NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
ख़रीदो, ख़रीदो, चमन बिक रहा है
आज की सरकारें जिस तरह विकास के नाम पर पूरा देश बेचने पर आमादा हैं, उसी पर तंज़ करते हुए शायर ओमप्रकाश 'नूर’ ने एक शानदार नज़्म कही है-''चमन बिक रहा है''। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं आइए उनकी यही नज़्म।
न्यूज़क्लिक डेस्क
23 Aug 2020
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

''चमन बिक रहा है''

 

ख़रीदो,  ख़रीदो,  चमन  बिक  रहा  है

 

ये  शाख़ें  ख़रीदो,  गुलों   को   ख़रीदो

कबूतर  बिका,   बुलबुलों  को  ख़रीदो

 

ये  कोयल  की  बोली, ये  कू  कू बिकाऊ

सभी  है  बिकाऊ  के   जो   है   टिकाऊ

 

परिंदों  की   बिकने    लगी   हैं    उड़ानें

चले    आओ   भाई    सजी  हैं    दुकानें

 

बहारें   ख़रीदो    के    ख़ुशबू    ख़रीदो

ये   झेलम  ख़रीदो  के  सरयू    ख़रीदो

 

बिकाऊ  हैं  अब   देखो  गंगो-जमन  भी

बिकाऊ  है  इन्सानियत   का  चलन  भी

 

बिके  जा  रहे  हैं    ज़बानों    के   चैनल

बिकाऊ  हैं  अब  सच  की राहें मुसलसल

 

बिकाऊ  है   अब  पत्ता-पत्ता  ये कलियां

नगर  ही  नहीं   गांव   की  सारी  गलियां

 

बहुत   माल  है  अपने  पुरखों  का प्यारे

ख़रीदो    ख़रीदो   ये  दिलकश   नज़ारे

 

कहो अब  ये  चिड़ियों  से  मत  चहचहाऐं

के  अब  बिकने  वाली  हैं घर  की  हवाऐं

 

किसी   शाख़  पर   अब  न   बैठें   परिंदे

जो   बोली  लगाऐ   वही  शाख़   चुन  ले

 

बिकाऊ  है   सामान  सब  इस  चमन  का

नहीं  डर  रहा  अब  तो  दार-औ-रसन का

 

बिके  अब  न  उल्फ़त  का  बरगद बचा लो

उठो    नौजवानो !   ये    संसद   बचा   लो

 

  • ओमप्रकाश 'नूर’

                   रुड़की

इसे भी पढ़ें : …‘सुंदरता के दुश्मनो, तुम्हारा नाश हो !’

इसे भी पढ़ें : वो मुझको मुर्दा समझ रहा है, उसे कहो मैं मरा नहीं हूं

इसे भी पढ़े : 15 अगस्त: इतने बड़े हुए मगर छूने को न मिला अभी तक कभी असल झण्डा

इसे भी पढ़े : ...पूरे सिस्टम को कोरोना हो गया था और दुर्भाग्य से हमारे पास असली वेंटिलेटर भी नहीं था

इसे भी पढ़े : ...कैसा समाज है जो अपनी ही देह की मैल से डरता है

इसे भी पढ़े : वरवर राव : जो जैसा है, वैसा कह दो, ताकि वह दिल को छू ले

इसे भी पढ़े : क्या हुआ छिन गई अगर रोज़ी, वोट डाला था इस बिना पर क्या!

 

poem
Sunday Poem
privatization
indian railways
BSNL
Modi government
इतवार की कविता

Related Stories

वे डरते हैं...तमाम गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज और बुलडोज़र के बावजूद!

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान

फ़ासीवादी व्यवस्था से टक्कर लेतीं  अजय सिंह की कविताएं

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

हिजाब बनाम परचम: मजाज़ साहब के नाम खुली चिट्ठी

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!


बाकी खबरें

  • अदिति निगम
    25 मार्च, 2020 - लॉकडाउन फ़ाइल्स
    26 Mar 2022
    दो साल पहले भारत के शहरों से प्रवासी परिवारों का अब तक का सबसे बड़ा पलायन देखा गया था। इसके लिए किसी भी तरह की बस या ट्रेन की व्यवस्था तक नहीं की गयी थी, लिहाज़ा ग़रीब परिवार अपने गांवों तक पहुंचने…
  • सतीश भारतीय
    गुरुग्राम में कॉलेज छात्रों की गैंग जबरन कर रही है, रेहड़ी-पटरी वालों से ‘हफ़्ता वसूली‘
    25 Mar 2022
    फिल्मों में ‘हफ्ता वसूली‘ गुन्डे करते हैं और गुरुग्राम की धरती पर पढ़े लिखे नौजवान कर रहे हैं।
  • रवि शंकर दुबे
    योगी को फिर मुख्यमंत्री बनाना भाजपा की मज़बूती दर्शाता है या मजबूरी?
    25 Mar 2022
    योगी आदित्यनाथ जब दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, तो भाजपा हाईकमान के चेहरे पर बिखरी खुशी कितनी असली थी कितनी नकली? शायद सबसे बड़ा सवाल यही है।
  • सोनिया यादव
    यूपी से लेकर बिहार तक महिलाओं के शोषण-उत्पीड़न की एक सी कहानी
    25 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में जहां बीजेपी दूसरी बार सरकार बना रही है, तो वहीं बिहार में बीजेपी जनता दल यूनाइटेड के साथ गठबंधन कर सत्ता पर काबिज़ है। बीते कुछ सालों में दोनों राज्यों पितृसत्तात्मक राजनीति की…
  • अजय कुमार
    श्रीलंका की तबाही इतनी भयंकर कि परीक्षा के लिए कागज़ का इंतज़ाम भी नहीं हो पा रहा
    25 Mar 2022
    श्रीलंका में रसोई गैस के एक सिलेंडर की कीमत तकरीबन 4200 श्रीलंकन रुपये तक पहुंच गयी है। एक किलो दूध का पैकेट तकरीबन 600 श्रीलंकन रुपये में मिल रहा है। कागज की कमी की वजह से सरकार ने स्कूली परीक्षा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License