NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कानून
नज़रिया
भारत
राजनीति
क्या हैं पुरानी पेंशन बहाली के रास्ते में अड़चनें?
समस्या यह है कि नई पेंशन योजना सेवा के वर्षों से कोई इत्तेफाक नहीं रखती है बल्कि यह कार्पस बेस्ड है यानी जितना फंड NPS अकाउंट में होगा उसी हिसाब से पेंशन।
मंजीत सिंह पटेल
16 Mar 2022
PROTEST
NPS के खिलाफ और पुरानी पेंशन की मांग करते कर्मचारी (फोटो- शिवानी गुप्ता, गांव कनेक्शन)

एक जनवरी 2004 से केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन की जगह नई पेंशन स्कीम लागू की थी जिसे आज पश्चिम बंगाल को छोड़कर लगभग सभी राज्य अपने अपने यहां लागू कर चुके हैं। अब समस्या यह है कि नई पेंशन योजना सेवा के वर्षों से कोई इत्तेफाक नहीं रखती है बल्कि यह कार्पस बेस्ड है यानी जितना फंड NPS अकाउंट में होगा उसी हिसाब से पेंशन। लेकिन इससे उन कर्मचारियों के ऊपर संकट पैदा हो गया है, जिनकी रेगुलर बेस पर नियुक्ति के बाद सेवानिवृत्ति महज 10 से 15 वर्षों के भीतर हो रही है या जिन राज्यों में NPS का कर्मचारी अंशदान कई वर्षों तक काटा ही नहीं गया और न ही सरकारी अंशदान जमा किया गया। फलस्वरूप कोई फंड निवेशित ही नही हुआ और अब जबकि उनकी सेवानिवृत्ति या तो नजदीक है या हो गयी है।

ऐसे सभी कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन स्कीम, सेवानिवृत्ति पर न तो मिनिमम पेंशन की गारंटी देती है और न ही उन्हें पुरानी पेंशन की तरह अंतिम सेलरी के आधार पर पेंशन देती है। ऐसे कर्मचारियों को नाम मात्र फंड जमा होने के कारण नाम मात्र की यथा 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये की पेंशन मिल रही है। जिसके कारण कर्मचारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

 हालांकि पेंशन, राज्य का विषय है। चूंकि नेशनल पेंशन स्कीम एक कंट्रीब्यूटरी स्कीम है जिसमें पेंशन के लिए कर्मचारी से बेसिक सेलरी और महंगाई भत्ते का 10% कर्मचारी अंशदान के रूप में काट लिया जाता है और साथ साथ सरकार स्वयं 10% के मुकाबले 14% का अंशदान जमा करती है। जिसे तीन सरकारी संस्थानों में LIC, SBI और UTI में निवेश किया जाता है ताकि कर्मचारी को मार्किट के अनुसार ब्याज मिल सके और ये संस्थान भी बेहतर परफार्म कर सकें व इन्हें मजबूत किया जा सके। इसके अलावा इसी प्लेटफॉर्म पर स्वावलंबन योजना, अटल पेंशन योजना और निजी क्षेत्र के लिए टियर 2 नाम से योजनाएं भी चल रही हैं।

आज नेशनल पेंशन स्कीम के तहत तकरीबन 6 लाख करोड़ से भी अधिक निवेश हो चुका है। जिसका 85% हिस्सा लॉन्ग टर्म यानी सरकारी प्रतिभूतियों में और 15% ओपन मार्किट यानी शेयर मार्किट में लगाया गया है। अब यदि NPS को खत्म कर दिया जाय तो निश्चित है कि उपरोक्त तीनों योजनाए भी बंद हो सकती हैं। साथ ही साथ इन तीनों बैंको को अगले ही महीने से जो 77 लाख कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने एन.पी.एस. से लगभग 9000 करोड़ मिलते हैं वे भी बंद हो जाएंगे ऐसी स्थिति में यह कल्पना करना मुश्किल है कि सरकार इन्हें चला पाएगी। सम्भव है फिर सरकार इन्हें भी बेच दे।

दूसरी बात यह कि यदि कोई राज्य NPS छोड़ भी दे तो बड़े राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र जिनका NPS में 50 हजार करोड़ से भी अधिक निवेश हो चुका है, उस राशि को एकमुश्त निकाल पाना आसान नही है। यही नहीं हर राज्य ने जिसने NPS को लागू किया उसके साथ PFRDA यानी पेंशन फंड रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ साथ NPS ट्रस्ट और NSDL CRA यानी नेशनल सिक्योरिटी डिपोजिटरी लिमिटेड के साथ अलग अलग अग्रीमेंट साइन किये हैं। ये अग्रीमेंट भी राज्यों की पुरानी पेंशन बहाली घोषणाओं के आड़े आ सकते हैं। सम्भव है मार्केट की लिक्विडिटी और अपने बिजनेस को बचाने के लिए ये तीनों बैंक या फिर केंद्र सरकार कोर्ट का रास्ता भी अपना सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो सम्भव है बिना केंद्र सरकार के सहयोग से पुरानी पेंशन बहाली का मामला राज्य सरकारों के लिए बहुत चुनौती पूर्ण हो सकता है। अब समझना ये होगा कि हाल ही में कर्मचारियों के दबाव के बाद तीन राज्यों की सरकारों- राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब ने जो पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणाएं अपने बजट में की हैं, उन्हें हकीकत का अमलीजामा किस तरह पहनाया जाएगा?

(लेखक, सेंट्रल एंड स्टेट गवर्मेंट एम्प्लॉयीज कन्फेडरेशन दिल्ली और नेशनल मूवमेंट फ़ॉर ओल्ड पेंशन स्कीम, दिल्ली के अध्यक्ष हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

ये भी पढ़ें: एनपीएस की जगह, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग क्यों कर रहे हैं सरकारी कर्मचारी? 

NPS
Demand for old pension
old pension system
restoration of old pension
old age pension
New Pension Scheme

Related Stories

क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?

28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?

पुरानी पेंशन बहाली मुद्दे पर हरकत में आया मानवाधिकार आयोग, केंद्र को फिर भेजा रिमाइंडर

मुद्दा: नई राष्ट्रीय पेंशन योजना के ख़िलाफ़ नई मोर्चाबंदी

यूपी : आगामी चुनाव से पहले लाखों शिक्षकों ने योगी सरकार से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने को कहा

पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अटेवा का लखनऊ में प्रदर्शन, निजीकरण का भी विरोध 

झारखंड: शासन की उपेक्षा के शिकार सामाजिक सुरक्षा पेंशन के हक़दारों ने उठाई आवाज़!

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने भी उठाई पुरानी पेंशन बहाली की मांग : ‘न कामदार, न नामदार, मैं हूं बिना पेंशन सरहदों का चौकीदार!’  

नई पेंशन स्कीम के विरोध में कर्मचारियों का 'पेंशन सत्याग्रह'


बाकी खबरें

  • Taliban
    सुबोध वर्मा
    अफ़ग़ानिस्तान: गढ़े गये फ़सानों के पीछे की हक़ीक़त
    22 Aug 2021
    विदेशी ताकतों की दखल के चलते तालिबान की वापसी हुई है। अब जनता को इन तालिबान से निपटना होगा।
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : "मुझमें गीता का सार भी है, इक उर्दू का अख़बार भी है..."
    22 Aug 2021
    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के बाद जो सवाल भारत के प्रधानमंत्री से पूछे जाने चाहिए, वह भारत के मुसलमानों से पूछे जा रहे हैं। विविधता से भरे हमारे देश में समय समय पर देशभक्ति, वफ़ादारी को लेकर म
  •  modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सरकार जी की सरकार में बहस
    22 Aug 2021
    सरकार जी जानते हैं और समझते हैं कि ये बहस, ये विचार विमर्श, ये चर्चायें, ये सब जी का जंजाल हैं। ये हरगिज़ नहीं होनी चाहियें।
  • बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!
    सोनिया यादव
    बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!
    22 Aug 2021
    कैंपस में आए दिन छात्राओं के साथ हो रहे अभद्र व्यवहार और छेड़खानी के खिलाफ छात्रों ने सेंट्रल ऑफिस पर प्रदर्शन कर प्रशासन से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इस दौरान छात्राओं ने प्रशासन को…
  • स्मार्ट सिटी में दफन हो रही बनारस की मस्ती और मौलिकता
    विजय विनीत
    स्मार्ट सिटी में दफन हो रही बनारस की मस्ती और मौलिकता
    22 Aug 2021
    बनारस का मज़ा और मस्ती लुप्त होती जा रही है। जनता पर अनियोजित विकास जबरिया थोपा जा रहा है। स्मार्ट बनाने के फेर में इस शहर का दम घुट रहा है... तिल-तिलकर मर रहा है। बनारस वह शहर है जो मरना नहीं, जीना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License