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स्वास्थ्य
भारत
लॉकडाउन: 30 लाख थालियों तक भोजन पहुंचाने की कोशिश में ‘कारवां ए मोहब्बत’
"आज हमें अपने आसपास रह रहे सभी जरूरतमंद लोगों के साथ खड़े होने की ज़रूरत है। किसी को भी भूखे पेट न सोना पड़े, हमें इसका ध्यान रखना चाहिए।”
कारवां ए मोहब्बत
14 Apr 2020

कोरोना वायरस के मद्देनजर हुए लॉकडाउन ने देश को अनिश्चितता के अंधकार में धकेल दिया है। करोड़ों लोग इस लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले, दिहाड़ी मज़दूर और फ्लाईओवर के नीचे गुज़र-बसर करने वाले लोगों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे समय में सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की संस्था ‘कारवां ए मोहब्बत’ देशभर में इन पीड़ितों को मुफ्त भोजन-राशन पहुंचा रही है।

संस्था ने लॉकडाउन लागू होने के 10 दिनों के भीतर ही 10 लाख से अधिक थालियों में भोजन पहुंचाया है। कारवां ए मोहब्बत, दिल्ली एनसीआर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक में भी भोजन राशन उपलब्ध करा रही है। इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं और वॉलिंटियर्स का सहयोग लिया जा रहा है।

हर्ष मंदर के मुताबिक ‘कारवां ए मोहब्बत’ के पास हर रोज 200 से अधिक फोन कॉल्स आते हैं जिनमें लोग भोजन और राशन की मांग करते हैं। इन सभी लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए टीम ने राहत प्रक्रिया को तीन भागों में बांटा है।

1. पका हुआ खाना- बेघर लोगों, विकलांग-बुजुर्गों और प्रवासी मजदूरों तक पका हुआ भोजन पहुंचाया जा रहा है।

2. राशन किट- देश के कई हिस्से में राशन किट पहुंचाया जा रहा है। इसमें 5 लोगों के परिवार के 10 दिन के भोजन का हर इंतजाम किया गया है।

3. खाते में सीधे पैसे भेजना- देश के दूर-दराज इलाके में जहां कारवां ए मोहब्बत की टीम या वॉलिंटियर्स नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहां ग़रीबों के यहां सीधे पैसे भेजे जा रहे हैं ताकि वे राशन का तत्काल इंतजाम कर सकें।

हर्ष मंदर के मुताबिक 2011 की जनगणना के अनुसार दिल्ली में 48000 बेघर लोग रहते हैं। ये सभी लोग किसी फ्लाई ओवर के नीचे, पार्क के किनारे, धार्मिक स्थलों के आसपास, रेलवे स्टेशनों और आश्रय गृहों में जीवन व्यतीत करते हैं। यहां कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने का ख़तरा सबसे अधिक है। कारवां ए मोहब्बत इन लोगों का विशेष ध्यान रख रही है।

हर्ष मंदर का कहना है, "आज हमें अपने आसपास रह रहे सभी ज़रूरतमंद लोगों के साथ खड़े होने की जरूरत है। किसी को भी भूखे पेट न सोना पड़े, हमें इसका ध्यान रखना चाहिए। ‘कारवां ए मोहब्बत’ की कोशिश है कि हर एक ज़रूरतमंद को सम्मानजनक रूप से भोजन उपलब्ध कराएं। हमारी टीम दिल्ली में हर रोज औसतन 2000 तथा पूरे देश में तकरीबन 5000 लोगों के पास हर रोज पका हुआ भोजन या राशन किट पहुंचा रही है।"

राशन किट में उपलब्ध हैं ये सामग्री

कारवां ए मोहब्बत द्वारा तैयार किए गए राशन किट में 5 किलोग्राम आटा, 5 किलोग्राम चावल, 2 किलोग्राम दाल, 1 किलोग्राम नमक, 1 किलोग्राम चीनी, 1 लीटर रिफाईन तेल, 100 ग्राम मिर्च पाउडर, 50 ग्राम हल्दी, 50 ग्राम धनिया पाउडर, 50 ग्राम जीरा, एक साबुन और एक डिटर्जेंट बार उपलब्ध है। इन्हें कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव को ध्यान में रखते हुए प्रभावितों के पास पहुंचाया जा रहा है।

30 लाख थालियों में भोजन पहुंचाने का लक्ष्य

देश के कई राज्यों ने लॉक डाउन की सीमा अगले दो हफ्ते के लिए बढ़ा दी है। देशभर में लॉकडाउन की सीमा बढ़ाने पर विचार चल रहा है। ऐसे में कारवां ए मोहब्बत ने 30 लाख थालियों में भोजन पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। ये राहत कार्य लॉकडाउन के बाद भी जारी रखने होंगे क्योंकि लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव का नुक़सान ग़रीब-मजदूरों को उठाना पड़ सकता है।

प्रवासी मजदूरों और दंगा पीड़ितों का रखा जा रहा विशेष ध्यान

लॉकडाउन की घोषणा के तुरंत बाद अचानक से हजारों मजदूर दिल्ली से अपने गांवों की ओर पलायन कर गए, लेकिन अभी भी दिल्ली में प्रवासी मजदूरों की संख्या अच्छी खासी है। कारवां ए मोहब्बत इन मजदूरों को भी भोजन उपलब्ध करा रहा है।

बीते महीने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे ने हज़ारों परिवारों को बेघर कर दिया था। उनकी सारी संपत्ति दंगे की भेंट चढ़ गई थी। कारवां ए मोहब्बत इन दंगा पीड़ित परिवारों के पास राशन किट उपलब्ध करा रही है। हर दिन कम से कम 800 परिवारों के पास राशन किट पहुंचाया जा रहा है।

इसी प्रकार दिल्ली में रह रहे रोहिंग्या और अन्य शरणार्थियों, अकेली महिलाओं, बेसहारा बुजुर्गों, सेक्स वर्कर्स के पास भी कारवां ए मोहब्बत भोजन-राशन उपलब्ध करा रहा है।

लॉकडाउन पर उठते सवाल

हर्ष मंदर ने इस लॉकडाउन की योजना पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार ने ग़रीबों का ध्यान रखे बिना ही लॉकडाउन की घोषणा कर दी। ग़ैर-बराबरी वाले हमारे समाज पर लॉकडाउन के कुप्रभाव के बारे में हर्ष मंदर कहते हैं, "अगर लॉकडाउन को हमारी सरकार, समाज और हम सबने ज़रूरी समझा तो इसमें ग़रीब और अमीर के लिए बराबरी का नियम होना चाहिए था। हमें सोचना होगा कि हमने क्यों इस तरह का देश बनाया है, जहां संकट के वक्त लगता है कि ये एक नहीं बल्कि दो हिन्दुस्तान है। मैं और आप घर में अगर बैठे रहेंगे तीन हफ़्ते तो हमें अपनी तनख़्वाह सुनिश्चित है। हमारे घर में जगह भी है जहां हम साफ रह सकते हैं, हाथ साफ रख सकते हैं, लेकिन बहुत बड़ी आबादी के पास ऐसी कोई सुविधा नहीं है।"

क्राउड फंडिंग से सहयोग की अपील

सरकारी प्रयास नाकाफी होने और प्रभावितों की संख्या काफी अधिक होने के कारण कारवां ए मोहब्बत ने लॉकडाउन से प्रभावितों के पास भोजन-राशन और तमाम जरूरी सामान पहुंचाने के लिए क्राउड फंडिंग का सहारा लिया है। संस्था देश और विदेशों से भी सहयोग की अपील कर रही है और भारी संख्या में लोग फंडिंग कर रहे हैं। अब तक 80 लाख से अधिक रुपये का योगदान लोगों ने इस संस्था को दिया है। इस पर हर्ष मंदर का कहना है, "मानवता के ऊपर एक गंभीर संकट आ गया है। हम सबको इस समय साथ आकर सबसे कमजोर लोगों की मदद करने की जरूरत है। इसलिए अपने सामर्थ्य के अनुसार सबको सहयोग करके इस विपदा से अपने ग़रीब भाई-बहनों को उबारना है।"

आप ‘कारवां ए मोहब्बत’ को अपना आर्थिक सहयोग देने के लिए नीचे के लिंक पर जा सकते हैं:

https://covid19-afpi।ketto।org/fundraiser/help-labourers-and-migrants-in-delhi

COVID
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Coronavirus lockdown
Hunger in India
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