NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: बापू मिले 'सरकार जी' से
"तो बापू", सरकार जी ने कहा, "आप यहां आए किसलिए हैं। आप तो जानते ही हैं आपके और मेरे रास्ते जुदा जुदा हैं। आप सत्य के प्रयोगधर्मी और मैं असत्य को सत्य बनाने के प्रयोग में जुटा हूं। आप प्रेम के पुजारी और मेरी तो राजनीति ही घृणा फैलाने पर टिकी है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
03 Oct 2021
GANDHI JI CARTOON
तस्वीर केवल प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए। साभार: पत्रिका

कल दो अक्टूबर था। रात को दिनभर की थकान के बाद 'सरकार जी' गहरी नींद में सो गए। सोते-सोते उन्हें लगा कि गांधीजी उनके कमरे में बैठे हैं। वे हड़बड़ा कर उठे। देखा गांधीजी वास्तव में ही उनके सामने कुर्सी पर बैठे हैं। सरकार जी घबरा कर पसीने पसीने हो गए। 'भूत-भूत' चिल्लाना चाहते थे पर छप्पन इंच के सीने से आवाज ही नहीं निकल पा रही थी।

‘सरकार जी’ को घबराया देख गांधीजी बोले, "घबराओ मत, मैं तो यहां सिर्फ प्यार की बात करने आया हूं। मैं तो तुमसे भी प्यार करता हूं बल्कि कहा जाए तो मैं सब से प्यार करता हूं। मैं किसी से भी घृणा नहीं करता हूं, नफरत नहीं करता हूं। क्योंकि घृणा और नफरत ही हिंसा की जननी हैं"।

"मैं झूठे से नहीं झूठ से नफरत करता हूं। मैं हिंसक से नहीं हिंसा से नफरत करता हूं। पापी से नहीं पाप से नफरत करता हूं। इसलिए मुझे किसी भी व्यक्ति से घृणा या नफरत नहीं है। तुमसे भी नहीं", गांधी जी ने आगे जोड़ा।

"बापू", सरकार जी ने कहा, "कल आपका जन्मदिन था और मैंने उसे बहुत धूमधाम से मनाया और मनवाया। मैं दिन भर आपके ही गुण गाता रहा। मैंने तो आपकी याद में स्वच्छ भारत 2.O भी शुरू कर दिया.......। 

सरकार जी आगे कुछ बोलते उससे पहले ही गांधीजी ने बीच में टोका दिया, "और स्वच्छ भारत 1.O का क्या हुआ जो 2.O भी शुरू कर दिया। कुछ काम काज भी करेगा या ओ...ओ... ही करता रहेगा। तुझे कूड़ा फैलवा कर, कैमरे के सामने झाड़ू लगाने का नाटक करने का बड़ा शौक है। लोग देखते हैं तो क्या सीखते हैं?" गांधीजी बुदबुदाए "पहले एक ओ और अब दो ओ। पहले मन का कूड़ा साफ करो, बाहर का कूड़ा तो साफ हो ही जाएगा"।

"तो बापू", सरकार जी ने कहा, "आप यहां आए किसलिए हैं। आप तो जानते ही हैं आपके और मेरे रास्ते जुदा जुदा हैं। आप सत्य के प्रयोगधर्मी और मैं असत्य को सत्य बनाने के प्रयोग में जुटा हूं। आप प्रेम के पुजारी और मेरी तो राजनीति ही घृणा फैलाने पर टिकी है। मैं इन चीजों को कैसे छोड़ सकता हूं। आपकी अहिंसा और सत्य में से मैंने बस इतना ही तो किया है न कि 'अ' को अहिंसा से हटा कर सत्य के आगे लगा दिया है। बस यही मेरी मजबूती है बापू। और हां! अपनी राजनीति चमकाने के लिए आपको याद तो कर ही लेता हूं"। 

"मैं तो तुम्हें समझाने आया था। प्यार करो। व्यापारियों से प्यार करते हो तो किसानों से भी प्यार करो। कारोबारियों से प्यार करते हो तो बेरोजगारों से भी प्यार करो। कॉर्पोरेट से प्यार करते हो तो छात्रों से भी प्यार करो। हिंदुओं से प्यार करते हो तो मुसलमानों से भी प्यार करो। प्यार की राजनीति हमेशा रहती है पर घृणा की राजनीति जल्द ही मर जाती है। सच की उम्र लंबी होती है और झूठ की उम्र छोटी"। इतना कहते ही गांधी जी अंतर्ध्यान हो गए।

भोर हो चुकी थी। अब दोबारा सोने का समय नहीं था। अतः सरकार जी उठे और अपना नित्य कर्म पूरा किया। उसके बाद मोरों को दाना डाला। मोरों को दाना डाल अपने प्रिय स्थल 'सेंट्रल विस्टा' की ओर चल पड़े। वहां पर मजदूर काम कर रहे थे।

सरकार जी ने मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा, "मित्रों, मैं भी आपके बीच में से ही एक हूं। बचपन में मैं भी मजदूरी करता था। और आप तो जानते ही हैं, उस समय यह जो आपने सिर पर पीला टोपा पहना हुआ है न, यह नहीं होता था। एक बार काम करते हुए मेरे सिर पर एक मन भर का पत्थर गिर पड़ा। मन भर तो आप समझते ही है ना, यही कोई चालीस किलो। तो भाइयों वह दिन है और आज का दिन.........(कुछ भी, कुछ भी)

(‘तिरछी नज़र’ एक व्यंग्य स्तंभ है। इसके लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Narendra modi
Mahatma Gandhi

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

इतवार की कविता: के मारल हमरा गांधी के गोली हो

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू


बाकी खबरें

  • मीडिया को चुप करवाने का रेड राज
    न्यूज़क्लिक टीम
    मीडिया को चुप करवाने का रेड राज
    23 Jul 2021
    इनकम टैक्स और ED का छापा मीडिया को शांत करने का एक महत्वपूर्ण हथियार बन गया है। आजकल हर मीडिया हाउस किसी और भी कारोबार में लगा हुआ है जिसके कारण उन्हें निशाना बनाना आसान हो गया है। और इन रेड के कारण…
  • पेगासस मामले की जांच की मांग को लेकर विपक्षी दलों का संसद परिसर में प्रदर्शन
    भाषा
    पेगासस मामले की जांच की मांग को लेकर विपक्षी दलों का संसद परिसर में प्रदर्शन
    23 Jul 2021
    विपक्षी सांसदों ने अपने हाथ में एक बड़ा बैनर ले रखा था जिस पर ‘हम उच्चतम न्यायालय की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग करते हैं’ लिखा हुआ था।
  • पेगासस के दुरुपयोग और लाइसेंस प्रक्रिया के आरोपों की समीक्षा करेगा इज़रायल
    भाषा
    पेगासस के दुरुपयोग और लाइसेंस प्रक्रिया के आरोपों की समीक्षा करेगा इज़रायल
    23 Jul 2021
    बेन बराक ने कहा कि पेगासस ने ‘‘कई आतंकवादी प्रकोष्ठों का भंडाफोड़” करने में मदद की है लेकिन ‘‘ अगर इसका दुरुपयोग किया जा रहा है या इसे गैर-जिम्मेदार निकायों को बेचा जा रहा है तो यह कुछ ऐसा है जिसकी…
  • महाराष्ट्र : रायगढ़ जिले में भूस्खलन के कारण 30 लोगों की मौत
    भाषा
    महाराष्ट्र : रायगढ़ जिले में भूस्खलन के कारण 30 लोगों की मौत
    23 Jul 2021
    पुलिस के मुताबिक महाड तहसील के तलाई गांव में हुए इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण कई हादसे भी हो चुके हैं।
  • अमेरिका में प्रतिबंधात्मक मतदाता क़ानूनों की बाढ़
    सुबीर पुरकायस्थ
    अमेरिका में प्रतिबंधात्मक मतदाता क़ानूनों की बाढ़
    23 Jul 2021
    'इक्कीसवीं सदी के किसी चुनाव में अमेरिकी नागरिकों के मतदान करने के अबाधित अधिकार की अहमियत क्या उतनी ही है जितनी कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में स्वीकृत बजट के रूप में अमेरिकी धन के निर्बाध प्रवाह की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License