NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
छत्तीसगढ़ की वीडियो की सच्चाई और पितृसत्ता की अश्लील हंसी
छत्तीसगढ़ के बदौला बाजार की दो वीडियो वायरल हो रही हैं। एक में कुछ पुरुष एक महिला और उसकी सहेली को बड़ी बेरहमी से मार रहें हैं। लोग इस मुद्दे को लखनऊ के कैब ड्राइवर व प्रियदर्शिनी वाले मुद्दे से जोड़ रहे हैं और अधिकांश कैप्शन के यही भाव हैं कि इनके सर पर नारीवाद का भूत सवार है, इनके साथ ऐसा ही होना चाहिए।
अंकित शुक्ला
30 Aug 2021
छत्तीसगढ़ की वीडियो की सच्चाई और पितृसत्ता की अश्लील हंसी
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: Feminism in India

हम उस समाज में रहते हैं जहां लोग एक लड़की की गलती के लिए सभी लड़कियों को गलत ठहरा देते हैं। हम उस समाज के हिस्सा हैं जहां हर व्यक्ति के भीतर एक न्यायाधीश बैठा हुआ है, जो बिना सबूत और गवाहों के बस स्टेरि डिसाइसेस (Stare Decisis) के आधार पर ही फैसला सुनाता है और लड़कियों को गुनहगार ठहरा देता है। स्टेरि डिसाइसेस (Stare Decisis) एक कानूनी शब्द है जिसका मतलब होता है कि अतीत के किसी मुकदमें के फैसले के आधार पर वर्तमान समय के किसी मुकदमें का फैसला दे देना। और ऐसी घटनाएं हमारे समाज में लड़कियों के साथ सबसे अधिक होती हैं। उपर्युक्त बातें अभी वायरल हो रही वीडियो के संदर्भ में और अधिक सही साबित होती नज़र आ रही हैं।

छत्तीसगढ़ के बदौला बाजार की दो वीडियो जमकर वायरल हो रही हैं। जिसमें कुछ पुरुष एक महिला और उसकी सहेली को बड़ी बेरहमी से मार रहें हैं। आपने भी किसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म के फीड को स्क्रोल करते हुए इस वीडियो को देखा ही होगा। मुद्दा वायरल वीडियो नहीं है क्योंकि आज हर वीडियो वायरल हो जाता है मुद्दा उसके नीचे लिखा जाने वाला कैप्शन है, लोग इस मुद्दे को लखनऊ के कैब ड्राइवर व प्रियदर्शिनी वाले मुद्दे से जोड़ रहें हैं और अधिकांश कैप्शन के यही भाव हैं कि इनके सर पर नारीवाद का भूत सवार है, इनके साथ ऐसा ही होना चाहिए। 

कई यूज़र्स को तो ये भी नहीं पता था कि यह वीडियो कहां की है लेकिन उन यूज़र्स ने पितृसत्तात्मक समाज के एक वफ़ादार सिपाही की तरह बड़ी अभिमानी ढंग से लिखा कि यह लखनऊ नहीं है, यह बिहार है। यहां नारीवाद का सारा भूत झाड़( उतार) दिया जाएगा। कई लोग इस वीडियो को दिल्ली का बात रहे हैं तो कई लोग हरियाणा, राजस्थान का, जो जहाँ का है वो वहाँ का बता कर वीडियो डाल रहा है लेकिन कैप्शन वही है कि यह लखनऊ नहीं है। एक पितृसत्तात्मक समाज नारीवाद से इतना बौखलाया हुआ क्यों है? क्या उसे डर है कि पितृसत्ता के उनके किले को एक न एक दिन नारीवाद ढाह देगा? 

वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है?

दरअसल छत्तीसगढ़ के बदुलाबाज़ार के सिमगा में एक भारतीय जनता पार्टी का पार्षद सूर्यकांत ताम्रकार अपने एक दोस्त की पत्नी को अपने साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए कई दिनों से कह रहा था। पार्षद ने अभद्र बातें कहकर महिला पर संबंध बनाने का दबाव बनाया। महिला ने जब उस से कहाँ कि आपको शर्म नहीं आती है मैं आपकी भाभी हूँ तो पार्षद ने बड़ी बेशर्मी से कह दिया कि देवर भाभी में ये सब चलता है। इस बात पर गुस्साई महिला ने पार्षद को चप्पलों से पीट दिया। फिर क्या था ये वीडियो वायरल हो गया लेकिन पार्षद की बेशर्मी फिर भी कम नहीं हुई। उसने दुबारा महिला पर ऐसा ही दबाव बनाया। बेशर्मी या फिर उस मर्द के भीतर का अहंकार जो अपने अपमान का बदला उस महिला के शरीर और स्वाभिमान को रौंद कर लेना चाहता था। तब महिला अपनी एक सहेली को साथ लेकर पार्षद के दुकान पर जा धमकी। उसके बाद पार्षद के दोस्त और समर्थकों ने महिला और उसकी सहेली को बहुत बेरहमी से पीटा जिसका वीडियो आप सब ने देखा।

वीडियो में दिखता है कि महिला अपनी सहेली के साथ पार्षद को एक दुकान के सामने कुछ समझा रही है लेकिन पार्षद के दोस्त और समर्थक उसके साथ बदतमीजी से बात करते हैं और महिला को बोलते हैं कि हाथ लगा के दिखा, तब महिला डंडे से उनमें से एक को मारती है और तीन डंडे लगने के बाद वो महिला से डंडा छीन लेते हैं और उसे बुरी तरह से मारने लग जाते हैं, महिला के बाल पकड़ कर उसे खींचते हैं और फिर ज़मीन पर उसके सिर को पटक देते हैं।

जो लोग इस पूरी घटना की वीडियो बना रहे होते हैं उनकी भी आवाज वीडियो में सुनाई देती है। वो लोग काफ़ी खुश हैं और बोल रहे हैं कि सही किया... एक दम सही। 

अगले वीडियो में महिला रोड पर खड़ी है और खड़े रहने की कोशिश कर रही है लेकिन खड़ी नहीं हो पा रही है। उसके नाक और मुँह से बुरी तरह से खून निकल रहा है। लोग वीडियो बना रहे हैं लेकिन कोई भी मदद को नहीं आता है। इस वीडियो को भी लोग बड़े मजाकिया अंदाज में पोस्ट कर रहे हैं और कैप्शन में फिर वही लखनऊ वाले पूर्वाग्रह की बात लिखी जा रही है। 

महिलाओं के साथ मारपीट के मामले में अभी तक एक ग‍िरफ्तार हो चुका है, और पुलिस को दूसरे आदमी की तलाश है। 

एसडीओपी भाटापारा सिद्धार्थ बघेल ने बताया कि इस मामले में आईपीसी की धारा 294, 506, 323, 452, 334 के तहत एक आरोपी पिंकू देवांगन को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि भाजपा नेता सूर्यकांत ताम्रकार फिलहाल फरार है जिसकी तलाश की जा रही है।

मामले की सच्चाई जाने बिना, ना जाने कितने लोगों ने दोनों महिलाओं को गलत ठहरा दिया क्योंकि महिलाओं का मर्दों पर हाथ उठाना हमारी संस्कृति के खिलाफ है लेकिन मर्दो का महिलाओं पर हाथ उठाना संस्कृति में निहित है। अगर मर्द औरत पर हाथ उठाये तो शान और वश में रखने की बात हो जाती, लेकिन वहीं औरत मर्द पर हाथ उठा दे तो मर्द को कायर और औरत को बदचलन कहा जाता है। यह हमारे समाज की सामाजिक और मानसिक संरचना है। जहां एक बच्चे को मर्द बनाया जाता है और एक बच्ची को महिला। "नारीवादी सिमोन द बोउआर ने कहा था “महिला पैदा नहीं होती उसको महिला बनाया जाता है।" 

लखनऊ की एक लड़की के गलती के लिए सारी महिलाओं को गलत ठहराने वाले लोग ये क्यों भूल गए कि अपने देश में हर दिन 88 बलात्कार के मुकदमें दर्ज होते हैं (NCRB's) और बस 2019 में 32,033 मामले बलात्कार के दर्ज हुए थे। ये वो मामले हैं जो दर्ज हुए थे, ना जाने ऐसे कितने मामले समाज, कुल, खानदान की इज्जत के नाम पर दबा दिए गए होंगे। और यह पितृसत्तात्मक समाज एक लखनऊ के मामले को लेकर सभी महिलाओं पर दोषारोपण कर रहा है। इस वीडियो ने समाज की उस सच्चाई को सामने ला दिया है, जो कहता है कि हम पुरूष और महिला में भेदभाव नहीं करते हैं।

अंकित शुक्ला दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता में मास्टर्स कर रहे हैं। लेख में निहित विचार उनके निजी हैं

Chhattisgarh
viral video
patriarchy
women exploitation
male dominant society
gender discrimination
Social Media

Related Stories

अफ़्रीका : तानाशाह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कर रहे हैं

मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!

पड़ताल: क्या टिकैत वाकई मीडिया को धमकी दे रहे हैं!

उच्च न्यायालय ने फेसबुक, व्हाट्सऐप को दिए सीसीआई के नोटिस पर रोक लगाने से किया इंकार

विश्लेषण : मोदी सरकार और सोशल मीडिया कॉरपोरेट्स के बीच ‘जंग’ के मायने

कैसे बना सोशल मीडिया राजनीति का अभिन्न अंग?

नए आईटी कानून: सरकार की नीयत और नीति में फ़र्क़ क्यों लगता है?

महामारी की दूसरी लहर राष्ट्रीय संकट, इंटरनेट पर मदद मांगने पर रोक न लगाई जाए : उच्चतम न्यायालय

फेसबुक ने घंटो तक बाधित रखा मोदी के इस्तीफे संबंधी हैशटैग, बाद में कहा गलती से हुआ बाधित

कपूर, लौंग, अजवाइन और नीलगिरी तेल ऑक्सीजन लेवल नहीं बढ़ाते, केन्द्रीय मंत्री ने शेयर किया ग़लत दावा


बाकी खबरें

  • ram_navmi
    अफ़ज़ल इमाम
    बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?
    13 Apr 2022
    हिंसा की इन घटनाओं ने संविधान, लोकतंत्र और बहुलतावाद में विश्वास रखने वाले शांतिप्रिय भारतवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोग अपने जान-माल और बच्चों के भविष्य को लेकर सहम गए हैं।
  • varvara rao
    भाषा
    अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की
    13 Apr 2022
    बंबई उच्च न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में कवि-कार्यकर्ता वरवर राव की वह याचिका बुधवार को खारिज कर दी जिसमें उन्होंने चिकित्सा आधार पर स्थायी जमानत दिए जाने का अनुरोध किया था।
  • CORONA
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,088 नए मामले, 26 मरीज़ों की मौत
    13 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 5 लाख 21 हज़ार 736 लोग अपनी जान गँवा चुके है।
  • CITU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन
    13 Apr 2022
    ये सभी पिछले माह 39 दिन लंबे चली हड़ताल के दौरान की गई कार्रवाई और बड़ी संख्या आंगनवाड़ी कर्मियों को बर्खास्त किए जाने से नाराज़ थे। इसी के खिलाफ WCD के हेडक्वार्टस आई.एस.बी.टी कश्मीरी गेट पर प्रदर्शन…
  • jallianwala bagh
    अनिल सिन्हा
    जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान
    13 Apr 2022
    जलियांवाला बाग के नवीकरण के आलोचकों ने सबसे महत्वपूर्ण बात को नज़रअंदाज कर दिया है कि नरसंहार की कहानी को संघ परिवार ने किस सफाई से हिंदुत्व का जामा पहनाया है। साथ ही, उन्होंने संबंधित इतिहास को अपनी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License