NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पाकिस्तान
पठानकोट-पुलवामा में NIA की चार्जशीट: अब पाकिस्तान का हाथ, तब जिहादी ताकत!
2016 में NIA पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराने से बच रहा था, आज आतंकियों को ‘जिहादी’ बताने से बचा गया है।
प्रेम कुमार
27 Aug 2020
पठानकोट-पुलवामा में NIA की चार्जशीट: अब पाकिस्तान का हाथ, तब जिहादी ताकत!

25 अगस्त को एनआईए की ओर से दायर चार्जशीट में दो बातें पूरे देश और दुनिया का ध्यान खींचने वाली हैं। एक- पुलवामा हमले में पाकिस्तान का हाथ। दूसरा- बालाकोट स्ट्राइक की तारीफ। इन दोनों बातों का महत्व पता चलता है जब पुलवामा हमले और पठानकोट हमले से जुड़ी चार्जशीट की हम तुलना करते हैं। पठानकोट हमले की चार्जशीट में पाकिस्तान का नाम लेने से बचा गया था जबकि षडयंत्रकारी संगठन और नेतृत्व से लेकर घटना को अंजाम देने के तौर-तरीके दोनों घटनाओं में लगभग एक समान हैं। दोनों आरोप-पत्रों को देखने से भी यह बात साफ तौर पर मालूम पड़ जाती है।

पठानकोट-पुलवामा हमलों का मास्टरमाइंड मसूद अजहर-राउफ असगर

एनआईए की ओर से पुलवामा आतंकी हमले और पठानकोट आतंकी हमले में दायर चार्जशीट में सबसे बड़ी समानता यह है कि दोनों हमलों में पहले और दूसरे नंबर पर वही दो नाम हैं- मसूद अजहर और राउफ असगर। पुलवामा हमले में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है मसूद अजहर का भाई अम्मार अलवी उर्फ चाचा उर्फ छोटा मसूद। यह बात भी समान रूप से पायी गयी है कि दोनों हमले पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के नेतृत्व की ओर से रची गयी सुनियोजित आपराधिक साजिश का नतीजा थे।

दिसंबर 2016 में पठानकोट हमले में दायर चार्जशीट का हिस्सा

photo 1_2.PNG

पठानकोट और पुलवामा हमले की चार्जशीट में आतंकी हमले, हमलावर, षडयंत्र, ट्रेनिंग, तौर-तरीके और कई अन्य मामलों में बड़ी समानता है। मगर, चौंकाने वाली बात यह है कि एनआईए ने अपने आरोप पत्र में पुलवामा हमले में खुलकर पाकिस्तान का हाथ बताया गया है। जबकि, इसी एनआईए ने पठानकोट हमले में कहीं भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया था।

गौर करने वाली बात यह है कि जैश-ए-मोहम्मद का जिक्र एनआईए ने 2016 में पाकिस्तान में ‘गैर कानूनी संगठन’ के तौर पर किया था। तब कहा गया था कि पठानकोट हमले को पाकिस्तान की सरजमीं से अंजाम तो दिया गया, लेकिन इसमें पाकिस्तान के नॉन स्टेट एक्टर्स का हाथ था। पाकिस्तान को एक तरह से क्लीन चिट दी गयी थी। ये वही समय था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रेकफास्ट अफगानिस्तान में, लंच पाकिस्तान में और डिनर हिन्दुस्तान में करने का शौक पूरा कर रहे थे। 25 दिसंबर 2015 को पीएम मोदी लाहौर पहुंचे थे और एक हफ्ते बाद 2 जनवरी 2016 को पठानकोट में आतंकी हमला हो गया था। नवाज़ शरीफ के साथ नरेंद्र मोदी की खूब छन रही थी।

ISI ने भी की थी पठानकोट हमले की जांच

पीएम नरेंद्र मोदी और पीएम नवाज शरीफ में करीबी का ही नतीजा था कि पठानकोट हमले की जांच के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराना तो दूर, पाकिस्तान की एजेंसियों को जांच के लिए भारत बुला लिया गया था। पठानकोट हमले की जांच के लिए पाकिस्तान से 5 सदस्यों की संयुक्त जांच टीम पठानकोट आयी थी जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी शामिल थी। बाद में इस जांच टीम ने हमले में पाकिस्तान का हाथ होने से इंकार किया था।

photo 2_2.PNG

पुलवामा हमले में पाकिस्तान का हाथ- चार्जशीट

एनआईए की वेबसाइट पर मौजूद पुलवामा हमले से जुड़े आरोप-पत्र के दस्तावेज में चार्जशीट के 12वें बिन्दु के अंतिम हिस्से में कहा गया है कि आरोप पत्र में पाकिस्तान स्थित सभी संस्थानों की संलिप्तता को रिकॉर्ड में लाया गया है जो कश्मीरी युवाओँ को भड़काते और उकसाते हैं और भारत में आतंकी हमले कराते हैं। वहीं इससे पहले 11वें बिन्दु में कहा गया है कि जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान शासकों (Establishment) की ओर से आतंकियों को भारतीय क्षेत्र में अच्छे तरीके से योजना बनाकर भेजा जाता है। ये आतंकी जम्मू के साम्बा-कठुआ सेक्टर के ठीक दूसरी ओर पाकिस्तान स्थित शकरगढ़ स्थित लांच पैड से भेजे जाते हैं।

आरोप-पत्र में यह बात भी उल्लेखनीय है कि जैश-ए-मोहम्मद अपने कार्यकर्ताओँ को विस्फोट और अन्य आतंकी प्रशिक्षण के लिए अफगान स्थित अलकायदा-तालिबान-जैश-ए-मोहम्मद और हक्कानी-जैश-ए-मोहम्मद के पास भेजा करता था।

NIA के आरोप पत्र में बालाकोट स्ट्राइक की तारीफ़

NIA के पठानकोट और पुलवामा के आरोप पत्रों को देखकर ऐसा लगता है मानो यह किसी आतंकी हमले की जांच के साथ-साथ शासकीय नीति के हिसाब से पॉलिटिकली करेक्ट होने की कोशिश की गयी हो। ताजा चार्जशीट में बालाकोट स्ट्राइक की इस रूप में प्रशंसा की गयी है कि इसी वजह से हाफिज सईद और साथियों की दूसरे हमले की योजना नाकाम हो गयी और पाकिस्तान पहले की तरह झूठ नहीं बोल पाया।

भारत में आतंकी हमलों में पाकिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल भी होता रहा है और षडयंत्रकारियों को पाकिस्तान के हुक्मरानों का समर्थन भी मिलता रहा है। इसके बगैर ये घटनाएं हो नहीं सकतीं। फिर भी नेशनल इन्वेस्टिगेंटिंग एजेंसी जब इसकी जांच करती है तो इसके सबूत पेश किए जाते हैं। इस बार भी कई ऐसी बातचीत को बतौर सबूत पेश किया गया है जिससे यह पता चलता है कि भारत में पुलवामा हमले के पहले और बाद भी आतंकियों को पाकिस्तान से निर्देश दिए जाते रहे। मगर, सवाल यह है कि क्या पठानकोट हमले में भारत के पास ऐसे सबूत नहीं थे? तब क्यों पाकिस्तान की सरकार को क्लीन चिट दी गयी?

पठानकोट की चार्जशीट में ‘जिहाद’, पुलवामा की चार्जशीट में ‘जिहाद’ का जिक्र नहीं

यह बात भी उल्लेखनीय है कि ‘जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल पुलवामा हमले की ताजा चार्जशीट से जुड़े दस्तावेज में एक बार भी नहीं दिखता। जबकि, पठानकोट हमले से जुड़े दस्तावेज में यह शब्द बार-बार आया है। तब कहा गया था कि युवाओं को ‘जिहाद’ के नाम पर तैयार किया जाता है, उकसाया जाता और उनसे आतंकी गतिवधियों को अंजाम दिलाया जाता है।

दिसंबर 2016 में मोहाली स्थित एनआईए के स्पेशल कोर्ट में दायर पठानकोट हमले की चार्जशीट में बताया गया था कि जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि पठानकोट स्थित एअर फोर्स स्टेशन पर हमला आतंकी कार्रवाई थी। यह पाकिस्तान में मौजूद ‘गैर कानूनी संगठन’ जैश-ए-मोहम्मद को चलाने वाले और उसके नेताओं की साजिश का नतीजा थे। इसी संगठन ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ, साम्बा, तंगधार और राजबाग के साथ-साथ दिल्ली में भी फिदायीन हमलों की जिम्मेदारी ली थी।

पठानकोट और पुलवामा हमलों के आरोपपत्रों में जो एक बात समान रूप से देखी गयी है वह यह है कि भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मकसद से बड़ी साजिश के तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर स्थित आतंकी कैम्प में आतंकियों की नियुक्ति और प्रशिक्षण दिए जाते हैं ताकि उन्हें अवैध तरीके से भारतीय क्षेत्र में भेजा जा सके और आतंकी कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके।फिर भी एक फर्क है कि पहले पाकिस्तानी शासक का नाम तब नहीं आया था, इस बार खुलकर आया है।

सार यह है कि पाकिस्तान की सरजमीं से भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। चाहे उसे गैरकानूनी जैश-ए-मोहम्मद कहें या फिर सीधे पाकिस्तानी हुक्मरान की कार्रवाई। आखिर इस बात से कौन इनकार कर सकता है कि जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन को पाकिस्तान की सरकार का संरक्षण प्राप्त है? 2016 में NIA पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराने से बच रहा था, आज आतंकियों को ‘जिहादी’ बताने से बचा गया है। आज पाकिस्तान को इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार माना गया है, तब वही जैश-ए-मोहम्मद गैर कानूनी संगठन और जिहादी था। जिहाद के नाम पर लोगों को भड़काने वाला संगठन था। आरोप पत्र में बालाकोट स्ट्राइक की तारीफ भी याद की जाएगी।

 

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

india-pakistan
pulwama attack
CRPF Jawan Killed
NIA

Related Stories

अपने क्षेत्र में असफल हुए हैं दक्षिण एशियाई नेता

वार इन गेम: एक नया खेल

कितना याद रखें, कितना मन को मनाएं और कितना भूलें? 

15 अगस्त 1947: आज़ादी की ख़ुशी के साथ था बँटवारे का सदमा

बंटवारे का दर्द: जो हो चुका या जो किया जा रहा है!

आगरा शिखर सम्मलेन: भारत-पाकिस्तान के रिश्तों का अहम पड़ाव

धर्म, क़ानून और स्वामीः क्रूर होते समाज में न्याय और करुणा के स्वर

बॉब डिलन से प्रेरित : "हू किल्ड स्टेन स्वामी?"

दुख की बात है कि हमारे समाज में फादर स्टेन स्वामी जैसे लोग हीरो नहीं बनते!

सुधा भारद्वाज राजनीतिक बंदी हैं कोई क्रिमिनल नहीं, कोरोना महामारी को देखते हुए उन्हें जल्द रिहा किया जाए


बाकी खबरें

  • student in ukraine
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे पीछे: यूक्रेन में फँसे छात्रों से लेकर, तमिलनाडु में हुए विपक्ष के जमावड़े तक..
    06 Mar 2022
    हर हफ़्ते की कुछ चुनिंदा ख़बरों को जो रोचक भी हैं और ज़रूरी भी, लेकर आए हैं अनिल जैन..
  • George Orwell
    समीना खान
    “1984” 2022 में भी प्रासंगिक
    06 Mar 2022
    हाल ही में राजकमल प्रकाशन के लिए अभिषेक श्रीवास्तव ने बीसवीं सदी के सबसे प्रसिद्ध और प्रासंगिक उपन्यास ‘1984’ का अनुवाद किया, जो अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1949 में…
  • Jai Prakash Chouksey
    मृगेंद्र सिंह
    स्मृति शेष : चौकसे साहब के निधन से एक धारदार और आकर्षक लेखनी पर पर्दा गिर गया
    06 Mar 2022
    जय प्रकाश चौकसे की याद में एक प्रशंसक पाठक का संस्मरण।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    पूर्वांचल: मुकाबला किसानों-युवाओं की नाराज़गी और सत्ताधारियों के चुनावी प्रबंधन में
    05 Mar 2022
    सात चरणों में विभाजित यूपी के विधानसभाई चुनाव के आखिरी चरण में 7 मार्च को 54 सीटों पर मतदान होगा. किसान और नौजवान सत्ताधारियो से बेहद नाराज़ है. इसके जवाब में सत्ताधारियो का चुनाव प्रबंधन भी बेजोड़…
  • Padtal Duniya Bhar Ki
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः यूक्रेन के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र जापोरिजया पर रूसी, आख़िर इरादा क्या है
    05 Mar 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने रूस के यूक्रेन पर हमले के 10वें दिन, यूक्रेन के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र पर कब्जे किये जाने के पीछे, रूसी इरादों के बारे में न्यूज़क्लिक के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License