NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री मोदी का पांचवां संबोधन भी निराशाजनक रहा
कुल मिलाकर देश के नाम अपने पांचवें भाषण में भी नरेंद्र मोदी मूल समस्या को नजरअंदाज करते हुए और अपनी सरकार की अभी तक की नाकामी को भी शब्दों के मायाजाल से कामयाबी बताने का उपक्रम करते दिखाई दिए।
अनिल जैन
13 May 2020
प्रधानमंत्री मोदी

कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर देश से मुखातिब हुए। पिछले 54 दिनों के दौरान राष्ट्र के नाम उनका यह पांचवां औपचारिक संबोधन था। कोरोना वायरस संक्रमण की चुनौती के संदर्भ में अपने 34 मिनट के इस संबोधन में उन्होंने शुरु के 15 मिनट 'गौरवशाली भारतीय संस्कृति’, 'वैभवशाली विरासत’, 'इतिहास’, 'योग साधना’, 'डेमोग्राफी’, 'डेमोक्रेसी’, '21वीं सदी का आत्मनिर्भर भारत’, '135 करोड भारतीयों की संकल्प शक्ति’ आदि पर खर्च किए। इसके बाद उन्होंने देश के अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए विभिन्न तबकों के लिए 20 लाख करोड रुपये के आर्थिक पैकेज और लॉकडाउन को चौथे चरण के रूप में आगे बढ़ाने का ऐलान किया।

हालांकि उन्होंने आर्थिक पैकेज का विस्तार से ब्योरा नहीं दिया और यह काम अपनी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर छोड़ दिया जो अब कुछ दिनों तक इसकी विस्तार से जानकारी देती रहेंगी। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन-4 बिलकुल अलग रंग-रूप में होगा और इसकी जानकारी भी देशवासियों को 18 मई से पहले दे दी जाएगी।

22 मार्च के जनता कर्फ्यू से लेकर अब तक जारी लॉकडाउन के दौरान वैसे तो समाज के हर तबके को तमाम परेशानियों का सामना करना पडा है, लेकिन सबसे दर्दनाक दुश्वारियों का सामना गरीबों और बडे शहरों से पलायन कर अपने घरों को लौटने वाले प्रवासी मजदूरों ने किया है। मगर प्रधानमंत्री ने करीब 2500 शब्दों के अपने भाषण में ग़रीबों का जिक्र सिर्फ तीन जगह और मज़दूर शब्द का जिक्र सिर्फ एक बार किया। दुनिया के किसी भी देश में कोराना महामारी के दौरान इतने बड़े पैमाने पर आबादी का पलायन नहीं हुआ है, जितना बडा भारत में हुआ है और अभी हो रहा है।

सिर सामान की गठरी, गोद में बच्चों को और पीठ पर बूढे मां-बाप को लादकर सैकडों किलोमीटर की दूरी तय करने और इस दौर भूख-प्यास के साथ ही कई जगह पुलिस की मार सहते हुए प्रवासी मजदूर सिर्फ इस 'गौरवशाली भारत’ में ही दिखाई दे रहे हैं। मगर प्रधानमंत्री के भाषण में इन मजदूरों की दशा को रत्तीभर स्थान नहीं मिल सका। और तो और पुलिस की मार से बचने के लिए रेल की पटरियों के सहारे अपने गांव लौटते जो मजदूर रास्ते में ही मौत का शिकार हो गए, उनके बारे में भी प्रधानमंत्री के लंबे भाषण में संवेदना के दो शब्द अपनी जगह नहीं बना पाए। यही नहीं, पलायन शब्द का तो उन्होंने अपने पूरे भाषण में एक बार भी इस्तेमाल नहीं किया।

लॉकडाउन की अवधि के दौरान ही कई बार हुई बेमौसम की बारिश ने किसानों को भी खासा नुकसान पहुंचाया है। प्रधानमंत्री ने आर्थिक पैकेज की चर्चा करते हुए किसानों का भी चार बार जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक पैकेज देश के उन श्रमिकों और किसानों के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के दिन-रात परिश्रम करते हैं। उन्होंने इस सिलसिले में उद्योग जगत का जिक्र भी किया और कहा कि इस पैकेज से कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, लघु और मंझौले उद्योग को भी काफी सहारा मिलेगा जो करोडों लोगों की जीविका का साधन है और आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का मजबूत आधार है।

प्रधानमंत्री ने आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए उसके लाभार्थियों में सबसे पहले ग़रीबों, मज़दूरों और किसानों का जिक्र किया और और आखिरी में उद्योगपतियों का। अब देखने वाली बात होगी कि पैसा बांटते समय भी यही क्रम बना रहता है या नहीं।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इस बात की कोई चर्चा नहीं की कि कोरोना महामारी का मुकाबला करने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर क्या प्रयास किए जा रहे हैं। उनके पूरे भाषण में न तो 'अस्पताल’ शब्द का जिक्र आया और न ही 'इलाज’ शब्द का। अलबत्ता विदेशों को भेजी गई दवाओं का जिक्र उन्होंने जरूर किया। उन्होंने कहा कि जिंदगी और मौत की लड़ाई लड रही दुनिया में आज भारत की दवाइयां एक नई आशा लेकर पहुंच रही हैं। प्रधानमंत्री के भाषण में सबसे ज्यादा जोर 'आत्म-निर्भर भारत’ पर रहा। उन्होंने 29 मर्तबा आत्म-निर्भर शब्द का इस्तेमाल किया और हर क्षेत्र में आत्म-निर्भरता पर जोर दिया।

पिछले 54 दिनों के दौरान कोरोना वारियर्स के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए ताली-थाली बजाने, दीया-मोमबत्ती जलाने और अस्पतालों पर सेना के विमानों फूल बरसाने तथा अस्पतालों के सामने सेना का बैंड बजाने जैसे इंवेट आयोजित करवा चुके प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार के भाषण में डॉक्टर, नर्स, पुलिस और फ्रंटलाइन पर खडे अन्य कोरोना वारियर्स का एक बार भी जिक्र नहीं किया। उन्होंने यह ज़रूर कहा कि कोरोना वायरस लंबे समय तक हमारे जीवन का हिस्सा बना रहेगा। यानी एक तरह से प्रधानमंत्री ने मान लिया किया स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर इस महामारी का मुकाबला करने के लिए उनकी सरकार जितना कर सकती थी, वह कर चुकी है।

हमेशा की तरह प्रधानमंत्री अपने इस संबोधन के दौरान भी खुद की पीठ थपथपाने से नहीं चूके। बीते छह वर्षों में लागू हुए आर्थिक सुधारों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि उन सुधारों के कारण ही आज इस संकट के दौर में भारत की व्यवस्थाएं अधिक समर्थ और सक्षम नजर आई हैं। इस सिलसिले में मोदी हमेशा की तरह गलत बयानी करने या तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश करने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा कि जब कोरोना संकट शुरू हुआ तब भारत में एक भी पीपीई किट नहीं बनती थी और एन-95 मास्क उत्पादन भी नाममात्र का होता था, लेकिन आज स्थिति यह है कि भारत में ही हर रोज दो लाख पीपीई किट और दो लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं। सवाल है कि जब कोरोना संकट शुरू होने से पहले इन चीजों का उत्पादन नहीं होता था तो फिर फरवरी महीने तक इनका निर्यात कैसे होता रहा? सवाल यह भी है कि अगर आज इनका भारी मात्रा उत्पादन हो रहा है तो फिर इन चीजों को विदेशों से मंगाने की ज़रूरत क्यों पड़ रही है और देश के कई राज्यों में इनका अभाव क्यों बना हुआ है?

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में लैंड और कानून का जिक्र भी किया है। देखने वाली बात होगी कि वे कौन से कानून बदलते हैं। श्रम कानूनों को बदलने और उन्हें सख्त तथा उद्योगपतियों के अनुकूल बनाने की शुरुआत तो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने कर ही दी है। आत्म-निर्भरता और मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं के साथ आर्थिक सुधारों और श्रम-सुधारों का जिक्र सुनते ही लग जाता है कि मजदूरों को कम पैसे में खामोशी के साथ ज्यादा खटने को कहा जाएगा। जाहिर है कि त्याग मजदूर करेगा और मेवा समर्थ वर्ग खाएगा। जब चुनाव आएंगे तो मजदूरों के वोट हासिल करने के लिए उनके त्याग-तपस्या को फिर याद कर लिया जाएगा।

अमेरिका और यूरोप के अन्य देशों में सरकारें ऐसे मौकों पर आर्थिक पैकेज तय करने में विपक्ष से भी सलाह-मशविरा करती हैं। वहां मीडिया भी सवाल करता है। मगर यहां तो इस सरकार के लिए इन सब बातों का कोई मतलब ही नहीं है। लोकतंत्र का मंत्रोच्चार करते हुए अलोकतांत्रिक इरादों पर अमल करना इस सरकार का मूल मंत्र है।

प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा की तरह इस बार भी अपने भाषण में 130 करोड़ भारतीयों का जिक्र किया है लेकिन अपने पहले के चार संबोधनों की तरह इस बार भी उन्होंने उन लोगों को नसीहत देने से परहेज किया जो कोरोना महामारी की आड़ में सांप्रदायिक नफरत फैलाने का संगठित और सुनियोजित अभियान छेड़े हुए हैं। इस अभियान में उनकी अपनी पार्टी भाजपा के कई सांसद, विधायक और पदाधिकारी भी सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।

कुछ दिनों पहले ज़रूर प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके देशवासियों से अपील की थी कोरोना महामारी को किसी धर्म, जाति, संप्रदाय, नस्ल, भाषा या किसी देश-प्रदेश की सीमा से न जोड़ा जाए और हम सब मिल-जुल कर इसका मुकाबला करें। यह अपील अरब देशों की ओर से सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाले अभियान पर नाराजगी जताने के बाद की गई थी। लेकिन पूरे कोरोना काल में एक बार भी राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री का इस विभाजनकारी अभियान के बारे में न बोलना यही बताता है कि वे इस आपदा को भी ऐसे अभियान के लिए एक अवसर मानकर चल रहे हैं।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का कोरोना काल में राष्ट्र के नाम पांचवां संबोधन भी निराशाजनक ही रहा, जिसमें वे मूल समस्या को नजरअंदाज करते हुए और अपनी सरकार की अभी तक की नाकामी को भी शब्दों के मायाजाल से कामयाबी बताने का उपक्रम करते दिखाई दिए।

Coronavirus
COVID-19
Lockdown
Narendra modi
Lockdown 4
Lockdown Extension
Economic package
20 lakh Crore
RBI

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: किसान और राजनीति, क्या दिल्ली की तरह फ़तह होगा यूपी का मोर्चा!
    12 Dec 2021
    एक साल से भी ज़्यादा समय बाद किसान दिल्ली का मोर्चा जीत कर घर लौट रहे हैं। और जिनका यूपी, पंजाब में घर है उनके सामने आने वाला चुनाव है...जिसमें उन्हें अपने हक़ में एक नई सरकार चुननी है। यूपी का किसान…
  • CBSE
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: प्रश्न पूछो, पर ज़रा ढंग से तो पूछो
    12 Dec 2021
    अभी ऐसे ही, बारहवीं कक्षा की परीक्षा में एक प्रश्न पूछ लिया गया कि किस सरकार के तहत सन् दो हजार दो में गुजरात में अप्रत्याशित स्तर पर मुस्लिम विरोधी हिंसा हुई थी। सरकार को अखर गया, माथा ठनक गया। इतना…
  • PM modi
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: अमृत महोत्सव, सांसदों को फटकार का नाटक और अन्य
    12 Dec 2021
    एक तरफ प्रधानमंत्री सांसदों को सदन में उपस्थिति रहने को कहते हैं दूसरी ओर उनकी पार्टी चुनाव वाले राज्यों के अपने करीब सौ सांसदों को निर्देश देती है कि वह सारे काम छोड़ कर अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों…
  • varanasi
    विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: बनारस में जिन गंगा घाटों पर गिरते हैं शहर भर के नाले, वहीं से होगी मोदी की इंट्री और एक्जिट
    12 Dec 2021
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को बनारस के जिन घाटों से गंगा में इंट्री और एक्जिट करेंगे, उनमें एक है खिड़किया घाट और दूसरा रविदास घाट। एक पर शाही नाले का बदबूदार पानी गंगा को गंदा कर रहा है,…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'ईश्वर को किसान होना चाहिये...
    12 Dec 2021
    भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े जनआंदोलन में किसानों ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है और अब किसान धीरे धीरे घर की तरफ़ जा रहे हैं। पढ़िये विहाग वैभव की किसानों पर यह नज़्म...
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License