NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
युवा
शिक्षा
भारत
राजनीति
सुनिए सरकार: इस वक्त हेडलाइन मैनेजमेंट छोड़कर छात्रों को निकालने के मैनजमेंट पर ध्यान दें
जब सारे बच्चे सुरक्षित आ जाएंगे और आपके प्रयासों से आ जाएंगे, तो यह देश इतना कृपालु है कि आपको श्रेय देगा। लेकिन चंद सौ को निकाल कर इस वक्त जहाज़ के आते ही मंत्री भेज कर फोटो खींचाने की ज़रूरत नहीं है। पत्रकार रवीश कुमार का खुला पत्र
रवीश कुमार
27 Feb 2022
Ukrain
फ़ोटो- सोशल मीडिया

सेवा में,

विदेश मंत्रालय

भारत सरकार,

इस वक्त हेडलाइन मैनेजमेंट छोड़ कर जो हज़ारों छात्र यूक्रेन में फंसे हैं उनके निकालने के मैनजमेंट पर ध्यान दिया जाना चाहिए। आपरेशन गंगा नाम रख दिया गया है तो आपरेशन में गंगा की सी पवित्रता थोड़ी मात्रा में तो होनी ही चाहिए। जब सारे बच्चे सुरक्षित आ जाएंगे और आपके प्रयासों से आ जाएंगे, तो यह देश इतना कृपालु है कि आपको श्रेय देगा। लेकिन चंद सौ को निकाल कर इस वक्त जहाज़ के आते ही मंत्री भेज कर फोटो खींचाने की ज़रूरत नहीं है।  

इससे बेहतर यह होगा कि कोई मंत्री रोमानिया की सीमा पर सैंकड़ों भारतीय छात्रों के बीच खड़े होकर फोटो खींचा ले तो रात रात भर वहां पहुंच कर ठंड में खड़े हैं। जिनके मां-बाप भारत के अलग-अलग राज्यों में जाग रहे हैं और हमें मैसेज कर रहे हैं कि मदद करें।

कीव के बोगोमोलेट्स यूनिवर्सिटी के एक हास्टल नंबर -7 के बंकर में पांच सौ से छह सौ बच्चे बंकर में रह रहे हैं। इसमें कुछ नाइजीरिया के भी बच्चे साथ रह रहे हैं। बंकर अब गंदे होने लगे हैं। पानी नहीं है। शौचालय नहीं है। बच्चे खाना नहीं बना सकते हैं, फल खाकर रह रहे हैं।

यहां शरण ले रहे हैं पोलटावा मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र मोहम्मद तारिक ने बताया कि बच्चे दूतावास को फोन कर रहे हैं। चार दिन से यही जवाब मिल रहा है कि अपडेट करेंगे लेकिन कुछ प्रगति नहीं है। बच्चे भी दूतावास की मुश्किल स्थिति समझते हैं लेकिन उनका कहना है कि कुछ तो प्रगति हो। कोई उम्मीद तो हो। दो सौ बच्चों को निकाल कर जश्न मनाया जा रहा है जबकि 18000 बच्चे अलग अलग शहरों में फंसे हुए हैं।

स्लोवाकिया की सीमा पर 150-200 छात्र खड़े हैं। इन छात्रों को वापस जाने के लिए कहा जा रहा है। भारतीय दूतावास को फोन कर रहे हैं लेकिन यही जवाब मिल रहा है कि कोशिश हो रही है लेकिन जब तक सीमा पार नहीं करेंगे मदद नहीं कर पाएंगे। तो इन छात्रों को सीमा पार कराने के क्या विकल्प हैं, इसके बारे में उन्हें और भारत में इनके मां-बाप को सरकार को बताना चाहिए ताकि उन्हें तसल्ली मिले। मां-बाप की हालत बहुत ख़राब है। स्लोवाकिया की सीमा पर आयुषी शर्मा भी खड़ी है। उसे सीमा के भीतर नहीं आने दिया जा रहा है। वहां बर्फ पड़ रही है।

एक पिता ने लिखा है कि उनकी बेटी आयुषि इवानो फ्रैकिविस्क मेडिकल यूनिवर्सिटी की तीसरे वर्ष की छात्रा है। बच्चों ने अपनी तरफ से बसों का प्रबंध किया और स्लोवाकिया सीमा पर पहुंचे हैं। वहां पांच किलोमीटर की लाइन लगी है जब उनकी बारी आई तो फिर से धक्का देकर वापस भेज दिया गया। तब से बच्चों का यह दल खुले आसमान के नीचे खड़ा है। पूरी रात ठंड में गुज़ारी है। उन्होंने खाना नहीं खाया है। दूतावास से भी कोई मदद नहीं मिल रही है। आयुषि के साथ दो सौ बच्चे हैं जो स्लोवाकिया की सीमा पर इंतज़ार कर रहे हैं। 

बिहार के सहरसा ज़िले की रहने वाली हिमांगी कुमारी पोलैंड की मेदयाका शेनिल सीमा पर तीन दिनों से कतार में खड़ी है। हिमांगी इवोनो फ्रेंक्विस शहर से यहां आई है। उसके पास खाने-पीने की चीज़ें ख़त्म हो गई हैं। जिस जगह पर हिमांगी खड़ी है वहां का तापमान माइनस 2 डिग्री सेल्सियस है। उसकी हालत कितनी ख़राब हो गई होगी। हिमांगी के पिता गजेंद्र कुमार मिश्र काफी परेशान हैं क्योंकि तीन दिन गुज़र गए हिमांगी तक किसी प्रकार की मदद नहीं पहुंची है। पिता का कहना है कि कोई सुन नहीं रहा है। सरकार ने जो टॉल फ्री नंबर जारी किया है उस पर काफी देर तक कोई रिसीव नहीं करता और कोई उठाता है भी तो कोई खास जवाब नहीं मिलता है। 

मुस्कान भाटिया की मां बहुत परेशान है। उनकी मां का कहना है कि बीस दिन पहले जब भारतीय दूतावास से संपर्क किया था तब यही जवाब मिला था कि परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। कुछ नहीं होगा लेकिन अब दूतावास से संपर्क करना मुश्किल हो गया है। जब यूक्रेन छोड़ने की एडवाइज़री आई तब तक काफी देर हो चुकी थी और कोई जहाज़ उपलब्ध नहीं था। हवाई टिकटों के दाम बहुत बढ़ा दिए गए। छात्रों से कह दिया गया कि अपना इंतज़ाम कर बॉर्डर पर पहुंचें। मुस्कान और अस्सी छात्र बस से रावा-रुस्का सीमा पर पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद उन्हें सीमा के भीतर नहीं जाने दिया गया। वापस जाने के लिए कह दिया गया। वहां से छात्र 156 किलोमीटर दूर एक और सीमा की तरफ रवाना हो गए। पोलैंड और यूक्रेन की सीमा शेहयनी मेदयाका पर पहुंचे। कई घंटे तक वहीं बाहर खुले आसमान के नीचे इंतज़ार करते रहे। उन्हें बताया गया कि भारतीयों को लिए सीमा बंद है। छात्रों को वापस लविव के हॉस्टल में आना पड़ा। उस हॉस्टल में मुस्कान के साथ 850 भारतीय छात्र रह रहे हैं।

हमीरपुर की विभुती भी लविव के बंकर में रह रही हैं। इनके पिता ने वीडियो मैसेज में सरकार के प्रयासों की सराहना की है लेकिन यह भी कहा है कि छात्रों से संपर्क नहीं किया जा रहा है। पोलैंड की सीमा पर 36 घंटे से बच्चे इंतज़ार कर रहे हैं। लवीव में फंसे बच्चों को जल्दी निकालना ज़रूरी है।

आरुषि शर्मा की बहन ने मैसेज किया है कि आरुषि और सत्तर छात्रों का दल स्लोवाकिया की सीमा पर आठ घंटे से कड़ी ठंड में खड़ा है। वहां इन्हें स्लोवाकिया में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। दूतावास से मदद नहीं मिल पा रही है। खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। स्लोवाकिया वाले केवल यूक्रेन के नागरिकों को अपनी सीमा में आने दे रहे हैं।

टरनोपिल नेशनल मेडिकल, अमन ईशा कीर्ति, ईशिता अभिनव रोमानिया बोर्डर की तरफ जा रहे हैं, आठ किलोमीटर उतार दिया है। बहुत भीतर है। रोमानिया की सीमा पर कई हज़ार भारतीय छात्र पहुंच गए हैं लेकिन अगर उन्हें तुरंत भीतर बुलाने का प्रबंध नहीं किया गया तो ठंड और भूख से ही बच्चों की हालत बिगड़ सकती है। कुछ बच्चों के बेहोश होने की भी खबर आ रही है।

सरकार हुज़ूरी, आपको पता है कि लविव में कितने धमाके हो रहे हैं। खारकीव औऱ कीव में क्या आलम है। जिन शहरों में रुस पहुंच गया है या धमाका कर रहा है, वहां से बच्चों को निकालने का प्रबंध करें। बेशक कई हज़ार छात्र खुद से पोलैंड और रोमानिया की सीमा पर हैं। वहां पर विदेश मंत्रालय को और अधिक कर्मचारी और अधिकारी तैनात करनी चाहिए ताकि एक एक छात्र से संपर्क हो। इन देशों से बात कर यूक्रेन की सीमा में खड़े बच्चों को गर्म कपड़े और भोजन का प्रबंध करना चाहिए। भारत में उनके मां-बाप को सरकार की तरफ से फोन जाना चाहिए और सारी जानकारी देनी चाहिए कि इतना वक्त क्यों लग रहा है। क्या किया जा रहा है औऱ क्या नहीं हो सकता है। 

यह बताने की ज़रूरत नहीं है मगर अब लोगों के मैसेज में एक नई चीज़ सामने आने लगी है। यूक्रेन की स्थानीय जनता का व्यवहार बदलने लगा है। शायद उन्हें लग रहा है कि भारत ने यूक्रेन की मदद नहीं की। यूक्रेन के सैनिकों का रुख भी बदलने लगा है। यह स्थिति और ख़तरनाक हो सकती है। भारतीय छात्रों की जान अटकी है, फोटोबाज़ी और फोकसबाज़ी का समय अभी बहुत मिलेगा लेकिन पहले इन छात्रों की जान बचाइये।

यह लंबा पत्र इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि जिस वक्त गोदी मीडिया पर यह प्रोपेगैंडा चल रहा है कि आपरेशन गंगा शुरू हो गया है, छात्रों को निकाला जा रहा है, उनके मां-बाप यह देख पा रहे हैं कि हज़ारों बच्चे अभी भी जंग के बीच फंसे हैं। उनके लिए कुछ नहीं हो रहा है। बच्चे सीमा पर अपनी मदद से पहुंच रहे हैं औऱ वहां भी उन्हें मदद नहीं मिल रही है। सभी मां-बाप सरकार की मुश्किल को भी समझते हैं लेकिन इस वक्त प्रोपेगैंडा की जगह पारदर्शिता की ज़रूरत है। उसके लिए बहुत समय है। 

रवीश कुमार

ज़ीरो टीआरपी ऐंकर

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और एनडीटीवी के एंकर हैं। यह टिप्पणी उनके आधिकारिक फेसबुक पेज से साभार ली गई है।) 

ये भी पढ़ें: रूस-यूक्रेन अपडेट: कीव में सड़कों पर घमासान,लोगों से शरण लेने की अपील


बाकी खबरें

  • Sino-Russian
    एम. के. भद्रकुमार
    चीन-रूसी सैन्य गठबंधन के मायने क्या हैं! 
    18 Dec 2021
    चीन-रूसी गठबंधन किसी भी तरह से वैसा नहीं है जैसा कि अमेरिका अपने किसी भी पश्चिमी साथी के साथ होने का दावा कर सकता है। इस मामले की खास बात यह है कि चीन-रूसी गठबंधन अपनी समकालीनता में अमेरिका के…
  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमरीका की महँगाई का भारत पर हो सकता है बुरा असर
    17 Dec 2021
    अमरीका में महँगाई दर 40 सालों में सबसे ज़्यादा होने से वहाँ ब्याज़ दर बढ़ने की संभावना हैI यूएस के अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि वहाँ जल्द महँगाई के साथ बेरोज़गारी और आर्थिक मंदी छा सकती हैI इसका भारत…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    बैंक कर्मियों की देश्वयापी हड़ताल, गुड़गांव नमाज़ मामला SC में और अन्य ख़बरें
    17 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी बैंक कर्मियों की देश्वयापी हड़ताल, गुड़गांव नमाज़ मामला सुप्रीम कोर्ट में और अन्य ख़बरों पर।
  • rupee vs Doller
    अजय कुमार
    डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट उन्हें भी मारती है जिन्होंने पूरी जिंदगी डॉलर नहीं देखा है!
    17 Dec 2021
    डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले 20 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। इसका आम जनजीवन पर क्या असर पड़ेगा?
  • bank strike
    न्यूज़क्लिक टीम
    बैंक कर्मचारियों की हड़ताल पर खामोश क्यों मीडिया?
    17 Dec 2021
    वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा आज बात कर रहे हैं कि दो दिन से देश भर में चल रही निजीकरण पर बैंकों की हड़ताल का देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा ?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License