NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं
हम ग़रीबी, बेरोज़गारी को लेकर भी सहनशील हैं। महंगाई को लेकर सहनशील हो गए हैं...लेकिन दलित-बहुजन को लेकर....अज़ान को लेकर...न भई न...
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
08 May 2022
cartoon

हम भारतीयों में कई सारी खासियतें होती हैं। सारी खासियतों का जिक्र करने में कई सारी पोथियां भर जायेंगी इसलिए हम जिक्र करते हैं एक ही खासियत का। वह खासियत है सहनशीलता, सहन करने की खासियत। यह खासियत हम में सदियों से है पर अब यह खासियत बढ़ गई है। 

हमारी सहनशीलता, सहनशक्ति पिछले आठ सालों से हद से अधिक बढ़ गई है। हम पहले से अधिक सहनशील हो गए हैं। पहले हम कहीं कम सहनशील थे। अभी नौ दस साल पुरानी ही तो बात है जब हम पेट्रोल की कीमत एक रुपए भी बढ़ती थी तो हम सड़कों पर उतर जाते थे। प्याज की बढ़ती कीमतों पर तो हम सरकार तक बदल देते थे, जी हां, केन्द्र सरकार तक। पर पिछले आठ वर्षों में हम इतने सहनशील हो गए हैं कि पेट्रोल डीजल की कीमत दस दिनों में दस रुपए भी बढ़ जाए तो भी हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। गैस सिलेंडर भी हजार के पार हो जाए तो भी हम सह लेंगे। हम महंगाई को सहन कर लेंगे। उसकी वजह से दो बार की बजाय एक बार खाना खा लेंगे, बच्चों का पेट काट कर घर चला लेंगे, उन्हें स्कूल से निकाल लेंगे। सब कुछ सह लेंगे पर सरकार पर उंगली नहीं उठायेंगे।

पहले भ्रष्टाचार को देख कर हमारा खून खौलने लगता था। भ्रष्टाचार हमें हरगिज बर्दाश्त नहीं था। हमने तो भ्रष्टाचार के आरोप पर ही सरकार बदल दी थी। लोकपाल की नियुक्ति न होने पर हम उग्र हो गए थे। पर अब कहीं लोकपाल की बात ही नहीं है। अब हम भ्रष्टाचार को लेकर भी सहनशील हो गये हैं। अब हमें लोकपाल, लोकायुक्त, किसी की भी जरूरत नहीं है। सरकार न रखे लोकपाल, हमारी बला से।

न तो हमें रफ़ाल विमान की खरीद में भ्रष्टाचार को लेकर फर्क पड़ता है और न ही पीएम केयर्स फंड के भ्रष्टाचार से। फ्रांस में रफ़ाल पर जांच बैठती है पर हमारे कान पर जूं तक नहीं रेंगती है। इंडोनेशिया हमारे से सस्ता रफ़ाल विमान खरीद लाता है, उसकी खरीद कीमत तक बता देता है, और हम हैं कि विमान की कीमत को बंद लिफाफे में रखे बैठे हैं। इंडोनेशिया को इस तरह कीमतें नहीं बतानी चाहिए थी। अपनी नहीं तो हमारे देश की सुरक्षा का तो ध्यान रखना चाहिए था। कीमतें पता चलने से देश की सुरक्षा को खतरा तो होता ही है, सरकार भी खतरे में पड़ जाती है। पता चल जाता है कि सरकार ने कितना खाया है। और इन दिनों तो सरकार ही देश है।

ऐसे ही पीएम केयर्स फंड पर भी हम सहनशील हैं, उसमें भी अगर भ्रष्टाचार हुआ है तो भी हम सहनशील हैं। फंड में किसने दिया, कितना दिया, कब दिया, या तो पीएम साहब जानें या फिर भगवान जी। हमें जानने की क्या पड़ी है, और जरूरत भी क्या है। कितना पैसा आया और कितना पैसा गया और कहां गया, हमें क्या पड़ी है। फंड से क्या क्या खरीदा गया और जो खरीदा गया वो कैसा था, हमें क्या मतलब। पढ़ा तो यह भी था कि उस फंड से जो वेंटिलेटर खरीदे गए, वे फुस्स निकले। निकले होंगे हमें क्या। उस का इस्तेमाल कर लोग मरे होंगे। मरे होंगे, हमें क्या। हम अब सहनशील हैं, भ्रष्टाचार के प्रति भी सहनशील हैं। उस फंड से पीएम साहब ने जनता की केयर की या अपनी केयर की। साहब, ये सब माया की बातें हैं। अब हम सहनशील हैं और इन सब बातों से हमें कोई मतलब नहीं है।

हम सहनशील हैं सरकार और पुलिस के अन्याय के प्रति भी। सरकार की पुलिस कुछ भी करे, किसी के भी खिलाफ करे, लॉकअप में मार दे, थाने में बलात्कार करे, लाठीचार्ज करे, झूठा केस दर्ज कर जेल में बंद कर दे, मतलब कुछ भी करे, हम सब सहने के लिए तैयार हैं। पुलिस की किसी भी ज्यादती से हमारा खून नहीं खौलता है। पुलिस की किसी भी ज्यादती के खिलाफ हम आंदोलन नहीं करते हैं। हम सहनशील हैं।

हम गरीबी, बेरोज़गारी को लेकर भी सहनशील हैं। अगर हम इन चीजों को लेकर सहनशील न होते तो आधे से अधिक भारत आज सड़कों पर उतरा होता। पर नहीं है, क्योंकि हम सहनशील हैं। वैसे भी ये गरीबी, ये बेरोज़गारी, ये सब तो भगवान की देन हैं। सरकार इसमें क्या करे। इसलिए गरीब, बेरोज़गार सड़क पर उतरा हुआ है भगवान जी के लिए। और सरकार ने भी उसे सड़क पर उतारा हुआ है जय श्री राम के लिए, हनुमान जी के लिए। 

पर हम इतने सहनशील भी नहीं हैं कि सब कुछ ही सहन कर लें। हम यह भी सहन कर लें कि हमारे मोहल्ले में कोई दलित-बहुजन दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर निकल जाए। न ही इतने सहनशील हैं कि कोई दलित रसोइया या रसोइयन हमारे बच्चों का मिड-डे मील बना दे। और तो और हम तो किसी अनुसूचित जाति वाले को अपने सामने कुर्सी पर बैठे हुए भी सहन नहीं कर सकते हैं। अभी हम इतने सहनशील नहीं हुए हैं।

हम कितने भी सहनशील हो गए हों। चाहे हम महंगाई को सहन कर लें, गरीबी-बेरोजगारी सहन कर लें, भ्रष्टाचार सहन कर लें या फिर सरकार की, पुलिस की ज्यादती सहन कर लें पर अजान की आवाज सहन नहीं कर सकते हैं। 'ईश्वर महान है' सुनना-बोलना हम अंग्रेजी में सहन कर सकते हैं (गॉड इज ग्रेट), बात बात पर 'ओह माई गॉड' बोल सकते हैं पर 'ईश्वर महान है' अरबी भाषा में (अल्लाह हू अकबर) सहन नहीं कर सकते हैं। हम कितने भी सहनशील हो गए हों पर इतने सहनशील भी नहीं हैं कि इन सब बातों को सहन कर लें।

(इस व्यंग्य स्तंभ तिरछी नज़र के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।) 

tirchi nazar
Satire
Political satire
Inflation
Tolerant
unemployment
Dalit Bahujan Adivasi
Azaan Controversy

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

कटाक्ष : बुलडोज़र के डंके में बज रहा है भारत का डंका


बाकी खबरें

  • ‘खेती बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’: किसानों ने राज्यापलों के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा रोषपत्र, कई जगह पुलिस ने रोका
    मुकुंद झा
    ‘खेती बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’: किसानों ने राज्यापलों के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा रोषपत्र, कई जगह पुलिस ने रोका
    26 Jun 2021
    आज 26 जून 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर ऐतिहासिक किसान आंदोलन के सात महीने पूरे हुए हैं। इसी के साथ आज आपातकाल दिवस भी है। इसलिए किसानों ने ‘खेती बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ कर्यक्रम के तहत देशभर में राज्यप
  • 1975 में मीसा था तो अब UAPA और राजद्रोह
    न्यूज़क्लिक टीम
    1975 में मीसा था तो अब UAPA और राजद्रोह
    26 Jun 2021
    46 साल पहले लगी इमरजेंसी की ख़ौफ़नाक छाया 2021 में कितनी भयावह है, इस पर वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बातचीत की, न्यूज़क्लिक के एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ से, जिन्होंने उस समय गिरफ़्तारी और जेल को…
  • कोरोना
    रवि दुग्गल
    कोविड-19 वैक्सीन: टीके तक पहुंच और भेदभाव की समस्याएं
    26 Jun 2021
    गैर बीजेपी शासित राज्यों का कहना है कि वैक्सीन आपूर्ति में केंद्र सरकार द्वारा उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। 
  • यूपी धर्मांतरण मामला : कुछ का दावा उन्होंने बहुत पहले बदल लिया था धर्म, कुछ ने बदला ही नहीं
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी धर्मांतरण मामला : कुछ का दावा उन्होंने बहुत पहले बदल लिया था धर्म, कुछ ने बदला ही नहीं
    26 Jun 2021
    मुस्लिम परिवारों और अन्य ने दिल्ली में 2 मुस्लिम मौलवियों की गिरफ़्तारी के बाद यूपी एंटी-टेररिज़्म स्क्वाड पर रेड और जांच के दौरान 'मानसिक प्रताड़ना' का आरोप लगाया है।
  • cartoon
    आज का कार्टून
    "खेती बचाओ, लोकतंत्र बचाओ"
    26 Jun 2021
    किसान ही बचाएंगे खेती, किसान ही बचाएंगे लोकतंत्र। जी हां, शायद वह ऐतिहासिक मौका आ गया है। किसान दोहरी भूमिका में है, दोहरा चुनौती-दोहरा संघर्ष। आपातकाल दिवस (25-26 जून) के मौके पर भी किसान अपने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License