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कोविड-19
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महाराष्ट्र : स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों से लड़ने के लिए दी 'सेल्फ लॉकडॉउन' की सलाह 
महाराष्ट्र में कोविड-19 से संक्रमित होने वाले मरीजों की तादाद में क्यों तेजी से देखी जा रही है। न्यूजक्लिक ने इसकी वजहों को जानने के लिए बहुत सारे स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बातचीत की और आगे के उपायों का आकलन किया। 
अमेय तिरोदकर
06 Apr 2021
महाराष्ट्र : स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों से लड़ने के लिए दी 'सेल्फ लॉकडॉउन' की सलाह 
फोटो सौजन्य: एनडीटीवी 

महाराष्ट्र कोविड-19 के मरीजों की तादाद रविवार 4 अप्रैल को 30 लाख के पार हो गई है, राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पहला मामला 10 मार्च 2020 को सामने आया था। इसके 6 महीने बाद ही कोरोना-पीड़ितों की संख्या 10 लाख से भी अधिक हो गई थी, जबकि इसके अगले 4 महीनों में और 10 लाख लोग संक्रमित हो गए थे। इस साल 2021 की जनवरी से लेकर 4 अप्रैल तक कोरोना-पीड़ितों की संख्या एक बार फिर 10 लाख के ऊपर पहुंच गई है और यह लगातार बढ़ ही रही है।
 
महाराष्ट्र में कोविड-19 के मामलों में तेजी से हो रही यह बढ़ोतरी सभी के लिए चिंताजनक है।  सरकार ने  इसके मुकाबले के लिए रविवार को नए नियम-कायदों की घोषणा की,  जिसके  परिणाम को हम ‘मिनी लॉकडाउन’ कह सकते हैं। गर्मी के इस दूसरे सीजन को भी कोरोना वायरस के नए संक्रमण की चपेट में आने का डर अब वास्तविक  लग रहा है।  

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का विश्वास है कि  कोरोना वायरस से संक्रमण की  तादाद अनेक वजहों से बढ़ी हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण भी हैं।  न्यूज़क्लिक ने इस बारे में कुछ डॉक्टर्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बातचीत की जो इस वायरस से मुकाबले के लिए गठित टास्क फोर्स के हिस्सा हैं और जो इस समस्या को दूसरी तरफ से भी देख पा रहे हैं। 

डॉ गौतम भंसाली मुंबई हॉस्पिटल में प्रैक्टिस करते हैं और वे राज्य सरकार की टास्क फोर्स का भी हिस्सा हैं।  वह मुंबई में सभी निजी अस्पतालों में कोरोना मरीज के लिए बेड सुविधाओं की  देखरेख के प्रभारी हैं।  डॉक्टर भंसाली ने इस मौजूदा परिस्थितियों से निपटने के लिए एक नया मुहावरा गढ़ा है।  

उन्होंने कहा " स्व-लॉकडाउन एकमात्र उपाय है।  हम लोगों के समुद्र के किनारे या और कहीं भी आने-जाने का दोष केवल सरकार पर ही नहीं मढ सकते।  सरकार उनसे  नहीं कहती कि आप यह करो।  इस कोरोना वायरस से मुकाबला करने के लिए लोगों को अपनी गतिविधियों को स्वयं ही नियंत्रित करना है। स्व-लॉकडाउन आवश्यक है।" 

जब डॉक्टर भंसाली से पूछा गया कि कोरोना संक्रमण की बढ़ती तादाद की असल वजह क्या है तो उन्होंने इसे वायरस की दूसरी लहर बताया।  उन्होंने कहा," सभी यूरोपीय देशों ने कोरोना के दूसरी लहर की मार झेली है। चाहे ब्रिटेन हो, इटली, स्पेन या जर्मनी हो।  इस लिहाज से हम उनसे दो से तीन महीने पीछे हैं, कोरोना की पहली और दूसरी लहर, दोनों ही हिसाब से।" 

डॉक्टर भंसाली ने कहा कि महाराष्ट्र और केरल में यह ट्रेंड हम इसलिए पहले देख रहे हैं, क्योंकि ये दोनों राज्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरे जुड़े हुए हैं। "चाहे महाराष्ट्र हो या केरल, आप यहां ज्यादा मरीज पाएंगे, इसलिए कि इन दोनों राज्यों के पास बंदरगाहों, हवाई अड्डों और अंतरराष्ट्रीय परिवहन से जुड़ने के अनेकानेक संसाधन हैं।  यही वजह है कि हम यहां ज्यादा मरीज देखते हैं।  हालांकि,  यह ट्रेंड जल्द ही पूरे देश में देखा जाएगा।  दिल्ली में पहले कुछ सैकड़ों की तादाद में मामले सामने आए थे लेकिन पिछले दो दिनों में संक्रमित लोगों की संख्या हजार पहुंच गई है। वायरस फिर से फैल रहा है"।

डॉक्टर भंसाली ने मुंबई के  आंतरिक हालात के बारे में भी बताया।  उन्होंने कहा, " मुंबई में पिछले साल पहली बार  लॉकडाउन लगा था, जिसके अच्छे नतीजे सामने आए थे।  लेकिन आप एक महानगर को  सदा के लिए बंद तो नहीं रख सकते। 

जीने के लिए लोगों को काम करने की जरूरत होती है,  हमने देखा इस दौरान बाजारों में लोगों की बेतहाशा भीड़ थी। इसने  अनेक स्तरों पर कोविड-19 का संक्रमण फैलाया। हम लोग पहले रोजाना 10 हजार से लेकर 14 हजार लोगों के सेम्पल की जांच भी कर रहे थे।  अब इसकी संख्या बढ़कर 50,000 हो गई है।  यह भी एक कारण है,  जिसमें लोगों के अधिक संक्रमित होने की संख्या का हमें पता चल रहा है।" 

डॉक्टर मंदार कुबल  ने पिछले एक साल में कोविड-19 से संक्रमित हजारों लोगों का इलाज किया है।  वह पूरे मुंबई में  अनेकानेक डॉक्टरों से इस बारे में नियमित स्तर पर विचार विमर्श करते रहे हैं।  उन्होंने बताया, "कोविड-19 के  संक्रमण  में मौजूदा वृद्धि दर  चौतरफा शिथिलता बरतने का नतीजा है।  बाजार में जैसे ही इसकी वैक्सीन आई  और मरीजों की तादाद घटनी शुरू हुई  तो लोगों ने सोच लिया कि अब तो खतरा टल गया है।  लिहाजा,  व्यापक स्तर पर लोगों ने मॉस्क लगाना छोड़ दिया, बाजारों में भीड़ बेतहाशा बढ़ गई और जीवन पटरी पर लौट आया।  लेकिन वायरस अभी भी मौजूद है।  यही सब वजह है, जिनसे कि हम संक्रमित मरीजों की तादाद में तेजी देख रहे हैं।"

डॉक्टर मंदार मानते हैं कि सरकार का घोषित नया नियम-कायदा फिलहाल आवश्यक है। आगे उन्होने कहा " मैं सोचता हूं कि लोगों की गतिविधियों के संदर्भ में नए नियमन या प्रतिबंध राज्य की अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल में संतुलन बैठाने का एक प्रयास है। राज्य सरकार की टास्क कमेटी को रोजाना स्थिति का मूल्यांकन कर उसके मुताबिक नियमन और कड़ा करने या उसमें कुछ छूट देने पर विचार करती है। किंतु मैं सोचता हूं कि  वायरस के फैलाव को रोकने के लिए लोगों को इन नियमों का पालन करना चाहिए।  इस स्थिति से निपटने का कोई एकमात्र उपाय नहीं है।" 
 
समस्या केवल मुंबई तक ही सीमित नहीं है,  यह राज्य के अन्य हिस्सों, जैसे पुणे, नागपुर और नांदेड़ में भी मरीजों की तादाद में तेजी से वृद्धि होती देखी गई है।  राज्य में कुल संक्रमित मरीजों की तादाद की 35 फीसदी अकेले मुंबई में है,  जबकि पुणे में 24 फ़ीसदी,  नागपुर में 18 फीसदी और नांदेड़ में 12 फीसदी है। राज्य के औरंगाबाद, नासिक, अमरावती, कोल्हापुर और  अन्य शहरों में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। 

" ये सभी महाराष्ट्र के औद्योगिक शहर हैं। इनमें परिवहनों की आवाजाही, लोगों के जुटान जैसी गतिविधियां बहुत होती हैं। राज्य के अनेक हिस्सों के लोगों की यहां लगातार आवाजाही होती रहती है। इसीलिए हम इन शहरों में भी कोरोना पीड़ितों की संख्या में इजाफा होते देख रहे हैं।" यह बात राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कही। उन्होंने आगे कहा,"लेकिन पिछले साल और इस वर्ष की स्थिति में एक अंतर है।  हम पहले की तुलना में आज अधिक संसाधन से लैस हैँ। डॉक्टर प्रशिक्षित हैं, दवाओं जैसे सहायक कारक हैं और ऑक्सीजन भी पर्याप्त मात्रा में सुलभ है। इस लिहाजन, पिछले वर्ष की तुलना में इस साल कोरोना से होने वाली मृत्यु दर में गिरावट है।  हमारा फोकस इस दर में और गिरावट लाने का है।" 

न्यूज़क्लिक  ने महाराष्ट्र में निगरानी अधिकारी डॉक्टर प्रदीप आवटे से भी बातचीत की जो संक्रमण-पीड़ित रोगों की देखभाल के प्रभारी हैं। उन्होंने बताया,"जनवरी और फरवरी महीने के दौरान पूरे राज्य में वैवाहिक समारोहों की धूम रही थी। साथ ही, राज्य के 15,000 गांवों में ग्राम पंचायतों के चुनाव हुए थे।  इन अवसरों पर जमा होने वाली भीड़ का वायरस के प्रसार पर बड़ा असर पड़ा था। फिर नागपुर और पुणे  के तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट भी हो गई।  इस समय के दौरान लोगों के जुटान  में  ढील भी दे दी गई थी।  इन्हीं सब कारणों से हम वायरस को तेजी से बढ़ता हुआ देख रहे हैं।" डॉक्टर आवटे ने  बताया कि वायरस के विभिन्न संस्करणों के अन्य कारण हैं। "इनको लैब में जांच करने की जरूरत है।  परंतु मेरा विश्वास है कि यह कई कारणों में से एक कारण हो सकता है।"

डॉक्टर आवटे के मुताबिक,  वायरस से मुकाबला करने के लिए राज्य सरकार को अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाने की आवश्यकता है। "हमारा दृष्टिकोण फिलहाल अस्पताल-केंद्रित है।  किंतु इसको बदलकर सर्वेक्षण-केंद्रित करने की आवश्यकता है।  वायरस के बारे में अधिक से अधिक जानकारी के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा सर्वेक्षण करने की जरूरत है। अगर हमने ऐसा किया तो हमारे अस्पताल पर कोरोना मरीजों के लेकर दबाव नहीं रहेगा।" 

अब तो यह स्पष्ट हो गया है कि महाराष्ट्र कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहा है।  सामाजिक जुटान के विरुद्ध कड़े नियमों के क्रियान्वयन और मरीजों से संबंधित त्वरित जानकारी तथा आम लोगों का ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण, वायरस  के प्रसार की  रफ्तार को कम करने में मददगार होगा। सरकार को इस  लक्ष्य को हासिल करने के लिए संकल्पित होना ही होगा।  

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

Maharashtra: Health Experts Call for 'Self Lockdown' to Stem COVID-19 Rise

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