NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
इतवार की कविता : 3 भोजपुरी ग़ज़लें
भोजपुरी में बेहद उम्दा कलाम लिखा जा रहा है। इस बात की तस्दीक़ करने का ज़िम्मा हम पाठकों पर छोड़ते हैं। इतवार की कविता में आज पढ़िये शायर इरशाद ख़ान सिकंदर की 3 भोजपुरी ग़ज़लें।
न्यूज़क्लिक डेस्क
19 Sep 2021
Nature

भोजपुरी गीतों का नाम आते ही लोग फ़िल्म इंडस्ट्री में हो रही फूहड़ता की बात करने लगते हैं जिसकी वजह से भोजपुरी में लिखी जा रही कविताएं, ग़ज़लें हमारी नज़रों से दूर ही रह जाती हैं। भोजपुरी में बेहद उम्दा कलाम लिखा जा रहा है। इस बात की तस्दीक़ करने का ज़िम्मा हम पाठकों पर छोड़ते हैं। 'इतवार की कविता' में आज पढ़िये सही मायनों में बहुमुखी प्रतिभा के धनी दिल्ली में रहने वाले शायर इरशाद ख़ान सिकंदर की 3 भोजपुरी ग़ज़लें।

1.

हर साँझ तहरा प्रीत में पागल रहे गजल
सूरज लेखा तलाब में डूबल रहे गजल

जइसे कि बूँद ओस के देहिया प दूब के
आँखी से लेके गाल तक फइलल रहे गजल

देखिहा कबो तू चाँद के हमरा निगाह से
कहब$ कि आसमान में सूतल रहे गजल

आन्ही रहे कि याद रहे काल्ह रात भर
महुआ के लेखा तकिया पे चूवल रहे गजल

लिख पढ़के दिल हमार ई आखर अढ़ाई गो 
एतना हँसल कि देखके रोवल रहे गजल

2.

अन्हार बस्ती में सूरुज के लेके खत अइहs
तू अबगे अइहs तs आँसू के लेखा मत अइहs

निकलले बाड़s कदम ड्योढ़ी से तs लगले हाथ
गगन के तखती प इतिहास भी रचत अइहs

तूँ बीच राह में हिम्मत न हरिहs ए बीरन
भले ही लौटिके एहिजा गिरत-परत अइहs

बिदेस जाए के बा जा मगर भुलइहs जनि
सनेस देब तs पंछी नियन उड़त अइहs

खलीलाबाद के दक्खिन में गाँव बा करमा
समय मिले तs कभो तूँ घुमत फिरत अइहs

3.

लउके अन्हरिया आगे मन में अलाव सुलगे
साँझी के बेरा एगो सूरज के घाव सुलगे

अँखिया में लाली बाटे पीयर भइल बा देहिया
पुरुवा के साथ पाके बिरहा के भाव सुलगे

दू रोज के सफर में दुनिया के ए भँवर में 
देखनीं इहो तमासा जल बीचे नाव सुलगे

बर के बुता चुकल बा जीवन के सारा किस्सा
पर याद आवे जब-जब, तब-तब पड़ाव सुलगे 

केहुओ के मत बतइह इरसाद ई कहानी
नैना नदी के तीरे काहे बहाव सुलगे

- इरशाद ख़ान 'सिकंदर'

Sunday Poem
Hindi poem
ghazal
Bhojpuri Ghazal

Related Stories

वे डरते हैं...तमाम गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज और बुलडोज़र के बावजूद!

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

...हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!

इतवार की कविता: जश्न-ए-नौरोज़ भी है…जश्न-ए-बहाराँ भी है

इतवार की कविता: के मारल हमरा गांधी के गोली हो


बाकी खबरें

  • विचार: मानव मनोविज्ञान को समझना!
    शंभूनाथ शुक्ल
    विचार: मानव मनोविज्ञान को समझना!
    31 May 2021
    असहिष्णुता राजनेता और राजनीतिक दलों में इस कदर पैठ गई है, कि अब वे जनता के मन को समझने में भी नाकाम हैं।
  • वक़्त की आवाज़: फ़िलिस्तीन के नागरिकों को समर्पित
    न्यूज़क्लिक टीम
    वक़्त की आवाज़: फ़िलिस्तीन के नागरिकों को समर्पित
    31 May 2021
    वक़्त की आवाज़ का यह एपिसोड फ़िलिस्तीनी लोगों को समर्पित है जो निरंतर दमन का सामना करते हुए स्वतंत्रता और न्याय की अपनी मांगों के साथ दृढ़ता से खड़े रहे हैं। उन लोगों के साथ एकजुटता दिखाते हुए…
  • बिहार में माकपा विधायक अजय कुमार पर दूसरी बार जानलेवा हमला
    अनीश अंकुर
    बिहार में माकपा विधायक अजय कुमार पर दूसरी बार जानलेवा हमला
    31 May 2021
    विधायक अजय कुमार पर एक ही महीने में हुए दूसरे जानलेवा हमले के खिलाफ़ और दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग को ले कर माकपा ने सोमवार को बिहार में राज्यव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की है।
  • रामदेव
    प्रबीर पुरकायस्थ
    पतंजलि के उत्पाद बेचने के लिए रामदेव के फ़र्ज़ी दावों और भाजपा के विज्ञानविरोधी राष्ट्रवाद की कॉकटेल
    31 May 2021
    रामदेव और पतंजलि के लिए, हरेक विवाद कारोबार में मददगार है। उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता है कि उनके गलत-सलत प्रचार से लोगों की जानें जा सकती हैं।
  • मैथिली शिवरामन
    मैथिली शिवरामन
    चिल्ड्रन ऑफ़ डार्कनेस : मैथिली शिवरामन
    31 May 2021
    मैथिली शिवरामन, लिंगों के बीच और समुदायों के भीतर समानता की प्रखर सेनानी, मायूसी के साथ लिखती हैं कि जातिवाद लोगों के जनसमूह को पैदा करता है। इसे ‘हॉन्टेड बाय फ़ायर’ से लिया गया है: जो जाति, वर्ग,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License