NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
मोदी की ‘मन की बात’ की तरह नीतीश कुमार की वर्चुअल रैली भी लाइक से ज़्यादा डिस्लाइक
यूट्यूब, ट्वीटर, फेसबुक इत्यादि सभी सोशल माध्यमों पर बड़े पैमाने पर लोगों ने नापसंदगी का इज़हार किया। और बेरोज़गारी, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
मुकुंद झा
08 Sep 2020
मोदी की ‘मन की बात’ की तरह नीतीश कुमार की वर्चुअल रैली भी लाइक से ज़्यादा डिस्लाइक

बिहार चुनाव में प्रचार की शुरुआत सोमवार को नीतीश कुमार ने वर्चुअल रैली के माध्यम से कर दी, हालांकि चुनाव आयोग द्वारा औपचरिक रूप से चुनाव की घोषणा होनी बाक़ी हैं। ये चुनाव ऐसे समय में हो रहे है जब देश और राज्य में कोरोना संक्रमण लगातर बढ़ रहा है और इस माहमारी में सरकारों की गलत नीतियों के कारण लाखों लोगों का रोजगार छिन गया है।

राजनीतिक तौर पर बिहार में कोई भी गठबंधन अपने स्वरूप को लेकर निश्चित नहीं है। सत्ताधारी गठबंधन में ही नीतीश कुमार के नेतृत्व को लेकर ही फूट और मनमुटाव साफ तौर पर दिख रहा है। इस गठबंधन के महत्वपूर्ण सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) खुलेतौर पर नीतीश नेतृत्व की आलोचना कर रही है। वहीं विपक्षी महागठबन्धन भी अपने स्वरूप को लेकर अभी निश्चित नहीं है और इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि वाम दल महागठबंधन का हिस्सा होंगे।

इस सबके बीच बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने सोमवार को वर्चुअल रैली की। इसको लेकर बिहार का राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ दिखा। एक तरफ जहाँ जेडीयू इसे सफल बताने में लगी है जबकि विपक्ष ने इस रैली को पूरी तरह फ्लॉप शो कहा।

अब सवाल उठ रहा है कि क्या सच में ये रैली फ्लॉप शो रही या हिट। आइए इस रैली से जुड़े कुछ आंकड़े दखते हैं।

जेडीयू ने वर्चुअल रैली से पहले कई दावे किए थे। उन्होंने तो दावा किया कि इस रैली का निमंत्रण 26 लाख लोगों को भेजा गया है। लेकिन ऑनलाइन प्लेटफार्म पर आते ही सारे दावे उलटे पड़ते दिखाई दिए और जिस तरह लोगों ने पिछले दिनों प्रधनमंत्री मोदी और बीजेपी के वीडियोज़ को नापसंसद किया था उसी तरह नीतीश कुमार के वीडियो यानी वर्चुअल रैली का भी हश्र हुआ। फेसबुक, ट्विटर से लेकर लोगों ने यूट्यूब तक नीतीश कुमार के इस रैली को नापसंद किया और कमेंट करके अपन गुस्सा भी जाहिर किया।

क्या रहा ट्विटर का हाल

सबसे पहले ट्विटर का हाल देखते है। इस वर्चुअल रैली का JDU और नीतीश कुमार के ट्विटर हैंडल पर लाइव प्रसारण किया गया। हालंकि ट्विटर पर डिसलाइक का ऑप्शन नहीं है। इसलिए वहां डिस्लाइक तो नहीं लेकिन कमेंट करके लोगों ने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की।

ख़बर लिखे जाने तक नीतीश कुमार के हैंडल पर इस वर्चुअल रैली को 51 हज़ार लोगों ने देखा जबकि मात्र 3.7 हज़ार लोगों ने लाइक किया और 1.3 हज़ार ने रिट्वीटस किये और 2.8 हज़ार लोगों ने कमेंट किया। हमने यह कमेंट और रिट्वीटस को देखा वहां अधिकांश लोगों ने सरकार की और नीतीश की कुमार की आलोचना करते हुए पोस्ट किया। ऐसे ही एक यूजर अंकित सिंह ने लिखा कि "रोजगार नहीं तो वोट नहीं सिस्टम को दीमक के तरह चाट गए धांधली जोर शोर से चल रही है। exam में 25 लाख में बिहार दरोगा भर्ती 2019 की सीट बेच दिए बहुत विकास किए हो।"

image

यही हाल JDU के ट्विटर हैंडल का भी रहा है वहां भी लोगों ने अधिकांश कमेंट में नीतीश और बिहार सरकार की आलोचना की, यहां पर ख़बर लिखे जाने तक केवल 2.1 हज़ार लोगो ने वीडियो देखा और मात्र 85 लोगों ने ही पसंद किया, यहाँ 105 कमेंट किये गए और यहां भी रोजगार के सवाल को लेकर सरकार से सवाल पूछे गए।

image

फेसबुक पर भी लोगों ने नीतीश कुमार से पूछा रोजगार क्यों नहीं दिया

फेसबुक पर इसका प्रसारण नीतीश कुमार और JDU के पेज से किया गया। समाचार लिखे जाने तक नीतीश कुमार के पेज पर कुल 3 लाख 86 हज़ार लोगों ने इस वीडियो को देखा जबकि 58 हज़ार लोगो ने कमेंट किया। 4 हज़ार लोगों ने इसे शेयर किया और 18 हज़ार लोगों ने इस वीडियो पर रिएक्ट किया। हमने यहां भी सैकड़ों कमेंट पढ़े अधिकांश में लोग बेरोज़गारी, शिक्षकों की भर्ती न होने जैसे सवाल उठा रहे थे जबकि यहां पर कुछ लोग नीतीश कुमार के समर्थन में भी लिख रहे थे परन्तु वो भी पार्टी के कार्यकर्ता ही लग रहे थे। वे समर्थन में लिख रहे थे परन्तु लोगों द्वार उठाए जा रहे सवालों का जवाब नहीं दे रहे थे।

image

यही हाल JDU फेसबुक पेज़ का भी था। वहां इस वीडियो को 47 हज़ार लोगों ने देखा। 6.6 हज़ार ने कमेंट किया जबकि 456 लोगो ने इसे शेयर किया। यहां भी लोगों ने बिहार में बढ़ते अपराध और कप्यूटर शिक्षकों की बहाली को लेकर सवाल किये।

image

यूट्यूब पर डिस्लाइक की बाढ़

अब आते हैं यूट्यूब पर। इस वर्चुअल रैली का कई यूट्यूब चैनलों द्वारा लाइव प्रसारण किया जा रहा था। सभी जगह पर इस वीडियो को लाइक से अधिक डिस्लाइक मिले यानी लोगों ने नीतीश के भाषण को नापसंद अधिक किया। देखते हैं कहाँ पर क्या हाल रहा।

आज ख़बर लिखे जाने तक ZEE BIHAR JHARKHND के यूट्यूब चैनल पर नीतीश की वर्चुअल रैली को 2,695 लोगों ने देखा और मात्र 35 लोगों ने पसंद किया जबकि 72 लोगों ने नापसंद किया।

image

आज तक के एक यूट्यूब चैनल Bihar tak पर भी नीतीश की वर्चुअल रैली को लोग ने भर-भरकर डिस्लाइक दिए। इस चैनल पर समाचार लिखे जाने तक 2100 लोगों ने लाइक किया है तो 10 हज़ार लोगों ने नापसंद किया।

image

Live Cities के यूट्यूब चैनल पर नीतीश की वर्चुअल रैली को पसंद से अधिक ज्यादा नापसंद किया जा रहा है। इस चैनल पर अब तक 89 हज़ार लोगों ने देखा जबकि 6.1 हज़ार लोगों ने नीतीश की रैली को लाइक किया है तो 13 हज़ार लोगों ने डिस्लाइक किया।

image

जबकि City Post Live के यूट्यूब चैनल पर नीतीश कुमार का भाषण लाइव चल रहा था। जहाँ नापसंद करने वाले लोग की संख्या 7 हज़ार थी तो पसंद करने वालों की संख्या केवल 815 थी। जबकि कुल 47 हज़ार से अधिक लोग इस वीडियो को देख चुके थे।

image

एक अन्य यूट्यूब चैनल First Bihar jharkhnd पर भी यही हाल था, वहां नापसंद करने वाले लोग की संख्या 8.6 हज़ार थी तो पसंद करने वालों की संख्या केवल 403 थी। जबकि कुल 43 हज़ार से अधिक लोग इस वीडियो को देख चुके थे।

image

यूट्यूब कमेंट में भी लोग सभी जगह नीतीश सरकार पर रोज़गार के लिए कुछ नहीं करने, स्वास्थ्य की बदहाली और नियोजित शिक्षकों के सवालों को लेकर घेर रहे थे।

नीतीश कुमार ने रैली में क्या कहा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस वर्चुअल रैली में अपने 15 साल के शासन बनाम लालू-राबड़ी की डेढ़ दशक की सरकार की तुलना की। उन्होंने जदयू (JDU) नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं से मतदाताओं, खासतौर पर नयी पीढ़ी तक पहुंचने और राजग तथा राजद के शासन के बीच अंतर बताने को कहा। जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने लगातार चौथे कार्यकाल के लिए डिजिटल रैली के माध्यम से प्रचार अभियान की शुरूआत करते हुए 176 मिनट का भाषण दिया और अधिकतर समय पिछले 15 साल में राज्य में किये अपने विकास कार्यों की बात की।

विपक्ष ने नीतीश पर साधा निशाना, कहा फ्लॉप शो

जन अधिकार पार्टी (JAP) के अध्यक्ष पप्पू यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी वर्चुअल रैली असफल रही है। जनता नीतीश मॉडल को पूरी तरह नकार चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र और करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी लोगों ने नीतीश कुमार को नहीं सुना। बिहार की जनता बाढ़ और कोरोना से तबाह है और नीतीश कुमार वर्चुअल रैली कर रहे हैं। यह बिहार की जनता के साथ मज़ाक है, इस बार चुनाव में राज्य की जनता नीतीश कुमार को सबक सिखाएगी।

बिहार में मुख्य विपक्षी दल आरजेडी के नेता और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आक्रामक तरीके से नीतीश पर हमला बोला। उन्होंने तो रैली से पहले ही नीतीश पर दस सवाल दागे और कहा "नीतीश कुमार की विगत 1 मार्च को गाँधी मैदान की Actual रैली का हश्र पूरे देश ने देखा था। ख़ैर वर्चुअल के बहाने हम उन्हें ऐक्चुअल मुद्दों से भागने नहीं देंगे। आशा है आज मुख्यमंत्री हमारे इन सवालों का जवाब देंगे"

tejshvi.PNG

रैली के बाद भी उन्होंने प्रेस वार्ता कर नीतीश कुमार के हमलों का जवाब दिया और एकबार फिर उन्होंने नीतीश कुमार से सवाल किया और कहा "मैंने माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से तथ्यों के आधार पर आज सुबह कुछ तार्किक सवाल किए थे और आशा थी कि वो जवाब देंगे लेकिन उन्होंने किसी सवाल का कोई तार्किक जवाब नहीं दिया। "

इसके बाद उन्होंने मंगलवार सुबह ट्वीट कर कहा नीतीश कुमार ने 1995 में एकीकृत बिहार में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ा था तो मात्र 7 सीट आयी थी। 2014 में लेफ़्ट के साथ मिलकर (लोकसभा) लड़े थे तो मात्र 2 सीट आयी थी। वो जीवन में कभी भी अकेले लड़ेंगे तो प्रतापी चेहरे को दहाई के अंकों में भी सीट प्राप्त नहीं होगी। यह मेरी चुनौती और दावा है।

इसके साथ ही वाम दलों ने भी इस रैली को फ्लॉप कहा। भाकपा माले ने कहा कि बिहार की जनता ने नीतीश की वर्चुअल रैली को रिजेक्ट किया है। बढ़ते जनाक्रोश से घबराई सरकार जनता का सामना करने से डर रही है। माले ने सवाल किया कि बेरोज़गारी में नंबर वन क्यों है बिहार? दलित-गरीबों के ऊपर बढ़ते हमले, शिक्षा की बदहाली पर मुख्यमंत्री की जुबान क्यों नही खुली?

इसे भी पढ़े :-  मोदी जी के 'मन की बात' को लाखों की संख्या में लोग कर रहे हैं नापसंद,क्या है वजह?

Nitish Kumar
Virtual rally of Nitish Kumar
Video Dislike
youtube
twitter
Facebook
Social Media
Coronavirus
COVID-19
Bihar Elections
jdu

Related Stories

बीजेपी के चुनावी अभियान में नियमों को अनदेखा कर जमकर हुआ फेसबुक का इस्तेमाल

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

अफ़्रीका : तानाशाह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कर रहे हैं

मुख्यमंत्री पर टिप्पणी पड़ी शहीद ब्रिगेडियर की बेटी को भारी, भक्तों ने किया ट्रोल

मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!

हेट स्पीच और भ्रामक सूचनाओं पर फेसबुक कार्रवाई क्यों नहीं करता?

छत्तीसगढ़ की वीडियो की सच्चाई और पितृसत्ता की अश्लील हंसी

कांग्रेस, राहुल, अन्य नेताओं के ट्विटर अकाउंट बहाल, राहुल बोले “सत्यमेव जयते”

ट्विटर बताए कि आईटी नियमों के अनुरूप शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति कब तक होगी : अदालत

उच्च न्यायालय ने फेसबुक, व्हाट्सऐप को दिए सीसीआई के नोटिस पर रोक लगाने से किया इंकार


बाकी खबरें

  • bihar
    अनिल अंशुमन
    बिहार शेल्टर होम कांड-2’: मामले को रफ़ा-दफ़ा करता प्रशासन, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
    05 Feb 2022
    गत 1 फ़रवरी को सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो ने बिहार की राजनीति में खलबली मचाई हुई है, इस वीडियो पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले लिया है। इस वीडियो में एक पीड़िता शेल्टर होम में होने वाली…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    सत्ता में आते ही पाक साफ हो गए सीएम और डिप्टी सीएम, राजनीतिक दलों में ‘धन कुबेरों’ का बोलबाला
    05 Feb 2022
    राजनीतिक दल और नेता अपने वादे के मुताबिक भले ही जनता की गरीबी खत्म न कर सके हों लेकिन अपनी जेबें खूब भरी हैं, इसके अलावा किसानों के मुकदमे हटे हो न हटे हों लेकिन अपना रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ कर लिया…
  • beijing
    चार्ल्स जू
    2022 बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के ‘राजनयिक बहिष्कार’ के पीछे का पाखंड
    05 Feb 2022
    राजनीति को खेलों से ऊपर रखने के लिए वो कौन सा मानवाधिकार का मुद्दा है जो काफ़ी अहम है? दशकों से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने अपनी सुविधा के मुताबिक इसका उत्तर तय किया है।
  • karnataka
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: हिजाब पहना तो नहीं मिलेगी शिक्षा, कितना सही कितना गलत?
    05 Feb 2022
    हमारे देश में शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, फिर भी लड़कियां बड़ी मेहनत और मुश्किलों से शिक्षा की दहलीज़ तक पहुंचती हैं। ऐसे में पहनावे के चलते लड़कियों को शिक्षा से दूर रखना बिल्कुल भी जायज नहीं है।
  • Hindutva
    सुभाष गाताडे
    एक काल्पनिक अतीत के लिए हिंदुत्व की अंतहीन खोज
    05 Feb 2022
    केंद्र सरकार आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार को समर्पित करने के लिए  सत्याग्रह पर एक संग्रहालय की योजना बना रही है। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के उसके ऐसे प्रयासों का देश के लोगों को विरोध…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License