NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मोदी की काशी यात्रा: बदहाल ‘विकास’ की हक़ीक़त परदे से ढांपने की कोशिश
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के समय नौकरशाही ने बनारस शहर के चेहरे पर चस्पा दाग़ को ढंकने के लिए पूरे शहर में जगह-जगह पैबंद लगा दिए। जितने भी खुले नाले थे, जिसकी बदबू और सड़ांध से समूचा शहर परेशान रहता है, उसे छिपाने के लिए कई स्थानों पर कनात लगाकर घेर दिया गया।
विजय विनीत
15 Jul 2021
मोदी की काशी यात्रा: बदहाल ‘विकास’ की हक़ीक़त परदे से ढांपने की कोशिश

कोविडकाल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली मर्तबा बनारस आए तो नौकरशाही ने समूचे शहर में कथित विकास की हक़ीक़त पर परदे का पैबंद लगा दिया। पीएम संसद में बनारस का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह आज, 15 जुलाई को पूर्वाह्न बनारस आए और बटन दबाकर 1475 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इसी दरम्यान उन्होंने सिगरा में बहुचर्चित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन भी किया।

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के समय नौकरशाही ने बनारस शहर के चेहरे पर चस्पा दाग को ढंकने के लिए पूरे शहर में जगह-जगह पैबंद लगा दिए। जितने भी खुले नाले थे, जिसकी बदबू और सड़ांध से समूचा शहर परेशान रहता है, उसे छिपाने के लिए कई स्थानों पर कनात लगाकर घेर दिया गया। खासतौर पर सिगरा से लेकर फातमान रोड तक। यहां से गुजरने वाले नाले जहां खुले थे, सभी स्थानों पर कनात का पैबंद लगवाया गया था।

यही नहीं, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के उत्तरी छोर पर स्थित नाले से बहती गंदगी और सड़ांध शहर के लोगों का जीना मुहाल करती रही है। इस नालों को भी नौकरशाही ने पूरी तरह ढंकवा दिया था। यह वही नाला है जो बारिश के दिनों में फुंफकार मारता है। बारिश का पानी जमा होता है तो समूचा तेलियाबाग और आसपास के सभी इलाके ताल-तलैया में बदल जाते हैं।

सरकारी नुमाइंदों ने बनारस के कथित विकास पर सिर्फ यहीं पैबंद नहीं लगाया, संपूर्णानंद स्टेडियम के पास भी कनात लगाकर गंदगी और शहर की बदहाली ढंकने की कोशिश की।

पीएम के दौरे के बाद कथित स्मार्ट सिटी पर तंज सकते हुए बनारस के जाने-माने पत्रकार प्रदीप कुमार कहते हैं, “हकीकत को छिपाने और पीएम मोदी को भरमाने के लिए नौकरशाही ने परदा लगाने की ओछी हरकत की है। हमें लगता है कि नौकरशाही नहीं चाहती है कि प्रधानमंत्री सच देखें। उनकी यात्रा का फरमान आते ही अफसरों की मोहनी विद्या का ट्रायल शुरू हो जाता है। इनका जादू दोतरफा चलता है। नौकरशाही एक ओर जनता पर टोना करती है, दूसरी ओर प्रधानमंत्री को नजरबंद कर देती है। विकास के सच पर कनात का पैबंद लगा देती है। जहां पानी नहीं, वहां समुद्र दिखा देती है। जहां हरियाली नहीं, वहां जंगल दिखा देती है। जहां दीया नहीं, वहां लेजर लाइट लगवा देती है। प्रधामंत्री के जाते ही हरे-भरे गमलों को लुटवा देती है, ताकि नौकरशाही के घपले-घोटाले पकड़े ही न जाएं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस आए तो उन्होंने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का लोकार्पण करते हुए कहा,  “रुद्राक्ष जापान-भारत की दोस्ती के प्रतीक है। काशी तो साक्षात् शिव ही है। पिछले सात सालों में इतनी सारी विकास परियोजनाओं से काशी का श्रृंगार हो रहा है, तो ये श्रृंगार बिना रुद्राक्ष के कैसे पूरा हो सकता था? अब जब ये रुद्राक्ष काशी ने धारण कर लिया है, तो काशी का विकास और ज्यादा चमकेगा, और ज्यादा काशी की शोभा बढ़ेगी।”

कन्वेंशन सेंटर पर उठ रहे सवाल

मोदी ने जिस रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का लोकार्पण किया, उसे लेकर कई तरह के विवाद हैं। जिस स्थान पर इसका निर्माण कराया गया है वह नगर निगम की संपत्ति है। यहां पहले नगर निगम का प्रेक्षागृह था। नगर निगम के मिनी सदन का हाल भी यहीं मौजूद था। हैरत की बात यह है कि भाजपा सरकार और उसकी मशीनरी ने कथित विकास के धुन में नगर निगम के सभासदों की सहमति लेने की जरूरत ही नहीं समझी। शहर में जब भी कोई विकास होता है, उस पर मिनी सदन में चर्चा जरूरी है। जब से नरेंद्र मोदी बनारस के सांसद बने हैं तब से मनमाने ढंग से विकास कार्य हो रहा है। किसी भी योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले बनारसे के मिनी सदन में कोई चर्चा नहीं होती। शहर के सभासदों का काम सिर्फ गली मोहल्लों में जाम सीवर को खोलने के लिए फराटी लेकर दौड़ने तक सीमित हो गया है।

रुद्राक्ष आमजन के लिए नहीं!

मिनी सदन में कांग्रेस सभासद दल के नेता सीताराम केसरी कई महीने से पीएम नरेंद्र मोदी समेत देश भर के नेताओं को चिट्ठी भेजकर रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कार्य रुकवाने की मांग कर रहे थे। केसरी बताते हैं, “जिस स्थान पर रुद्राक्ष बना है वह नगर निगम की संपत्ति है। मिनी सदन की अनुमति के बगैर इस संपत्ति पर कोई निर्माण कार्य नहीं हो सकता था। रुद्राक्ष के निर्माण से लेकर लोकार्पण तक में बनारस शहर के सदस्यों की सहमति नहीं ली गई। सभासदों को मिनी सदन चलाने के लिए जहां-तहां ठौर तलाशना पड़ रहा है। रुद्राक्ष बनने से पहले जनता को सब्जबाग दिखाया गया था कि यह सबके लिए है, लेकिन “रूप की रानी” सरीखे इस सेंटर में आम आदमी जा पाएगा, इसमें संदेह है।”

मोदी द्वारा लोकार्पित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर उस स्थान पर बनाया गया है जहां पहले नगर निगम का प्रेक्षागृह और मिनी सदन था। जब तक यहां प्रेक्षागृह था तब तक वहां सामान्य व्यक्ति आसानी से चला जाता था। निजी आयोजन के लिए भी हाल बुक करा लेता था। अब इसके लिए मोटी फीस देनी होगी। रुद्राक्ष में अगर कोई कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा तो समूचा शहर जाम में जकड़ जाएगा, क्योंकि यहां वाहनों के निकलने के लिए कोई कायदे का रास्ता नहीं है। बात समझने की है, बीमारी का इलाज ढूंढा ही नहीं गया और बुलंद इमारत खड़ी कर दी गई।

बनारस के विकास पर तंज कसते हुए सपा के एमएलसी आशुतोष सिन्हा कहते हैं, “अगर कुछ बनाना ही था तो ऐसा हाल बनवाते जो सामान्य जन के लिए उपयोगी होता। इतना हाईफाई और विलासितापूर्ण कन्वेंशन सेंटर बना दिया गया है कि वह आम आदमी के लिए निरर्थक ही रहेगा। बड़ी बात यह है कि इस सेंटर को स्मार्ट सिटी की कंट्रोलिंग अथॉरिटी के अधीन कर दिया है। नगर निगम का अधिकार और हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के लिए मिनी सदन का हाल तो तोड़ दिया, लेकिन वादे के मुताबिक सभासदों के लिए कोई दूसरी जगह मुहैया नहीं कराई गई। ये कैसा विकास है कि चुने हुए बनारस के जनप्रतिनिधियों को कभी टाउनहाल के हाल में तो कहीं पेड़-पौधों के नीचे मिनी सदन की बैठकें करनी पड़ रही हैं।”

बनारस के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में पौधरोपण करते प्रधानमंत्री मोदी

“थोथा है मोदी के विकास का नारा”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद राजेश मिश्र कहते हैं, “मोदी के विकास का नारा थोथा है। इनकी घोषणाएं झूठा सब्जबाग दिखाने वाली हैं, जनता का हित साधने वाली नहीं। पहले मिनी सदन की बैठक में बनारस के हर विकास कार्य पर चर्चा होती थी। वहीं बैठकर नीतियां तय होती थी। जनसुविधाओं के बारे में योजनाएं बनती थी, जिसे मोदी ने खत्म कर दिया। नगर निगम की जगह हथियाने से पहले सभासदों से पूछा तक नहीं गया। कोई यह बताने वाला नहीं कि यह रुद्राक्ष जनसामान्य को आखिर कौन सा लाभ देगा?”

बनारस के सिगरा में जिस स्थान पर रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर बनाया गया है, उसके पीछे पहले कूड़ा ढोने वाली गाड़ियां खड़ी होती थीं। अब इन गाड़ियों को जल संस्थान परिसर के पास खड़ा कराया जा रहा है। कूड़ा ढोने वाली सभी गाड़ियां जिन जगह खड़ी की जा रही हैं वहां जल संस्थान का तालाब है। यहीं गंगा का पानी स्टोर किया जाता है और बाद में नलों के जरिये उसकी आपूर्ति की जाती है। इसी पानी से बनारस शहर के अस्सी फीसदी हिस्से की प्यास बुझती है। साफ-सफाई का नारा बुलंद करने वाले भाजपा नेताओं को इस बात से मतलब नहीं कि गंदगी से सने वाहन उस जगह खड़े हो रहे हैं जहां का पानी समूचा शहर पीता है।

पूर्व विधायक अजय राय सवाल करते हैं, “ मोदी का यह मॉडल विकास का है या विनाश का? गुजरात के बाद मोदी ने काशी को “बनारस मॉडल” का दर्जा दे दिया है। यह तो शहर के लोगों की जिंदगी से खेलने वाला मॉडल है। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर उस स्थान पर बनवा दिया गया जहां नगर निगम के सैकड़ों डंफर व कूड़े की गाड़ियां खड़ी होती थीं। जल संस्थान परिसर में कूड़ा गाड़ियों का ग्राउंड बनाया जाना कहां लाजमी है? विकास का मॉडल कितना खतरनाक है, यह बात बनारसियों के बाद में समझ में आएगी?”

छीन ली गई इल्म की रौशनी

दूसरी ओर, मोदी के बनारस मॉडल में चार चांद लगाने के लिए हजारों दृष्टिहीनों से इल्म की रौशनी छीन ली गई है। दुर्गाकुंड स्थित पूर्वांचल के पहले और अंतिम अंध विद्यालय को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। कोई अचरज नहीं कि आने वाले कल शहर के बीच स्थित इस अंध विद्यालय को खाक में मिलाकर गगनचुंबी व्यावसायिक इमारतें तान दी जाएं। बनारस के दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय की तकरीबन सौ करोड़ की संपत्ति का व्यावसायिक उपयोग कर मुनाफे की लालसा के चलते ही पूर्वांचल के पहले अंध विद्यालय को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। अब हजारों छात्रों की जिंदगी अंधेरे में भटक रही है। आपदा में अवसर का फायदा उठाकर 18 उद्योगपति जो विद्यालय के ट्रस्टी बताए जाते हैं, ने प्रस्ताव पारित कर पिछले 20 जून, 2020 को कोरोना काल में ही विद्यालय को हमेशा के लिए बंद कर दिया। ट्रस्टियों का आरोप था कि उन्हें किसी भी तरह की सरकारी सहायता नहीं मिल रही है। इस बात को अंदरखाने में ही रखने की भरसक कोशिश की गई लेकिन सच जब सामने आया तो लोगों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, शिक्षा सचिव और सामाजिक न्याय मंत्रालय तक छात्रों की व्यथा-कथा को लिख भेजा। इस उम्मीद से कि दिव्यांगों के लिए प्रधानमंत्री विशेष तौर पर संवेदनशील हैं पर ऊपरी खाने के मौन ने बता दिया कि सरकार का हाथ किसके लिए और किसके साथ है? बनारस के प्रबुद्धजनों का कहना है कि दृष्टिहीन सड़कों पर हैं और नजर वालों को विकास का मोतियाबिंद हो गया है।

(बनारस स्थित लेखक वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Narendra modi
UttarPradesh
banaras
Modi's Kashi Yatra
UP ELections 2022
Development in UP
UP Reality
Yogi Adityanath
Modi government
BJP

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • बिहार : न खाद्यान्न और न ईंधन उपलब्ध, छतों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ज़िंदा रहने का संघर्ष करते बाढ़ पीड़ित
    मोहम्मद इमरान खान
    बिहार : न खाद्यान्न और न ईंधन उपलब्ध, छतों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ज़िंदा रहने का संघर्ष करते बाढ़ पीड़ित
    13 Jul 2021
    'हम क्या कर सकते हैं, बाढ़ के पानी में सबकुछ डूब गया है और गांव को जोड़ने वाली सड़क को भी बाढ़ ने बर्बाद कर दिया है। बाहर निकलने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है। प्रखंड अधिकारियों ने उपलब्धता ना होने का…
  • विध्वंस, नाम बदलना, पुनर्लेखन : भविष्य पर नियंत्रण करने के लिए कैसे अतीत को बदल रही है भाजपा?
    शलिनी दीक्षित
    विध्वंस, नाम बदलना, पुनर्लेखन : भविष्य पर नियंत्रण करने के लिए कैसे अतीत को बदल रही है भाजपा?
    13 Jul 2021
    भाजपा इतिहास में दखलंदाज़ी कर रही है,  ताकि सांप्रदायिक आग हमेशा जलती रहे। यह पार्टी का ज्ञान, पहचान है और इसलिए लोगों पर नियंत्रण का प्राथमिक स्रोत है।
  • फ़ैक्ट-चेक : बगैर चार्जशीट फ़ाइल हुए जेल में बंद थीं प्रज्ञा ठाकुर?
    पूजा चौधरी
    फ़ैक्ट-चेक : बगैर चार्जशीट फ़ाइल हुए जेल में बंद थीं प्रज्ञा ठाकुर?
    13 Jul 2021
    ऑल्ट न्यूज़ ने पता लगाया कि ये दावा कम से कम 2012 से किया जा रहा है. फिलहाल कुछ समय से मोदी सरकार की आलोचना करने वालों को जेल में डाले जाने के ख़िलाफ़ गुस्से की वजह से ये दावा फिर से चर्चा में आया.
  • AAP के पोस्टर की तस्वीर एडिट कर सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर की गयी
    आकिब पठान
    AAP के पोस्टर की तस्वीर एडिट कर सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर की गयी
    13 Jul 2021
    सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी का एक कथित बिलबोर्ड वायरल है. इस बिलबोर्ड पर गुजराती में लिखा है, “નમાજ પઢશે ગુજરાત” जिसका मतलब है गुजरात नमाज़ पढ़ेगा. आगे, पोस्टर पर लिखा है, “ભાગવત સપ્તાહ અને…
  • नेशनल पोर्टल फॉर ट्रांस जेंडर पर्सन्स के ज़रिये अदिति (हरी साड़ी में) और काजल (लाल लिबास में) को मिली ट्रांस महिला की पहचान। फोटो : वर्षा सिंह 
    वर्षा सिंह
    अपना बुटीक खोलने और अपनी ज़िंदगी खुलकर जीने के लिए हासिल की ट्रांस महिला की पहचान
    13 Jul 2021
    “...बैंक ने मुझे लोन नहीं दिया। मेरे पास आधार कार्ड है। जिसमें मेरी पहचान पुरूष के तौर पर है। मेरे सर्टिफिकेट्स में मेरा पुरुष नाम ही है। जब मैं लोन के लिए जाती हूं तो मुझे स्त्री के तौर पर देखकर वह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License