NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
'सोहराय' उत्सव के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली अभद्रता का जिक्र करने पर आदिवासी महिला प्रोफ़ेसर बनीं निशाना 
सोगोय करते-करते लड़कियों के इतने करीब आ जाते हैं कि लड़कियों के लिए नाचना बहुत मुश्किल हो जाता है. सुनने को तो ये भी आता है कि अंधेरा हो जाने के बाद सीनियर लड़के कॉलेज में नई आई लड़कियों को झाड़ियों की तरफ जबरदस्ती खींच कर ले जाते हैं और आयोजक मंडल इन सब बातों को नजरअंदाज कर चलते हैं.’
अनिल अंशुमन
20 Jan 2022
rajni

..... ऐसे कई पोस्ट झारखण्ड सोशल मिडिया जगत में ‘#WeStandWithRajniMurmu’ नाम से एक अभियान के रूप में काफी वायरल हो रहा है। फेसबुक,इन्सटाग्राम और ट्वीटर के मंच से कई महिला एक्टिविस्ट आदिवासी महिला बुद्धिजीवी प्रो. रजनी मुर्मू के समर्थन में खड़े होने की अपील कर रहीं हैं। इस अभियान को अपना सक्रिय समर्थन दे रहे कई पुरुष बंधू भी लोगों से इसके समर्थन में खड़े होने की अपील के साथ अभियान को व्यापक बनाने में जुटे हुए हैं। दूसरी ओर इस मुद्दे पर आदिवासी बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों के भी मत मतान्तर उभर कर सामने आने लगे हैं।  

ज्ञात हो कि पिछले एक सप्ताह से प्रो. रजनी मुर्मू के एक सोशल मिडिया पोस्ट को लेकर काफी तीखी क्रिया प्रतिक्रियाएं जारी हैं। उक्त पोस्ट में उन्होंने संताल आदिवासी समाज द्वारा मनाये जानेवाले लोकप्रिय प्रकृति परब ‘सोहराय’ उत्सव के सामूहिक नृत्य-गीत कार्यक्रम के दौरान संताल छात्राओं-महिलाओं के साथ होने वाले अभद्र आचरण और उत्पीड़न के सवाल को काफी तल्खी के साथ उठाया है। 

जिसमें 7 जनवरी को झारखण्ड की उपराजधानी दुमका स्थित सिद्धू-कानू मुर्मू विश्वविद्यालय अंतर्गत एसपी कॉलेज (दुमका) समेत कई अन्य कॉलेजों में आदिवासी छात्र संघों के तत्वाधान में आयोजित होनेवाले सोहराय परब के दौरान ‘सोगोय’ प्रथा के नाम पर समारोह में शामिल युवाओं द्वारा छात्राओं-महिलाओं के साथ किये गए छेड़छाड़ व उत्पीड़न के मुद्दे पर रजनी मुर्मू जी ने समाज के लोगों से इसपर त्वरित संज्ञान लेने की अपील की। पूर्व के ऐसे आयोजनों में उन्होंने अपने साथ भी हुए ऐसे आचरण की चर्चा करते हुए कार्यक्रम के आयोजकों पर जानबूझकर अनदेखी करने का आरोप लगया । 

चर्चा है कि इस आलोचनात्मक पोस्ट के वायरल होते ही कार्यक्रम के आयोजक तथा आदिवासी छात्र संघ नेतागण काफी आक्रोशित हो गए। उन्होंने इसे संताल समाज को शर्मशार करनेवाला बताने के साथ साथ सोहराई परब और आदिवासी संस्कृति-परंपरा पर हमला करार देते हुए इस पोस्ट के विरोध में आदिवासी छात्र-छात्राओं को सड़कों पर उतार दिया।

10 जनवरी को ‘रजनी मुर्मू मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाते हुए आदिवासी छात्र-छात्राओं हुजूम लेकर वे दुमका नगर थाना पहुँच गए। प्रो. रजनी मुर्मू के विरुद्ध आईटी कानून के तहत मुकदमा दर्ज़ कर अविलम्ब उनके खिलाफ कारवाई करने हेतु लिखित आवेदन दिया।   

जिसमें उन्होंने प्रो. रजनी मुर्मू के विवादित पोस्ट को आदिवासी समाज की गलत व नकारात्मक छवि परोसने वाला तथा संताल समाज को बदनाम करने बताया।                                      

इसी मांग को लेकर दुमका स्थित सिद्धो-कानू विश्वविद्यालय के समक्ष भी प्रो. रजनी मुर्मू को तत्काल बर्खास्त किये जाने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिए। साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि 24 घंटे के अन्दर विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांग नहीं पूरी करेगा तो विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में कामकाज ठप्प कर दिया जाएगा।   

सोशल मीडिया में रजनी मुर्मू के खिलाफ जबरदस्त ट्रोलिंग कैम्पेन शुरू करने के साथ साथ उन्हें वीडियो मैसेज भेजकर ‘बिठलाहा’ (सामाजिक बहिष्कार) कर देने और जान से मार देने तक की धमकी दी जाने लगी। 

रजनी मुर्मू ने भी गोड्डा थाना जाकर उक्त वीडियो-मैसेजों को साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत कर राज्य में हाल ही बने ‘मॉबलिंचिंग कानून’ के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया है।

थाना में पहुंचे मीडियाकर्मियों से स्पष्ट कहा कि उनका पोस्ट सबके सामने है और उसमें उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा है। इस पोस्ट के माध्यम से उन्होंने आदिवासी समाज की लड़कियों-महिलाओं की दुर्दशा के सवाल को पूरी मजबूती से उठाया है। इसलिए वे हर विरोध का सामना करने को तैयार हैं।

सोशल मीडिया मंच पर अपनी ट्रोलिंग को टक्कर देने में वे खुद ही कूद पड़ी हैं। उनके पोस्ट को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम-अफवाह का काट करने के लिए अपने उक्त पोस्ट को और भी अधिक वायरल कर रहीं हैं। साथ ही अपने नित नए पोस्टों के माध्यम से आदिवासी समाज की महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के सवाल को व्यापक बना रहीं हैं।

इसके पहले भी कई बार आदिवासी समाज की लड़कियों के साथ लगातार हो रहे सामूहिक दुष्कर्म कांडों तथा सामाजिक उत्पीड़न कांडों की पेपर कटिंग्स युक्त पोस्ट लगाकर समाज के अन्दर महिला विरोधी रवैये को उजागर करती रहीं हैं। 

देर से ही सही आदिवासी समाज के बुद्धिजीवी-साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्त्ताओं का प्रगतिशील  तबका भी रजनी मुर्मू जी के समर्थन में खड़ा होने लगा है। 

सोशल मिडिया मंच पर हिंदी साहित्य के चर्चित युवा आदिवासी साहित्यकार एवं कवि अनुज लुगुन का पोस्ट काफी चर्चा में है। जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा है कि- समाज में अगर आपराधिक प्रवृत्तियां पनप रहीं हों तो उसका तुरंत प्रतिरोध होना चाहिए। रजनी मुर्मू जी के जिस पोस्ट को लेकर विवाद हो रहा है उसे मैंने गंभीरता से पढ़ा है। उन्होंने सोहराय परब को लेकर न कोई अभद्र टिपण्णी की है और न ही उसका कोई अनादर किया है।

उन्होंने तो केवल कॉलेज में उस महाउत्सव में घुस रही आपराधिक प्रवृति पर सवाल उठाकर आदिवासी लड़कियों की सुरक्षा का सवाल उठाया है। कुछ लोगों की गलत प्रवृत्तियों की वजह से समाज का सौहार्द बिगड़ता है तो उस पर चिंता करना जायज है। रजनी मुर्मू के खिलाफ कार्रवाई की जो मांग उठ रही है उससे मैं सहमत नहीं हूँ। मैं महिलाओं के ऊपर होनेवाले किसी भी तरह के अपराध के विरुद्ध हूँ और यह मैंने अपने पुरखों से सीखा है। 

एक युवा आदिवासी एक्तिविस्ट ने सवाल उठाया है कि अपने समाज की महिला के साथ अन्य समाज का व्यक्ति गलत करे तो न्याय चाहिए और जब अपने समाज की महिला के साथ अपने ही समाज का व्यक्ति गलत करे तो कुछ भी नहीं चाहिए ? रजनी मुर्मू ने कुछ भी गलत नहीं कहा है। मैंने भी हमारे यहाँ के मेला-त्योहारों में आदिवासी लड़कियों को परेशान किया जाना देखा है। 

इस तरह के कई पोस्ट खूब वायरल हो रहें हैं जिनमें रजनी मुर्मू के समर्थन के जरिये आदिवासी समाज में महिलाओं की वर्तमान दुर्दशा मुद्दे को विस्तार दिया जा रहा है। 

फिलहाल संताल परगना की पुलिस ने इस प्रकरण की विस्तृत जांच उपरांत ही कोई कारवाई करने की बात कह रही है। राज्य में जारी कोरोना प्रोटोकाल की पाबंदियों के तहत राज्य सरकार द्वारा 31 जनवरी तक सड़क की तमाम गतिविधियों पर भी रोक लगाए जाने के कारण विरोध पक्ष कोई बड़ी गोलबंदी नहीं कर पा रहा है। लेकिन सोशल मीडिया में घमासान मचा हुआ है जिसमें अब रजनी मुर्मू के पोस्ट के समर्थन-विरोध के बहाने आदिवासी समाज के अंदर भी महिला विरोधी नज़रिए को लेकर एक नया वाद-विवाद छिड़ गया है। 

आदिवासी युवा एक्टिविस्ट महिलाओं के सोशल पेज ‘Skhua’ में भी उठाया गया सवाल भरा पोस्ट ध्यान देने योग्य है। जिसमें कहा गया है कि- क्या हम युवा इतने असहिष्णु हो गए हैं कि किसी सवाल को सवाल की तरह नहीं देख सकते हैं ? रजनी मुर्मू का पोस्ट सिर्फ एक कॉलेज में सोहराई के दौरान महिलाओं से छेड़छाड़ का सामना करने पर उनकी आपत्ति पर था। जिस प्लेटफार्म पर उन्होंने कहा उससे आपत्ति हो सकती है लेकिन उनके सवालों को आप नकार नहीं सकते हैं। ऐसा क्यों होता है कि संताल परगना की महिलाओं के शोषण के विरुद्ध जो भी लिखता या कहता है उसका सिर्फ विरोध ही होता है वो भी जमकर। गुरु गोमके ने भी कहा था- आमाक जति लागिद, आमाक धोरोम लागिद/ जाहाएं दो बाय ईंयेलाय आमगेम इयेंला ... तुम्हारे समुदाय के लिए, तुम्हारी धर्म-संस्कृति के लिए/ कोई और नहीं देखनेवाला, तुम ही देखोगे ! इसलिए ये वक़्त किसी को हराने या झुकाने का नहीं बल्कि उन सवालों के साथ खड़े होने का जो महिलाओं सुरक्षित और समाज को सशक्त बनाने के पक्ष में खड़ा हो !

Jharkhand
Sohrai festival
Sohrai
Tribal women
Tribal women professor
Rajni Murmu

Related Stories

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

झारखंड: बेसराजारा कांड के बहाने मीडिया ने साधा आदिवासी समुदाय के ‘खुंटकट्टी व्यवस्था’ पर निशाना

झारखंड: ‘स्वामित्व योजना’ लागू होने से आशंकित आदिवासी, गांव-गांव किए जा रहे ड्रोन सर्वे का विरोध

झारखण्ड : शहीद स्मारक धरोहर स्थल पर स्कूल निर्माण के ख़िलाफ़ आदिवासी संगठनों का विरोध

झारखंड : ‘जनजातीय गौरव दिवस’ से सहमत नहीं हुआ आदिवासी समुदाय, संवैधानिक अधिकारों के लिए उठाई आवाज़! 


बाकी खबरें

  • russia attack on ukrain
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूक्रेन पर हमला, रूस के बड़े गेम प्लान का हिस्सा, बढ़ाएगा तनाव
    25 Feb 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बात की न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से। यूक्रेन पर रूस हमला, जो सरासर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है, के पीछे पुतिन द्वारा…
  • News Network
    न्यूज़क्लिक टीम
    आख़िर क्यों हुआ 4PM News Network पर अटैक? बता रहे हैं संजय शर्मा
    25 Feb 2022
    4PM News नामक न्यूज़ पोर्टल को हाल ही में कथित तौर पर हैक कर लिया गया। UP की राजधानी लखनऊ का 4PM News योगी सरकार की नीतियों की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। 4PM News का आरोप है कि योगी…
  • Ashok Gehlot
    सोनिया यादव
    राजस्थान : कृषि बजट में योजनाओं का अंबार, लेकिन क़र्ज़माफ़ी न होने से किसान निराश
    25 Feb 2022
    राज्य के बजटीय इतिहास में पहली बार कृषि बजट पेश कर रही गहलोत सरकार जहां इसे किसानों के हित में बता रही है वहीं विपक्ष और किसान नेता इसे खोखला और किसानों के साथ धोखा क़रार दे रहे हैं।
  • ADR Report
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव छठा चरणः 27% दाग़ी, 38% उम्मीदवार करोड़पति
    25 Feb 2022
    एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार छठे चरण में चुनाव लड़ने वाले 27% (182) उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं वहीं 23% (151) उम्मीदवारों पर गंभीर प्रकृति के आपराधिक मामले हैं। इस चरण में 253 (38%) प्रत्याशी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: मोदी सभा में खाली कुर्सियां, योगी पर अखिलेश का तंज़!
    25 Feb 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात करेंगे आवारा पशुओं के बढ़ते हुए मुद्दे की, जो यूपी चुनाव में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकता है। उसके साथ ही अखिलेश यादव द्वारा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License