NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
राष्ट्र के नाम संबोधन का सार : मेरा भाषण ही मेरा शासन है!
न पलायन करते मज़दूरों पर एक शब्द, न कुचलकर मारे गए मज़दूरों के लिए कोई शोक संवेदना, न भूख के हाहाकार पर कोई शर्मिंदगी। न कोरोना से जंग के 50 दिन का कोई ब्योरा। सिर्फ़ एक ‘अभूतपूर्व’ पैकेज की घोषणा जिसके लिए हम यही कहेंगे, “पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें।”
मुकुल सरल
13 May 2020
cartoon click

दिन मंगलवार, तारीख़ 12 मई, समय रात 8 बजे। करीब 34 मिनट का भाषण। शुरुआती 15-20 मिनट की भूमिका या प्रस्तावना और फिर कथित तौर पर एक ‘अभूतपूर्व’ आर्थिक पैकेज की घोषणा, जिसका पूरा ब्योरा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देंगी। जिसमें अभी तक किए गए सभी खर्चे और राहत पैकेज जोड़ लिए गए हैं।

न पलायन करते मज़दूरों पर एक शब्द, न कुचलकर मारे गए मज़दूरों के लिए कोई शोक संवेदना, न भूख के हाहाकार पर कोई शर्मिंदगी। न कोरोना से जंग के 50 दिन का कोई ब्योरा। न लॉकडाउन के हासिल पर कोई बात। न ‘पीएम केयर्स’ का कोई हिसाब। सिर्फ़ भाषण....भाषण और भाषण। मानो फ़िल्मी अंदाज़ में कह रहे हों कि ...मेरा भाषण ही मेरा शासन है। और यही आपका राशन है।

इस कोरोना काल में 22 मार्च के जनता कर्फ़्यू के लिए 19 मार्च को किए ऐलान से लेकर कल 12 मई तक कुल 54 दिनों में हमारे प्रधानसेवक देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह 5वां राष्ट्र के नाम संबोधन था और नतीजा क्या निकला...वही ढाक के तीन पात।

मोदी जी ने नहीं बताया कि कोरोना से लड़ाई में इन 50 दिनों में हम कहां खड़े हैं। बस इतना बताया कि हम 2 लाख पीपीई किट और 2 लाख एन95 मास्क बनाने लगे हैं, लेकिन अभी भी हमारे सभी स्वास्थ्यकर्मी और आपदाकर्मियों को क्या ये उपलब्ध हो पाया इसका जिक्र नहीं किया। उन्होंने नहीं बताया कि कोरोना का संक्रमण रोकने में हम कितना कामयाब हुए। नहीं बताया कि 24 मार्च को जब करीब 500 केस थे तो क्यों कुल चार घंटे का समय देते हुए पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया गया, और अब जब 70 हज़ार से ज़्यादा केस और 2 हज़ार से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं तो क्यों ऐसा ढीलाढाला लॉकडाउन है कि कुछ पता ही नहीं चल रहा है कि कहां खुला है, कहां बंद। खुला है तो क्यों खुला है, बंद है तो क्यों बंद। यही स्थिति रेलवे के साथ थी। उसे भी एक साथ बंद करने और अब यकायक खोलने का कोई वाजिब तर्क नहीं दिया गया।

जानकारों का कहना है कि एक साथ पूरा देश बंद करने की बजाय पहले भी चरणबद्ध तरीके से देश बंद करना था और अब खोलना भी नियोजित तरीके से था। कहा तो यही जा रहा है कि अभी ग्रीन ज़ोन खोला जा रहा है, लेकिन ओरेंज और रेड ज़ोन में भी काफी गतिविधियां शुरू हो गई हैं और ऐसी भी दुकानें और कंपनियां शुरू हो गई हैं जो अत्यावश्यक सेवाओं में नहीं आतीं। आप शराब की दुकानों का ही उदाहरण ले सकते हैं, यह माना कि शराब से राज्य को बहुत राजस्व मिलता है, लेकिन क्या ऐसे समय में जनता की सेहत की कीमत पर शराब की दुकानों को इस तरह खोला जाना सही था। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर और लगभग सभी महानगरों में भी ऐसी कंपनियां खुल गई हैं जो आवश्यक सेवा में नहीं आतीं। सबसे बड़ा उदाहरण तो आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम् में एलजी पॉलिमर कंपनी को खोले जाने का मामला है, जिसे दोबारा खोले जाने की कोशिश में हुई गैस लीक ने कई जानें ले लीं और सैकड़ों को बीमार कर दिया। पॉलिमर कंपनी कौन सी आवश्यक सेवा में आती है, जो उसे सबसे पहले खोलने की अनुमति दी गई।

इसके अलावा जो सेवाएं और कंपनियां खुल गई हैं, वहां कोरोना से बचाव के लिए कितनी भारत सरकार या WHO की गाइड लाइन का पालन हो रहा है, यह देखना भी ज़रूरी है। सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग के भरोसे कोरोना से नहीं बचा सकता। क्योंकि इससे सिर्फ़ शरीर के बाहर का तापमान पता चलता है। बहुत से लोगों ने बताया कि गर्मी में काम करने या चलने के बाद उनका तापमान बढ़ा हुआ आया और थोड़ा आराम करके या एसी में बैठने के बाद कुछ और। कहा जा रहा है कि एयरपोर्ट पर बहुत मामलों में यही गलती हुई। एसी विमान से उतरकर जब आपका तापमान लिया गया तो वो नार्मल आया। इसी तरह अगर आपने बुखार आने पर पेरासिटामॉल या अन्य कोई दवा ले ली है तो भी इस थर्मल स्क्रीनिंग से कुछ नहीं पता चलेगा। इसके अलावा हमारे देश में बड़ी संख्या में मामले एसिंप्टोमेटिक हैं, यानी ऐसे मामले जिसमें बाहरी तौर पर कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखते।  

और ऐसी स्थिति में अगर केवल मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग से ही कोरोना से पूरा बचाव हो जाएगा तो फिर इतनी लंबी तालाबंदी की क्या ज़रूरत थी, ये भी मोदी जी को बताना चाहिए था।

इसलिए यह बताना ज़रूरी है कि प्रतिदिन टेस्ट की क्षमता बढ़ाने के लिए क्या किया जा रहा है। क्योंकि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने पहले एक लाख टेस्ट प्रतिदिन का लक्ष्य लिया था लेकिन आमतौर पर 80-85 हज़ार टेस्ट ही प्रतिदिन हो पा रहे हैं। हालांकि भारत के लिए ये थोड़ी राहत की बात है कि ठीक होने की दर 31 फीसदी से ज़्यादा है। और मृत्यु दर साढ़े तीन फीसद के करीब। हालांकि महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश इत्यादि राज्यों की स्थिति अभी काफी ख़राब है।

india_3.JPG
इसके अलावा मोदी जी ने जिस आत्मनिर्भर भारत का बार-बार जिक्र किया उसका शोर हम हरित क्रांति के ज़माने से सुनते आए हैं। इसके अलावा लोकल के लिए वोकल का जुमला अच्छा है, लेकिन मेड इन इंडिया और मेक इन इंडिया क्या था? और उसका क्या हासिल हुआ ये भी मोदी जी ने नहीं बताया।

इसके अलावा उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए जिन चार एल पर ज़ोर दिया, उसके भी संकेत फिलहाल तो ख़तरनाक़ ही निकल रहे हैं। मोदी जी के ये चार एल कौन से हैं? ये हैं लैंड, लेबर, लिक्विडिटी, और लॉ। लेकिन लेबर रिफॉर्म के नाम पर आप क्या कर रहे हैं सब देख ही रहे हैं। मोदी सरकार पहले ही 44 श्रम कानूनों को 4 कोड में बदल रही है। इसी के साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत तमाम राज्य सरकारों ने मौका देखकर सभी श्रम कानूनों को कम से कम तीन सालों के लिए स्थगित कर दिया है। इसमें काम के 8 घंटे के बदले 12 घंटे ड्यूटी का भी प्रावधान है और जिसके लिए कोई ओवरटाइम नहीं मिलेगा। बल्कि 8 घंटे काम की दर पर ही भुगतान होगा। इसके अलावा भी मालिकों को तमाम ऐसी छूट दे दी गई हैं कि वे खुलकर मनमानी कर सकें। जब चाहे जिस मज़दूर को रख सकें, जब चाहे निकाल सकें। हालांकि इसकी छूट पहले भी थी और मालिक पहले भी मनमानी कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें इसकी कानूनी तौर पर छूट मिल गई है।

लैंड रिफार्म के नाम पर भी देश में कितने सालों से विकास के नाम पर भूमि अधिग्रहण का खेल चल रहा है, आप देख ही रहे हैं। जल, जंगल, ज़मीन की किस तरह लूट हो रही है, सब जानते ही हैं। अब आगे क्या होगा, इसका सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है, क्योंकि आपात स्थिति के नाम पर सरकारों ने तमाम अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं।

अब केवल देखने को ये ‘अभूतपूर्व’ 20 लाख करोड़ का पैकेज है, जिसके लिए बता दिया गया है कि उसमें पहले दी गई सभी राहतें जोड़ ली गईं हैं। जो बाक़ी है उसका हमारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से एक-एक करके ऐलान किया जाएगा। हालांकि यह पैकेज पहले नहीं तो दूसरे लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही आ जाना चाहिए था। अगर ऐसा होता तो आज ऐसी हालत नहीं होती। इसे हम देर आयद, दुरस्त आयद भी नहीं कह सकते। यह कितना दुरस्त है ये आगे देखने वाली बात है। देखना होगा कि इसमें बर्बाद हो चुके ग़रीब, मज़दूर, किसान को क्या मिला। छोटे-मंझोले उद्योग-धंधों को क्या मिला। एक मशहूर विज्ञापन की टैग लाइन है, “पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें।” यही सावधानी हमें इस पैकेज में रखनी है यानी पहले पैकेज का ऐलान और फिर उसका ज़मीन पर क्रियान्वयन देख लें, तभी तालियां या थालियां बजाएं।

Coronavirus
Lockdown
Narendra modi
PM Modi's Address to the nation
Migrant workers
Workers and Labors
economic crises
Economic Recession
20 lakh Crore
ICMR

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल मॉडल ऑफ़ गवर्नेंस से लेकर पंजाब के नए राजनीतिक युग तक

उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!


बाकी खबरें

  • लाल बहादुर सिंह
    सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 
    26 Mar 2022
    कारपोरेटपरस्त कृषि-सुधार की जारी सरकारी मुहिम का आईना है उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने तो सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन इसके सदस्य घनवट ने स्वयं ही रिपोर्ट को…
  • भरत डोगरा
    जब तक भारत समावेशी रास्ता नहीं अपनाएगा तब तक आर्थिक रिकवरी एक मिथक बनी रहेगी
    26 Mar 2022
    यदि सरकार गरीब समर्थक आर्थिक एजेंड़े को लागू करने में विफल रहती है, तो विपक्ष को गरीब समर्थक एजेंडे के प्रस्ताव को तैयार करने में एकजुट हो जाना चाहिए। क्योंकि असमानता भारत की अर्थव्यवस्था की तरक्की…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,660 नए मामले, संशोधित आंकड़ों के अनुसार 4,100 मरीज़ों की मौत
    26 Mar 2022
    बीते दिन कोरोना से 4,100 मरीज़ों की मौत के मामले सामने आए हैं | जिनमें से महाराष्ट्र में 4,005 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा गया है, और केरल में 79 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा…
  • अफ़ज़ल इमाम
    सामाजिक न्याय का नारा तैयार करेगा नया विकल्प !
    26 Mar 2022
    सामाजिक न्याय के मुद्दे को नए सिरे से और पूरी शिद्दत के साथ राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने के लिए विपक्षी पार्टियों के भीतर चिंतन भी शुरू हो गया है।
  • सबरंग इंडिया
    कश्मीर फाइल्स हेट प्रोजेक्ट: लोगों को कट्टरपंथी बनाने वाला शो?
    26 Mar 2022
    फिल्म द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग से पहले और बाद में मुस्लिम विरोधी नफरत पूरे देश में स्पष्ट रूप से प्रकट हुई है और उनके बहिष्कार, हेट स्पीच, नारे के रूप में सबसे अधिक दिखाई देती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License