NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
चुनावी राज्यों में क्रमवार दंगे... संयोग या प्रयोग!
ईद वाले दिन राजस्थान में हुई हिंसा ये बताने के लिए काफी है कि आगे आने वाले चुनावों में मुद्दे क्या होंगे। इतना तो तय है कि विकास की बात भूल जाइए।
रवि शंकर दुबे
05 May 2022
VOILENCE

आमतौर पर राजनीतिक दल अपने चुनावी शंखनाद में जनता से जुड़े मुद्दे परोसती हैं, लेकिन अब दौर बदल गया है, तो जनता के वोटों को तौलने वाला पैमाना भी नए मुद्दे सामने ले आया है, जिसमें... सांप्रादायिक हिंसा, धार्मिक उन्माद, त्योहारों में दंगे, नफ़रती राजनीति और मानविक क्षति को बढ़ावा देने वाली सोच शामिल है। दूसरी ओर अज़ान के सामने हनुमान चालीसा को लाकर खड़ा कर दिया गया और नफ़रती आवाज़ इतनी तेज़ कर दी गई है कि रोज़गार, महंगाई, स्वास्थ्य, शिक्षा के लिए बोलने वालों की आह तक सुनाई देनी बंद हो गई है। इतिहास बताता है कि राजनीतिक लाभ के लिए हिन्दू-मुसलमान को लड़ाना हमेशा से एक बड़ा हथियार रहा है। लेकिन आज के दौर में ये हथियार काफी आधुनिक हो चुका है।

साल 2024 में लोकसभा चुनाव हैं, उससे पहले गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में आरएसएस से जुड़ी और केंद्र में बैठी भाजपा ने अपनी क्षमता और चरित्रनुसार तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। जिसमें भाजपा की सबसे ज्यादा नज़रें राजस्थान पर हैं, क्योंकि यह एक ऐसा राज्य है जहां फिलहाल भाजपा की सरकार नहीं है। बीती 3 मई को ईद के दिन राजस्थान के जोधपुर में जो हुआ वो किसी से छिपा नहीं है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सिर्फ इस बिनाह पर ईद के मौके पर सजाई गईं झालरें और झँडे उखाड़ने शुरु कर दिए, कि वहां पाकिस्तानी झंडे लगाए गए हैं। यानी यहां से इतना तो साफ हो जाता है कि संविधान की एक धारा न्यायपालिका को भाजपा के कार्यकर्ता धता बता चुके हैं।

ग़ौर करने वाली बात ये है कि पिछले दिनों हुए एक के बाद एक सांप्रदायिक दंगे उन्हीं राज्यों में भड़के जहां लोकसभा से पहले विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसे हम एक-एक कर समझने की कोशिश करते हैं:

राजस्थान

राजस्थान में फिलहाल कांग्रेस की सरकार है, जहां अशोक गहलोत मुख्यमंत्री है, कहा जाता है कि राजस्थान में हर पांच साल पर सरकार ज़रूर बदलती है, लेकिन जब केंद्र की सत्ता में बैठी भाजपा के सामने बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी, स्वास्थ्य, शिक्षा के लिए कोई माकूल जवाब नहीं है, कोई भी प्लान नहीं है, ऐसे में वामदल समेत अन्य राजनीतिक दल आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए दंगे करवा रही है।

ख़बरों के मुताबिक प्रशासन की मीटिंग में ये तय हुआ था कि 3 मई को ईद के मौके पर मुस्लिमों को झालरें, झंडे और लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके बावजूद महज़ पाकिस्तानी झंडे लगाने की अफवाह पर भाजपा कार्यकर्ताओं के बड़े झुंड ने झंडे, झालरें और लाउडस्पीकर नोच दिए। अगले दिन दोपहर के 2 बजते-बजते मुस्लिम बाहुल्य 10 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया। इसी दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जन्मदिन भी था हालांकि उन्होंने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए, और इमरजेंसी में डीजीपी समेत शीर्ष अधिकारियों संग बैठक की। फिलहाल मामले में अभी तक करीब 97 लोगों का गिरफ्तारी की जा चुकी है। सिर्फ यही नहीं आपको याद होगा पिछले दिनों अलवर में अतिक्रमण के नाम पर एक मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था, दावा किया गया कि ये प्राचीन मंदिर है, जिसके बाद भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे के खिलाफ हमलावर होते दिखाई दिए। इस बात में कोई शक नहीं कि अलवर की एमसीडी भाजपा के हाथों में है, इसलिए पहला सवाल उसी से किया जाना चाहिए।

ख़ैर... राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं। साल 2018 में भाजपा को 73 सीटों पर जीत मिली थी जबकि कांग्रेस को 100 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस ने बसपा के साथ मिलकर सरकार बना ली थी।

 

मध्य प्रदेश

भारत के बड़े हिंदी भाषी राज्यों में एक मध्य प्रदेश के पिछले चुनाव तो आपको याद ही होंगे जब कांग्रेस ने भाजपा से सत्ता छीन ली थी, और सरकार बना ली थी। हालांकि कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच चल रही कलह का भाजपा ने पूरा फायदा उठाया और विधायकों को तोड़कर उन्हें अपनी पार्टी में ज्वाइन करा लिया। अब शिवराज सिंह चौहान फिर से मुख्यमंत्री है। दूसरी बात ये कि यहां भाजपा के दोबारा सत्ता में आने पर कोई खास काम नहीं हुआ है, ऐसे में जनता की मुखालफत का डर भाजपा को सता रहा है। यही कारण है कि पिछले दिनों जब रामनवमी के दिन निकली शोभायात्रा के दौरान प्रदेश के खरगौन में हिंसा हो गई। तब लोगों के कथित मामा ने हिंसा में कथित तौर पर शामिल लोगों के घर और दुकानों पर बुलडोज़र चलवा दिया।

उधर राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी निकल पड़े और बोले कि जिन घरों  से पत्थर आए हैं उन घरों को पत्थर का ढेर बनाएंगे। फिर हुआ भी यही। यहां भी ग़रीबों के आशियाने बर्बाद कर दिए गए। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। साल 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को 109 और कांग्रेस को 114 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।  

गुजरात

गुजरात में फिलहाल भाजपा की सरकार है और भूपेंद्र भाई पटेल मुख्यमंत्री हैं। यहां इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं, हालांकि यहां भाजपा को बाकि राज्यों की तुलना में ज्यादा डर नहीं है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद यहां से आते हैं। हालांकि यहां भी पिछले दिनों एक धर्म विशेष के घरों और दुकानों पर बुलडोज़र चलाए गए थे। दरअसल यहां खंभात ज़िले में रामनवमी की शोभायात्राओं में पथराव की ख़बरें आई थीं। बताया गया कि यहां बकायदा बाहर से लाए गए हथियारों के सबूत मिले हैं जिसके ज़रिए सांप्रदायिक हिंसा फैलाने का साज़िश रची जा रही थी। यहां तीन मौलानाओं को मुख्य आरोपी बताते हुए गिरफ्तार किया गया था। इसके कुछ दिन बाद गुजरात के ही सांबरकाठा ज़िले के हिम्मतनगर में दंगे हो जाते हैं। जहां कई दुकानों, मकानों और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया जाता है। यहां के दंगों के बाद आरोप लगे कि दो अलग-अलग समुदायों ने एक दूसरे पर पथराव किया जिसके बाद चार लोगों की गिरफ्तारी हुई। चुनावी राज्यों में दंगों का क्रम यहीं नहीं रुकता है।

इन दंगों के ज़रिए सिर्फ विधानसभा चुनाव ही नहीं साधे जा रहे हैं बल्कि आंखें लोकसभा चुनाव पर भी गड़ी हुई हैं। यही कारण है कि इसकी शुरुआत राजधानी दिल्ली से की गई। जहां जहांगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती के दिन शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें पथराव की ख़बरें सामने आईं। बाद में नतीजा ये हुआ कि एक ओर से मुसलमानों की दुकानें उजाड़ दी गईं, बिना किसी नोटिस। वजह सिर्फ ये दी गई कि ये घर और दुकानें अवैध तरीके से बनी हुई हैं। हालांकि यहां कई हिन्दुओं की दुकाने भी इस कार्रवाई की चपेट में आईं। वैसे इस इलाके में हिन्दू हो या मुसलमान ज़्यादातर सभी लोग मेहनतकश ग़रीब तबके से ही हैं।

फिर सवाल ये भी है कि जब 15 सालों से एमसीडी भाजपा के पास है तब ये ख्याल नहीं आया और जब रमज़ान का महीना आया, जब ईद आने वाली थी तब लोगों को पूरे परिवार समेत सड़क पर ला खड़ा किया गया।

आने वाले सालों में जिन-जिन बड़े राज्यों में चुनाव होने हैं, वहां क्रमवार दंगे होना महज़ संयोग तो नहीं हो सकता, साफ तौर पर एक प्रयोग है। और अगर ये प्रयोग है तो इसका जवाब कौन देगा। क्योंकि कार्रवाई के नाम पर एक ओर से मुसलमानों के घर-परिवार टारगेट किए जा रहे हैं।

इन मामलों में वाम दलों समेत कई राजनीतिक पार्टियों ने सवाल खड़े हैं।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सचिव मंडल ने जोधपुर के जालौरी गेट पर ईद के मौके पर जानबूझकर साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कड़ी निंदा की है और इस घटना के जिम्मेदार दंगाइयों और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है ताकि राज्य में ऐसी साम्प्रदायिक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। माकपा के राज्य सचिव अमराराम ने इसे भाजपा-आरएसएस द्वारा साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश करार देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं अनायास नहीं होती बल्कि इनके पीछे धार्मिक कट्टरपंथी क्षुद्र शरारती तत्वों की गहरी साजिश होती है जो भाईचारे के दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने अनुसंगी संगठनों के जरिये पूरे देश को नफरती ज्वार में तपाने के दुष्कृत्यों में रत है और भेदभावकारी नारों के जरिये समाज के एक हिस्से में नफरत फैलाने के लिए नियोजित ढंग से जगह-जगह ऐसे घिनौने कृत्यों को अंजाम देने और उकसाने के काम कर एक धर्म विशेष को निशाना बना रही है।

उधर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में ईद पर हुई हिंसा को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। अशोक गहलोत ने कहा, राजस्थान में शांति इन्हें हजम नहीं हो रही है। इनको हाईकमान से निर्देश मिले हैं कि राजस्थान में अस्थिरता पैदा करनी है। राजस्थान सरकार को बदनाम करना है। इस काम को किसी भी तरह से करने का निर्देश मिला है। इसलिए बीजेपी नेताओं में प्रतिस्पर्धा हो रही है। सभी को होमवर्क दिया गया है।

पहले भाजपा शासित राज्यों में बुलडोज़र चलाने की प्रतिस्पर्धा, फिर अज़ान बनाम हनुमान चालीसा और अब ईद के दिन सांप्रदायिक दंगे... इस बात के साफ संकेत हैं कि अब आगे आने वाले चुनावों में महंगाई, बेरोजगारी, स्वास्थ्य, शिक्षा पर बात नहीं की जाएगी। देश में सिर्फ धर्म संसदों के नाम पर नफरत के बीज बोए जाएंगे।

एक बार फिर आपको बताते चलें कि साल 2025 में आरएसएस के 100 साल पूरे हो रहे हैं। जानकार मानते हैं कि ऐसे में भाजपा के कृत्यों का कारण बकायदा निर्देशित है। यही नहीं जगह-जगह धर्म संसदें और ये सब हिजाब, अज़ान, लाउडस्पीकर इत्यादि के विवाद ‘हिन्दू राष्ट्र’ की वृहत परियोजना का ही हिस्सा हैं।

इसे भी पढ़ें:

https://hindi.newsclick.in/jodhpur-violence-Curfew-continues-97-arrested

https://hindi.newsclick.in/CPI%28M%29-expresses-concern-over-Jodhpur-ncident-demands-strict-action-from-Gehlot-government

 

Rajasthan sarkar
VOILENCE
eid
hanuman chalisa
ashok gehlot

Related Stories

मध्य प्रदेश: आख़िर ईद के जुलूस के दौरान भड़की हिंसा की वजह क्या है?

गुजरात में सड़क किनारे सो रहे 15 प्रवासी मज़दूरों को ट्रक ने कुचला, सभी की मौत

पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में छह आरोपी बरी

राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर तीन नाबालिग बच्चियों से बलात्कार


बाकी खबरें

  • यूपी चुनाव 2022: तो क्या महागठबंधन की योजना बना रहे हैं अखिलेश
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव 2022: तो क्या महागठबंधन की योजना बना रहे हैं अखिलेश
    03 Aug 2021
    अखिलेश यादव का यह कहना कि कांग्रेस और बसपा तय करे कि वे किस के पक्ष में हैं, उनकी रणनीति में एक बदलाव का संकेत लगता है।
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: हमारा 'तीर' किसी दूसरे के तरकश में चला गया!
    03 Aug 2021
    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फिर सुर बदला है। अपनी सहयोगी बीजेपी से अलग पेगासस मामले में उन्होंने जांच की वकालत की है। उधर उनकी पार्टी के नेता उपेंद्र कुशवाहा द्वारा उन्हें ‘पीएम मटेरियल’ कहे…
  • प्रयागराज: गंगा के तट पर फिर से देखने को मिले 100 से अधिक संदिग्ध कोविड पीड़ितों के शव  
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    प्रयागराज: गंगा के तट पर फिर से देखने को मिले 100 से अधिक संदिग्ध कोविड पीड़ितों के शव  
    03 Aug 2021
    अकेले शुक्रवार को ही फाफामऊ घाट पर संदिग्घ कोविड-19 पीड़ितों के करीब 60 शव उपर आ गये थे, जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया।
  • बेज़ोस और मस्क : शुरूआत अंतरिक्ष में एक नये युग की या उस पर अवैध कब्जों की?
    प्रबीर पुरकायस्थ
    बेज़ोस और मस्क : शुरूआत अंतरिक्ष में एक नये युग की या उस पर अवैध कब्जों की?
    03 Aug 2021
    अंतरिक्ष के एक नये युग के धुंआधार प्रचार के पीछे अंतरिक्ष को हड़पने की नयी कोशिशों की सच्चाई छुपी हुई है।
  • पेगासस प्रकरण के बाद निजता का क्या होगा? 
    वैभव निकम
    पेगासस प्रकरण के बाद निजता का क्या होगा? 
    03 Aug 2021
    किसी भी मोबाइल या लैपटॉप की ऑनलाइन गतिविधि को गुप्त रूप से ट्रैक करना और बड़े डेटा को हासिल करना बताता है कि कंपनियां ज़्यादातर उन व्यक्तियों के बारे में जानकारी हासिल करती हैं जो जानकारी उनके पास कभी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License