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मुसलमानों की नागरिकता पर हमले का हथकंडा है NPR और NRC
मोहसिन आलम भट्ट का कहना है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर सवाल उठाने का अधिकार सरकारी अफ़सरों को नहीं मिलना चाहिए बल्कि यह एक क़ानूनी प्रक्रिया है, जिसे अदालतों में तय किया जाना चाहिएI
न्यूज़क्लिक
14 Jan 2020

नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के विरोध के बीच सरकार ने एनपीआर का नया राग छेड़ दिया हैI सरकार की दलील है कि एनपीआर जनगणना की तरह ही एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन गौर से देखें तो यह एनआरसी की पहली सीढ़ी हैI एनपीआर की प्रक्रिया पूरी करने के बाद जो एनआरसी लिस्ट जारी की जानी है, वह असम से भी ज्यादा ख़तरनाक होगीI

एनपीआर की प्रक्रिया में तहसीलदार स्तर के अधिकारियों को छूट दी गई है कि वे शक के आधार पर किसी भी व्यक्ति की नागरिकता पर सवाल उठा सकते हैंI हैरत की बात नहीं है कि ये सरकारी मुलाज़िम अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर एक समुदाय विशेष की नागरिकता पर सवाल उठाएंगेI इसलिए मोहसिन आलम भट्ट का कहना है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर सवाल उठाने का अधिकार सरकारी अफ़सरों को नहीं मिलना चाहिए बल्कि यह एक क़ानूनी प्रक्रिया है, जिसे अदालतों में तय किया जाना चाहिएI

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