NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लखीमपुरः योगी राज के लिए दावानल बन सकती है किसानों की मौत
बात बोलेगी: हिंसा और प्रतिशोध और वह भी अपने ही देश के नागरिकों के प्रति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित नये भारत का नया नार्मल होता जा रहा है। ऐसा लगता है सरकारों ने अपने लोगों-नागरिकों के ख़िलाफ़ ही जंग छेड़ दी है।
भाषा सिंह
04 Oct 2021

उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी, किसान आंदोलन के लिए ही नहीं भारतीय लोकतंत्र के लिए एक और टेस्ट केस बन गया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के कार्यक्रम में विरोध करके-काले झंडे दिखा कर लौट रहे किसानों के ऊपर जिस तरह गाड़ी चढाई गई, किसानों की मौत हुई—उससे यह बात साफ हो गई है कि सरकारें प्रतिशोध की जो राजनीति कर रही हैं—उसने माहौल को बेहद हिंसक और अराजक बना दिया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी का 25 सितंबर, 2021 को यह बोलना कि वह मिनटों में किसानों को सबक सिखा देंगे, बिल्कुल हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रतिशोध से भरे बयान से मिलता है—जिसमें वह किसानों पर हमला करने और उसके लिए जेल तक जाने की नसीहत अपने लोगों को देते हैं।

हिंसा और प्रतिशोध और वह भी अपने ही देश के नागरिकों के प्रति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित नये भारत का नया नार्मल होता जा रहा है। ऐसा लगता है सरकारों ने अपने लोगों-नागरिकों के खिलाफ ही जंग छेड़ दी है।

फिलहाल, किसानों को कुचलना, उन पर हमला योगी सरकार के लिए भारी पड़ सकता है, क्योंकि जिस तरह से घटना के बाद सरकारी लीपापोती की गई, उसने किसानों के गुस्से में आग में घी डालने का काम किया है।

लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को निघासन तहसील के कस्बा तिकुनिया में किसानों के ऊपर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे की कार चढ़ाने से जो खून बहा, उसने पूरे इलाके को राजनीतिक रूप से सरगर्म कर दिया है। कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी को तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने यहां पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया, लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत यहां पहुंच गये और उन्होंने दो-टूक शब्दों में अपनी मांगों को सूत्रबद्ध कर दिया। किसानों की मांग है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को गिरफ्तार किया जाए और अजय मिश्र को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए। किसानों का कहना है कि आशीष की गिरफ्तारी के बाद ही शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। चारों किसानों की लाशों को सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन जारी है।

तमाम हंगामे के बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर आखिरकार एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। उनके खिलाफ कई चश्मदीद गवाहों ने पूरे वाकये को खुलकर बयान किया, जिसके बाद उन्हें बचाने के लिए कल यानी 3 अक्टूबर 2021 से जो कोशिशें चल रही थीं, जिसमें मीडिया का एक बड़ा तबका भी शामिल था, वे फिलहाल बहुत कामयाब होती नहीं दिख रहीं। हालांकि अभी भी मामला बराबरी का दिखाने की कवायद भरपूर चल रही है, जिसमें जाने-माने पत्रकार ट्विटर समेत बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसानों द्वारा की गई हिंसा के एक दो फुटेज लेकर सियापा कर रहे हैं। उनकी बातें सुनकर लगता है कि मानो वे कह रहे हैं कि जब मंत्री का बेटा गाड़ी किसानों पर चढ़ा रहा था, किसान मर रहे थे—तब भी भला किसानों को गुस्सा क्यों आया—उन्हें तो बिल्कुल शांत रहकर अपने साथियों को अपने साथ ही तड़पते हुए मरते देखना चाहिए था। किसानों का गुस्सा आना अपराध है, गाड़ी को नेता का बेटा जब भी मन आए यूं ही रौंदता रहता है। यहां पर कभी ज़ी न्यूज, आजतक तो कभी दैनिक जागरण में पीत पत्रकारिकता करने की होड़ सी लगी हुई थी। जिस तरह से दैनिक जागरण ने किसानों के खिलाफ स्टोरी की, उससे गुस्साए लोगों ने कई जगहों पर दैनिक जागरण अखबार की प्रतियां जलाकर आक्रोश व्यक्त किया।

लखीमपुर में भाजपा नेता की गाड़ियों ने सिर्फ किसानों की ही जान नहीं ली, बल्कि एक पत्रकार को भी मार दिया। साधना न्यूज चैनल के साथ जुड़े निघासन के पत्रकार रमन कश्यप घटनास्थल पर वीडियो बना रहे थे, जब उन्हें भी पीछे से गाड़ी ने टक्कर मार दी और वह खाई में गिर गये, जिससे उनकी मौत हो गई। स्थानीय पत्रकार संगठनों ने मौत पर आक्रोश व्यक्त करते हुए योगी सरकार ने पत्रकार के परिवार को मुआवजा और पत्नी को नौकरी देने की मांग की है। जिस तरह से चार किसानों की मौत के अलावा कुल आठ लोगों की मौत पर राजनीतिक दलों ने विरोध जताया, उसकी वजह से योगी सरकार ने दबाव में आकर एफआईआऱ दर्ज की, मुआवजे की घोषणा की, लेकिन अभी गिरफ़्तारियां नहीं हुई हैं।

उधर किसान आंदोलन के खिलाफ माहौल बनाने और इसमें अदालत का सहारा लेने का दांव भी चला जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा कि जब तीन कृषि कानूनों पर मामला कोर्ट में लंबित है तब किसान आंदोलन क्यों कर रहे हैं। ये सारी बातें देश की सर्वोच्च अदालत में ऐसे हो रही हैं, जैसे उसे पूरे मामले का संज्ञान ही न हो। जबकि किसान आंदोलन का संचालन कर रही समिति-संयुक्त किसान मोर्चा इस बाबत अपना स्टैंड स्पष्ट कर चुका है कि कृषि कानून पर अभी सिर्फ और सिर्फ स्टे यानी रोक है, उन्हें रद्द नहीं किया गया है। यह रोक किसी भी क्षण हटाई जा सकती है। किसान आंदोलन का जो सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है-जिसके तहत देश भर के अलग-अलग राज्यों से किसान संगठन-यूनियन-जत्थेबंदियां जुड़ी हुई हैं—वह है संयुक्त किसान मोर्चा—उसने सुप्रीम कोर्ट का कभी दरवाजा नहीं खटखटाया। संयुक्त किसान मोर्चा शुरू से यह कहा रहा है कि तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का काम केंद्र की मोदी सरकार का है। वह सिर्फ राजनीतिक चैनल के जरिये इस समस्या का समाधान निकालना चाहता है, लिहाजा वह अदालत से किसी भी तरह की अपेक्षा नहीं करता और न ही उसे इस पूरी लड़ाई में कोई पार्टी—स्टेकहोल्डर मानता है। वहीं एक बड़ा मुद्दा यह भी है, जिसकी ओर किसान नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता वाले मामले वाला जो केस सुप्रीम कोर्ट में दर्ज भी है, उसकी सुनवाई के लिए भी देश की सर्वोच्च अदालत को एक मिनट का समय नहीं मिला है।

(भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Lakhimpur Kheri
Lakhimpur Kheri Update
kisan andolan
Yogi Adityanath
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    आज़मगढ़: फ़र्ज़ी एनकाउंटर, फ़र्ज़ी आतंकी मामलों को चुनावी मुद्दा बनाया राजीव यादव ने
    05 Mar 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने आज़मगढ़ की निजामाबाद विधानसभा का हाल लिया। बात की निर्दलीय उम्मीदवार, रिहाई मंच के एक्टिविस्ट राजीव यादव से, जिन्होंने आज़मगढ़ में फ़र्ज़ी एनकाउंटर और…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार: सहरसा में पंचायत का फरमान बेतुका, पैसे देकर रेप मामले को रफा-दफा करने की कोशिश!
    05 Mar 2022
    रेप की घटना को पंचायत ने रफा-दफा करने के लिए अजीबोगरीब फैसला सुनाते हुए आरोपी युवक को पीड़ित परिवार को 70 हजार रुपए देने को कहा। साथ ही समझौते के जरिए मामले को दबाने की बात भी सामने रखी।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार बजट सत्र: विधानसभा में उठा शिक्षकों और अन्य सरकारी पदों पर भर्ती का मामला 
    05 Mar 2022
    भाकपा माले के विधायक मनोज मंजिल ने सदन में कहा, "तीन साल में मात्र 37 हज़ार शिक्षकों की बहाली की है। पूरे बिहार में साढ़े तीन लाख पद खाली पड़े हैं। नौजवानों की जवानी बर्बाद हो जा रही है। ये सरकार…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव : काशी का माँझी समाज योगी-मोदी के खिलाफ
    05 Mar 2022
    यूपी चुनाव: वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों का दीदार करने के लिए देश-विदेश से सैलानी वाराणसी आते है और इन घाटों पे सैलानी नाव में यात्रा करते हैं। यहाँ के नाव चालक यानी नाविक माँझी समाज से है। वाराणसी में…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: वोट की चिंता ख़त्म होते ही बढ़ सकती है आपकी चिंता!
    05 Mar 2022
    हर जानकार यही कह रहा है कि चुनाव ख़त्म होगा तो वोट की चिंता ख़त्म होगी। वोट की चिंता ख़त्म होगी तो कीमतें अपने आप बढ़ जाएंगी। आम आदमी पर महंगाई कहर बनकर टूटने लगेगी। देखते जाइए आगे-आगे होता है क्या।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License