NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
भारत
राजनीति
मिशन यूपी : आगामी चुनाव में बीजेपी के ख़िलाफ़ प्रचार करेंगे किसान
तीन कृषि क़ानूनों और आगामी चुनावों में बीजेपी का विरोध करने के लिए राज्य भर में क़रीब 18 रैलियाँ की जाएंगी।
अब्दुल अलीम जाफ़री
27 Jul 2021
मिशन यूपी : आगामी चुनाव में बीजेपी के ख़िलाफ़ प्रचार करेंगे किसान

40 से ज़्यादा किसान यूनियनों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार 26 जुलाई को लखनऊ प्रेस क्लब से किसान आंदोलन के 8 महीने पूरे होने पर उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव के लिए 'मिशन यूपी' का ऐलान किया।

एसकेएम के वरिष्ठ नेताओं योगेंद्र यादव, राकेश टिकैत, मुकुट सिंह और दर्शन पाल ने सभी किसानों से एक खुला ख़त पेश कर भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) को वोट न देने का अनुरोध किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को आश्वासन दिया था कि उनकी सरकार गेहूं का एक-एक दाना तब तक खरीदेगी जब तक कि किसान अपनी उपज बेचने में रुचि नहीं दिखाते। लेकिन, यह कोरी बयानबाजी साबित हुई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में इसी अवधि में राज्य में गेहूं की खरीद 308 लाख मीट्रिक टन (LMT) थी, और विडंबना यह है कि कुल सरकारी खरीद सिर्फ 56 लाख मीट्रिक टन है – जो इस साल की कुल अनुमानित उत्पादन का सिर्फ़ 18% है। सरकार ने आज तक एक भी क्विंटल दाल, सरसों, मसूर, चना और मक्का की खरीद नहीं की है। राज्य सरकार के रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के अधिकांश किसान अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे बेचने को मजबूर हैं।" उन्होंने आगे यह भी बताया कि केंद्र के एगमार्केट पोर्टल के अनुसार जुलाई 2020 तक यूपी में गेहूं ख़रीदने की औसत क़ीमत 1,884 रुपये थी, जो एमएसपी से भी 91 रुपये कम है।

उन्होंने कहा कि 8 महीने तक कड़ी सर्दी, तपाने वाली गर्मी और बारिशों के बाद एसकेएम ने यूपी के हर व्यक्ति तक पहुँच कर आंदोलन को तेज़ करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया, "मिशन यूपी के दौरान, हरियाणा और पंजाब के किसान सादकों पर आएंगे और किसानों में जागरूकता पैदा करने के लिए कई कार्यक्रम करेंगे। वह 75 ज़िलों में रैली और महापंचायतें भी करेंगे।"

जब न्यूज़क्लिक ने पूछा कि एसकेएम पूर्वांचल क्षेत्र में किसानों के मुद्दों को कैसे संबोधित करेगा, जहां खेती करने वालों का एक बड़ा हिस्सा भूमिहीन है और नए क़ानूनों से अनजान है, यादव ने कहा कि उनके स्वयंसेवक, "जो पिछले आठ महीनों से सीमा पर डेरा डाले हुए हैं, जल्द ही किसानों के बीच जाएंगे और अपना अभियान शुरू करेंगे। वे क़ानूनों में खामियों के बारे में बात करेंगे और आवारा जानवरों, पानी की आपूर्ति, उर्वरक, बीज, रसायन और बिजली की क़ीमत जैसे उनके मुद्दों को भी संबोधित करेंगे, जो छोटे किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता है।"

यादव ने यह भी कहा कि किसान संगठनों को 8 महीने क्या, यह भी नहीं लगा था कि आंदोलन 8 दिन भी चल पाएगा। उन्होंने कहा, "इस आंदोलन से किसानों का आत्म-सम्मान वापस आया है और सरकार भी किसानों की ताक़त को पहचान गई है।"

भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यूपी चल रहे किसान आंदोलन के लिए अगला प्रमुख गंतव्य होगा और उन्हें  पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर से 5 सितंबर को बड़े पैमाने पर 'किसान महापंचायत' के साथ मिशन की शुरूआत करने की उम्मीद है। तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ और आगामी चुनावों में भाजपा के विरोध में राज्य भर में कम से कम 18 रैलियां की जाएंगी।

टिकैत ने सरकार को चेतावनी दी कि वह किसानों को हल्के में न ले, उन्होंने यह भी कहा कि वह लखनऊ को भी दिल्ली बना देंगे और राज्य की राजधानी के लिए आने वाली हर सड़क को किसान "जाम कर देंगे"।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हम लखनऊ को दिल्ली में बदल देंगे और राज्य की राजधानी के सभी रास्ते बंद कर दिए जाएंगे। यूपी हमेशा से आंदोलन का गढ़ रहा है। हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि तीनों क़ानून निरस्त नहीं हो जाते।"

राज्य में किसानों की समस्या पर विस्तार से बताते हुए, बीकेयू नेता ने आगे कहा, "राज्य में चार साल से गन्ना ख़रीद की दर नहीं बढ़ाई गई है, 12,000 करोड़ रुपये अभी भी किसानों का बकाया है। किसानों के लिए बिजली मुफ्त है हरियाणा और पंजाब सहित कई राज्यों में, लेकिन यूपी में, बिजली की दरें सबसे अधिक हैं। यूपी गुजरात बंता जा रहा है, जो पुलिस द्वारा चलाया जाता है, न कि सरकार द्वारा।" उन्होंने आगे कहा कि मूंग उगाने वाले किसानों को अपनी फसल सस्ते में बेचने को मजबूर होना पड़ा जबकि आलू किसान बर्बाद हो गए।

एसकेएम के वरिष्ठ नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि यूपी के किसानों के सामने आने वाले मुद्दे पंजाब और हरियाणा में किसानों के सामने आने वाले मुद्दों से अलग हैं। राज्य में आवारा पशुओं की समस्या ने किसानों के लिए और मुसीबत खड़ी कर दी है। उन्होंने कहा, "सरकार ने गौ कल्याण उपकर लगाया और इसके लिए टैक्स लिया लेकिन इस मुद्दे को हल नहीं किया। गायों के प्रति उनका प्यार का भी पर्दाफ़ाश हो गया है।"

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करें।

'Mission UP': Farmers to Campaign Against BJP in Upcoming Polls

Farm Laws
Farmers Protests
SKM
Mission UP
Lucknow Press Club
UP Farmers
Muzaffarnagar Mahapanchayat
yogendra yadav

Related Stories

क्यों मिला मजदूरों की हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

"जनता और देश को बचाने" के संकल्प के साथ मज़दूर-वर्ग का यह लड़ाकू तेवर हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ है

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा


बाकी खबरें

  • जी-7 कॉर्पोरेट टैक्स डील – कर-राजस्व को कम करने और बहुराष्ट्रीय निगमों की लूट का सौदा?
    शिन्ज़नी जैन
    जी-7 कॉर्पोरेट टैक्स डील – कर-राजस्व को कम करने और बहुराष्ट्रीय निगमों की लूट का सौदा?
    12 Jun 2021
    जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों ने बड़े बहुराष्ट्रीय समूहों के कर परिहार से निबटने के लिए  एक समझौते पर सहमति व्यक्त की है। इस समझौते पर जी-20 देशों की क्या प्रतिक्रिया होगी और इन योजनाओं को कैसे लागू…
  • बांका मदरसा बम विस्फोट मामला
    मुकुंद झा
    बांका मदरसा बम विस्फोट मामला: "मदरसों को आतंकवाद का केंद्र बताकर भाजपा सांप्रदायिक नफ़रत फैलाना चाहती है"
    12 Jun 2021
    बीजेपी इस पूरे मामले को अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए सांप्रदायिक रंग दे रही है और मुस्लिम समाज के प्रति नफ़रत फैला रही है। विपक्ष ही नहीं सत्ता में उसकी सहयोगी और उसके अधीन आने वाला प्रशासन भी उनकी…
  • तमिलनाडु: लॉकडाउन और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच पिसते ऑटो चालक
    नीलाबंरन ए
    तमिलनाडु: लॉकडाउन और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच पिसते ऑटो चालक
    12 Jun 2021
    कोरोना की दूसरी लहर को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन ने कई ऑटोरिक्शा चालकों की रोजी-रोटी मुश्किल कर दी है। जहां एक तरफ़ उनकी आमदनी कम हुई है, वहीं दूसरी तरफ ऑटो क
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 84,332 नए मामले, लेकिन फिर 4 हज़ार से ऊपर मौत
    12 Jun 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 84,332 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में संक्रमण से पीड़ित 95 फ़ीसदी से ज़्यादा यानी 2 करोड़ 79 लाख 11 हज़ार 384 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • बैंक यूनियन ने किया निजीकरण का विरोध, 'राष्ट्र और उसके लोगों' को बताया पीएसबी का असली मालिक
    रौनक छाबड़ा
    बैंक यूनियन ने किया निजीकरण का विरोध, 'राष्ट्र और उसके लोगों' को बताया पीएसबी का असली मालिक
    12 Jun 2021
    राष्ट्रीय मीडिया हाल ही में विनिवेश पर सचिवों के कोर ग्रुप को नीति आयोग की तरफ़ से उन सार्वजनिक बैंकों के नामों का सुझाये जाने वाली ख़बरों से भरा पड़ा था जिनका निजीकरण किया जाना है। इसने बैंक इम्पलॉई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License