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मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत: किसान की खरी-खरी, योगी-मोदी के ख़िलाफ़ बजा बिगुल
बात बोलेगी: क्या है किसानों के मन में, क्या हुआ महापंचायत में ख़ास, क्या रहा मुज़फ़्फ़रनगर शहर का हाल। बता रहीं हैं वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह
भाषा सिंह
05 Sep 2021
मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत: किसान की खरी-खरी, योगी-मोदी के ख़िलाफ़ बजा बिगुल

देश का किसान अपनी धुन का पक्का और जबर्दस्त हौसले वाला होता है। आज जितने किसान महापंचायत स्थल पर थे उससे कई गुना पूरे शहर में फैले हुए थे। अनगिनत किसान तो अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से ही नहीं निकल पाए। उन्होंने कहा, हम शामिल होने आए, घर छोड़ा और यहां आ गये। मंच पर जाकर क्या करना, किसान का ईमान उसकी खेती है। 

दो दिन से पूरे शहर में भंडारे चल रहे हैं, हिंदू-मुस्लिम के सौहार्द वाले, तमामों खापों के नामों वाले, इलाके वाले—और इन सबसे इलाके का सबसे स्वादिष्ट पकवान पक रहा था। चाहे वह इलाके की मशहूर उड़द की दाल हो या छोले और आलू-कचालू। 

किसानी एक संगठित काम है और यह संगठन शक्ति लाखों लोगों की भीड़ को शहर में खाना खिलाते, पानी पिलाते-हलुआ-केला खिलाते दिखाई दी। भीषण गर्मी और उमस के बीच जिस तरह प्रेम से ग्रामीण भारत सेवा कर रहा था, वह नए राजनीतिक रिश्ते की जमीन को पुख्ता कर रहा था। राकेश टिकैत ने आज मोदी सरकार-योगी सरकार और भाजपा की देश बेचो नीति के खिलाफ जिस लंबी लड़ाई का बिगुल फूंका है—उसने आज की महापंचायत को ऐतिहासिक बना दिया है।

हिंदू-मुस्लिम सौहार्द पर मुहर लगी और एक तरह से पूरे सैलाब ने वर्ष 2013 की सांप्रदायिक हिंसा के लिए माफी मांगी और दोबारा दिलों में नफरत न सुलगाने देने का अहद किया। यह एक अहम पड़ाव है इस इलाके के लिए। वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर को एकतरफा सांप्रदायिक हिसा में ढकेला गया था, लाखों मुस्लिम परिवारों को बेघर किया, इस नफरत को उड़ेलने वाले भाजपा विधायक और सांसद-मंत्री सब बन गया। खुलेआम नफरत फैलाने को खूब राजनीतिक फायदा मिला और उन्होंने किसान आंदोलन शुरू होने से पहले तक किसान विरोध में बयान दिये और यह बताने की कोशिश की कि ये तमाम किसान बरगलाए हुए हैं। महापंचायत में आए किसान, ऐसे ही एक भाजपा के केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को बारे में बोलेः अब हम इन्हें बिलों में बैठने पर मजबूर कर देंगे। उत्तर प्रदेश की सड़कों पर हरियाणा जैसे हाल कर देंगे, जहां किसान भाजपा मुख्यमंत्री (मनोहर लाल खट्टर) से लेकर कोई भी नेता दूसरा नेता अपना पब्लिक प्रोग्राम नहीं कर सकता। अब बालियान हों या राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल या विधायक उमेश मलिक सभी की सुरक्षा स्थानीय पुलिस को बढ़ानी पड़ी। स्थानीय भारतीय किसान यूनियन के नेता राज मलिक ने बताया, ये सब एक हफ्ते से दुबके हुए हैं और बुढ़ाना से विधायक उमेश मलिक जब राकेश टिकैत के गांव से सिसौली गये थे, किसानों को समझाने के लिए तो वहां के किसानों ने उनको अच्छे  से समझा दिया, और वह भाग खड़े हुए। यही अब पूरे उत्तर प्रदेश में होना है।

मुजफ्फरनगर की यह शायद पहली किसान पंचायत रही, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में महिला किसानों ने शिरकत की, महिला किसानों ने भाषण दिये, स्टेज शेयर किया। जब हमने इस बारे में किसान नेता युद्धवीर सिंह से बात की, तो उन्होंने स्वीकारा कि यह पहली बार घटित हो रहा है। इस जगह को महिला किसानों ने खुद ही हासिल किया है और उन्हीं के बल पर यह किसान आंदोलन इतना लंबा सफर तय कर पाया है। पंजाब से करीब 1,000 महिला किसान लेकर मुजफ्फरनगर पहुंची भारतीय किसान यूनियन उग्राहा की महिला नेता हरिंदर कौर बिंदू ने न्यूज़क्लिक को बताया यह महापंचायत देश को बचाने का महायुद्ध है और इसको जीताने का जिम्मा हम औरतों ने उठा रखा है।

किसानों का जो सैलाब आज उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में उमड़ा, उसकी हुंकार सीधे योगी-मोदी सरकार के ख़िलाफ थी। एक बात साफ है कि महापंचायत में शामिल तमाम महिला किसानों, किसानों ने मौजूदा हुकमरान को किसान विरोधी मानते हुए, उन्हें सबक सिखाने के लिए सत्ता से हटाने के लिए प्रण ले लिया है। एक नये ढंग की गोलबंदी भी शुरू हुई, जिसके केंद्र में अब उत्तर प्रदेश है। उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा किसान नेता, जिसमें देश के किसान नेताओं को बुलाने का क्षमता है—वह राकेश टिकैत है।

मुजफ्फरनगर बहुत खरी-खरी बात कहने के लिए भी मशहूर रहा है। ऐसा ही एक खरा महाकवि इस मिट्टी से जन्मा था—शमशेर बहादुर सिंह और उनका एक शेर दिन भर जेहन में गूंजता रहा—

जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद

वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद

आज किसान योगी-मोदी सरकार को खरी-खरी सुनाकर देश को नये दौर में ले जाने के लिए मुस्तैद नज़र आता है। 

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