) के कई वरिष्ट और प्रमुख नेताओं के भी वे चहेते रहे लेकिन उनकी सोच व साक्रियाता प्रदेश के वामपंथी दलों के साथ ही रही। जल–जंगल–ज़मीन के तथा राज्य में विस्थापन – पलायन – भूख – बेकारी – गरीबी जैसे सवालों को मुख्यधारा कि मीडिया में स्वर देने हेतु कई छोटे बड़े अखबारों से भी जुड़े। लेकिन स्वतंत्र और वैकल्पिक मीडिया निर्माण के प्रयासों के तहत सामाजिक जन पत्रिका ‘जनहक़’ की कोर टीम के सदस्य के बतौर उल्लेखनीय कार्य किया।

भाजपा राज द्वारा झारखंड को गुजरात की भांति साम्प्रदायिकता की प्रयोगशाला बनाने की साजिशों के खिलाफ जन आन्दोलनों के राष्ट्रीय मोर्चा ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम की झारखंड ईकाई के गठन में महत्वपूर्ण केन्द्रक की भूमिका निभायी। साथ ही वामपंथी दलों व कई सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर झारखंड में अल्पसंख्यकों और आदिवासियों पर हो रहे हमलों, मॉब लिंचिंग और सत्ता प्रायोजित सांप्रदायिक उन्माद के खिलाफ कई बड़े अभियान चलाये। तीन वर्ष पूर्व ही ओपन हार्ट सर्जरी कराने के बावजूद अपनी शारीरिक कार्यक्षमता की सीमा से भी आगे बढ़कर सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

राज्य के भाजपा शासन द्वारा प्रदेश के कई स्थापित सामाजिक कार्यकत्ताओं – अन्दोलनकर्मियों पर थोपे गए देशद्रोह जैसे फर्जी मुकदमों के खिलाफ हुए जन अभियानों में केन्द्रीय भूमिका निभाई। इस कारण सरकार के इशारे पर प्रशासन ने उनपर राज्य में दंगा भड़काने का संगीन मुकदमा कर दिया।

वाम नेता महेंद्र सिंह के क्रान्तिकारी विचारों व आन्दोलनों से प्रेरित होकर 2019 में अपने कई साथियों के साथ भाकपा माले में शामिल हो गए। पार्टी ने भी उनकी बहुमुखी प्रतिभा–सांगठनिक कौशल और विचार सक्रियता को महत्व देते हुए वरिष्ट आन्दोलनकारी का सम्मान दिया।

उक्त सक्रियताओं के बीच भी अपनी कार्टून विधा की कला सक्रियता को उन्होंने कभी कमज़ोर नहीं होने दिया। उनका मानना था कि एक चित्रकार को सबसे पहले एक आम नागरिक के तौर पर अपनी सामाजिक सरोकार की सक्रियता से कभी नहीं अलग रहना चाहिए।  

कोरोना आपदा काल व लॉकडाउन में मोदी राज द्वारा जनता को महासंकट में असहाय बनाकर धकेल दिए जाने की अमानवीयता ने उन्हें इस क़दर उद्वेलित किया कि लम्बे अरसे के बाद एक बार फिर से अपनी कार्टून कला को सक्रिय कर दिया।                                                             

 bsr. crt. 11.jpg

झारखंड के साथ साथ पूरे देश में कोरोना आपदा के फैलने देने और हर दिन बढ़ते पीड़ितों की दुर्दशा पर तल्ख टिप्पणी से भरे उनके कार्टून हर दिन सोशल मीडिया में आने लगे। जिसे कई अखबारों और वेबसाइटों ने भी प्रमुखता के साथ नियमित रूप से प्रकाशित किया।

केंद्र के निर्देश पर गोदी मीडिया द्वारा तबलीगी ज़मात और उनके निवास मुहल्ला हिन्दपीढ़ी को कोरोना संक्रमण का मुख्य ज़िम्मेवार ठहराकर मुस्लिम समाज के खिलाफ सत्ता प्रायोजित कवायदों का मुखर होकर विरोध किया। इस पर बनाए उनके दर्जनों कार्टून पूरे प्रदेश के साथ साथ राष्ट्रिय स्तर पर भी चर्चित हुए ।   

 bsr. crt 1.jpg

अपनी मौत से चंद दिनों पूर्व तक अपने कार्टूनों के जरिये उन्होंने कोरोना महामारी रोकने में विफल और ‘आपदा को अवसर में बदलने’ का नारा देकर अपने जन विरोधी एजेंडों को खुलकर लागू कर रही वर्तमान केंद्र सरकार की कारगुजारियों पर निरंतर तल्ख़ टिपण्णी करते रहे।           

लॉकडाउन बंदी और उसके बाद तथाकथित अनलॉक बंदी से त्रस्त और बदहाल जनता की पीड़ा और विक्षोभ को निरंतर मुखर स्वर दिया।

11 अगस्त को भाकपा माले, एआईपीएफ़, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच समेत कई अन्य वामपंथी, सामाजिक और सामाजिक संगठनों द्वारा रांची के अंजुमन हॉल में आयोजित ‘बशीर स्मृति’ कार्यक्रम के माध्यम से झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार से उन्हें विशेष सम्मान देने की भी मांग की गयी। शोक व्यक्त करने वालों में भाकपा माले, सीपीएम, सीपीआई व मासस के वाम नेताओं के अलावा पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, कई पुरस्कारों से सम्मानित चर्चित फिल्मकार श्रीप्रकाश, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के प्रेमचन्द मुर्मू , आन्दोलनकारी दयामनी बारला, झारखंड बार काउन्सिल के एडवोकेट ए के राशिदी, हॉफमैन लॉ नेटवर्क के फादर महेंद्र पीटर तिग्गा, झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता मंडल के एजाज़ खान , पूर्व राज्य आदिवासी सलाहकार समिति सदस्य रतन तिर्की समेत कई अन्य महत्वपूर्ण लोग शामिल हुए । जाने माने अर्थशाश्त्री ज्यां द्रेज़ व वरिष्ठ फिल्मकार मेघनाथ तथा चर्चित झारखंड आन्दोलनकारी नेता सूर्य सिंह बेसरा समेत कईयों के भेजे शोक सन्देश भी पढ़े गए।

bashir smriti 2_0.jpg

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी वक्ताओं ने वर्तमान कि चुनौतिपूर्ण संकट की स्थिति में बशीर अहमद जैसे सामाजिक आन्दोलनकारी और जनपक्षधर कार्टूनिस्ट के असामयिक निधन को लोकतंत्र और सामाजिक साझी एकता के लिए अपूर्णीय क्षति बताया। बशीर जी की दृढ़ मान्यता रही कि जब तक संघर्ष है, वामपंथ ज़रूर रहेगा।

Jharkhand
Bashir Ahmed passed away
cartoonist

Related Stories

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

झारखंड:  रेलवे ठेकदार द्वारा खोदे गड्ढे में डूबकर गांव की 7 बच्चियों की मौत

मेघालय और झारखंड में खदान दुर्घटना में आठ लोगों की मौत, चार लापता

झारखंड : विवादित विधानसभा भवन में लगी आग

राम के नाम पर दुनिया में कर दिया बदनाम

झारखंड: बिरसा मुंडा की मूर्ति तोड़े जाने से झारखंडी समाज में आक्रोश

झारखंड विधान सभा चुनाव 2019 : भूख से मरनेवालों की बढ़ती कतार !

झारखंड : लोकसभा चुनाव : प्रवासी मजदूरों का दर्द नहीं बन सका मुद्दा

भौंरा गोलीकांड : निजी कोलियरी के दौर की दबंगई की वापसी

झारखंड हिंडाल्को हादसा: कौन है इसका ज़िम्मेदार?


बाकी खबरें

  • Omprakash
    राज वाल्मीकि
    ओमप्रकाश वाल्मीकि सिर्फ़ दलित लेखक नहीं, राष्ट्रीय हिंदी साहित्यकार हैं: डॉ. एन. सिंह
    18 Nov 2021
    ओमप्रकाश वाल्मीकि ने ‘दलित साहित्य का सौन्दर्य शास्त्र’ लिखकर उन सवर्ण आलोचकों को जवाब दिया था, जो दलित साहित्य में शिल्पकला की कमी बताते थे।  उनकी कहानियों में ‘अम्मा’, ‘बिरम की बहू’, ‘सलाम', '…
  • israel
    पीपल्स डिस्पैच
    फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ़ नई बसाहटों वाले इज़रायलियों द्वारा 451 हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया गया
    18 Nov 2021
    यह आंकड़े शुरूआती 2020 के बाद के हैं, मानवाधिकार समूह बी सेलेम का कहना है कि नई बसाहटों वाले इज़रायलियों द्वारा किए जाने वाले हमलों को इज़रायल द्वारा एक उपकरण के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, ताकि…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    स्टैंड अप कॉमेडियन वीर दास पर एक बार फिर भड़के दक्षिणपंथी संगठन
    18 Nov 2021
    वीरों की भूमि हिंदुस्तान में दो “वीर” आजकल काफ़ी चर्चे में चल रहे हैं। एक आज़ादी से पहले के वीर, एक आज़ादी के बाद के वीर। ये दो वीर हैं “वीर सावरकर” और “वीर दास”।
  • chennai floods
    नीलाबंरन ए
    चेन्नई की बाढ़ : इस अव्यवस्था के लिए कौन ज़िम्मेदार है?
    18 Nov 2021
    विशेषज्ञों का मानना है कि भारी जल निकासी के डिज़ाइन में तकनीकी ख़ामियों, शहरीकरण के कारण प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था के ख़ात्मे और जल निकायों पर अतिक्रमण की वजह से चेन्नई में हर तरफ जलभराव की स्थिति…
  • COP 26
    एम. के. भद्रकुमार
    COP 26: भारत आख़िर बलि का बकरा बन ही गया
    18 Nov 2021
    विकसित देशों का सारा गेम प्लान भारत और चीन पर कोयले के उपयोग में कमी लाने पर फिर से रजामंद करने और इसके जरिए अगले साल संयुक्त राष्ट्र की आगामी बैठक तक कार्बन उत्सर्जन में कटौती लाने के लिए उन पर दबाव…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License