NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
कोरोना काल में आत्मनिर्भरता यानी ‘सेल्फ रिलायंस’
आत्मनिर्भर को अंग्रेजी में ‘सेल्फ रिलायंस (self reliance)’ भी कहते हैं। मोदी जी जब आत्मनिर्भरता की बात कर रहे थे तो वे ‘सेल्फ रिलायंस’ की ही बात कर रहे थे। अब जब मोदी जी सेल्फ की बात करें तो सेल्फ माने स्वयं मोदी जी ही होता है, और कुछ हो भी नहीं सकता है। और रिलायंस का अर्थ तो सबको पता ही है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
24 May 2020
cartoon click

प्रधानमंत्री जी ने जबसे बीस लाख करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया है तब से मैं इसके बारे में जानने, समझने के लिए बेचैन हूँ। अगर प्रधानमंत्री जी स्वयं समझाते तो अवश्य ही समझ में आ जाता। पर उन्होंने स्वयं तो कुछ बताया नहीं, सारी जिम्मेदारी निर्मला सीतारमण जी पर डाल दी। अब निर्मला सीतारमण जी हैं तो बहुत ही बुद्धिमान, जेएनयू से जो पढ़ी हैं, इससे दस गुणा, दो सौ लाख करोड़ रुपये का बजट भी दो घंटे में पढा़ देती हैं। पर यहां चूक गयीं। बीस लाख करोड़ रुपये को समझाने में पांच लैक्चर लगा दिये और फिर भी न समझ पायीं और न ही समझा पायीं।

tirchi nazar_0.JPG

वाट्सएप यूनिवर्सिटी तो सभी विषयों की माहिर है। अतः सोचा इस बीस लाख करोड़ रुपये की महिमा उसी से पढ़ते हैं। पर वाट्सएप भी यही बता पाया कि यह भी मोदी जी के सभी कदमों की तरह से मास्टर स्ट्रोक है। तो वाट्सएप से पढ़ने और टीवी चैनलों को देखने के बाद मुझे समझ आ गया कि यह बीस लाख करोड़ रुपये किसी गरीबों को, मजदूरों को, रेहड़ी-ठेले वालों को ऐसे ही मुफ्त में देने के लिए नहीं हैं। यह बीस लाख करोड़ रुपये कोई फालतू का पैकेज नहीं है। इसमें से बहुत सारा पैसा तो पहले ही, बजट में या उसके बाद पेश किया जा चुका है। 

यह बीस लाख करोड़ रुपये तो साहूकार सरकार ने कम ब्याज पर, बिना किसी गारंटी के उधार देने के लिए रखा है। सरकार चाहती है कि इससे आप आत्मनिर्भर बनें, इसलिए सरकार रेहड़ी वालों को, किसानों को, मछली पकडने वालों को, सबको पैसा ब्याज पर देगी। सही ही तो है, जिन्दा रखने के लिए पैसा खैरात मैं देना चाहिए और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ब्याज पर। इससे गरीब भले ही आत्मनिर्भर बने या न बनें, सरकार अवश्य ही आत्मनिर्भर बनेगी।

प्रधानमंत्री जी चाहते हैं कि हम आत्मनिर्भर बनें। यह तो बहुत ही अच्छी बात है। हमारे मजदूर भाईयों ने तो मोदी जी के आह्वान से पहले ही दिखा दिया है कि वे कितने आत्मनिर्भर हैं। वे अपने गांव-देस लौटने के लिए सरकार पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं हैं। उन्हें न तो सरकारी बस चाहिए और न ही रेलगाड़ी। वे तो मोदी जी के आत्मनिर्भर बनने के उद्घोष से पहले ही आत्मनिर्भर बन चुके थे। वे अपने पैरों पर ही खड़े थे और अपने पैरों पर ही चल रहे थे, पगडंडियों पर, हाई-वे पर, रेलवे लाइन पर भी। सरकारी मदद की उन्हें न आशा थी और न दरकार। गरीब मजदूर तो अपने पैरों पर चल पड़ा है पर यह सरकार न जाने कब अपने पैरों पर खड़ी होगी, कब आत्मनिर्भर बनेगी। अब लोग इसी इंतजार में हैं कब यह सरकार आत्मनिर्भर बने और जनता से टैक्स वसूलना बंद करे।

इस सरकार का देश को आत्मनिर्भर बनाने का एक और सिद्धांत है कि पैसा विदेशों से आयात किया जाये। अर्थशास्त्री इसे ही एफडीआई कहते हैं। जितना अधिक एफडीआई होगा उतने ही हम आत्मनिर्भर बनेंगे। तो शत प्रतिशत आत्मनिर्भरता के लिए शत प्रतिशत एफडीआई होना चाहिये। पिछली सरकारें देश को कम आत्मनिर्भर बना रही थीं। बामुश्किल तैंतीस या अधिक से अधिक पचास प्रतिशत एफडीआई की इजाजत दे रहीं थीं। उससे आत्मनिर्भरता भी कम ही हो रही थी। अब सौ फीसदी विदेशी धन से सौ फीसदी आत्मनिर्भरता आयेगी।

आत्मनिर्भर को अंग्रेजी में ‘सेल्फ रिलायंस (self reliance)’ भी कहते हैं। मोदी जी जब आत्मनिर्भरता की बात कर रहे थे तो वे ‘सेल्फ रिलायंस’ की ही बात कर रहे थे। अब जब मोदी जी सेल्फ की बात करें तो सेल्फ माने स्वयं मोदी जी ही होता है, और कुछ हो भी नहीं सकता है। और रिलायंस का अर्थ तो सबको पता ही है। अरे, वही अंबानी, वही मुकेश अंबानी। यानी आप निर्भर हो जायें, मोदी जी पर और अंबानी पर। यानी कि आत्म निर्भर होने का अर्थ है कि आप निर्भर हो जायें, एक तो राजनेता पर और दूसरे पूंजीपति पर।

मोदी जी ने यह भी समझाया कि हमें "लोकल पर वोकल" होना है। अब वोकल होने पर कौन सा टैक्स लगता है तो भाई लोग एकदम से ही वोकल हो गए। लोकल इस्तेमाल करें या न करें, वोकल जरूर हो गए। मेरे पास भी बहुत सारे लोगों ने अमरीकी कम्पनी द्वारा चलाये जा रहे वाट्सएप पर, अपने चीनी स्मार्ट फोन से अंग्रेजों की भाषा में लोकल पर वोकल होने के लिए संदेश भेजे। 

प्रधानमंत्री जी ने आपदा को अवसर में बदलने का भी संदेश दिया है। आपदा को अवसर में बदलने की कला हर एक को नहीं आती है। हमारे मोदी जी इस कला में माहिर हैं और ऐसे कार्य पहले भी कर चुके हैं। अभी पिछले वर्ष ही उन्होंने पुलवामा अटैक की त्रासद आपदा को अवसर में बदल कर चुनाव जीत लिया था। इस बार भी मोदी जी ने इस आपदा को अवसर में बदलने की ठान ली है। इस आपदा का लाभ सिर्फ दो ही लोगों को मिला है। एक तो मोदी जी को। सुना है इस कोरोना काल में उनकी लोकप्रियता बढ़ गई है। और दूसरे मुकेश अंबानी को, उनकी भी संपदा बढ़ती ही जा रही है। 

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Atmanirbhar Bharat
Narendra modi
ambani adani
mukesh ambani
adani group
Coronavirus
Corona Period

Related Stories

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

कटाक्ष: नये साल के लक्षण अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान आंदोलन का एक साल: जश्न के साथ नई चुनौतियों के लिए तैयार
    26 Nov 2021
    दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन को आज एक साल पूरा हो गया। 26 नवंबर 2020 को शुरू हुआ यह आंदोलन आज अहम मोड़ पर है। पहली जीत के तौर पर यह आंदोलन तीनों कृषि क़ानूनों को वापस करा चुका है और अब दूसरी बड़ी…
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों ने Mr. PM को पढ़ाया संविधान का पाठ
    26 Nov 2021
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने दिल्ली की सरहद टिकरी बॉर्डर पर बैठीं किसान औरतों और मर्दों के साथ-साथ नेताओं से बात करके यह जानने की कोशिश की कि आखिर मोदी की घोषणा पर उन्हें क्यो नहीं…
  • sex ratio
    अजय कुमार
    1000 मर्दों पर 1020 औरतों से जुड़ी ख़ुशी की ख़बरें सच की पूंछ पकड़कर झूठ का प्रसार करने जैसी हैं!
    26 Nov 2021
    औरतों की संख्या मर्दों से ज़्यादा है - यह बात NFHS से नहीं बल्कि जनगणना से पता चलेगी।
  • up police
    विजय विनीत
    जंगलराज: प्रयागराज के गोहरी गांव में दलित परिवार के चार लोगों की नृशंस हत्या
    26 Nov 2021
    दलित उत्पीड़न में यूपी, देश में अव्वल होता जा रहा है और इस सरकार में दलितों व कमजोरों को न्याय मिलना दूर की कौड़ी हो गया है। यदि प्रयागराज पुलिस ने दलित परिवार की शिकायत पर कार्रवाई की होती और सवर्ण…
  • kisan andolan
    मुकुंद झा
    किसान आंदोलन के एक साल बाद भी नहीं थके किसान, वही ऊर्जा और हौसले बरक़रार 
    26 Nov 2021
    26 नवंबर 2020 को दिल्ली की सीमाओं से शुरू हुए किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर टिकरी, सिंघू और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर हज़ारों की संख्या में किसान पहुंचे और आंदोलन को अन्य मांगों के साथ जारी रखने का अहम…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License