NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
आम-जन का दर्द: अर्थव्यवस्था भंवर में है और मोदी सरकार को कुछ सूझ नहीं रहा  
जिस सच्चाई को आज नवीनतम आर्थिक आंकड़े दर्शा रहे हैं, उसका एहसास प्रत्येक भारतीय काफी लम्बे समय से कर रहा था- वह यह था कि जहाँ एक तरफ अर्थव्यवस्था लगातार डूबती जा रही है वहीँ दूसरी ओर इस सरकार को कुछ भी सूझ नहीं रहा है कि वह करे तो क्या करे।
सुबोध वर्मा
01 Dec 2019
economic slowdown

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI) द्वारा 29 नवंबर, 2019 को जारी किये गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, आर्थिक विकास की दर घटकर स्थायी मूल्य सूचकांक के हिसाब से 2019-20 की दूसरी तिमाही में (अप्रैल-सितम्बर) मात्र 4.5% रह गई है, जो लगातार छठी तिमाही में गिरावट का रुख दर्शा रहा है। यहां तक कि जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर अपनी सरकार के बचाव में सामने आकर इस बात का दावा किया है कि इसे अभी भी पूर्ण विकसित मंदी नहीं कह सकते और इसे काबू में कर लिया जाएगा, तो इस बात का देश के लोगों के लिए कोई अर्थ नहीं रह गया है।

घटते विकास की दर का अर्थ है, असंख्य भारतीय जन के लिए और खासकर उन लोगों को जो गरीबी की रेखा के आस-पास या उससे भी नीचे जी रहे हैं के पहले से ही कष्ट-साध्य जीवन में और इजाफ़ा करना है, क्योंकि इससे नौकरियों के अवसरों कमी, आमदनी में गिरावट के रूप में परिलक्षित हो रहा है,  और एक झटके के रूप में इसमें और भी इजाफ़ा होने जा रहा है।

graph 1_5.PNG

यदि आप इसे और बारीकी से देखें  तो चीजें कहीं अधिक अधिक डरावनी हैं। कृषि, वानिकी और मछली पालन के क्षेत्र में, जहाँ पर सबसे अधिक रोजगार पैदा करने की गुंजाईश होती है, में मात्र 2.1% की दर से बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। विनिर्माण के क्षेत्र में जहाँ पिछली तिमाही में सिर्फ 0.6% की दर से वृद्धि दर्ज की गई थी, उसमें वास्तव में इस समय 1% की गिरावट देखने को मिल रही है। निर्माण के क्षेत्र में सिर्फ 3.3% की तेजी आई है और  व्यापार, होटल, परिवहन आदि के क्षेत्र में 3.8% की वृद्धि हुई है। एकमात्र क्षेत्र जहाँ पर एक ठीक-ठाक बढ़त देखने को मिल रही है,  वह पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, रक्षा और अन्य सेवा क्षेत्र में है, जो 11.6% की दर के साथ आगे बढ़े हैं।

इस बीच, अबाध गति से लगातार बढ़ते बेरोजगार लोगों की संख्या ने संकट और और भी गहरा दिया है। यह चलन मौजूदा मंदी के पहले से जारी है क्योंकि इसकी जडें काफी गहरे प्रणालीगत दोषों की अभिव्यक्ति है। लेकिन मंदी ने इसमें आग में घी डालने का काम किया है, और सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक, मंदी के चलते अक्टूबर में बेरोजगारी दर बढ़कर 8.5% हो गई थी, जो एक साल पहले 6.7% के स्तर पर थी। [नीचे चार्ट देखें]
graph 2_2.PNG
कल एक और बुरी खबर सुनने को मिली है, जिसे सुनकर कोई अचंभा नहीं महसूस होता। वाणिज्य मंत्रालय ने आठ उद्योगों के आँकड़े जारी किये हैं, जिन्हें कोर सेक्टर के रूप में जाना जाता है। ये हैं कोयला, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली के क्षेत्र। जैसा कि नीचे दिए गए चार्ट में दर्शाया गया है कि साल दर साल विकास दर गिरकर इस साल अक्टूबर में -5.8% पर पहुंच गई है। सितंबर में यह गिरावट -5.1% के स्तर पर थी। जुलाई में एक छोटे से उछाल को अगर छोड़ दें तो, इस साल मार्च से ही कोर सेक्टर के उत्पादन में गिरावट का दौर जारी है।

graph 3_2.PNG

वास्तव में, ये चिह्नित कोर सेक्टर, गिरते हुए औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक (IIP) के केंद्र में है, जो देश में औद्योगिक उत्पादन में हो रहे बदलावों को दर्शाने का काम करता है। MOSPI द्वारा जारी किये गए आईआईपी  के आँकड़े इस साल के सितंबर तक के उपलब्ध हैं, जिसमें इस साल की जुलाई से लगातार गिरावट देखी जा सकती है। अगस्त में जहाँ इसमें 1.4% की गिरावट देखने को मिली थी, वहीँ सितंबर में आईआईपी  में साल दर साल के आधार पर 4.3% की गिरावट आई है।

graph 4_0.PNG

एक बार फिर से महीन अध्ययन करें तो एक स्याह तस्वीर उजागर होती है। सितंबर में जहाँ विनिर्माण घटक में 3.9% की गिरावट देखने को मिली वहीँ खनन क्षेत्र में 8.5% की जबर्दस्त गिरावट दर्ज की गई। खास तौर पर  ढलाई की जाने वाले धातु के उत्पादों (मशीनरी और उपकरणों को छोड़कर) के निर्माण में 22%, रबर और प्लास्टिक उत्पादों में 12.6%, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पादों में 10.6% और मशीनरी एवं उपकरण (nec) के क्षेत्र में 18.1% की गिरावट के साथ दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। उम्मीद है कि अक्टूबर आईआईपी के परिणाम भी जल्द ही जारी किये जायेंगे और नहीं लगता कि इस ढलान की ओर सरपट रफ़्तार से भाग रही अर्थव्यवस्था में किसी प्रकार के सुधार की गुंजाईश वाले आँकड़े निकल कर सामने आयें।

ये सभी आँकड़े चीख-चीख कर साबित कर रहे हैं कि अर्थव्यवस्था गहरी मंदी की चपेट में है, जबकि सरकार द्वारा इसे नकारने और झूठ फ़ैलाने का काम लगातार जारी है। मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के बेवकूफी भरे लक्ष्य को हासिल करने के ख्वाब को इस कड़वे हक़ीकत ने मटियामेट कर दिया है। वास्तविकता यह है कि इस  मंदी का इस्तेमाल कॉरपोरेट लॉबी द्वारा इस लाल-बुझक्कड़ सरकार से अधिक से अधिक रियायतें झटकने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसको अभी भी यही यकीन है कि यदि कॉर्पोरेट को मदद जारी रखी जाये तो एक न एक दिन अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर दौड़ पड़ेगी।

इस विचित्र किस्म की अंधी हठधर्मिता, जिसके तहत मोदी सरकार कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती करने, क्षतिग्रस्त पड़े निर्माण के क्षेत्र में भारी धनराशि की पेशकश करने, सुरक्षात्मक श्रम कानूनों को ध्वस्त करने ताकि नौकरी पर रखने और निकालने की शर्तों को आसान बना दिया जाये, और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर खुद के खर्च में कटौती करने जैसे उपायों के खिलाफ आज चिली और लेबनान सहित कई अन्य देशों की सड़कों पर लड़ाई लड़ी जा रही है।

यह ‘आ बैल मुझे मार’ वाला एक शानदार नुस्खा है, जिसे इस साल मई में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल कर चुकी बीजेपी को, हालिया चुनावों में उलटफेर के रूप में भुगतना पड़ा है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार को मिलने वाले जन समर्थन में किस प्रकार से गिरावट का दौर जारी है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

People’s Pain: Economy in Tailspin, Modi Govt. Clueless

Nirmala Sitharaman
GDP
Economy Slowdown
GST
demonetisation
indian economy
Narendra modi
Economic crisis India

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

GDP से आम आदमी के जीवन में क्या नफ़ा-नुक़सान?

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?


बाकी खबरें

  • make in india
    बी. सिवरामन
    मोदी का मेक-इन-इंडिया बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा श्रमिकों के शोषण का दूसरा नाम
    07 Jan 2022
    बहुराष्ट्रीय कंपनियों के गिग कार्यकर्ता नई पीढ़ी के श्रमिक कहे जा सकते  हैं, लेकिन वे सीधे संघर्ष में उतरने के मामले में ऑटो व अन्य उच्च तकनीक वाले एमएनसी श्रमिकों से अब टक्कर लेने लगे हैं। 
  • municipal elections
    फर्राह साकिब
    बिहारः नगर निकाय चुनावों में अब राजनीतिक पार्टियां भी होंगी शामिल!
    07 Jan 2022
    ये नई व्यवस्था प्रक्रिया के लगभग अंतिम चरण में है। बिहार सरकार इस प्रस्ताव को विधि विभाग से मंज़ूरी मिलने के पश्चात राज्य मंत्रिपरिषद में लाने की तैयारी में है। सरकार की कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इस…
  • Tigray
    एम. के. भद्रकुमार
    नवउपनिवेशवाद को हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका की याद सता रही है 
    07 Jan 2022
    हिंद महासागर को स्वेज नहर से जोड़ने वाले रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर पर अपने नियंत्रण को स्थापित करने की अमेरिकी रणनीति की पृष्ठभूमि में चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अफ्रीकी यात्रा काफी…
  • Supreme Court
    अजय कुमार
    EWS कोटे की ₹8 लाख की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट को किस तरह के तर्कों का सामना करना पड़ा?
    07 Jan 2022
    आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग को आरक्षण देने के लिए ₹8 लाख की सीमा केवल इस साल की परीक्षा के लिए लागू होगी। मार्च 2022 के तीसरे हफ्ते में आर्थिक तौर पर कमजोर सीमा के लिए निर्धारित क्राइटेरिया की वैधता पर…
  • bulli bai aap
    सना सुल्तान
    विचार: शाहीन बाग़ से डरकर रचा गया सुल्लीडील... बुल्लीडील
    07 Jan 2022
    "इन साज़िशों से मुस्लिम औरतें ख़ासतौर से हम जैसी नौजवान लड़कियां ख़ौफ़ज़दा नहीं हुईं हैं, बल्कि हमारी आवाज़ और बुलंद हुई है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License