NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
नज़रिया
समाज
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
अबकी बार, मोदी जी के लिए ताली-थाली बजा मेरे यार!
कटाक्ष: फ्री वैक्सीन के चक्कर में पेट्रोल-डीजल के दाम सैकड़ा पार कर गए, तो कर गए, रसोई गैस हजारी हो गयी तो हो गयी, मोदी जी टस से मस नहीं हुए, सौ करोड़ मुफ्त टीके लगवाकर ही माने। क्या अब भी हम उनका धन्यवाद नहीं करेंगे?
राजेंद्र शर्मा
27 Oct 2021
Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

इंडिया वालो, कुछ तो शर्म करो। मोदी जी ने तुम्हारे लिए क्या-क्या नहीं किया। दुनिया में सबसे ज्यादा, नहीं नहीं; दुनिया में सबसे जल्दी, नहीं नहीं; पर पूरे सौ करोड़ टीके तो लगवाए ही हैं। और वह भी एकदम फ्री। फ्री के चक्कर में पेट्रोल-डीजल के दाम सैकड़ा पार कर गए, तो कर गए, रसोई गैस हजारी हो गयी तो हो गयी, मोदी जी टस से मस नहीं हुए। सौ करोड़ टीके मुफ्त लगवाकर ही माने। और टीका भी ऐसा-वैसा नहीं, मेक इन इंडिया वाला शुद्ध स्वदेशी। देश में बना वह भी स्वदेशी और इंग्लेंड से बनकर आया, वह भी स्वदेशी। और तो और रूस से बनकर आया, वह भी स्वदेशी। टीके का टीका, आत्मनिर्भरता ऊपर से। और टीका भी मुफ्त! चार में से एक बंदे ने टीके के पैसे भर भी दिए तो क्या? चौथाई से दाम की वसूली भी कोई वसूली है! चालीस फीसद वोट से मोदी जी 130 करोड़ भारतीयों के चुने हुए नेता बन सकते हैं, तो 75 फीसद मुफ्त टीकों से, टीका मुफ्त क्यों नहीं कहलाएगा। 

फिर टीके के ऊपर से मोदी जी, ने राशन भी तो फ्री दिया है और अपनी तस्वीर वाला थैला रूंगे में। और मोदी जी ने अस्पताल, आक्सीजन, खर्चे वगैरह के बिना ही, कोरोना माता के कोप से तमाम देशवासियों को जो बचाया है, उसका क्या? जो साढ़े चार लाख ऊपर चले गए वे तो खैर मुक्त हो गए, पर बाकी सब को मोदी जी ने बचाया कि नहीं। जरा सोचिए, अगर मोदी जी नहीं होते तो क्या होता? और न जाने कितने लोग मारे जाते। फिर कोरोना से बचाया सो बचाया, मोदी जी ने दुनिया में भारत का डंका भी बजवाया है। और बदले में हमसे मोदी जी को क्या मिला? एक ढंग का थैंक्यू तक नहीं। वर्ना बेचारे को कम से कम चुनाव के लिए आए दिन यूपी के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे होते, वोट खुद ब खुद पड़ जाते। और चक्कर लगाने तक तो फिर भी समझा जा सकता था। यहां तो सुना है कि डाक्टरों, नर्सों वगैरह समेत सरकारी अमले को, सरकारी हुकुम देकर मोदी जी का भाषण सुनवाना पड़ रहा है। टीका, राशन सब मुफ्त लेने के बाद, अब भाषण मुफ्त सुनने तक में नखरे! पहले पढ़े-लिखे, फिर मजदूर, फिर किसान और अब मामूली कर्मचारी भी! तुम इतने नाशुक्रे कैसे हो सकते हो, इंडिया वालो!

ये भी पढ़ें: गाइड बुक : “भारत माता की जय”

अब यह तो बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। चुनाव के नाम पर हो तब भी नहीं। वैसे भी यह चुनाव का मामला थोड़े ही है। चुनाव तो आते-जाते रहते हैं, विश्व में महान वही राष्ट्र माने जाते हैं, जो अपने धर्म, अपनी संस्कृति पर डटे रहते हैं। यह भारतीय धर्म, भारतीय संस्कृति का मामला है। राष्ट्र के सम्मान का मामला है। वैसे तो योगी का चुनाव भी भारतीय धर्म और संस्कृति का ही मामला है। एक तो भगवाधारी, उस पर महंत और उसके ऊपर से ब्रह्मचारी; इससे ज्यादा ठूंस-ठूंसकर धर्म और संस्कृति, एक सीएम में कैसे भरी जा सकती है? यानी मामला डबल-डबल धर्म और संस्कृति वाला, डबल इंजन वाला है। फिर भी, चुनाव आखिरकार चुनाव है। चुनाव के मामले में पब्लिक पर पक्के तौर पर भरोसा नहीं कर सकते। पिछली बार बंगाल, केरल, तमिलनाडु वालों ने मोदी जी की नहीं मानी तो नहीं ही मानी। और तो और असम वालों ने भी बिहार की तरह सांस अटका ही दी थी। पर कोविड को हराना तो राष्ट्र के गौरव का मामला है और महामारी को एक नहीं दो-दो बार हराने के लिए, मोदी जी का बड़ा सा थैंक्यू तो बनता ही है। जी हां! यह दूसरी बार है जब मोदी जी ने कोविड को हराया है। पहली लहर में कोविड को मोदी जी ने हरा दिया था, तभी तो दूसरी लहर को हराने का अवसर मिला। जरूरत पड़ी तो मोदी जी तीसरी बार भी कोविड को हराएंगे, पर भारत को पक्के से हर बार जिताएंगे।

दुनिया सांस रोक कर इसका इंतजार कर रही है कि नये इंडिया वाले कैसे कोविड पर दूसरी जीत मनाएंगे? कैसे अपने प्राणों के रखवाले का शुक्रिया अदा करेंगे। फिर हम विश्व गुरु बनने चले हैं तो हमें विश्व गुरु की तरह आचरण भी तो करना है। हमें दूसरों के अनुकरण करने के लिए आदर्श भी तो स्थापित करना है। इसलिए, प्लीज कोई हमें यह समझाने की कोशिश नहीं करे कि एक अरब टीकों वाला जश्न इसके लिए काफी है। माना कि वह भी थैंक्यू का जश्न था, पर मोदी जी की तरफ से डाक्टरों-नर्सों के थैंक्यू का जश्न और टीका कंपनियों के लिए थैंक्यू का भी।

बेशक, उन सब ने मोदी जी का थैंक्यू भी किया, लेकिन वह जान बचाने वाले के लिए कृतज्ञ राष्ट्र वाला थैंक्यू नहीं था। और पांच करोड़ थैंक यू के पोस्टकार्डों में भी, इस जीत को निपटाने की कोशिश कोई नहीं करें। अव्वल तो पोस्टकार्ड पता नहीं डाक विभाग ने सही पते पर डिलीवर किए भी या डाकियों की कमी की वजह से बीच में ही अटके रह गए। पर अगर थैंक यू पोस्टकार्ड पते पर पहुंच भी गए हों तब भी, सिर्फ पांच करोड़ के थैंक्यू से क्या बात बनेगी?एक सौ तीस करोड़ की जान बचायी और थैंक्यू सिर्फ पांच करोड़ का। इससे थोड़े से कम तो कोविड के लपेटे में ही आ लिए! महामारी से अनछुए ही रह गए लोग क्या बचाने वाले का थैंक्यू भी नहीं करेंगे। वैसे भी बाकी दुनिया, पोस्टकार्ड का महत्व कहां समझेगी!

तो भाइयो एक बार फिर हो जाए, ताली-थाली, घंटा-घंटी वादन और एक सौ तीस करोड़ भारतवासियों द्वारा अपने रखवाले मोदी जी का ध्वनिमय अभिनंदन। अबकी बार मोदी जी विदेश यात्रा से लौटकर जिस दिन आएंगे, उस दिन देशवासी बालकनियों, छज्जों, छतों, सडक़ों आदि पर निकलकर, फिर से ताली-थाली, घंटा-घंटी बजाएंगे और थैंक यू मोदी जी से आकाश गुंजाएंगे। इसका फालतू फायदा यह होगा कि इस सामूहिक घोष से आकाश में उत्पन्न कंपन से,कोविड के बचे-खुचे वाइरस भी मर जाएंगे। वैसे दिया-बाती, टार्च-मोमबत्ती से रौशनी करने से भी वही काम हो जाता। लेकिन, उससे दीवाली का कन्फ्यूजन होने का खतरा है। वैसे भी दीवाली हिंदुओं की है, दूसरों से मनवाकर उसे वे अपवित्र कैसे हो जाने देंगे! सो ताली-थाली, घंटा-घंटी वाला थैंक्यू मोदी ही सही। और हां, प्लीज इसकी प्रतीक्षा मत करते रहिएगा कि इस बार भी मोदी जी के कहने से ही ताली-थाली बजाएंगे। बात समझिए, मोदी जी हैं तो क्या हुआ, थैंक्यू के लिए ताली-थाली बजाने को खुद कहते हुए क्या अच्छे लगेंगे! विदेशी मीडिया वाले क्या कहेंगे?

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

ये भी पढ़ें: "खाऊंगा, और खूब खाऊंगा" और डकार भी नहीं लूंगा !

Narendra modi
Modi
modi sarkar
Prime Minister Narendra Modi
Narendra Modi Image (9280
Modi propaganda
corona vaccine

Related Stories

कोरोना के दौरान सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं ले पा रहें है जरूरतमंद परिवार - सर्वे

यूपी चुनाव : क्या पूर्वांचल की धरती मोदी-योगी के लिए वाटरलू साबित होगी

कोविड पर नियंत्रण के हालिया कदम कितने वैज्ञानिक हैं?

भारत की कोविड-19 मौतें आधिकारिक आंकड़ों से 6-7 गुना अधिक हैं: विश्लेषण

पंजाब सरकार के ख़िलाफ़ SC में सुनवाई, 24 घंटे में 90 हज़ार से ज़्यादा कोरोना केस और अन्य ख़बरें

क्या बूस्टर खुराक पर चर्चा वैश्विक टीका समता को गंभीर रूप से कमज़ोर कर रही है?

रोजगार, स्वास्थ्य, जीवन स्तर, राष्ट्रीय आय और आर्थिक विकास का सह-संबंध

दो टूक: ओमिक्रॉन का ख़तरा लेकिन प्रधानमंत्री रैलियों में व्यस्त

क्या सरकार की पीएम मोदी के जन्मदिन पर ढाई करोड़ लोगों के टीकाकरण की बात 'झूठ' थी?

मोदी जी, शहरों में नौकरियों का क्या?


बाकी खबरें

  • The Indian Agricultural Situation Must Not Be Misread
    प्रभात पटनायक
    खेती के संबंध में कुछ बड़ी भ्रांतियां और किसान आंदोलन पर उनका प्रभाव
    15 Nov 2021
    इनमें पहली भ्रांति तो इस धारणा में ही है कि खेती किसानी पर कॉर्पोरेट अतिक्रमण तो ऐसा मामला है जो बस कॉर्पोरेट और किसानों से ही संबंध रखता है। यह ग़लत है। 
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 10,229 नए मामले, 125 मरीज़ों की मौत
    15 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.39 फ़ीसदी यानी 1 लाख 34 हज़ार 96 हो गयी है।
  • Facebook
    परंजॉय गुहा ठाकुरता
    फ़ेसबुक/मेटा के भीतर गहरी सड़न: क्या कुछ किया जा सकता है?
    15 Nov 2021
    क्या सांप्रदायिक नफ़रत फैलाने के सिलसिले में सक्रिय रूप से उकसाने को लेकर फ़ेसबुक के ख़िलाफ़ क़ानूनी और नियामक कार्रवाई की जा सकती है? हालांकि, अमेरिका में इसकी एक मिसाल मौजूद है, लेकिन भारत में इसे…
  • tax
    सुबोध वर्मा
    सरकार का टैक्स कलेक्शन तो बढ़ा है, लेकिन फिर भी ख़र्च में कटौती जारी
    15 Nov 2021
    मोदी सरकार ने शिक्षा, सामाजिक न्याय, पर्यावरण समेत कई मंत्रालयों के ख़र्च पर रोक लगा दी है। 
  • Gurgaon Panchayat
    मुकुंद झा
    गुड़गांव पंचायत : औद्योगिक मज़दूर, किसान आए एक साथ, कहा दुश्मन सांझा तो संघर्ष भी होगा सांझा!
    15 Nov 2021
    रविवार को गुड़गांव में बेलसोनिका ऑटो कंपोनेंट इंडिया इंप्लॉयीज यूनियन, मानेसर द्वारा मजदूर-किसान पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें  कृषि बिलों को वापस लेने और श्रम संहिताओं को समाप्त करने की संयुक्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License