NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!
सरकार जी जब भी विदेश जाते हैं तो वहां रहने वाले भारतीयों से अवश्य ही मिलते हैं। इससे सरकार जी की खुशहाल भारतीयों से मिलने की इच्छा भी पूरी हो जाती है। 
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
15 May 2022
cartoon

सरकार जी अभी, हाल ही में, विदेशी दौरे पर थे। जैसा कि होता ही है कि विदेशी दौरे पर उनका वहां रहने वाले भारतीयों से मिलने का कार्यक्रम था। सरकार जी जब भी विदेश जाते हैं तो वहां रहने वाले भारतीयों से अवश्य ही मिलते हैं। इससे सरकार जी की खुशहाल भारतीयों से मिलने की इच्छा भी पूरी हो जाती है। 

तो सरकार जी डेनमार्क में बसे खुशहाल भारतीय लोगों से मिल कर हॉल में से निकले ही थे कि पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया। सरकार जी सकपका गए। सरकार जी बनने के बाद ऐसा पहली बार हुआ था पिछले सात आठ सालों में सरकार जी के सामने पत्रकार पड़ जाएं। वैसे तो सरकार जी तैयारी कर के भी पत्रकारों के सामने नहीं आते हैं पर यहां तो वे पत्रकारों के सामने अचानक ही पड़ गए थे और वह भी बिना किसी तैयारी के। सामने टेलीप्रोम्पटर भी नहीं था कि कुछ बोल पाते। तो सरकार जी हड़बड़ा गए। हकलाते हुए कुछ अस्पष्ट सा बोलने लगे। जो कुछ समझ में आया, वह था, 'आपको अंदर नहीं आने दिया? ओह माई गॉड'!

ओह माई गॉड! यह तो बहुत ही अजीब हुआ। पत्रकारों को तो अंदर आने ही देना चाहिए था। सरकार जी का भाषण सुनने देना चाहिए था। सरकार जी जो जुमले बाजी करते, वह सुनने देनी चाहिए थी। मी लार्ड, ये सरकार जी द्वारा जुमला बोलने की बात मैंने नहीं, आदरणीय गृहमंत्री जी ने कही थी। मैं तो यह मानते हुए कि जुमला बोलना अच्छी बात है, सरकार जी यह करते रहते हैं और गृहमंत्री जी इसकी तस्दीक भी करते हैं, इस शब्द, जुमला का प्रयोग कर रहा हूं।

तो सरकार जी तो विदेश में खुशहाल भारतीय लोगों से मिलने ही गए थे। भारत में तो खुशहाल भारतीय ढूंढने से भी नहीं मिलते हैं। तो सरकार जी जब भी विदेश जाते हैं, वहां बसे भारतीयों से अवश्य ही मिलते हैं क्योंकि खुशहाल भारतीय वहीं, विदेश में ही मिलते हैं। वहीं पर सरकार जी 'सब चंगा सी', 'सब ठीक-ठाक है', :ऑल इज वेल' बोल सकते हैं। भारत में तो यह बोलना मुश्किल ही है। यहां भारत में कोई भी 'सब चंगा सी' बोलेगा तो लोग हंसेंगे, ठहाके लगायेंगे। 

भारत में तो लोग बोलते 'हे भगवान! गैस सिलेंडर हजार रुपए का हो गया'! 'हाय राम! यह मूंह जला खाने का तेल तो दो सौ के पार होने वाला है'! 'ओह माई गॉड! गेहूं का आटा भी पचास रुपए पहुंच गया है'! या अल्लाह! ये लोग पेट्रोल डीजल की कीमत बढ़ाने से कब रुकेंगे'! विदेश में होते हैं तो भगवान को याद करने के, ओह माय गॉड बोलने के मौके कम ही आते हैं पर भारत में आप दिन में पांच सात बार भगवान को याद न करें, ऐसा हो ही नहीं सकता है। जब से सरकार जी सरकार बने हैं तब से ऐसे मौके ज्यादा ही आने लगे हैं। जब भी लोग बाजार जाते हैं, पेट्रोल पंप जाते हैं, गैस सिलेंडर मंगवाते हैं, सब्जी खरीदते हैं, भगवान को याद कर ही लेते हैं। 'ओह माई गॉड' बोल ही लेते हैं। 

भारत में खुशहाल भारतीय कम ही पाये जाते हैं। खुशहाल भारतीय एक लुप्त होती प्रजाति है। खुशहाल भारतीयों के संरक्षण के लिए ही वर्तमान सरकार जी बहुत ही लगन से, बिना सोये, बिना कोई छुट्टी लिए काम कर रहे हैं। इन्हीं के कार्यकाल में भारतीयों को विदेश भेजने का विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है। विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और अन्य बहुत से भारतीय खुशहाल रहने के लिए ही भारत से बाहर गए हैं। अनुमान है, रोज लगभग तीन सौ भारतीय खुशहाल भारतीय बनने के लिए विदेश जाते हैं।

ओह माई गॉड! यह क्या हो गया? मैं यह सब लिख ही रहा था कि खबर आई कि उच्चतम न्यायालय ने देशद्रोह (राजद्रोह) कानून को सस्पेंड कर दिया है। उस पर रोक लगा दी है। अब क्या होगा? मतलब क्या अब कोई भी सरकार जी की आलोचना कर सकेगा?  कोई भी सरकार जी के झूठ को झूठ कह सकेगा? कोई भी सरकार जी को जुमले को जुमला बोल सकेगा? कोई भी सरकार जी को झूठे वादे करने वाला, वादे पूरे नहीं करने वाला बता सकेगा? और सरकार जी उसे देशद्रोही भी नहीं कह सकेंगे? ओह माई गॉड! देश में यह क्या हो रहा है? 

लेकिन जरा रूको। खुश मत होओ। सरकार जी के पास और भी हथियार हैं। और अधिक खतरनाक हथियार हैं। देशद्रोह कानून से अधिक खतरनाक तो यूएपीए ही है। और इन सरकार जी के पास ही नहीं, सभी सरकार जीयों के पास इतने खतरनाक हथियार रहे हैं। आजकल यूएपीए है तो उससे पहले पोटा होता था और पोटा से पहले टाडा...उससे पहले मीसा। तो चिंता मत करो। अगर राजद्रोह कानून खत्म हो भी गया तो भी विरोधियों पर, आलोचकों पर और अधिक खतरनाक कानून लगाए जा सकते हैं। यूएपीए लगाया जा सकता है। तो देशभक्त लोगों, चिंता मत करो। देश में कानून का राज चलता ही रहेगा। 

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Narendra modi
Inflation
unemployment
NRI
Modi Govt

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं

कटाक्ष : बुलडोज़र के डंके में बज रहा है भारत का डंका


बाकी खबरें

  • Neiphiu Rio
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नागालैंड की घटना पर सीएम रियो ने कहा, 'आफ़्स्पा कठोर है, इसे हटाना ज़रूरी!'
    06 Dec 2021
    मोन ज़िले के ओटिंग में सुरक्षा बलों की फ़ायरिंग में 14 नागरिकों की मौत के बाद से राज्य में ग़ुस्सा है।
  • RML
    भाषा
    तीन केंद्रीय अस्पतालों के रेजिडेंट चिकित्सकों ने सोमवार से नियमित, आपात सेवाओं का किया बहिष्कार
    06 Dec 2021
    रेजिडेंट चिकित्सकों ने नीट-पीजी 2021 की काउंसलिंग में देरी को लेकर एफओआरडीए द्वारा आयोजित देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के समर्थन में सोमवार से सभी नियमित और आपातकालीन सेवाओं का बहिष्कार किया।
  • Pendant
    संदीपन तालुकदार
    पोलैंड में मिला पेंडेंट मानव द्वारा बनाया सबसे पुराना जीवित आभूषण हो सकता है
    06 Dec 2021
    कार्बन डेटिंग ने स्थापित किया है कि पेंडेंट इसी तरह से सजाए गए और अन्य साइटों में पाए जाने वाली कलाकृतियों से हज़ारों साल पुराना है।
  • US amazon
    सोनाली कोल्हटकर
    क्यों अमेज़न अमेरिकी श्रमिकों के यूनियन बनने से भयभीत है
    06 Dec 2021
    एक ऐसे दौर में जब श्रमिकों के बीच में असंतोष बढ़ता जा रहा हो, अपने अल्बामा वेयरहाउस में दूसरी दफा यूनियन के लिए मतदान के फैसले से अमेज़न निश्चित रूप से चिंतित है कि कहीं अमेरिकी श्रमिक भी यूरोप की तरह…
  • street
    दमयन्ती धर
    गुजरात: नगर निगमों ने मांसाहारी खाद्य पदार्थ बेचने वाले ठेलों को प्रतिबंधित किया, हॉकर्स पहुंचे हाई कोर्ट
    06 Dec 2021
    अकेले अहमदाबाद में ही 6000 से ज्यादा, ठेले पर मांसाहारी खाद्य पदार्थ बेचने वाले विक्रेता हैं। इनमें से ज्यादातर उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा से आए लोग हैं, जिनका परिवार इस आय पर निर्भर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License