NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
उत्तराखंड: सरकार ने आंदोलनकारी शिक्षक-कर्मचारियों की लिस्ट मंगाई, वेतन रोका
उत्तराखंड के 18 अशासकीय कॉलेजों के शिक्षक एवं कर्मचारी लम्बे समय से अपनी विभिन्न मांगों को आंदोलनरत हैं। सरकार ने इनकी बात सुनने की जगह आंदोलनकारियों की लिस्ट मंगवाई और लिस्ट न देने तक वेतन पर रोक लगाई है।
पीयूष शर्मा
23 Jan 2021
उत्तराखंड: सरकार ने आंदोलनकारी शिक्षक-कर्मचारियों की लिस्ट मंगाई, वेतन रोका

बीजेपी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार अपने ही राज्य के छात्र-छात्राओं के भविष्य को उज्ज्वल बनाने वाले शिक्षकों व कर्मचारियों की मांगों को नज़रअंदाज़ कर उनके संघर्षों और उनकी आवाज़ को लगातार दबाने का प्रयास कर रही है।

आपको बता दें कि उत्तराखंड के 18 अशासकीय कॉलेजों के शिक्षक एवं कर्मचारी लम्बे समय से अपनी विभिन्न मांगों को आंदोलनरत हैं। इन शिक्षकों एवं कर्मचारियों का आरोप है कि प्रदेश सरकार सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है। इनका कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं का निवारण करने की बजाय उनके आंदोलन को दबाने व भविष्य में वह कोई आंदोलन न कर पाए इसके लिए उनको डराने में लगी है।

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (ग्रूटा) ने उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी एक पत्र पर घोर आपत्ति दर्ज की है। इस पत्र में निदेशालय द्वारा कॉलेजों के प्राचार्यों से धरना-प्रदर्शन में शामिल रहे शिक्षकों व कर्मचारियों की सूची मांगी है और इसके साथ ही यदि शिक्षक प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए हैं तो उसका प्रमाण भी अनिवार्य रूप से देने को कहा है और साथ ही बोला है कि सूची देने के बाद ही वेतन दिया जाएगा।

पूरा मामला क्या है?

राज्य सरकार द्वारा लाए गए उत्तराखंड विश्वविद्यालय विधेयक 2020 में चैप्टर XI-A हटा दिया गया है जिस कारण राज्य के सभी 18 अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ विद्यार्थियों के हितों की भी उपेक्षा की गयी है।

राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2001 में यह व्यवस्था है कि उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड में आने वाले समस्त संस्थानों के हितों तथा उनके कर्मचारियों को प्राप्त होने वाले वेतन व पेंशन आदि को उसी रूप में संरक्षित किया जायेगा जैसा कि उन्हें राज्य बनने से पूर्व (उत्तर प्रदेश) में प्राप्त हो रहा था।

वर्तमान में उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2020 में चैप्टर XI-A को हटाने से उक्त संस्थानों में कार्यरत सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में आ गया है। उक्त समस्या को शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने सरकार के सामने रखा परन्तु इसका कोई समाधान नहीं निकला जिसके चलते शिक्षक व कर्मचारी आंदोलनरत हैं।

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (ग्रूटा) के अध्यक्ष डॉ. वीपी सिंह का कहना कि उनके संज्ञान में आया है कि यदि समस्त अनुदानित महाविद्यालय अपनी सम्बद्धता श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय टिहरी गढ़वाल से कर लेते हैं तो शासन इन महाविद्यालयों को अनुदान आदि के सम्बन्ध में यथास्थिति बनाये रखेगा। वहीं दूसरी और इस मसले पर शिक्षकों एवं कर्मचारियों का कहना है कि शिक्षकों एवं कर्मचारियों का सम्बद्धता से कोई सम्बन्ध नहीं है बल्कि राज्य सरकार सीधे आदेश जारी कर सम्बद्धता राज्य विश्वविद्यालय से करा सकती है।

कॉलेजों कि सम्बद्धता की यह समस्या पहले भी आ चुकी है। पूर्व में कॉलेजों कि सम्बद्धता पहले आगरा विश्वविद्यालय से थी, उसके बाद मेरठ विश्वविद्यालय तत्पश्चात उत्तराखंड में राज्य विश्वविद्यालय HNB गढ़वाल श्रीनगर एवं उसके बाद केंद्रीय विश्वविद्यालय HNB श्रीनगर से हो गयी। इस सबमें महत्वपूर्ण बात यह कि सम्बद्धता परिवर्तन करने के समय शिक्षकों एवं कर्मचारियों यहां तक कि प्रबंध समितियों को भी नहीं पूछा गया, मात्र अधिनियम या अध्यादेश के द्वारा व्यवस्था कर दी गयी है।

उत्तराखंड उच्च शिक्षा निदेशालय ने विश्वविद्यालय विधेयक 2020 में संशोधन की मांग को लेकर सचिवालय कूच करने वाले अशासकीय कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों के नामों की सूची तलब किए जाने के साथ ही कहा कि सूची देने के बाद ही वेतन जारी किया जायेगा ।

इस सम्बन्ध में हमने जब शिक्षा निदेशक डॉ. कुमकुम रौतेला से बात की तो उन्होंने कहा कि सूची आने के बाद विभाग यह देखेगा कि क्या प्रदर्शन करने के लिए शिक्षकों एवं कर्मचारी कॉलेज में उपस्थित थे कि नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्होंने यह सूची अपनी higher authorities के कहने पर मांगी है।

हमने इस संदर्भ में डीएवी कॉलेज देहरादून के डॉ. राजेश पाल से बात की तो उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे पर विरोध दर्शाना हमारा संवैधानिक अधिकार है और इस तरह पत्र भेजकर उनका दमन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने से पहले ही सूचित कर दिया गया था कि हम सामूहिक रूप से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को पत्र देने के लिए जा रहे है और मांग-पत्र देने की यह प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण थी लेकिन फिर भी प्रशासन यह जो रवैया दिखा रहा है यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है और यह जनतांत्रिक अधिकारों का दमन करने कि नीति है।

डॉ. वीपी सिंह ने कहा कि सरकार का यह आदेश पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। साथ ही उन्होंने कहा कि हम काफी समय से मांग कर रहे हैं कि एक बैठक कीजिये ताकि इस समस्या का हल निकला जाए परन्तु सरकार इस मुद्दे पर हमारे साथ बैठने को तैयार नहीं है और अब इस तरह से हमारी आवाज़ को दबाया जा रहा है साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षक और कर्मचारी के खिलाफ उत्पीड़न की कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा की राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत और राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उनकी मांगों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे है और निदेशालय द्वारा इस तरह आदेश निकालकर तानाशाही दिखा रहे हैं।

उच्च शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. आनंद सिंह उनियाल ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों कि सूची राज्य के शिक्षा मंत्री श्री धन सिंह रावत की तरफ से मांगी गयी है, सूची आने पर क्या कार्यवाही होगी अभी यह स्पष्ट नहीं है।

स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफआई) के उत्तराखंड राज्य सचिव हिमांशु चौहान ने कहा कि इन अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों में प्रदेश भर के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। ऐसे में कॉलेजों का अनुदान बंद करना समझ से परे है। इससे शिक्षक-कर्मचारियों के वेतन पर संकट मंडराएगा और साथ ही विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ेगा क्योंकि अनुदान के कारण ही छात्र-छात्राओं से कम शिक्षण शुल्क लिया जाता है। अनुदान बंद होने से छात्र-छात्राओं की फीस कई गुना बढ़ जाएगी, जो छात्रों के साथ अन्याय है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षकों कि आवाज़ को दबाने कि बजाय उनकी समस्याओं पर गौर करना चाहिए और जल्द ही इसका समाधान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाज के अलग-अलग तबके अपनी शिकायतों को बताने के लिए विरोध-प्रदर्शनों का का तरीका अपनाते हैं परन्तु बीजेपी को उनकी जन विरोधी नीतियों कि असहमति बिलकुल बर्दाश्त नहीं है और वह जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावशाली तरीकों से रोकने का प्रयास कर रहे हैं और लगातार नागरिकों की बाड़े-बंदी करने में लगे हुए। इस तरह उन्हें खामोश कर देने तथा किसी भी प्रकार कि असहमति को दण्डित करने की नीति अपनाई जा रही है।

Uttrakhand
teachers protest
Student Protests
Trivendra Singh Rawat
BJP
Uttarakhand University
Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University Teachers Association

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन न मिलने से नाराज़ EDMC के शिक्षकों का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?


बाकी खबरें

  • Hijab
    अजय कुमार
    आधुनिकता का मतलब यह नहीं कि हिजाब पहनने या ना पहनने को लेकर नियम बनाया जाए!
    14 Feb 2022
    हिजाब पहनना ग़लत है, ऐसे कहने वालों को आधुनिकता का पाठ फिर से पढ़ना चाहिए। 
  • textile industry
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः "कानपुर की टेक्स्टाइल इंडस्ट्री पर सरकार की ग़लत नीतियों की काफ़ी ज़्यादा मार पड़ी"
    14 Feb 2022
    "यहां की टेक्स्टाइल इंडस्ट्री पर सरकार की ग़लत नीतियों की काफ़ी ज़्यादा मार पड़ी है। जमीनी हकीकत ये है कि पिछले दो साल में कोरोना लॉकडाउन ने लोगों को काफ़ी परेशान किया है।"
  • election
    ओंकार पुजारी
    2022 में महिला मतदाताओं के पास है सत्ता की चाबी
    14 Feb 2022
    जहां महिला मतदाता और उनके मुद्दे इन चुनावों में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं, वहीं नतीजे घोषित होने के बाद यह देखना अभी बाक़ी है कि राजनीतिक दलों की ओर से किये जा रहे इन वादों को सही मायने में ज़मीन पर…
  • election
    सत्यम श्रीवास्तव
    क्या हैं उत्तराखंड के असली मुद्दे? क्या इस बार बदलेगी उत्तराखंड की राजनीति?
    14 Feb 2022
    आम मतदाता अब अपने लिए विधायक या सांसद चुनने की बजाय राज्य के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के लिए मतदान करने लगा है। यही वजह है कि राज्य विशेष के अपने स्थानीय मुद्दे, मुख्य धारा और सरोकारों से दूर होते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 34,113 नए मामले, 346 मरीज़ों की मौत
    14 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1.12 फ़ीसदी यानी 4 लाख 78 हज़ार 882 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License