NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए
रामनवमी और रमज़ान जैसे पर्व को बदनाम करने के लिए अराजक तत्व अपनी पूरी ताक़त झोंक रहे हैं, सियासत के शह में पल रहे कुछ लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब को पूरी तरह से ध्वस्त करने में लगे हैं।
रवि शंकर दुबे
11 Apr 2022
Ram Navami Attack
Image courtesy : Scroll

कौन कहता है कि रामनवमी के दिन शोभायात्रा न हो?, कौन कहता है रमज़ान के पाक महीने में बाज़ार गुलज़ार न हों?... सही मायने में इन्हीं पर्वों से तो हिंदोस्तां बनता है, लेकिन दुर्भाग्य है देश का, कि सत्ता में बैठे हुक्मरानों को हिंदोस्तां से नहीं हिंदू और मुसलमानों से मतलब है।

इत्तेफाक देखिए, रमज़ान का पाक महीना चल रहा है, ऐसे में नवरात्रि शुरू हो जाती है, वास्तव में इसे कितनी खूबसूरती से मनाया जा सकता है, लेकिन सत्ता की शह में पल रहे कुछ लोगों को ये ज़रा भी बर्दाश्त नहीं, क्योंकि हिंदू-मुसलमान एक साथ आने का मतलब है देश में अमन और शांति, जो फिलहाल वर्तमान राजनीतिक दृष्टिकोण से तो पूरी तरह बेईमानी होगी।

बीते 10 अप्रैल यानी रविवार को पूरे देश में रामनवमी का पर्व मनाया गया, जगह-जगह शोभायात्राएं निकाली गईं। लेकिन इन शोभायात्राओं में श्रद्धा से ज़्यादा उन्माद देखने को मिला और एक वर्ग विशेष के प्रति नफ़रत। ये यात्राएं अचानक तयशुदा मार्ग से हटकर मुस्लिम बहुल इलाकों में पहुंच जाती हैं और अचानक ही उकसावे वाली नारेबाज़ी शुरू हो जाती है। इस सबके बीच पथराव शुरू हो जाता है, आगज़नी होने लगती है, लाठी-डंडे चलने लगते हैं जिसमें कई बेगुनाह लोग घायल हो जाते हैं।

बड़ी बात ये है कि राम की शोभायात्रा के दौरान ऐसा सिर्फ़ एक शहर या राज्य में नहीं हुआ, बल्कि गुजरात, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के शहरों में ऐसी ही घटनाएं देखने में आईं।   

कहां-कहां क्या हुआ

बात गुजरात की करें तो यहां साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर के छपरिया क्षेत्र में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान यही सब उन्माद और फिर हिंसा देखने को मिली। कहा गया कि यात्रा पर हमला हुआ जिसमें कुछ पुलिसकर्मी समेत कई लोग घायल हुए हैं। हालांकि दूसरे पक्ष की शिकायत नज़रअंदाज़ कर दी गई।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल में तब झड़प हुई जब दक्षिण हावड़ा के बीई कॉलेज के नजदीक से विश्व हिंदू परिषद ने राम नवमी के अवसर पर एक शोभा यात्रा निकाली थी। ये यात्रा हावड़ा घाट की तरफ जा रही थी लेकिन पीएम बस्ती इलाके के पास जुलूस के पहुंचने पर अराजकता फैल गई।

रामनवमी के मौके पर झारखंड के लोहरदगा के हिरही-हेंदलासो-कुजरा गांव की सीमा पर भी राम नवमी का मेला लगा हुआ था। इस मेले में हिंसा और आगजनी की घटना सामने आई। इस आगजनी में करीब 10 मोटरसाइकिल और पिकअप वैन को आग के हवाले कर दिया गया।

मध्य प्रदेश के खरगोन से भी शोभायात्रा के दौरान सांप्रादायिक उपद्रव की ख़बरें सामने आईं। और उसके बाद एकतरफा कार्रवाई देखने को मिली है। यहां कहा गया कि इसके लिए पहले से तैयारी की गई थी, उपद्रवियों ने शोभायात्रा में ख़लल डालने के लिए पेट्रोल बम बनाए थे और पत्थर इकट्ठा किए थे। जिसको लेकर फिलहाल जांच की बात कही जा रही है। हालांकि वायरल वीडियो कुछ और ही कहानी बयान करते हैं कि किस तरह उकसावे की कार्रवाई की गई और कोशिश की गई कि टकराव हो जाए।

ख़ैर... अब सवाल ये है कि इन चार राज्यों में अचानक माहौल बिगाड़ने का आखिर कारण क्या है? जिसका जवाब हिंदोस्तां के मशहूर दिवंगत शायर डॉ राहत इंदौरी के एक शेर में मिलता है.... ‘'सरहदों पर बहुत तनाव है क्या, कुछ पता तो करो चुनाव है क्या'’

अभी के लिए राहत इंदौरी की इस नज़्म में सरहद की जगह राज्य को दे दी जाए तो बिल्कुल सटीक बैठेगा। दरअसल इसी साल के आखिरी तक गुजरात में चुनाव होने हैं, अगले साल मध्य प्रदेश में... इसके बाद 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। यानी इन छुटपुट सांप्रादायिक दंगों को अगर आप चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं तो ग़लत नहीं है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में हमने जैसा देखा कि भाजपा का सिर्फ एक मकसद है सत्ता में बने रहना, फिर चाहे जैसे... क्योंकि अब विकास के नाम पर वोट मिलने वाले नहीं है, महंगाई अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है, घर के राशन से लेकर, सब्ज़ी, सुई तक का दाम पहुंच से बाहर जा रहा है, रोज़गार मिल नहीं रहा है, जिनके पास रोज़गार हैं वो भी बेरोज़गार हो रहा है। अर्थव्यवस्था ठप्प है। पड़ोसी मुल्कों से हमारे रिश्ते अच्छे नहीं है। कहने का मतलब है कि ले देकर भाजपा के पास राम मंदिर और हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा शेष बचता है। तो ज़ाहिर है कि आगे की चुनाव भी धर्म की आड़ में ही लड़ा जाएंगे।

चार राज्यों में उपद्रव के ये हो सकते हैं कारण

अब सबसे पहले गुजरात की बात करतें हैं। जहां इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं, पिछली बार के चुनावों को देखते हुए भाजपा कोई ढील देना नहीं चाहती है, कांग्रेस भी नई तैयारियों के साथ जुटी हुई है, आम आदमी पार्टी की एंट्री ने भी मामला त्रिकोणीय बना दिया है। इसमें सबसे अहम बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद गुजरात से आते हैं। यानी अगर यहां से भाजपा चुनाव हार जाती है तो राजनीतिक जगत में काफी शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी।

बात मध्यप्रदेश की करें, तो यहां अगले साल चुनाव होने हैं, आपको बता दें कि पिछले चुनावों में यहां कांग्रेस ने भाजपा को हरा दिया था, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से बगावत कर कई विधायकों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया और भाजपा को सत्ता में ले आए। कहने का अर्थ ये कि यहां भी भाजपा ने जनमत को जमकर शर्मशार किया। इसके अलावा शिवराज सिंह चौहान के फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई खास काम हुआ नहीं है, ऐसे में मध्य प्रदेश की जनता की ओर से बदलाव के सुर देखे जा रहे हैं यही कारण है कि भाजपा अपना हिंदू-मुस्लिम वाला हथियार इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगी।

अब बात पश्चिम बंगाल और झारखंड की, दोनों ही जगह भाजपा सरकार नहीं है। पश्चिम बंगाल में जब चुनाव हुए तब भाजपा ने एड़ी तक ज़ोर लगा दिया लेकिन आखिर में उसे मुंह की खानी पड़ी, प्रधानमंत्री से लेकर भाजपा और केंद्र सरकार का हर मंत्री रैलियां करने पहुंचा लेकिन चुनाव नहीं जीत सका, इतना ही नहीं नतीजे आने के बाद आधी से ज्यादा भाजपा अब ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो चुकी है। दूसरी ओर झारखंड है, जहां पिछले चुनावों में कांग्रेस ने हेमंत सोरेन की पार्टी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी, और भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया था। लेकिन भाजपा फिर से यहां सत्ता में वापसी चाहती है। पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों के लिए और झारखंड की 14 लोकसभा सीटों के लिए भाजपा ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

भाषणों और वक्तव्यों से दूर हटकर अगर धरातल पर वास्तविकता देखें तो भारतीय जनता पार्टी ने कट्टर हिंदू पार्टी के तौर पर खुद को स्थापित किया है, हालिया उत्तर प्रदेश के चुनाव में 80 बनाम 20 कहकर ये बात सामने भी रख दी गई, और अब पार्टी इसी धर्रे पर चलकर आगे भी सत्ता में स्थापित रहना चाहती है। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी का सरंक्षक संघ भी 2025 में पूरे हो रहे अपने 100 सालों को हिंदू राष्ट्र के तौर पर मनाने की ओर बढ़ रहा है। यही वजह है कि हालही में ऐसे दंगे, धर्म संसदें और तमाम ज़हरीले भाषण देखे गए हैं जो देश के लिए और संविधान के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है।  

Ram Navami Attack
Ram Navami
ramzan
communal violence
Communal Hate
Religion and Politics

Related Stories

मनासा में "जागे हिन्दू" ने एक जैन हमेशा के लिए सुलाया

‘’तेरा नाम मोहम्मद है’’?... फिर पीट-पीटकर मार डाला!

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर

शामली: मॉब लिंचिंग का शिकार बना 17 साल का समीर!, 8 युवकों पर मुकदमा, एक गिरफ़्तार

इंदौर में "नाम पूछकर" चूड़ी वाले को पीटा, भारी बवाल के बाद मामला दर्ज 

पश्चिम बंगाल में जाति और धार्मिक पहचान की राजनीति को हवा देती भाजपा, टीएमसी

उत्तर प्रदेश: निरंतर गहरे अंधेरे में घिरते जा रहे हैं सत्य, न्याय और भाईचारा

दिल्ली दंगों से फैले ज़हर के शिकार हुए कारवां के तीन पत्रकार

…और अब हम दिमाग़ से भी बीमार होने लगे


बाकी खबरें

  • FCRA
    एस एन साहू 
    मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी का एफ़सीआरए लाइसेंस रद्द होना संघीय ढांचे के लिए एक सबक है
    06 Jan 2022
    क्रिसमस पर घटी घटना और नवीन पटनायक के मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी को समर्थन देने से यह उम्मीद जगी है कि अधिक से अधिक राज्य, निरंकुश केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ संवैधानिक मूल्यों और संघीय ढांचे की रक्षा के लिए आगे…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में क़रीब 7 महीने बाद 90 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज किये गए
    06 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 90,928 नए मामले दर्ज किये गए हैं। वहीं पिछले 24 घंटे में ओमिक्रोन के 495 नए मामले सामने आए हैं और कुल मामलों की संख्या बढ़कर 2,630 हो गई है।
  • Hisham Abu Hawwash
    अभिजान चौधरी
    141 दिनों की भूख हड़ताल के बाद हिशाम अबू हव्वाश की रिहाई के लिए इज़रायली अधिकारी तैयार
    06 Jan 2022
    व्यापक विरोध और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद इज़राइली अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अबू हव्वाश के प्रशासनिक हिरासत आदेश को और आगे नहीं बढ़ाया जायेगा और उन्हें फ़रवरी में रिहा कर दिया…
  •  Bullibai app
    न्यूज़क्लिक टीम
    बुल्लीबाई एप के ज़हरीले कारोबार का राज़ और सर्वोच्च सत्ता की खामोशी
    06 Jan 2022
    बुल्लीबाई एप मामले में रहस्य का पर्दा धीरे-धीरे उठ रहा है. मुंबई पुलिस के प्रयास से बंगलूरु, रुद्रपुर और कोटद्वार से गिरफ्तारियां हुई हैं. क्या इन गिरफ्तारियों से कुछ नये ठोस तथ्य सामने आयेंगे?…
  • unemployement
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या है देश में बेरोज़गारी का आलम?
    06 Jan 2022
    2014 में सत्ता में आने से पहले, बीजेपी और नरेंद्र मोदी का सबसे बड़ा वादा था कि देश की जनता के लिए 2 करोड़ रोज़गार पैदा किए जाएँगे। लेकिन 7 सालों में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। Centre for Monitoring Indian…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License