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सऊदी अरब व यूएई को हथियार बेचने के ट्रम्प प्रशासन के फैसले को यूएस ने निलंबित किया
इस घोषणा का मानवाधिकार और युद्ध-विरोधी समूहों तथा शांति की अपील करने वाले एक्टिविस्ट ने स्वागत किया।
पीपल्स डिस्पैच
28 Jan 2021
सऊदी अरब व यूएई को हथियार बेचने के ट्रम्प प्रशासन के फैसले को यूएस ने निलंबित किया

27 जनवरी को प्रकाशित अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ ट्रम्प प्रशासन द्वारा किए गए हथियारों के सौदे को अमेरिका निलंबित कर देगा। यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंथनी ब्लिंकेन ने कहा कि उन्नत हथियारों और लड़ाकू जेट को बेचने के लिए हुए इस व्यापक सौदे की समीक्षा की जाएगी।

इस घोषणा का स्वागत मानवाधिकार समूहों, युद्ध-विरोधी और शांति कार्यकर्ताओं और संगठनों द्वारा किया गया साथ ही साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के कांग्रेस के कुछ सदस्यों इल्हान उमर और रो खन्ना ने भी इसका स्वागत किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने चुनाव अभियान के दौरान पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित कई हथियारों के सौदों की फिर से जांच करने के अपने इरादे को जाहिर किया था और यहां तक कि उन्होंने यमन में सऊदी के नेतृत्व में गठबंधन के हस्तक्षेप की वैश्विक जांच और भारी निंदा के चलते ये चुनाव जीता था। इस गठबंधन में यूएई भी शामिल है। लीबिया में जारी गृहयुद्ध में यूएई की भूमिका भी चिंता का विषय है।

यमन के युद्ध में भाग लेने वाले विभिन्न खाड़ी देशों को निरंतर सैन्य मदद के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की दुनिया भर में आलोचना की गई है।

पूर्ववर्ती ट्रम्प प्रशासन ने अपने 4 साल के कार्यकाल के दौरान इन दो क्षेत्रीय शक्तियों के साथ कई छोटे-बड़े हथियारों के सौदों की घोषणा की थी। ट्रम्प प्रशासन के आखिरी महीने में यूएई के साथ 50 एफ-35 फाइटर जेट और 18 एमक्यू- 9बी रीपर ड्रोन को बेचने के लिए 23 बिलियन डॉलर का बड़ा सौदा किया गया था जो 'अब्राहम समझौते’ के नाम से जाने जाने वाले इजरायल-अरब के रिश्ते को सामान्य करने के समझौतों के बाद हुआ था।

इन हथियारों के सौदे की भी निंदा की गई थी और कई अमेरिकी सीनेटरों द्वारा घरेलू तौर पर विरोध किया गया, जिसमें कुछ रिपब्लिकन भी शामिल थे जिन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे क्षेत्र में 'खतरनाक हथियारों की होड़' पैदा हो सकती है। सेक्रेटरी ब्लिंकेन ने अब्राहम समझौते के लिए अपने प्रशासन का समर्थन व्यक्त किया, लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि इससे हथियारों के सौदों की समीक्षा प्रभावित होगी या ये कैसे होगी।

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