NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
सड़क में गड्ढे...: एक स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम
तिरछी नज़र: गड्ढे सड़क बनवाने में बरती गई ईमानदारी का परिचायक हैं। सड़क बनाने में जितनी अधिक ईमानदारी बरती गई होती है गड्ढे उतनी ही जल्दी और उतने ही ज़्यादा बनते हैं।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
12 Sep 2021
सड़क में गड्ढे...: एक स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम
प्रतीकात्मक तस्वीर। 

जीवन में, सड़क का बहुत ही महत्व होता है। सड़क ना हो तो जैसे जीवन ही न हो। आप इधर से उधर जा ही ना पाएं। और अगर जाना चाहें भी तो बहुत ही धीरे-धीरे जा पाएं। सड़क जीवन को तीव्रता प्रदान करती है। और अब तो तो तीव्रतम एक्सप्रेस-वे भी बनने लगे हैं।

हम स्कूलों में पढ़ते हैं कि पहली बड़ी लंबी सड़क शेरशाह सूरी ने बनवाई थी, पेशावर से कोलकाता तक। लेकिन यह वामपंथियों द्वारा लिखा गया, पढ़ाया गया ‘मिथ्या’ इतिहास है। पहली सड़क मुझे तो लगता है भगवान कृष्ण ने बनवाई होगी। भगवान राम तो जंगलों में पगडंडियों के रास्ते लंका गए थे और वापस हवाई मार्ग से लौटे थे। उसके बाद उनके इधर उधर जाने के वृतांत नहीं हैं। इसलिए भगवान राम को तो सड़क बनवाने की जरूरत नहीं पड़ी होगी। पर भगवान कृष्ण का तो मथुरा से द्वारका और द्वारका से हस्तिनापुर आना जाना लगा ही रहता था अतः उन्होंने ही पहली लंबी सड़क बनवाई होगी। और पहला गोल्डन ट्रायंगल भी मथुरा-द्वारका-हस्तिनापुर ही बना होगा। आशा है असली इतिहासकार समुचित बदलाव कर लेंगे और इस गोल्डन ट्रायंगल को भी ढूंढ लेंगे। आगे से बच्चों को भी इतिहास में यही पढ़ाया जायेगा।

लेकिन सड़क हो और उसमें गड्ढे ना हो ऐसा हमारे देश में तो हो ही नहीं सकता है। सड़क नई हो या पुरानी, किसी के भी शासनकाल में बनी हो, उसमें गड्ढे होना लाजमी है। सड़क दस साल पहले बनी हो, दो साल पहले या फिर छह महीने पहले, उसमें गड्ढे ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता है। सड़क बनवाने और उसमें गड्ढे खुदवाने के मामले में हमारी सारी सरकारें, भूतपूर्व और वर्तमान, बराबर की ईमानदार हैं।

सरकार तो बस ईमानदारी से सड़क बनवाती जाती है। और उसमें गड्ढे तो बस अपने आप ही बन जाते हैं। गड्ढे सड़क बनवाने में बरती गई ईमानदारी का परिचायक हैं। सड़क बनाने में जितनी अधिक ईमानदारी बरती गई होती है गड्ढे उतनी ही जल्दी और उतने ही ज्यादा बनते हैं। पूरी की पूरी सड़क का गड्ढे में तब्दील हो जाना यह बताता है कि सरकार ने उस सड़क विशेष को बनाने में बहुत ही अधिक ईमानदारी बरती है।

सड़क पर गड्ढे होना मात्र सरकार की ईमानदारी का ही परिचायक नहीं है अपितु यह यह भी बताता है कि सरकार जनता का कितना ख्याल रखती है। बिना गड्ढे वाली सड़क पर फर्राटे से बाइक, कार या बस चलाना दुर्घटना को आमंत्रण देता है। तेज गति से वाहन चलाने से यदि दुर्घटना होती है तो भयंकर होती है और उसमें जान और माल की हानि भी अधिक होती है। जबकि गड्ढों वाली सड़क पर मात्र छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती हैं और जान-माल की हानि भी कम होती है। अतः सरकार प्रजा के हित में ही गड्ढों वाली सड़कों का निर्माण करवाती है।

गड्ढों वाली सड़क पर वाहन चलने से गंभीर दुर्घटना की आशंका कम होने के अलावा वाहन चालक में कुछ विशेष गुणों का निर्माण भी होता है। उनमें से एक गुण है संयम। जब आप गड्ढों वाली सड़क पर गाड़ी चलाते हैं तो आपको बहुत ही संयम से धैर्य पूर्वक गाड़ी चलानी पड़ती है। गड्ढों को देखते हुए गाड़ी को गड्ढों से बचाकर, इधर उधर से निकालना पड़ता है जिससे आप में संयम और धैर्य जैसे गुण स्वत: ही निर्मित हो जाते हैं। 

दूसरा गुण जो इन गड्ढों भरी सड़क पर चलने से निर्मित होता है वह है निर्णय लेने की क्षमता का विकास। जब कभी भी आपके सामने अधिक गड्ढों वाली सड़क आती है तो आपको तुरंत निर्णय लेना पड़ता है, देखना सोचना पड़ता है, कि आपका वाहन इस सड़क को पार कर पाएगा या नहीं। इससे आपमें तुरंत और ठीक ठीक निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है और आप जीवन के कठिन मोड़ों पर ठीक निर्णय ले सकते हैं।

तीसरा गुण जो इस तरह की सड़कों पर चलने से विकसित होता है वह है जोखिम उठाने और खतरा मोल लेने की क्षमता। जब आप गड्ढों भरी सड़कों पर वाहन चलाते हैं तो आप यह जानते समझते हुए भी वाहन चलाते हैं कि आपका वाहन कहीं भी, कभी भी खराब हो सकता है, टूट सकता है। परंतु यह जानते हुए भी वाहन चलाने से आप में जोखिम उठाने और खतरा मोल लेने की जो अद्भुत क्षमता विकसित होती है वह आपके जीवन में कई बार बहुत अधिक काम की साबित होती है।

गड्ढों भरी सड़कों पर चलने से चौथा गुण जो आता है वह है नए-नए रास्तों की खोज करना। जब भी आपके रास्ते में एक ऐसी गड्ढों भरी सड़क आ जाती है जिसे पार करना आपके वाहन के लिए मुमकिन नहीं होता है तो आप नए-नए रास्तों की खोज करने लगते हैं। कई बार जो नया रास्ता खोजते हैं वह भी गड्ढों से भरा होता है और आपको एक और नया रास्ता खोजना पड़ता है। कभी-कभी तो यह भी होता है कि आप एक नया रास्ता खोज कर कहीं पहुंचते हैं और दो-चार दिन वहां रुकने के बाद जब लौटने लगते हैं तो पता चलता है जिस गड्ढा विहीन रास्ते से आप आए थे वह भी अब गड्ढा युक्त है। अब आपको लौटने के लिए एक और नया रास्ता खोजना पड़ता है। यह नए-नए रास्ते खोजने का गुण और अनुभव आपको जीवन की कठिनाइयों में भी नये रास्ते खोजने में बहुत काम आता है, और आपमें छुपे अन्वेषक का आविष्कार भी करता है।

ऐसा नहीं है कि यह गड्ढों भरी सड़क केवल कुछ सिखाती ही है, हममें गुणों का विस्तार ही करती है। बल्कि यह गड्ढों वाली सड़कें हमारा अच्छा निशुल्क मनोरंजन भी करती हैं, आनंद भी देती है। किसी अच्छे गड्ढों वाली सड़क पर वाहन दौड़ाने में जो झूले मिलते हैं, वे किसी रोलर कोस्टर पर झूलने से कम मनोरंजक और कम आनंददायक नहीं होते हैं। इससे वही आनंद मिलता है और पेट में वैसी ही कुल्हन सी होती है जैसी किसी रोलर कोस्टर की सवारी में होती है।

गड्ढों वाली सड़कों के इतने लाभ देखते हुए मुझे लगता है कि भविष्य में हम ऐसी सड़कें बना पाएंगे जो अब की सड़कों से भी अच्छी हों, अधिक गड्ढों वाली हों। आजकल जो सड़कें बनती हैं, उनमें गड्ढे बनने में कुछ हफ्ते और कई बार तो कुछ महीने तक लग जाते हैं। आशा है भविष्य में हम ऐसी सड़कें बना पाएंगे जो बनने के अगले दिन ही गड्ढों भरी हो जाएं। आगे अधिक उन्नति करने पर हम सड़क बनाते हुए ही गड्ढा युक्त सड़कें बना देंगे। मैं आगे आने वाली सरकारों से भी यही उम्मीद करता हूं कि वे भी सड़क बनाने के मामले में भूतपूर्व और वर्तमान सरकारों से भी अधिक ईमानदार होंगी और अधिक से अधिक गड्ढों वाली सड़कें बनवायेंगी।

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

Satire
Political satire
tirchi nazar
broken roads
potholes
Road

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!

तिरछी नज़र: विश्व गुरु को हंसना-हंसाना नहीं चाहिए


बाकी खबरें

  • सबरंग इंडिया
    जेके पुलिस ने जारी की 'अनटोल्ड कश्मीर फाइल्स', हर धर्म के लोग कश्मीरी उग्रवाद का शिकार हुए
    09 Apr 2022
    कहावत है कि सच को बहुत देर तक नहीं झुठलाया जा सकता है। जी हां, ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म पर मचे हो-हल्ले और विवाद के बीच जम्मू कश्मीर पुलिस ने अनटोल्ड कश्मीर फाइल्स (Untold Kashmir Files) जारी की है।…
  • ज़ाहिद खान
    प्रलेस : फ़ासिज़्म के ख़िलाफ़ फिर बनाना होगा जनमोर्चा
    09 Apr 2022
    9 अप्रैल, प्रगतिशील लेखक संघ के स्थापना दिवस पर विशेष: प्रलेस का किस तरह से गठन हुआ?, संगठन के पीछे क्या उद्देश्य थे? इस संगठन के विस्तार में क्या-क्या परेशानियां पेश आईं?, प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    बेशर्म नंगई पर उतरा तंत्र, नफ़रती एजेंटों की पौ-बारा
    08 Apr 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने मध्यप्रदेश में पत्रकार व अन्य लोगों को थाने में अर्द्धग्न करने की घटना को लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया और पीड़ित पत्रकार कनिष्क तिवारी से बात की। महंगाई में…
  • एजाज़ अशरफ़
    गुजरात दंगे और मोदी के कट्टर आलोचक होने के कारण देवगौड़ा की पत्नी को आयकर का नोटिस?
    08 Apr 2022
    नरेन्द्र मोदी सरकार स्पष्ट रूप से हिंदुत्व के कट्टर आलोचक के साथ राजनीतिक हिसाब चुकता कर रही है, इस उम्मीद के साथ कि ऐसा करके वह उन्हें भाजपा को चुनौती देने से रोक सकेगी। 
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    बीजेपी शासित एमपी और उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर ज़ुल्म क्यों ?
    08 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे हैं मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा पत्रकारों के साथ हुई अभद्र घटना पर। स्थानीय यूट्यूब पत्रकार कनिष्क तिवारी ने बताया…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License