NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पेगासस स्पाइवेयर: भारत सरकार चर्चा तक के लिए तैयार नहीं; मेक्सिको में हुई जांच, पूर्व सरकार ने खर्च किए छह करोड़ 10 लाख डॉलर
2006 से 2012 तक देश के राष्ट्रपति रहे फेलिप काल्डेरोन और 2012 से 2018 तक राष्ट्रपति रहे एकरिन पेना नीतो के प्रशासनों में किए गए 31 अनुबंधों के रिकॉर्ड पाए गए हैं। कुछ अनुबंधों को किसी अन्य उपकरण की खरीदारी बताकर छुपाया गया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Jul 2021
Pegasus

पेगासस स्पाइवेयर का मामला भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई मुल्कों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर भारत की राजनीति भी गर्म विपक्ष पूरी ताकत से सरकार को इस मसले पर घेर रहा है परन्तु भारत सरकार इस पर जांच तो दूर, चर्चा तक नहीं कर रही है।  उसका कहना है कि जो रिपोर्ट मीडिया में आई है उसमें कोई आधार ही नहीं है। खैर, इस बीच दुनिया के कई देशों ने इस पर छानबीन शुरू कर दी है।

इसी क्रम में  मेक्सिको के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने बुधवार को कहा कि देश के दो पूर्ववर्ती प्रशासनों ने विपक्षियों और पत्रकारों पर निगरानी रखने के मकसद से पेगासस स्पाइवेयर को खरीदने के लिए छह करोड़ 10 लाख डॉलर खर्च किए थे।

जन सुरक्षा सचिव रोजा इसेला रोड्रिगेज ने बताया कि 2006 से 2012 तक देश के राष्ट्रपति रहे फेलिप काल्डेरोन और 2012 से 2018 तक राष्ट्रपति रहे एकरिन पेना नीतो के प्रशासनों में किए गए 31 अनुबंधों के रिकॉर्ड पाए गए हैं। कुछ अनुबंधों को किसी अन्य उपकरण की खरीदारी बताकर छुपाया गया।

सरकार ने कहा कि इजराइली स्पाइवेयर कंपनी एनएसओ ग्रुप के साथ कई अनुबंधों पर फ्रंट या शेल कंपनियों के साथ हस्ताक्षर किए गए थे, जिनका उपयोग मेक्सिको में रिश्वत के लेने-देन या करों से बचने के लिए अक्सर किया जाता है। शेल या फ्रंट कंपनियां ऐसी कंपनियां होती हैं, जो केवल कागजों पर बनी होती हैं और कोई आधिकारिक कारोबार नहीं करतीं। इन कंपनियों का इस्तेमाल धनशोधन के लिए किया जाता है।

इससे पहले, धनशोधन संबंधी मामलों के सरकार के एक शीर्ष जांचकर्ता ने पिछले सप्ताह कहा था कि पिछले दो प्रशासनों के अधिकारियों ने स्पाइवेयर खरीदने के लिए लगभग 30 करोड़ डॉलर सरकारी धन खर्च किया था।

मेक्सिको की वित्तीय खुफिया इकाई के प्रमुख सैंटियागो नीतो ने कहा था कि 2012 से 2018 के बीच पूर्व प्रशासन के अधिकारियों ने इज़राइल के एनएसओ से ‘स्पाइवेयर’ खरीदने के लिए सरकारी कोष से 30 करोड़ डॉलर खर्च किए थे। ऐसा प्रतीत होता है कि पेगासस स्पाइवेयर जैसे कार्यक्रमों के ‘बिल’ में अतिरिक्त भुगतान शामिल हैं, जिन्हें शायद रिश्वत के रूप में पूर्व सरकारी अधिकारियों को वापस भेज दिया गया होगा।

सैंटियागो नीतो ने बुधवार को कहा था कि भुगतान की गई राशि और जिस तरह उनका भुगतान किया गया था, उससे पहले से ही सवालों के घेरे में आ चुके टेलीफोन टैपिंग कार्यक्रम में सरकारी भ्रष्टाचार के संकेत मिलते हैं। टेलीफोन हैक करने के लिए पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और विपक्षी हस्तियों को निशाना बनाया गया था, जिनमें देश के मौजूदा राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्राडोर और उनके करीबी भी उस वक्त शामिल थे।

नीतो ने कहा कि लोपेज ओब्राडोर ने एक दिसम्बर, 2018 को राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभाला और ‘स्पाइवेयर’ का इस्तेमाल न करने का संकल्प किया। तभी से मौजूदा प्रशासन द्वारा ऐसी किसी गतिविधि को अंजाम देने के सबूत भी नहीं मिले हैं।

भारत में संसद में सरकार ने इस पर बहस की अनुमति तो नहीं ही दी लेकिन संसदीय समिति इस पर चर्चा न कर सके इसके लिए सत्ताधारी दल के सदस्यों ने अपनी उपस्थ्ति  दर्ज नहीं कराई, जिससे ये बैठक भी नहीं हो पाई।  

आपको बता दे संसद की आईटी संबंधी स्थायी समिति की बैठक बुधवार को कोरम पूरा नहीं होने के कारण स्थगित कर दी गई जिसमें पेगासस स्पाइवेयर के मुद्दे पर सरकारी अधिकारियों से सवाल-जवाब किये जाने थे।

कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के कई सदस्य ‘‘नागरिकों के आंकड़ों की सुरक्षा और निजता’’ पर चर्चा करने के लिए बैठे थे। जानकार सूत्रों के अनुसार इस समिति में शामिल भाजपा सदस्य बैठक में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने विरोध स्वरूप उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं किये। इस कारण बैठक के लिए जरूरी कोरम पूरा नहीं हो सका।

समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने कहा था कि पेगासस जासूसी मामले को लेकर सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से समिति के सदस्य सवाल-जवाब करेंगे।

भाजपा सांसदों ने इसका विरोध किया और कहा कि जब कांग्रेस संसद की कार्यवाही नहीं चलने दे रही है तो फिर समिति की बैठक में इसकी चर्चा नहीं हो सकती।

समिति के सदस्य और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा सांसद समिति की बैठक में आए और उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया ताकि कोरम पूरा न हो। इलेक्ट्रानिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय से बुलाए गए लोगों ने लिखित रूप से सूचना दी और उपस्थित नहीं हुए। यह बहुत स्पष्ट है कि पेगासस को लेकर यह सरकार कुछ नहीं करने वाली है।’’

थरूर ने मंगलवार को कहा था कि समिति अपनी बैठक में राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और अन्य लोगों के फोन कथित तौर पर पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए टैप करने के मामले में सरकारी अधिकारियों से सवाल पूछेगी।

उन्होंने कहा कि समिति के कई सदस्यों के लिए यह ‘‘सबसे अहम’’ मामला है।

इस 32 सदस्यीय समिति की बैठक का मुद्दा ‘‘नागरिकों के डेटा की सुरक्षा और निजता’’ था। समिति में सबसे अधिक सांसद भाजपा के हैं।

पिछले सप्ताह कुछ मीडिया संगठनों के अंतरराष्ट्रीय समूह ने कहा था कि भारत में पेगासस स्पाइवेयर के जरिए 300 से अधिक मोबाइल नंबरों की कथित निगरानी की गयी। इसमें पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद पटेल ओर अश्विनी वैष्णव और 40 से अधिक पत्रकारों, तीन विपक्षी नेताओं के अलावा अनेक कार्यकर्ताओं के नंबर भी थे। सरकार इस मामले में विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज करती रही है।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

Pegasus
Israeli spyware
Survellaince Democracy
Shashi Tharoor
monsoon session

Related Stories

पेगासस मामला : न्यायालय ने जांच रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा बढ़ाई

पेगासस कांड: आखिर क्या है RSS से जुड़ा GVF ट्रस्ट? जिसकी अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के आयोग की जांच पर लगा दी रोक

ख़बरों के आगे पीछे: बुद्धदेब बाबू को पद्मभूषण क्यों? पेगासस पर फंस गई सरकार और अन्य

क्या पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर के लिए भारत की संप्रभुता को गिरवी रख दिया गया है?

पेगासस मामले में नया खुलासा, सीधे प्रधानमंत्री कठघरे में, कांग्रेस हुई हमलावर

फ़ैक्ट चेकः सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के फ़ैक्ट चेक का फ़ैक्ट चेक

पेगासस पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला गांधी, राम मोहन राय के नज़रिये की अभिव्यक्ति है

पेगासस जासूसी कांड पर सुप्रीम कोर्ट की खरी-खरी: 46 पन्नों के आदेश का निचोड़

पेगासस मामला : न्यायालय स्वतंत्र जांच का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर अगले हफ्ते सुनाएगा फैसला

पेगासस मामले में सुप्रीम कोर्ट के इक़बाल को चुनौती दे रही है सरकार!


बाकी खबरें

  • Mothers and Fathers March
    पीपल्स डिस्पैच
    तख़्तापलट का विरोध करने वाले सूडानी युवाओं के साथ मज़बूती से खड़ा है "मदर्स एंड फ़ादर्स मार्च"
    28 Feb 2022
    पूरे सूडान से बुज़ुर्ग लोगों ने सैन्य शासन का विरोध करने वाले युवाओं के समर्थन में सड़कों पर जुलूस निकाले। इस बीच प्रतिरोधक समितियां जल्द ही देश में एक संयुक्त राजनीतिक दृष्टिकोण का ऐलान करने वाली हैं।
  • गौरव गुलमोहर
    यूपी चुनाव: क्या भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं सिटिंग विधायक?
    28 Feb 2022
    'यदि भाजपा यूपी में कम अंतर से चुनाव हारती है तो उसमें एक प्रमुख कारण काम न करने वाले सिटिंग विधायकों का टिकट न काटना होगा।'
  • manipur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान
    28 Feb 2022
    मणिपुर विधानसभा के लिए आज पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। मतदान का समय केवल शाम 4 बजे तक ही था। अपराह्न तीन बजे तक औसतन 67.53 फ़ीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
    28 Feb 2022
    हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
  • Sergey Lavrov
    भाषा
    यूक्रेन की सेना के हथियार डालने के बाद रूस ‘किसी भी क्षण’ बातचीत के लिए तैयार: लावरोव
    28 Feb 2022
    लावरोव ने यह भी कहा कि रूस के सैन्य अभियान का उद्देश्य यूक्रेन का ‘‘विसैन्यीकरण और नाजी विचारधारा से’’ मुक्त कराना है और कोई भी उस पर कब्जा नहीं करने वाला है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License